
नाइजीरिया के आयटोरो में समुद्र के जल स्तर में वृद्धि के कारण तटीय बस्ती का अस्तित्व संकट में है और दशकों से स्थानीय निवासी बार-बार विस्थापित होने को विवश हैं। 1987 से 2022 तक किए गए अध्ययन में यह पता चला है कि आयटोरो की तटरेखा सालाना औसतन 15 मीटर की दर से पीछे हट रही है, जिससे भौतिक पूर्वाधार विनष्ट हो रहे हैं। समुद्री जल के अतिक्रमण से पेयजल प्रदूषित हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है और बच्चों में नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी देखे जा रहे हैं।
दक्षिणी नाइजीरिया के आयटोरो में समुद्र का जलस्तर बढ़ते हुए तटीय बस्ती की मौजूदगी ही संकट में है। हर साल समुद्र तट संकुचित हो रहा है, और समुद्र द्वारा बहाए गए घरों के भग्नावशेष अब बाकी बची जमीन पर फैल गए हैं। घर खो चुके परिवार अब आंतरिक इलाकों में पुनर्निर्माण करके रहने लगे हैं, लेकिन कुछ समय में समुद्र फिर से उनकी बस्ती को निगल लेता है।
आयटोरो के पारंपरिक राजा ओलुवाम्बे ओजाग्बोहुन्मी ने 14 साल पहले खीची गई तस्वीर दिखाते हुए कहा, ‘‘तब यहां कई इमारतें थीं। अब उनमें से कोई भी शेष नहीं है।’’ उनके अनुसार दरबार में पहले लगभग 100 कमरे थे, जो अब मात्र एक दर्जन के करीब बच पाये हैं। समुद्र के करीब उनके शयनकक्ष में रात के समय समुद्र की लहरों के पर्खालों से टकराने की आवाज सुनाई देती है।
समुद्र के जल अतिक्रमण ने आयटोरो के स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है। बस्ती का एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र पानी में डूबा हुआ है। स्वास्थ्यकर्मी ओमोमी ओलुवासेन ने बताया कि पानी कभी-कभी खिड़की तक पहुंच जाता है। समुद्री जल के कारण पीने के पानी में प्रदूषण होने से टाइफाइड और दस्त जैसे जलजनित रोगों का खतरा बढ़ गया है। जलवायु परिवर्तन के चलते समुद्र के जलस्तर में वृद्धि के कारण आयटोरो जैसी नाइजीरियाई तटीय बस्तियों में आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका के संकट और भी गहराते जा रहे हैं।





