कक्रोच जनता पार्टी : भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, सीजेपी की प्रतिक्रिया क्या है

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भारत में कक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया है।
परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के मामले को लेकर सीजेपी एक महीने से लगातार उनका इस्तीफा मांग रही थी।
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना इस्तीफा घोषित किया, जिसे सीजेपी ने स्वागत योग्य कदम बताया है।
हालांकि उस समूह के संस्थापक ने कहा है कि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उनकी एक मुख्य मांग थी, लेकिन सीजेपी पूरे भारत के शिक्षा तंत्र में व्यापक पुनर्गठन की भी मांग कर रहा है। इसमें परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों में उच्च स्तर की जवाबदेही की भी माँ है।
सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर इस्तीफा घोषित करते हुए प्रधान ने लिखा, “जंतर-मंतर और देश में जो भी परिस्थितियां बन रही हैं, उनका फायदा देश विरोधी ताकतें न उठाएं। देश की एकता बनी रहे, भारत के किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे।”
उन्होंने आगे लिखा, “हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर पर ध्यान दे पाएं। इन्हीं बातों को सोचते हुए मैंने अपना इस्तीफा सम्माननीय प्रधानमंत्री को भेजा है।”
‘ककरोचों की जीत’ – सीजेपी
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सीजेपी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को अपनी आंदोलन की बड़ी जीत के रूप में स्वीकार किया है।
भारत के शिक्षा मंत्री को पद से हटाना उस समूह की प्रमुख मांग थी।
उन्होंने बार-बार कहा था कि “कोई समझौता नहीं होगा।”
“ककरीचों ने जीत हासिल की। लोकतंत्र ने जीत हासिल की!” सीजेपी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस प्रकार लिखा है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीप्के ने कहा, “हमने यह दिखा दिया है। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है।”
“धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। अगर आपको डरना नहीं है, अगर आप इस सरकार के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं, तो आप किसी भी व्यक्ति को इस्तीफा दिला सकते हैं। लोकतंत्र में डरने की कोई जरूरत नहीं है।”
शिक्षा मंत्री ने और क्या कहा?
“४० वर्ष से अधिक समय से मैं विद्यार्थी, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव है, इस बात पर मेरा दृढ़ विश्वास है,” प्रधान ने कहा।
“मैं देश के युवाओं की आशाओं, भावना और उचित अपेक्षाओं का उच्च सम्मान करता हूं। भारत के युवाओं के सपनों को पूरा करना हमारा सामूहिक राजनीतिक और सामाजिक जीवन की नैतिक जिम्मेदारी है। सम्माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र सेवा करने का मौका पाकर मैं आभारी हूं।”
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नीट प्रश्नपत्र चुहावट विषय पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “पहले दिन से मैंने इस मामले की जिम्मेदारी ली है और कभी पीछे नहीं हटूंगा। मैं दृढ़ता से मानता हूँ कि हम किसी भी मेधावी विद्यार्थी की संभावनाओं को परीक्षा माफियाओं के कारण खराब नहीं होने देंगे, और किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।”
“लेकिन इस दौरान जिम्मेदार पद पर कुछ लोगों द्वारा बाधा उत्पन्न करने और विद्यार्थियों को भ्रमित करने का प्रयास देखने से मुझे गहरा दुःख हुआ है।”
विपक्षी भी जुड़े राजीनामे की मांग में
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कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियों ने उनके इस्तीफे की मांग का समर्थन किया था।
भारत के १०० से अधिक प्रमुख लेखक, कलाकार और बुद्धिजीवियों ने पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग करते हुए विद्यार्थियों के समर्थन में संयुक्त बयान भी जारी किया था।
उस बयान में बताया गया कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रक्रिया की निरंतर अनियमितताओं ने सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया है।
कुछ हफ्तों के विरोध के बाद, पिछले सोमवार हजारों युवाओं ने भारत की संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज किया था। तब से हजारों लोग सड़कों पर प्रदर्शनरत हैं।
महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने के कारण कक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) का गठन हुआ है।
विशेष रूप से युवा इस अभियान में बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं। यह भारत के कुछ वर्षों के सबसे बड़े विद्यार्थी आंदोलनों में से एक बन चुका है।





