
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण विश्वव्यापी मेमोरी चिप्स की गंभीर कमी (मेमोरी क्रंच) देखने को मिल रही है, जो सीधे आम उपभोक्ताओं पर प्रभाव डालने लगी है। इसी समस्या के चलते अमेज़न ने अपने कई लोकप्रिय इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के दामों में बड़ी वृद्धि की है। इको स्पीकर, फायर टीवी, किंडल ई-रिडर और एरो राउटर जैसे उपकरणों के दाम रातोंरात बढ़ाकर कुछ ६० प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए हैं। दाम वृद्धि का सबसे अधिक असर अमेज़न के लोकप्रिय गैजेट इको डॉट पर पड़ा है। इसका मूल्य ४९.९९ अमेरिकी डॉलर से ६० प्रतिशत बढ़कर सीधे ७९.९९ डॉलर हो गया है, जिससे ३० डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
इसी प्रकार, १६ जीबी क्षमता वाले किंडल ई-रिडर का मूल्य भी ४० डॉलर बढ़कर १४९.९९ डॉलर हो गया है। स्ट्रीमिंग स्टिक से लेकर घरेलू नेटवर्क उपकरण तक दाम वृद्धि का प्रभाव देखा गया है। अमेज़न ने बताया है कि अपने उत्पादों की लागत बढ़ने के कारण और उसे खुद पर वहन करने में असमर्थता के कारण यह मूल्य वृद्धि करना पड़ा है। यह समस्या केवल अमेज़न तक सीमित नहीं है। एप्पल ने भी मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागतों का हवाला देते हुए अपने उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं जबकि माइक्रोसॉफ्ट एक्सबॉक्स हार्डवेयर पर इसी तरह का कदम उठा रहा है। विशेष रूप से क्लाउड कंपनियों और बड़े डेटा सेंटर्स ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मेमोरी चिप्स की बड़ी मांग की बात करते हुए आपूर्ति संकट की गहराई को बढ़ाया है।
जेपी मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, २०२४ की शुरुआत से २०२६ के अंत तक डीआरएएम (डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी) की कीमतें ४०० प्रतिशत या उससे अधिक बढ़ सकती हैं। इसका सबसे बड़ा प्रभाव सस्ते बजट गैजेट्स पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार अनुसंधान संस्था IDC के अनुसार, इससे विश्वव्यापी तौर पर पर्सनल कंप्यूटर और स्मार्टफोन की आपूर्ति कम हुई है और कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री में भी भारी गिरावट आई है। माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और अन्य बड़े क्लाउड प्रदाताओं ने दीर्घकालीन अनुबंधों के जरिए मूल्य जोखिम को कम करने का प्रयास किया है, लेकिन आम उपभोक्ताओं के लिए कीमत वृद्धि से बचने का कोई विकल्प नहीं है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह आपूर्ति संकट और महंगाई की स्थिति संभवतः २०२७ से पहले सहज नहीं होगी, जिसे विभिन्न तकनीकी और संचार माध्यमों ने भी रेखांकित किया है।





