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माइतीघर में जलजमाव की समस्या: तकनीकी खामियों और जलप्रवाह क्षेत्रों में अतिक्रमण मुख्य कारण

समाचार सारांश तकनीकी समीक्षा के बाद तैयार। माइतीघर क्षेत्र में बरसात के मौसम में होने वाले जलजमाव का मुख्य कारण इंजीनियरिंग भूल, सीवर अतिक्रमण और प्राकृतिक जलशोषक क्षेत्र के विनाश को तकनीकी अध्ययन में दर्शाया गया है। सीवर की पाइप लाईन के संकुचित होने से पानी का प्रवाह बाधित हो जाता है जिसके कारण सड़कों पर जाम (बॉटलनेक) जैसी समस्या होती है और टुकुचा खोला का पानी उल्टा बहने के कारण जलजमाव उत्पन्न होता है। इस समस्या के समाधान के लिए भूमिगत बड़े जल संचयन टैंक का निर्माण, सीवर की क्षमता का पुनः डिजाइन सहित दीर्घकालीन उपायों की रिपोर्ट में सिफारिश की गई है।

१० साउन, काठमाडौं। माइतीघर मंडला क्षेत्र में वर्षा ऋतु के दौरान जलजमाव के मूल कारणों में आस-पड़ोस के अवसंरचना निर्माण में हुई तकनीकी त्रुटि, जलप्रवाह क्षेत्रों में अतिक्रमण और प्राकृतिक जलशोषक क्षेत्रों का विनाश शामिल है, यह तथ्य अध्ययन से स्पष्ट हुआ है। वर्षा शुरू होते ही उक्त क्षेत्र में जलजमाव होने पर साउन ५ को काठमाडौँ महानगरपालिकाकी कार्यवाहक प्रमुख सुनिता डंगोल के नेतृत्व में विकास साझेदारों, सेवा प्रबंधन और सुविधा वितरण में संलग्न निकायों के प्रमुख और प्रतिनिधियों ने स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद सुनिता डंगोल ने संबंधित कार्यालय के कर्मचारियों को तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

कार्यवाहक प्रमुख के निर्देशानुसार, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण की प्रतिक्रिया शाखा प्रमुख उपसचिव रामबहादुर के.सी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई, जिसने स्थल पर जाकर रिपोर्ट तैयार की। टीम में महानगरपालिका के वरिष्ठ इंजीनियर जीवन रेग्मी, सड़क विभाग के इंजीनियर पुरुषोत्तम भण्डारी, काठमाण्डू उपत्यका खानेपानी लिमिटेड के प्रबंधक उज्वल श्रेष्ठ आदि शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, माइतीघर मंडला क्षेत्र की सीवर निकासी प्रणाली में गंभीर इंजीनियरिंग त्रुटि पाई गई है। क्षेत्र में प्रवेश करने वाले सीवर की ऊपरी पाइप का व्यास ९० सेंटीमीटर है जबकि निचले हिस्से में यह ६० सेंटीमीटर हो जाता है। ऊपरी हिस्से से आने वाले पानी का दबाव निचले संकीर्ण पाइप द्वारा सहन नहीं किया जा पाता, जिससे ‘बॉटलनेकिंग’ समस्या होती है और पानी सड़कों पर फैलता है। इसके अतिरिक्त, टुकुचा खोला के जल स्तर बढ़ने पर पानी को सीवर के माध्यम से खोल की ओर जाना चाहिए, लेकिन पानी उल्टा बस्ती और सड़क की ओर वापस बहता है (बैक फ्लो), जिससे भी माइतीघर में जलजमाव होता है।

भौतिक अवसंरचना के साथ-साथ पर्यावरणीय और शहरी विकास एवं प्रबंधन के कारणों को भी यह रिपोर्ट समस्याओं को बढ़ाने वाला माना गया है। पूर्व में माइतीघर चोक के आसपास के खुले क्षेत्र प्राकृतिक जल संग्रहण क्षमता रखते थे, जो वर्षा जल को जमीन में सोखने में मदद करते थे। लेकिन जिला प्रहरी परिसर काठमाडौं और सरकारी वकिल कार्यालय जैसी बड़ी इमारतों के निर्माण के कारण इन क्षेत्रों पर कंक्रीट की परतें चढ़ाई गईं, जिसने जल सोखने की प्राकृतिक प्रक्रिया को रोक दिया। इसलिए सतह पर पानी की मात्रा अत्यधिक बढ़ गई और वह सीधे माइतीघर चोक में केंद्रित हो गया, ऐसा तकनीकी टीम ने निष्कर्ष निकाला है।

अतिक्रमण की समस्या ने भी जलजमाव में योगदान दिया है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई स्थानों पर सीवर के अंदर व्यक्तिगत और सरकारी भवनों की संरचनाएं बन चुकी हैं, जिससे नियमित सफाई में बाधा आ रही है। सीवर पाइपों में प्लास्टिक कचरा, बोतलें और पत्थर-मिट्टी जमा होने से पानी का प्रवाह अवरुद्ध हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए कार्यवाहक प्रमुख डंगोल ने स्थानीय प्रशासन और साझेदार संस्थाओं के साथ मिलकर सभी अवरोध हटाने का निर्देश दिया है।

रिपोर्ट में तत्काल और दीर्घकालीन स्तर पर उठाए जाने वाले कदम सुझाए गए हैं। तत्काल के लिए सीवर निकासी मार्ग में मौजूद रुकावटों को हटाने, मैनहोल्स की ऊंचाई बढ़ाने और नियमित सफाई को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। दीर्घकालीन समाधान के लिए माइतीघर या पुराने स्वास्थ्य मंत्रालय परिसर की सार्वजनिक जमीन के नीचे बड़े जल संचयन टैंक का निर्माण करने का सुझाव दिया गया है, जो वर्षा जल को अस्थायी रूप से संग्रहित कर क्रमशः निकासी में सहायता करेगा।

टुकुचा खोला के निकास बिंदु पर जल प्रत्यावर्तन को रोकने के लिए ‘नॉन रिटर्न वाल्व’ लगाना, उपत्यका की सम्पूर्ण सीवर प्रणाली का GIS मैपिंग करना और क्षेत्र के अनुसार सीवर की क्षमता का पुनः डिजाइन करना भी आवश्यक बताया गया है। सड़क, जलापूर्ति, सीवर और विद्युत जैसे विभागों के बीच समन्वय की कमी को समाप्त कर एकीकृत प्रणाली विकसित करने की बात भी रिपोर्ट में खास तौर पर कही गई है।