इज़रायल में नेतन्याहू को पूर्वसेनाप्रमुख आइजेनकोट ने दी चुनौती, नए सर्वे में चार सीटों की बढ़त

समाचार सारांश: इज़रायल में आगामी 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव के लिए किए गए नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, पूर्व सेनाप्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाली यशार पार्टी प्रधानमंत्री बेनजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी से चार सीटें अधिक जीत रही है। सर्वे में यशार को 25 सीटें और लिकुड को 21 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, लेकिन कोई भी पार्टी सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों की बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। राजनीतिक प्रभाव बढ़ने के साथ ही इज़रायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट आइजेनकोट को अतिरिक्त सशस्त्र सुरक्षा प्रदान करने पर विचार कर रही है। 31 साउन, काठमांडू।
इज़रायल में आगामी 27 अक्टूबर के आम चुनाव के नजदीक आने पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू को पूर्वसेनाप्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी दल से चुनौती बढ़ती नजर आ रही है। गुरुवार को प्रकाशित “जमान इज़रायल” के नए सर्वेक्षण में आइजेनकोट की यशार पार्टी को 25 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी की पहुंच केवल 21 सीटों तक सीमित रह सकती है। सर्वे के मुताबिक यशार पार्टी लिकुड से चार सीटें आगे चल रही है। अंतिम कुछ हफ्तों में प्रकाशित अधिकतर सर्वेक्षणों में यशार की बढ़त देखी गई थी, लेकिन आमतौर पर दोनों दलों के बीच ज्यादा खाई नहीं थी। इस नए सर्वेक्षण में यशार ने अपनी बढ़त चार सीटों तक बढ़ा दी है।
चुनाव के नजदीक आते हुए करीब दो महीने शेष हैं। सार्वजनिक सर्वेक्षणों में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी पिछड़ रही है, फिर भी सरकार बनाने का समीकरण अस्पष्ट ही दिखाई देता है। इज़रायली संसद, नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार के संतुलित बहुमत के लिए कम से कम 61 सीटें चाहिए होती हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक नेतन्याहू विरोधी दलों के “चेंज ब्लॉक” को केवल 58 सीटें मिलेंगी, जो आवश्यक बहुमत से तीन सीटें कम हैं। नेतन्याहू समर्थक दलों को अनुमानित 50 सीटें और अरबी दलों को 12 सीटें मिलेंगी। इनमें राम पार्टी और हदाश-ताल को 6-6 सीटें मिलने की संभावना है। इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनाव से पहले कोई भी बड़ा राजनीतिक गठबंधन सरकार बनाने के लिए स्वतंत्र बहुमत सुनिश्चित करने में असमर्थ है।
आइजेनकोट की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। इज़रायली मीडिया चैनल 12 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से इज़रायली राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने और नुकसान पहुंचाने की कोशिशों के संकेत मिले हैं। प्रधानमंत्री नेतन्याहू को सरकारी सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन आइजेनकोट को अभी तक औपचारिक सरकारी सुरक्षा नहीं मिली है। राजनीतिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बढ़ने के कारण उनकी सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं। चुनावी अभियान के तेज होने के कारण इज़रायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी “शिन बेट” उन्हें सशस्त्र सुरक्षा देने पर विचार कर रही है।
गादी आइजेनकोट इज़रायल के पूर्व सेनाप्रमुख हैं, जिन्होंने चार दशक से अधिक समय सैन्य सेवा में बिताई और राजनीति में आए। वे 19 मई 1960 को तिबेरियास, इज़रायल में जन्मे थे। 18 वर्ष की आयु में उन्होंने इज़राइली सेना में भर्ती होकर कई जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2015 में वे इज़राइली सेना के 21वें प्रमुख नियुक्त हुए। 2019 में 41 वर्ष की सैन्य सेवा पूरी कर उन्होंने अवकाश लिया। सेना में रहते हुए वे तत्कालीन प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के सैन्य सचिव भी रहे। 2013-14 में वे इज़रायली सेना के उपप्रमुख सेनापति थे। अवकाश के बाद वे राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए। 2022 में नेशनल यूनिटी पार्टी में शामिल होकर उन्होंने औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश किया और संसद नेसेट के सदस्य बने। 2023 में हमास द्वारा इज़रायल पर हमला करने के बाद उनकी पार्टी नेतन्याहू सरकार का हिस्सा बनी। लेकिन 2024 में उन्होंने नेतन्याहू सरकार से अलग होने का निर्णय लिया। 2025 में वे नेशनल यूनिटी पार्टी से अलग होकर अपनी नई पार्टी ‘यशार’ का गठन किया। वर्तमान में आइजेनकोट प्रधानमंत्री नेतन्याहू के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं। हालिया सर्वेक्षण में यशार पार्टी की लिकुड से बढ़त के साथ उनकी राजनीतिक पकड़ आगामी चुनावों में मजबूत होने का अनुमान है।





