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‘मिटरब्याज पर ऋण चुकाते हुए बेघर होना पड़ा’

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के अनुसार।

  • लघु वित्तीय संस्थान के उच्च ब्याज दर और शोषण से पीड़ित किसान महिलाएं न्याय की मांग को लेकर काठमांडू में माइतीघर में सामूहिक आमरण अनशन पर बैठी हैं।
  • लघु वित्तीय ऋण न चुका पाने के कारण कई परिवार बेघर हो चुके हैं और सन् २०७५ से अब तक १५०० से अधिक व्यक्तियों ने आत्महत्या की है, यह पीड़ितों का आरोप है।
  • सरकार ने आंदोलनरत पीड़ितों से बातचीत शुरू की है, हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को लागू नहीं किया गया है, पीड़ितों का यह आरोप है।

१५ साउन, काठमांडू। कुछ दिनों से संघीय राजधानी काठमांडू के माइतीघर के आस-पास एक अलग तस्वीर दिख रही है। माइतीघर सड़क के किनारे वहाँ तराई क्षेत्र की महिलाओं की भीड़ कुछ अनोखी छवि प्रस्तुत कर रही है।

अधिकतर महिलाएं पीली साड़ी और हरे ब्लाउज पहने हुई हैं। पहली नजर में यह महिलाएं किसी धार्मिक मेला या आयोजन का हिस्सा लगती हैं।

लेकिन ये महिलाएं अपनी पीड़ा और समस्याओं के न्याय की उम्मीद लेकर घर-बार छोड़कर तराई के विभिन्न जिलों से राजधानी आई हैं।

यहाँ आने के बाद भी कोई विशेष समाधान नहीं हुआ, सरकार की ओर से भी विशेष ध्यान नहीं दिया गया। मजबूर होकर उन्होंने १२ साउन मंगलवार से सामूहिक आमरण अनशन शुरू किया है।

गरीब किसान महिलाओं को मौसम की भी मदद नहीं मिल रही है। मानसून के दौरान बारिश होने पर भी वे तिरपाल और प्लास्टिक की छत के नीचे आश्रय लेती हैं।

सुरक्षा कर्मियों ने तिरपाल लटकाने की अनुमति नहीं दी है, इसलिए बारिश होने पर उन्हें प्लास्टिक ओढ़ कर बचना पड़ता है। सुबह-शाम माइतीघर की सड़क पर ही खाना बनाने, खाने और रात बिताने की मजबूरी है।

सिरहा, सप्तरी, धनुषा जैसे जिलों से लघुवित्त वित्तीय संस्थाओं से प्रभावित इन महिलाओं ने न्याय की मांग के लिए काठमांडू में माइतीघर में आमरण अनशन पर बैठना चुना है।

व्यवसाय कर आर्थिक सुधार करने के उद्देश्य से सामूहिक जमानी में लघुवित्त से ऋण लेने वाली ये महिलाएं अब बेघर होने की स्थिति तक पहुंच चुकी हैं, जिसके कारण अंतिम विकल्प के रूप में आमरण अनशन का सहारा लिया है।

मिटरब्याज पर लिए गए ऋण का बोझ सहते हुए आत्महत्या के बजाय आमरण अनशन के माध्यम से न्याय मांगने का निर्णय एक पीड़ित महिला ने बताया।

उनके अनुसार सन् २०७५ से अब तक १५०० से अधिक लघुवित्त पीड़ितों ने आत्महत्या की है। ‘गरीबों को आर्थिक रूप से सुधारने आई लघुवित्त ने मिटरब्याज में फंसा दिया, मिटरब्याज ने बेघर कर दिया’, उन्होंने कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालय का आदेश भी लागू न कर पाने वाली सरकार कैसी है?’

