महिनावारी शिक्षा: ‘विद्यालय में शौचालय के पास प्याड बॉक्स होते तो सुविधा होती’

‘विद्यालय में शौचालय के पास प्याड बॉक्स होते तो सुविधा होती’ विद्यालय के पाठ्यक्रम में मासिक धर्म का विषय कक्षा चार से ही शामिल किया गया है। लेकिन क्या लड़कियों को मासिक धर्म स्वास्थ्य के बारे में पर्याप्त शिक्षा मिल पाती है? क्या वे आवश्यक समय पर आवश्यक जानकारी प्राप्त करती हैं? मासिक धर्म के दौरान विद्यालय छोड़ने की परिस्थितियों के कारण क्या-क्या बदलाव हुए हैं? ‘वाटर एड’ ने सन् 2009 में काठमांडू समेत चार जिलों में किए गए अध्ययन में पता लगाया था कि 53 प्रतिशत छात्राएं मासिक धर्म के दौरान विद्यालय छोड़ देती थीं। इनमें से अधिकांश ने मासिक धर्म के दौरान सफाई के लिए आवश्यक गोपनीयता और पर्याप्त पानी की कमी की बात कही थी। सन् 2026 तक भी हमने जिन कुछ सामुदायिक विद्यालयों का अवलोकन किया, उनकी स्थिति उस समय से ज्यादा अलग नहीं है। बच्चियों के लिए आवश्यक शौचालयों में पूर्व-निर्मित सुविधाएँ अभी भी ठीक से नहीं बनी हैं, ऐसा एक सामुदायिक विद्यालय की नर्स सविता रेग्मी ने बताया। छात्राएं मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं और काठमांडू महानगरपालिका उन स्थितियों में सुधार लाने के लिए कौन-कौन से कदम उठा रही है?





