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बैंकिंग क्षेत्र की वसूली में सुधार से बकाया ब्याज में वृद्धि, वास्तविक लाभ 65 अरब पहुंचा

नेपाल राष्ट्र बैंक की सुलभ ऋण नीति और सुधारित वसूली प्रक्रिया के कारण वाणिज्यिक बैंकों का वास्तविक लाभ पिछले वित्तीय वर्ष में 24.59 प्रतिशत बढ़कर 65 अरब 93 करोड़ रुपये हो गया है। ऋण हानि प्रबंधन के लिए अलग रखी गई राशि में 23 प्रतिशत की कमी ने बैंकों के लाभ पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। कुमारी बैंक ने 1 अरब 43 करोड़ रुपये वसूल कर लाभ में वृद्धि की है। पिछले वित्तीय वर्ष में नबिल बैंक 7 अरब 90 करोड़ रुपये के लाभ के साथ शीर्ष स्थान पर रहा जबकि प्रभु बैंक का लाभ ऋणात्मक होकर 2 लाख 423 रुपये का घाटा दर्शाता है। 31 साउन, काठमांडू।

बैंकिंग क्षेत्र में कर्ज़ा डिफॉल्ट और वसूली की समस्याओं में सुधार देखा गया है। नेपाल राष्ट्र बैंक की सहज ऋण नीति के कारण वसूली में सुधार होने से बैंकों के वित्तीय सूचकांकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़ों के अनुसार संचालित 20 वाणिज्यिक बैंकों का वास्तविक लाभ 65 अरब 93 करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह लाभ पिछले वर्ष के मुकाबले 24.59 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष शुद्ध लाभ 52 अरब 92 करोड़ रुपये था।

पिछले वर्ष बैंकों द्वारा दिखाया गया समग्र लाभ 70 अरब 10 करोड़ रुपये रहा है। इस लाभ में बैंक ने पकी हुई लेकिन अभी वसूल नहीं की गई ब्याज को भी शामिल किया है। पिछले वर्ष कुल बकाया ब्याज की राशि 4 अरब 16 करोड़ रुपये थी, जो बैंकों के शुद्ध लाभ का लगभग 5.94 प्रतिशत है। पूर्व वर्ष में बकाया ब्याज से 13 अरब 35 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। बैंक और वित्तीय संस्थान नेपाल वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों के अनुसार विवरण तैयार करते हैं।

पिछले वर्ष बैंकों के लाभ में मुख्य योगदान ऋण हानि प्रबंधन की कमी और वापसी राशि में वृद्धि का रहा है। बैंकों की आमदनी का मुख्य स्रोत ब्याज आमदनी में केवल मामूली सुधार हुआ है। वित्तीय क्षेत्र में ब्याज दरें कम होने के बावजूद बैंकों की शुद्ध ब्याज आमदनी केवल 1.27 प्रतिशत बढ़ी है। इस अवधि में वित्तीय प्रणाली में अधिक तरलता और कम ऋण मांग के कारण ब्याज आमदनी में वृद्धि नहीं हो सकी, ऐसा भी एक बैंक ने बताया है।