आंदोलन में शामिल सभी पीड़ितों की समस्याएं समान हैं। महोत्तरी के बर्दीबास की शिलम यादव ने २०७५ से लघुवित्त से ऋण लेकर अब बेघर होने की स्थिति बतााई है।

तीन बच्चों की मां यादव ने बताया कि वह एक कॉस्मेटिक दुकान चलाती थीं। दुकान विस्तार के लिए ऋण लेने के बाद अब घर से निकलना पड़ा है, जो उनकी पीड़ा है।

दिव्य लघुवित्त नामक वित्तीय संस्था हाल ही में बर्दीबास आई है और सिर्फ नागरिकता के आधार पर ऋण देती है। कर्मचारियों से बात कर ५० हजार रुपये का ऋण लिया था, उन्होंने बताया।

महोत्तरी बर्दीबास की शिलम यादव

‘पहली बार ५० हजार देने की बात की गई, फिर कहा कि तुम चुकाते रहो, तब और देंगे। मेरी आय, स्रोत या कारोबार के बारे में कुछ पूछा नहीं गया। नागरिकता की कॉपी और फोटो लेकर दो-तीन दिनों में कार्यालय बुलाकर ४६ हजार ही दिए’, यादव ने बताया।

लघुवित्त ने सेवा शुल्क और बीमा के नाम पर ४ हजार काट लिए। ब्याज ५० हजार के बराबर होना बताया गया, जिसके बाद वे पीछे हट गई।

दुकान में सामान बढ़ाने के बावजूद व्यापार उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ। ‘महीने में ५-१० हजार का व्यापार होता था, जिससे परिवार चलता था, ऊपर से ५ हजार की मासिक किस्त चुकानी पड़ती थी। आमदनी से ऋण चुकाना मुश्किल था’, यादव ने कहा।

लघुवित्त संस्थाओं की संख्या बढ़ने पर उन्होंने सदस्यता ली, लेकिन ऋण चुकाने के लिए दूसरी संस्थाओं से कर्ज लेना पड़ा। लगभग दर्जन भर संस्थाओं की सदस्यता लेकर भी ऋण नहीं चुका सकीं और वे बेघर हो गईं।

‘गांव में लिया ऋण चुका नहीं सकी, विभिन्न बहाने बनाकर टालना लघुवित्त की नीति है’, यादव ने शिकायत की। लघुवित्त १० सदस्यों का समूह बनाता था; यदि कोई एक किस्त नहीं चुका पाता तो नौ अन्य सदस्यों की बचत काट ली जाती थी।

किस्ता न चुका पाने पर समूह के सदस्य घर जाकर उपकरण जैसे टीवी, दराज, टेबल, पलंग, कुर्सी आदि उठा जाते थे। यहां तक कि पशुधन भी नहीं बंचा।

‘मैंने ऋण लिया है, चुका रही हूँ’, यादव ने कहा। ‘एक की किस्त चुकाने के लिए दूसरे से कर्ज लेकर ८-१० संस्थाओं की सदस्यता ली। आखिरकार मिटरब्याज में पैसा लेकर कारोबार चलाने की कोशिश की। मिटरब्याज जैसी व्यवस्था लघुवित्त ने ही बनाई है। १ लाख ऋण लिए तो हफ्ते में १० हजार चुकाना पड़ा।’

यादव के अनुसार कुल १५-१६ लाख ऋण लिया है, जिसमें १० लाख अभी भी बकाया है। मिटरब्याज ने दुकान बंद करा दी, जिसका उन्हें दुख है।

‘६ महीने दुकान बंद रही, किराया बकाया था, घरवालों ने भी कमरे की चाबी ले ली’, उन्होंने अपनी पीड़ा बयां की।

लघुवित्त ऋण व्यवहार के कारण ७ तोला सोना गया, डेढ़ कठ्ठा जमीन बेचना पड़ा और अब बेघर हो गई हैं। दुकान भी ३० हजार में बेचनी पड़ी, जो उनकी पीड़ा है।

