टर्की, साउदी अरब और पाकिस्तान ‘मक्का समझौता’ के जरिए मुस्लिम नेटो गठबंधन बना सकते हैं?

टर्की, साउदी अरब और पाकिस्तान के बीच ‘मक्का पैक्ट’ नामक एक संयुक्त सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए अब एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है। इस समझौते को कुछ विश्लेषकों ने “सुननी पैक्ट” या “मुस्लिम नेटो” के रूप में भी संदर्भित किया है। इसे इज़राइल और ईरान जैसे राष्ट्रों के खिलाफ एक स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, समझौते के पूर्ण विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाने के कारण अटकलें और टिप्पणियां बढ़ती जा रही हैं। आलोचकों का तर्क है कि समझौते में शामिल नहीं होने वाले देशों के राष्ट्रीय हित अलग-अलग होने के कारण यह गठबंधन बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकता है।
समझौते में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि किसी एक देश पर आक्रमण होता है तो तीनों पक्ष सामूहिक प्रतिक्रिया देंगे। टर्की के विदेश मंत्री हकान फिदन ने इस समझौते को ‘तकनीकी तौर पर नेटो के अनुच्छेद पांच के समान’ बताया है। लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि यह समझौता नेटो जैसे पूर्ण सैन्य गठबंधन में तब्दील होगा या नहीं, यह समय और परिस्थितियों के परीक्षण से ही स्पष्ट होगा। कादिर हस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शेरहत गिबेन्च का कहना है, “जब तक समझौते की शर्तें स्पष्ट नहीं होतीं, इसकी कार्यप्रणाली और प्रभाव का आकलन करना मुश्किल होगा।”
कुछ विश्लेषक मक्का समझौते को मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और अमेरिका समेत इज़राइल तथा ईरान के बीच द्वंद्व का जवाब मानते हैं। समझौते में दो सुननी बहुल देश पाकिस्तान और टर्की शामिल हैं, जिनकी सीमाएं ईरान से जुड़ी हैं। सऊदी अरब ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कुछ लोग इसे ईरान को चारों ओर से घेरने का प्रयास मानते हैं। हालांकि, टर्की के अधिकारियों ने बताया है कि इस समझौते की बातचीत दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी और यह मौजूदा संघर्ष से पहले ही शुरू हो चुका था।




