फाइभजी सेवा की तैयारी के लिए सेवा प्रदाताओं को कार्ययोजना प्रस्तुत करने का प्राधिकरण का निर्देश

समाचार सारांश
संपादकीय समीक्षा के बाद का अनुवाद।
- नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण ने मोबाइल सेवा प्रदाताओं को फाइभजी सेवा संचालित करने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
- देशव्यापी फोरजी सेवाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता देते हुए आठ बिंदुओं वाली निर्देशिका जारी की गई है।
- उपभोक्ता अधिकार संरक्षण, साइबर सुरक्षा और सेवा शुल्क प्रणाली को वैज्ञानिक बनाने के लिए सेवा प्रदाताओं को सजग किया गया है।
२२ सावन, काठमांडू। नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण ने देश में फाइभजी मोबाइल सेवा शुरू करने की तैयारी को आगे बढ़ाने के लिए मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों को चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही, देशभर फोरजी सेवाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता में रखते हुए मोबाइल सेवाओं के समग्र स्तर को ऊँचा उठाने के लिए आठ बिंदुओं का निर्देश भी जारी किया गया है।
प्राधिकरण द्वारा शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दूरसंचार अधिनियम, २०५३ की धारा १५ के तहत नेपाल टेलिकॉम और एनसेल सहित मोबाइल सेवा प्रदाताओं को सेवा की गुणवत्ता, नियामकीय अनुपालन, उपभोक्ता हित संरक्षण और नई तकनीक के विस्तार के विषय में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
प्राधिकरण ने प्रमुख शहरी क्षेत्रों से फाइभजी सेवा शुरू करने के लक्ष्य के साथ चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उसे प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, पूरे देश में फोरजी सेवाओं की पहुंच का विस्तार कर उसकी गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया गया है। नेपाल में उच्च गति वाली मोबाइल इंटरनेट सेवा का विस्तार और उन्नत तकनीक की दूरसंचार प्रविधि कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, प्राधिकरण ने बताया।
मोबाइल सेवा की गुणवत्ता सुधार को केंद्र में रखते हुए प्राधिकरण ने नेटवर्क की विश्वसनीयता, डेटा गति और ग्राहक अनुभव में सुधार करने के निर्देश दिए हैं। सेवा प्रदाताओं को प्राधिकरण द्वारा निर्धारित प्रमुख प्रदर्शन सूचकांक (केपीआई) पूरे किए जाने की नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही, नेटवर्क की स्थिति, सेवा में अवरोध, डेटा गति और ग्राहक संतुष्टि से सम्बंधित विवरण भी नियमित रूप से उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया गया है।
उपभोक्ता सेवा में सुधार के लिए ग्राहक सहायता प्रणाली को तकनीकी दृष्टि से सुसज्जित बनाने का निर्देश भी प्राधिकरण ने दिया है। सेवा प्रदाताओं द्वारा उपभोक्ता शिकायतों के प्रभावी समाधान के साथ चौबीसों घंटे शिकायत सुनवाई के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करना आवश्यक होगा एवं ग्राहक संतुष्टि सर्वेक्षण नियमित रूप से संचालित कर उसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।
मोबाइल सेवा नपहुंचे या गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध न हो पाने वाले क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर नेटवर्क विस्तार करने का भी निर्देश दिया गया है। विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्र, व्यावसायिक केंद्र और मुख्य शहरी क्षेत्रों में उच्च गति वाली मोबाइल ब्रॉडबैंड सेवा का विस्तार प्राथमिकता है। साथ ही, सेवा उपलब्ध कराए गए स्थानों के विवरण को नेपाल के नक्शे में समाहित कर कम से कम प्रत्येक तीन माह में अद्यतन करने का प्रावधान किया गया है।
प्राधिकरण ने रेडियो फ्रिक्वेंसी जैसे सीमित राष्ट्रीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर भी जोर दिया है। आवंटित फ्रिक्वेंसी का प्रभावी तौर पर उपयोग करने, दूरसंचार पूर्वाधारों के साझा उपयोग से दोहरी निवेश में कमी लाकर लागत कम करने और सेवा विस्तार को सुगम बनाने का निर्देश दिया गया है।
साथ ही, प्राधिकरण द्वारा अनुदान प्राप्त परियोजनाओं के लिए स्पष्ट कार्यतालिका, प्रगति सूचक और समय सीमा निर्धारित कर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। बढ़ते साइबर खतरों को ध्यान में रखते हुए साइबर सुरक्षा, नेटवर्क सुरक्षा, आपदा प्रबंधन (डिजास्टर रिकवरी) और व्यवसाय निरंतरता योजना बनाकर उसे लागू करने के लिए भी सेवा प्रदाताओं को निर्देशित किया गया है।
शुल्क प्रबंधन के क्षेत्र में प्राधिकरण ने लागत आधारित, वैज्ञानिक और पारदर्शी शुल्क निर्धारण प्रणाली अपनाने का आग्रह किया है। बाजार की मांग, तकनीकी विकास और उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुसार सेवा शुल्कों की नियमित समीक्षा कर आवश्यक प्रस्ताव प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।
प्राधिकरण के अनुसार इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से मोबाइल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, फोरजी एवं आगामी फाइभजी सेवाओं का विस्तार, उपभोक्ता अधिकार संरक्षण और दूरसंचार क्षेत्र में नई तकनीक के प्रयोग को गति मिलने की उम्मीद है।
साथ ही, दूरसंचार क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी, उत्तरदायी और तकनीकी-सुलभ बनाने के उद्देश्य से नियामक व्यवस्था और प्रभावी बनाई जा रही है, प्राधिकरण ने बताया।





