राष्ट्रीय गौरव की सिंचाई परियोजनाओं के प्रभावी अनुवर्ती के लिए विशेष तंत्र की स्थापना

जल संसाधन और सिंचाई विभाग ने राष्ट्रीय गौरव की परियोजनाओं की भौतिक तथा आर्थिक प्रगति पर निगरानी करने के लिए एक आधुनिक और प्रभावशाली विशेष तंत्र स्थापित किया है। इस तंत्र के द्वारा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में आ रही असुविधाओं और समस्याओं की पहचान कर उन्हें सुलझाने के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की जाएगी। ऊर्जा मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने परियोजना प्रगति समीक्षा और आगामी कार्ययोजना को लेकर सभी परियोजना प्रमुखों की बैठक बुलाई है।
२७ सावन, काठमांडू। राष्ट्रीय गौरव की परियोजनाओं सहित विभाग के अंतर्गत चल रही अन्य परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी के लिए जल संसाधन और सिंचाई विभाग ने नया विशेष तंत्र स्थापित किया है। इसके पीछे की पृष्ठभूमि यह है कि लंबे समय से चल रही परियोजनाएं अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाई हैं, निर्धारित समय सीमा पार हो चुकी है और निर्माण कार्यों में सामने आई समस्याओं का तर्कसंगत समाधान न मिलने से हालात खराब हुए हैं, जिसे देखते हुए यह व्यवस्था की गई है।
यह तंत्र परियोजना स्थल पर जाकर प्रगति की समीक्षा के साथ भौतिक स्थिति, आर्थिक खर्च, निर्माण तालिका, प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधान के उपायों पर नियमित निगरानी और समन्वय करता रहेगा। विभाग ने समस्या पहचानने, जिम्मेदार निकायों को चिन्हित करने और समाधान के लिए सख्त समय सीमा निर्धारित करने जैसे कदमों को समायोजित करते हुए निरंतर फॉलोअप करने के लिए नया प्रणाली विकसित की है।
प्रारंभिक चरण में महाकाली (तीसरी) सिंचाई परियोजना, रानी जमरा कुलरिया सिंचाई परियोजना, बबई सिंचाई परियोजना, भेरी–बबई डायवर्जन बहुउद्देश्यीय परियोजना, सिक्टा सिंचाई परियोजना और सुनकोशी–मरिन डायवर्जन बहुउद्देश्यीय परियोजना को प्राथमिकता दी गई है। इन परियोजनाओं की प्रगति का विवरण संकलित करने के अलावा समस्याओं की पहचान, तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जिम्मेदारी निर्धारण एवं परिणामोन्मुख निरंतर फॉलोअप प्रणाली संचालित करने की तैयारियां भी तेज की गई हैं।





