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विपन्न व्यक्तियों के लिए ‘नि:शुल्क बेड’: कितना प्रभावी है और निजी अस्पताल क्यों दिखाते हैं हिचक?

अस्पताल में उपचार करा रहे मरीज

तस्वीर स्रोत, BBC/MADHURI MAHATO

प्रकाशित

पढ़ने का समय: ५ मिनट

विपन्न वर्ग के मरीजों के लिए अस्पतालों द्वारा १० प्रतिशत बेड नि:शुल्क उपलब्ध कराने वाले प्रावधान को लागू करने में स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कई पहल शुरू की हैं।

लेकिन कई जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ इस व्यवस्था को पुरानी विफलता बताते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक सुधारों की जरूरत मानते हैं।

स्वास्थ्य संस्थान परिचालन मानक, २०७७ में यह प्रावधान था, पर अब तक इसके क्रियान्वयन में गंभीर समस्या रही है। इसमें कहा गया है कि “अस्पताल में आने वाले विपन्न, असहाय और बेवारिसे मरीजों के लिए कुल बेड का १० प्रतिशत नि:शुल्क प्रदान करना अनिवार्य है।”

“लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के अभाव में सरकार अब इस पर सख्ती करना चाहती है, जो अच्छी बात है,” पूर्व वरिष्ठ जनस्वास्थ्य प्रशासक चुड़ामणि भंडारी कहते हैं।

“परंतु इस प्रावधान की कमियां, निगरानी और पारदर्शिता के सवालों के समाधान के बिना अपेक्षित फल नहीं मिल सकता।”