कृषि बीमा अनुदान में दोहरी सुविधा लेने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, बीमित को अनिवार्य स्वघोषणा करनी होगी

सरकार ने कृषि, पशुपालन एवं जड़ीबूटी बीमा प्रीमियम अनुदान वितरण को पारदर्शी बनाने हेतु ‘कृषि, पशुपालन तथा जड़ीबूटी बीमा प्रीमियम में अनुदान उपलब्ध कराने की कार्यविधि २०८३’ लागू की है। नई कार्यविधि के अनुसार बीमा कंपनियों को बीमालेख जारी करते समय नेपाल बीमा प्राधिकरण के रियलटाइम ‘एग्रिकल्चर एंड लाइवस्टॉक इन्शोरेंस सिस्टम’ का अनिवार्य रूप से उपयोग करना होगा। अनुदान प्राप्त करने वाले को अन्य सरकारी संस्थाओं से इसी उद्देश्य हेतु अनुदान नहीं लिया गया होने की स्वघोषणा करनी आवश्यक है। उल्लंघन पाए जाने पर प्राधिकरण को सूचित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ९ भदौ, काठमांडू।
सरकार ने कृषि, पशुपालन और जड़ीबूटी बीमा प्रीमियम अनुदान वितरण को पारदर्शी, व्यवस्थित तथा दुरुपयोग रहित बनाने के लिए कठोर नीति लागू की है। कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने ‘कृषि, पशुपालन तथा जड़ीबूटी बीमा प्रीमियम में अनुदान उपलब्ध कराने की कार्यविधि २०८३’ जारी की है, जिसमें बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली और अनुदान वितरण व्यवस्था में तकनीक के उपयोग को अनिवार्य किया गया है। मंत्रिपरिषद द्वारा २० साउन को अनुमोदित यह नई कार्यविधि १ भदौ से लागू हो चुकी है, जो २०८२ की पुरानी कार्यविधि को प्रतिस्थापित कर देती है।
नई व्यवस्था के तहत बीमा कंपनियों को कृषि एवं पशुपालन बीमालेख जारी करते वक्त नेपाल बीमा प्राधिकरण के रियलटाइम सॉफ़्टवेयर ‘एग्रिकल्चर एंड लाइवस्टॉक इन्शोरेंस सिस्टम’ का उपयोग अनिवार्य है। प्रौद्योगिकी के उपयोग में सख्ती बरती गई है, कार्यविधि में केवल विशेष परिस्थितियों में, जैसे सॉफ़्टवेयर तकनीकी समस्या आने पर ही भौतिक रूप से बीमालेख जारी करने की अनुमति दी गई है। भौतिक बीमालेख जारी करते समय भी बीमा प्राधिकरण से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। कार्यविधि दोहरे लाभ और संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए स्पष्ट प्रावधान रखती है।





