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गाजामा शव गाड़ने की जगह की कमी से परिवारों को एक ही कब्र में कई शव रखने पर मजबूर होना पड़ा

अक्टूबर 2023 से जारी इजरायली आक्रमण में 73 हजार से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और गाज़ा में शव गाड़ने के लिए स्थान की कमी उत्पन्न हो गई है। गाज़ा के औकाफ मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से 40 से अधिक समाधिस्थल नष्ट हो चुके हैं और 60 समाधिस्थल पहले ही पूरी तरह भर चुके थे। अस्पतालों के सात सामूहिक कब्रस्थलों से 529 शव निकाले गए हैं, जबकि युद्धविराम के बाद भी कम से कम 1,200 फ़िलिस्तीनियों की मौत हुई है।

7 भदौ, काठमांडू। अमेरिका के समर्थन से इजरायल द्वारा जारी निरंतर आक्रमण में गाज़ा में मृतकों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शव गाड़ने के लिए पर्याप्त जगह की कमी गंभीर स्थिति बनी हुई है। इजरायली आक्रमण के दौरान कई कब्रें पहले ही ध्वस्त हो चुकी हैं जबकि बचे हुए कब्र स्थल पूरी तरह से भर चुके हैं। इसने पीड़ित परिवारों को अन्य विकल्प खोजने के लिए मजबूर कर दिया है।

गाज़ा के औकाफ एवं धार्मिक मामले मंत्रालय ने बताया है कि युद्ध की शुरुआत के बाद 40 से अधिक समाधिस्थल नष्ट हो चुके हैं। इजरायली सेना ने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में कब्रों तक पहुंच पर रोक लगा दी है, जिससे शव गाड़ने की जगह की कमी और बढ़ गई है। इजरायल के लगातार बमबारी और जबरन विस्थापन के कारण लाखों फ़िलिस्तीनियों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। पहले शव गाड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले कुछ स्थान अब विस्थापितों के आश्रय स्थल बन चुके हैं।

20 वर्षीय उमर अल-साहवी ने अपने पिता के लिए अंतिम संस्कार की जगह ढूंढ़ने की आवश्यकता बताई। उनके पिता 40 वर्षीय मोहम्मद को गाज़ा के ‘येलो लाइन’ के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह क्षेत्र इजरायल द्वारा निर्धारित सैन्य क्षेत्र है। गाज़ा शहर के जैतौन मोहल्ले में मोहम्मद एक छोटे से दुकान में चाय और कॉफी बेचते थे। 10 जून को उन्हें गले में गोली लगी और वे वहीं मौके पर मृत हो गए।

उमर ने अपने पिता को पुनः जैतौन समाधिस्थल में अंतिम निवास स्थान दिया जहाँ कई कब्रें एक-दूसरे के करीब थीं। उनमें से कई इजरायली आक्रमण के शिकार थे। जगह की कमी और युद्ध की कठोर परिस्थिति के कारण कई कब्रों पर केवल पत्थर रखे गए थे और मृतकों के नाम लिखे कागजों से कब्र चिन्हित की गई थी। उमर ने कहा, ‘मैं कब्रों के बीच खड़ा था और कई कब्रें देख रहा था। बालू के टीले और लोग उनके नीचे दबे हुए थे। कब्र केवल एक साधारण पत्थर था, जिसपर शहीद का नाम लिखा कागज टेका हुआ था। कोई अच्छा निर्माण नहीं था।’

वर्तमान में वहां एक कब्र की कीमत लगभग 500 शेकेल (167 डॉलर) है, जिसे उनका परिवार वहन नहीं कर सकता था, इसलिए उन्हें अन्य विकल्प तलाशना पड़ा। उमर ने कहा, ‘नई कब्र बनाने के लिए जगह नहीं थी, इसलिए मैंने अपने बाबा को अपने चाचा की कब्र में दफनाया।’

गाज़ा में सरकारी सेवाएं पूरी तरह ठप हैं और इजरायली आक्रमण का खतरा लगातार बना हुआ है। इससे हज़ारों मृत फ़िलिस्तीनियों के शव लापता हैं, जिनमें से कई बाग़, स्कूल या अस्पताल परिसर में दफन किए गए हैं। अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से 73 हजार से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं। पिछले वर्ष हुए युद्धविराम के बाद भी कम से कम 1200 की मौत हुई है। गाज़ा के अधिकारियों ने अस्पताल के सात सामूहिक कब्रस्थलों से 529 शव निकाले जाने की सूचना दी है।

इजरायली हिंसा रुकने के दौरान परिवारों ने मोहम्मद के शव को निकालकर अंतिम संस्कार के लिए समाधिस्थल ले गए। गाज़ा के औकाफ तथा धार्मिक मामिला मंत्रालय के अनुसार युद्ध के दौरान 40 से अधिक समाधिस्थल नष्ट हो चुके हैं और 60 समाधिस्थल पहले से ही भर चुके थे। इजरायली सेना ने अपने नियंत्रित क्षेत्रों के कब्रों में प्रवेश पर कड़ी पाबंदी लगा रखी है जिससे उपलब्ध कब्रों की संख्या और कम हुई है।

इजरायली बमबारी और जबरदस्ती विस्थापन के कारण लाखों फ़िलिस्तीन जेल अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। पहले अंतिम संस्कार के लिए निर्दिष्ट किए गए क्षेत्रों का अब विस्थापितों का आश्रय स्थल बन जाना आम बात है। गाज़ा के अधिकारियों ने कब्रों में रखे जाने वाले हेडस्टोन (पत्थर) और अन्य सामग्री की कमी बताई है, जिससे अंतिम संस्कार का खर्च 700 से 1000 शेकेल तक पहुंच गया है। अस्थायी कब्र न होने के कारण टूटे हुए भवनों के टुकड़े, मिट्टी और जस्ते की चादर से चिन्हित कब्र मिलने लगी हैं।

औकाफ मंत्रालय के मीडिया अधिकारी इकरामी अल-मदलाल ने बताया कि युद्ध की शुरुआत में गाज़ा के 60 समाधिस्थल भर चुके थे। मंत्रालय नई समाधिस्थलों की खोज में लगा हुआ है और अस्थायी स्थानों से कब्रों के स्थानांतरण में लगातार चुनौतियाँ आ रही हैं। (एजेंसियों के सहयोग से)