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खेलकूद के बहाने विदेश यात्रा की परंपरा: इस बार क्या होगा?

ओलंपिक, एशियन गेम्स, दक्षिण एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में अधिकांश अधिकारी अधिक यात्रा करते रहे हैं। चीन के हाउझाउ में संपन्न १९वें एशियाड में नेपाल से २५३ खिलाड़ी भाग लेने के बावजूद लगभग ४०० सदस्यों की टीम वहां पहुंची थी। पेरिस और टोक्यो ओलंपिक में भी खिलाड़ियों की तुलना में कोच और अधिकारियों की संख्या अधिक होने पर आलोचना हुई थी। आगामी २०वें एशियन गेम्स के लिए राखेप ने १३७ खिलाड़ियों सहित २१८ सदस्यों की टीम बनाई है और असंबंधित व्यक्तियों को न भेजने का संकेत दिया है। ४ भदौ, काठमांडू।

तीन वर्ष पहले चीन के हाउझाउ में आयोजित १९वें एशियन गेम्स में नेपाल से २५३ खिलाड़ी शामिल थे। उस प्रतियोगिता में नेपाल ने दो पदक भी जीते थे। लेकिन उसी एशियाड में खिलाड़ी, कोच और अधिकारी मिलाकर लगभग ४०० लोगों की टीम हाउझाउ पहुंची थी। इससे पहले फ्रांस के पेरिस में संपन्न ३३वें ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी। २०८१ साल में संपन्न इस ओलंपिक में नेपाल से ७ खिलाड़ी भाग ले रहे थे, लेकिन खिलाड़ियों की तुलना में दोगुनी से अधिक, अर्थात् २२ अधिकारी और कोच पेरिस पहुंचे थे। नेपाल वहां कोई पदक जीतने में सफल नहीं हो सका।

खेलकूद प्रतियोगिताओं के नाम पर विदेशी भ्रमण करने और उससे भत्ता लेने की प्रवृत्ति नेपाली खेलकूद में पुरानी है। प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और प्रबंधन के बजाय पदाधिकारियों को प्राथमिकता मिलने के कारण आलोचना होती रही है। आने वाले असोज में २०वें एशियन गेम्स होंगे। इस बार भी पिछली तरह पदाधिकारियों की संख्या अधिक होगी या केवल खेल से जुड़े लोग ही जाएंगे, यह सवाल उठ रहा है। सरकार ने इस बार असंबंधित व्यक्तियों को भेजने से इंकार किया है। राखेप के सदस्य सचिव रामचरण मेहताका अनुसार इस बार १३७ खिलाड़ियों समेत कुल २१८ सदस्यों की नेपाली टीम एशियाड में भाग लेगी।