
सरकार ने नदीनालों, तालाबों और भूगर्भीय जल स्रोतों में उद्योगों एवं अस्पतालों से निकलने वाले जहरीले कचरे के पानी के निपटान पर नियंत्रण के लिए नया ‘औद्योगिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले फोहर पानी संबंधी मानक २०८३’ का प्रारूप तैयार किया है। इस प्रारूप के तहत अस्पतालों को बिना जल शोधन किए अपने फोहर पानी को भूमि में डालने की अनुमति नहीं होगी और उद्योगों के मर्कुरी, आर्सेनिक, सीसा, कैडमियम, साइनाइड तथा रेडियोधर्मी पदार्थों के लिए कड़े सहिष्णुता सीमाएं निर्धारित की गई हैं। मंत्रालय ने इस मसौदे में शामिल पांच पुराने औद्योगिक फोहर पानी मानकों को निरस्त करने का प्रस्ताव रखा है और संबंधित पक्षों से १५ दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं। ९ भदौ, काठमाडौं।
नदीनालों, तालाबों और भूजल स्रोतों में उद्योगों और अस्पतालों द्वारा अनियंत्रित झरने से उत्पन्न विषाक्त जल प्रदूषण के गंभीर प्रभावों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसे कड़ाई से नियंत्रण करने की पहल की है। मानव स्वास्थ्य, जल जीवन और संपूर्ण पर्यावरण पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को ध्यान में रखते हुए कृषि, वन तथा पर्यावरण मंत्रालय ने ‘औद्योगिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले फोहर पानी संबंधी मानक २०८३’ का प्रारूप सार्वजनिक किया है। इस प्रस्तावित मानक में विशेष रूप से अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं की कड़ी निगरानी का प्रावधान किया गया है, जिससे जनस्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले प्रदूषण को रोका जा सके। अब कोई भी अस्पताल बिना जल शोधन के अपने फोहर पानी को भूमिगत जल स्रोतों को प्रदूषित करते हुए जमीन में नहीं छोड़ सकेगा।
इसी तरह, उद्योगों के फोहर पानी में पाए जाने वाले मर्क्युरी, आर्सेनिक, सीसा, कैडमियम, साइनाइड और रेडियोधर्मी पदार्थों पर अत्यंत कड़ी सहिष्णुता सीमा निर्धारित की गई है। ये सभी रसायन कैंसर जनित हैं और तंत्रिका तंत्र को हानि पहुंचाते हैं। नए मानकों के तहत प्रदूषण की प्रकृति के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कर विभिन्न नियम बनाए गए हैं। इनमें औषधि उत्पादन, चमड़ा प्रक्रमण (टैनरी), धागा और वस्त्र रंगाई (डाइंग), पेंट, सतह परिष्करण (इलेक्ट्रोप्लेटिंग), साबुन, चीनी, दूध, वनस्पति घी एवं तेल, कागज, पलप तथा फर्मेंटेशन उद्योग विशेष रूप से लक्ष्यित हैं क्योंकि ये अत्यधिक प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। मंत्रालय के अनुसार, उद्योग चाहे फोहर पानी को सतही जल, सार्वजनिक ढल या संयुक्त प्रशोधन प्लांट में मिलाएं, फोहर पानी का निपटान केवल निर्धारित सीमा के भीतर ही कर सकेंगे।





