
भारत की दिल्ली में जन्तर मंतर पर लगे अवरोधों के ठीक सामने एक परिवार ठंडी लस्सी और मेहँगी पैकेट्स बांट रहा है। मिनु फोगट पिछले कुछ दिनों से अपने पति और 18 वर्षीय बेटी के साथ यहां आ रही हैं। उन्होंने बताया कि यह पहली बार है जब वे किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई हैं। “हमारा बेटा IIT में पढ़ता है, लेकिन हम इन सभी छात्रों के संघर्ष में सहयोग देने यहां आए हैं। फोन पर रील शेयर करने मात्र से काम नहीं चलेगा। हमें घर से बाहर निकलना ही होगा,” उन्होंने कहा। मिनु फोगट के पति उत्तर दिल्ली में मिठाई की दुकान चलाते हैं। पिछले कुछ दिनों से दुकान का काम कर्मचारी को सौंपकर उनका पूरा परिवार जन्तर मंतर आ रहा है। 200 ग्राम लस्सी का पैकेट देते हुए उन्होंने कहा: “आप भी थोड़ा लें, बहुत गर्मी है।” 21 जुलाई को जब मैं जन्तर मंतर पहुंचा तो सबसे पहले मेरा सामना इसी दृश्य से हुआ और कई मायनों में इसने पूरे आंदोलन की एक व्यापक तस्वीर प्रस्तुत की।
समाचार चैनल और अखबारों में मात्र विरोध प्रदर्शनों के बारे में सुना और देखा होता है, लेकिन जिन लोगों ने कभी निकट से ऐसे दृश्य नहीं देखे, वे अब इस आंदोलन में एकजुट होकर एक-दूसरे का सहारा बन रहे हैं। संसद भवन से कुछ मीटर की दूरी पर स्थित जन्तर मंतर अब नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उसे सबसे बड़ी चुनौती का केंद्र बन चुका है। इन सभी घटनाक्रमों के केंद्र में कक्रोच जनता पार्टी और अभियानकर्मी सोनम वांगचुक हैं, जो 26 दिनों तक आमरण अनशन पर रहे। कक्रोच जनता पार्टी के गठन की कहानी आप लोग कई बार सुन चुके हैं। अब यहां हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हैं। उनके प्लेकार्ड्स पर उनकी मांगें स्पष्ट रूप से लिखी हैं और नारों में गूंज रही हैं: “धमेद्र प्रधान, इस्तीफा दो।”
लेकिन इस सप्ताह क्या हुआ? इससे इस प्रदर्शन की मुख्य मांग, अनशन की वजह और जिस मोड़ पर अनशन खत्म हुआ, ये सब अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं। क्या कहा गया, इस आंदोलन ने कैसे गति पकड़ी और अब क्या हो रहा है? इन सब में एक खाई नजर आ रही है और इस वक्त यह प्रदर्शन विभिन्न रूपों में रास्ता खोज रहा है। सोनम वांगचुक ने गुरुवार आधी रात को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह की उपस्थिति में अपना 26 दिन का अनशन समाप्त किया। इसके अनुसार सरकार शांति पूर्वक विरोध करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करेगी। सरकार NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और शिक्षा प्रणाली में सुधार करने के उपाय संसद में चर्चा करेगी।
आगामी दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। लगभग एक महीने पहले ये विरोध प्रदर्शन और आमरण अनशन जिन मांगों के कारण शुरू हुए थे, उन पर चर्चा करें। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। NEET प्रश्नपत्र लीक होने के कारण आत्महत्या करने वाले छात्र के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा मिलना चाहिए। CJP की ये तीनों मांगों के समर्थन में वांगचुक ने 28 जून को CJP के मंच से अनशन शुरू किया था। उस वक्त एक साक्षात्कार में जब पूछा गया कि केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे से क्या परिवर्तन आएगा, तो उन्होंने कहा, “इससे जवाबदेही स्थापित होगी।” वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, “हम चाहते थे कि वह अनशन खत्म करे। हमने साफ तौर पर कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे तो विरोध जारी रहेगा।”





