
जापान के कानुमा शहर के शिन-कानुमा स्टेशन पर रेल ठक्कर से चार कर्मचारियों की मौत की पुष्टि अधिकारियों ने गुरुवार को की है। मृतक कर्मचारी 50 से 60 वर्ष के पुरुष थे और रेल पर सवार लगभग 50 यात्री घायल नहीं हुए हैं। ये कर्मचारी रेल की पटरी के आसपास झाड़-झंखाड़ हटाने वाले सात सदस्यीय दल के सदस्य थे, और इस हादसे में ‘स्पेसिया एक्स’ एक्सप्रेस ट्रेन शामिल थी।
4 भदौ, टोक्यो – जापान में रेल ठक्कर से स्टेशन के चार कर्मचारियों की मौत के आधिकारिक रिपोर्ट जारी की गई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, टोक्यो के उत्तर में स्थित कानुमा शहर के शिन-कानुमा स्टेशन पर रेल की पटरी के आसपास झाड़-पत्तियां हटाते समय कर्मचारियों को एक्सप्रेस ट्रेन ने ठोकर मारी।
अग्नि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दुर्घटना में मारे गए चारों व्यक्तियों को घटनास्थल से निकाला गया। तीन व्यक्ति रेल के नीचे दबे हुए थे जबकि एक व्यक्ति पटरी पर था। जिजी प्रेस ने बताया कि ये पुरुष कर्मचारी 50 से 60 वर्ष की आयु वर्ग के थे। रेल पर सवार लगभग 50 यात्रियों में से किसी को भी चोट नहीं आई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दुर्घटना में शामिल ट्रेन “टोबु निक्को लाइन” पर चलने वाली छह डिब्बों वाली ‘स्पेसिया एक्स’ एक्सप्रेस ट्रेन थी, जो टोक्यो और तोचिगी क्षेत्र के प्रमुख पर्यटक गंतव्य निक्को को जोड़ती है। ट्रेन संचालक के अनुसार, यात्रियों के टोक्यो की ओर जाते समय शिन-कानुमा स्टेशन पर रुकने के दौरान हादसा हुआ। यात्रियों ने एक तेज धमाके की आवाज सुनी और ट्रेन अचानक रुकने के बाद गहरा तनाव महसूस किया। कुछ समय तक यात्री ट्रेन के अंदर ही रहने को बाध्य थे।
ये कर्मचारी झाड़-झंखाड़ हटाने वाली सात सदस्यीय टीम के सदस्य थे। जापानी रेल सेवाओं में उच्च स्तर की देखभाल, प्रशिक्षण और अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के कारण यातायात सेवा सुरक्षित मानी जाती है तथा जानलेवा दुर्घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं।
इस शताब्दी में जापान की सबसे घातक रेल दुर्घटना 2005 में हुई थी, जब व्यस्त समय में एक यात्री ट्रैन पटरी से उतरकर पश्चिमी अमागासाकी के एक अपार्टमेंट भवन से टकरा गई थी। उस हादसे में 107 लोगों की मौत और 500 से अधिक घायल हुए थे। 1963 में हुई एक रेल दुर्घटना में 161 लोगों की मौत हुई थी।
1964 में शुरू हुई जापान की ‘शिंकान्सेन’ बुलेट ट्रेन सेवा में अब तक किसी भी पटरी से ट्रेन गिरने या टकराने से यात्री की मौत नहीं हुई है।





