
समाचार सारांश
- राहुल गांधी ने पुणे में मनुस्मृति के उस उद्धरण को शर्मनाक बताया जिसमें महिलाओं के बारे में लिखा गया है, और कहा कि महिलाएं किसी की अधीनस्थ नहीं होनी चाहिएं।
- उन्होंने महिलाओं को 70 करोड़ अलग-अलग यात्राओं, कल्पनाओं और सपनों सहित भारत की सबसे बड़ी शक्ति और संपत्ति बताया है।
- राहुल के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेताओं ने उन्हें संविधान और भारतीय सभ्यता के प्रति जिम्मेदार होने की बात कहते हुए आलोचना की है।
9 भाद्र, काठमांडू। भारत की लोकसभा में विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी मनुस्मृति ग्रंथ को लेकर अपने हालिया बयान की वजह से विवादों में हैं। पुणे में शनिवार को आयोजित ‘‘छात्राओं की गूंज’’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मनुस्मृति के कुछ संदर्भों को उजागर किया।
राहुल ने मनुस्मृति में महिलाओं के संबंध में लिखे उद्धरण को ‘शर्मनाक’ कहा। उन्होंने कहा, ‘‘महिलाएं किसी की अधीनस्थ नहीं हो सकतीं।’
गांधी ने आगे कहा, ‘‘मैं यहां मनुस्मृति के उस उल्लेख को बताना चाहता हूं जिसमें कहा गया है कि बाल्यावस्था में महिला पिता की अधीनस्थ होती है, यौवन में पति की और पति के मृत्यु के बाद पुत्रों की। ये शब्द शर्मनाक हैं और कभी बोलने तक नहीं चाहिए थे।’
उन्होंने कहा, ‘महिलाएं भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उनके 70 करोड़ अलग-अलग सफर, कल्पनाएं और सपने हैं। महिलाएं समस्त राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने और खुद पर विश्वास करने की जरूरत है।’
मनुस्मृति के पांचवें अध्याय के श्लोक 148 में पाया जाने वाला यह उद्धरण विवादित माना जाता है। यह ग्रंथ महिलाओं की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अस्तित्व को खारिज करने और दलित जाति को अधीनस्थ बनाए रखने के लिए आलोचना का विषय रहा है।
हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार मनुस्मृति के रचयिता महर्षि मनु हैं और इसका संकलन ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर ईस्वी दूसरी शताब्दी तक माना जाता है। इसमें 12 अध्याय और लगभग 2,684 श्लोक हैं।
पहला अध्याय सृष्टि से संबंधित है। दूसरा अध्याय धर्म के नियम, वर्णधर्म, ब्रह्मचर्य आदि विषयों को समेटे हुए है। तीसरे अध्याय में विवाह और महिला का सम्मान शामिल हैं। चौथा अध्याय गृहस्थ धर्म और नरक के प्रकारों पर केंद्रित है।
पांचवां अध्याय खाने-पीने के नियम, महिलाओं के कर्तव्य, शुद्धता और अशुद्धता को बताता है। छठे में वानप्रस्थ और संन्यास धर्म, सातवें में राजाओं के कर्तव्य, आठवें में अपराध, न्याय और राजनीति के विषय हैं।
नौवें अध्याय में पैतृक संपत्ति, दसवें में वर्ण मिश्रण, ग्यारहवें में पापकर्म और बारहवें में तीन गुणों और वेदों की प्रशंसा की गई है।
मनुस्मृति को लंबे समय तक सामाजिक व्यवस्था का आधार माना गया है, परन्तु प्रगतिशील आंदोलनों के कारण इसे आलोचना का सामना भी करना पड़ा है। उदाहरण के तौर पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने 25 जुलाई 1927 को महाराष्ट्र के कोलाबा जिले में सार्वजनिक रूप से मनुस्मृति जलाकर इसका विरोध किया था।
अम्बेडकर के अनुसार मनु ने वर्ण व्यवस्था बनाई, हालांकि जाति व्यवस्था की सृष्टि नहीं, लेकिन इसकी शुरुआत यह ग्रंथ में हुई। उन्होंने अपने ग्रंथ ‘फिलोसॉफी ऑफ हिंदूइज्म’ समेत अन्य पुस्तकों में मनुस्मृति का विरोध किया था।
उस समय दलित और महिलाएं सामान्य जीवन यापन के हकदार नहीं थे और ब्राह्मणों के प्रभुत्व ने जाति व्यवस्था को जन्म दिया था। अम्बेडकर कहते हैं कि वर्ण व्यवस्था एक बहु-स्तरीय भवन की तरह है जिसमें उपर-नीचे जाने का कोई सीढ़ी नहीं है।
मनुवादी समर्थकों की भी कमी नहीं है। इतिहासकार नरहर कुरुंदकर ने मनुस्मृति को वेदों जैसा सम्मान मिलने की बात करने वाले समूह का समर्थन किया है। उनका कहना है, ‘‘स्मृतियां वेदों पर आधारित हैं और मनुस्मृति को भी वेदों के नजरिए से देखना चाहिए।’
उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि मनुस्मृति के समर्थक समूह इसे वेदों जैसे सम्मान देने की बात करते हैं। साथ ही कुछ विवादास्पद अंशों के कारण गलतफहमी न हो, इसलिए मनुवादी दृष्टिकोण भी बताते हैं। वे कहते हैं, ‘कुछ हिस्सों को छोड़कर भी यह ग्रंथ समाज कल्याण में योगदान देता है।’
राहुल गांधी के बयान के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कड़ी आलोचना की। आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल को देश के लोकतंत्र और संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी का महाराष्ट्र में जो बयान था कि महिलाओं को मनुस्मृति के बंधन तोड़कर बाहर आना चाहिए, वह गलत है। विपक्षी नेता होते हुए भी वे लोकतंत्र के खिलाफ हैं।’’
आदित्यनाथ ने राहुल पर संविधान की शपथ लेकर भारत की परंपरा और विरासत का अपमान न करने का आरोप लगाया।
उन्होंने सवाल उठाया, ‘‘ऐसे कौन हैं जिनके जीवन में महिला का सहारा नहीं है – मां, बहन, पत्नी या बेटी? क्या बिना पिता के बेटी होती है? बिना भाई के बहन? बिना पति के पत्नी? बिना बेटे के मां?’’
मुख्य रूप से भाजपा सांसद और समर्थक राहुल गांधी की आलोचना कर रहे हैं। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, ‘‘पहले पढ़ो, समझो, फिर बोलो।’’
भाजपा नेता अमित मालवीय ने मनुस्मृति के चुने हुए अंशों के आधार पर गलत प्रचार की बात कहते हुए महिलाओं के प्रति आदर का उल्लेख होने का हवाला देते हुए राहुल को कड़ी चेतावनी दी।
मालवीय ने कहा, ‘‘राहुल गांधी को हिंदू धर्मग्रंथों को राजनीतिक नजरिये से नहीं देखना चाहिए, कम से कम ईमानदारी से पढ़ना चाहिए। भारतीय सभ्यता अंग्रेज़ी चश्मे से पढ़कर समझने वाली चीज़ नहीं है।’
(एजेंसियों से)