‘मैंने मिटरब्याज में १८ लाख और लघुवित्त से ७ लाख ऋण चुकाया है, फिर भी १० लाख बाकी है। इसलिए अन्य विकल्प न होने के कारण आंदोलन में आई हूं’, यादव ने कहा।

इसी प्रकार के हालात में पीड़ित महोत्तरी के युवराज रसाइली ने भी लघुवित्त के झांसे में आने की बात कही। आशा लघुवित्त, फॉरवर्ड माइक्रोफाइनेंस, मेरा माइक्रोफाइनेंस, विजय लघुवित्त, नया नेपाल, इन्फिनिटी माइक्रोफाइनेंस सहित कई संस्थाओं से लगभग १५ लाख का ऋण लेकर सुमो गाड़ी खरीदी, पर वे अब बेघर हो चुके हैं।

महोत्तरी के युवराज रसाइली

रसाइली ने बताया कि गाड़ी खरीदने के बाद लॉकडाउन शुरू हो गया। गाड़ी न चला पाने पर सब्जी खेती में पैसा लगाया।

‘६ महीने गाड़ी नहीं चला पाई, सब्जियां खेत में सड़ गईं। लॉकडाउन के बाद लघुवित्त ने ऋण निवेश बंद कर दिया और धमकी दी – कर्ज न चुकाया तो गाड़ी ले जाएगा, घर में ताला लगाएगा और मृत्यु दर्ता बनवा देगा। मिटरब्याज लेकर ऋण चुकाया।

मिटरब्याज सहित ऋण चुकाने में विफल रहने पर घर पर ताला लग गया, रसाइली ने बताया। फिर गाड़ी बेचकर और जमीन बेचकर ऋण चुकाया।

रसाइली की तरह पाल्पा की तारा पांडे भी लघुवित्त की धोखाधड़ी की शिकार हैं। लघुवित्त ने १ लाख का तमसुक बना कर ८० हजार ही दिया और ब्याज १ लाख वसूला, यह उनकी शिकायत है।

उन्होंने बताया कि लघुवित्त १५% ब्याज बताता है, लेकिन ३६ से ५२ प्रतिशत तक चुकाना पड़ता है। शुरू में १ लाख ऋण लेकर १३ संस्थाओं के साथ कारोबार करती रहीं।

५ साल पहले जमीन बेचकर ऋण चुका चुकी तारा अब किराए के मकान में रहती है। ‘घर बनाने का पैसा गया, जमीन भी गया’, पांडे ने कहा।

बकरी पालन के लिए लिया ऋण चुकाने में वे असमर्थ हैं। ऋण देने के बाद हर महीने किस्ता भरने से पहले अगली किस्त आने लगती है।

अपनी बकरी दिखाते हुए उन्होंने कहा कि लघुवित्त ने अभी और १० लोगों को ऋण दिया है। उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा कर्ज देना है।

पाल्पा की तारा पांडे

माइतीघर में आमरण अनशन कर रहे लघुवित्त पीड़ितों के विषय में सरकार ने वार्ता समिति का गठन कर बिहीवार से उनकी बात-चीत शुरू की है।

सरकार और आंदोलनरत पीड़ितों के बीच बिहीवार को पहली चरण की वार्ता संपन्न हुई। वार्ता सकारात्मक रहा, पर अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा नहीं जा सका। इसलिए शुक्रवार को अगला चरण होगा।

सरकार द्वारा सर्वोच्च अदालत के आदेशों को लागू न करने के कारण पीड़ित अनिश्चितकालीन सामूहिक आमरण अनशन जारी रखे हुए हैं।

सर्वोच्च अदालत ने सरकार, नेपाल राष्ट्र बैंक और लघुवित्त बैंकर्स संघ को पीड़ितों की समस्या समाधान के लिए आदेश दिया था। लेकिन सरकार ने आदेश लागू नहीं किया, इसलिए पीड़ित आंदोलन कर रहे हैं।

फोटो : विकास श्रेष्ठ