रसुवा बाढ़: ‘पूर्व-सूचना देने पर भी कई लोगों ने विश्वास न किया, जिससे नुकसान बढ़ा’

रसुवा और नुवाकोट से होकर बहने वाली भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ ने नुवाकोट के ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार को लगभग डुबो दिया है, ऐसा विदुर नगरपालिका वार्ड नं १ के वार्ड अध्यक्ष लेनिन रंजीत ने बताया। उनके अनुसार त्रिशूलीवासियों को बाढ़ आने की सूचना समय रहते दे दी गई थी तथा माइकिंग के माध्यम से भी लोगों को तत्काल वहां से निकल जाने का कहा गया था। उन्होंने बताया, “मैं माइकिंग करते हुए त्रिशूली के पुराने पुल पार कर रहा था कि तभी बाढ़ आ गई। नए पुल तक पहुँचने पर पानी पैरों तक भिगो चुका था। किसी तरह पत्थरों तक पहुँचकर अपनी जान बचाई।”
रंजीत ने कहा, “बाजार का आधे से ज्यादा हिस्सा डूब चुका है। त्रिशूली जलविद्युत गृह, बाजार के दोनों नए और पुराने कंक्रीट पुल, त्रिशूली स्कूल, मंदिर और घर सभी बहा गए हैं। आसपास का ढुंगे बाजार भी पूरी तरह डूब चुका है।” उन्होंने बताया कि अभी तक शारीरिक तथा मानवीय क्षति का कोई सही पता नहीं चल पाया है। उन्होंने कहा, “कुछ मित्रों ने अपनी आंखों के सामने लोगों को बहते हुए देखा है। बाजार के कई निवासियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।” बचाव कार्य के लिए हेलीकॉप्टर मंगवाने की प्रक्रिया भी जारी है।
अभी बाजार के निवासी विदुर और कॉलोनी क्षेत्र में आश्रय लिए हुए हैं। वार्ड अध्यक्ष रंजीत ने बताया, “नदी के किनारे तल्ला बाजार के निवासियों ने तुरंत इलाके को छोड़ा जबकि ऊपर के बाजार में रहने वाले अब भी स्थानांतरण कर रहे थे। पहले भी ऐसी अफवाहें फैलती थीं, लेकिन बाढ़ इतनी भयंकर होकर कभी नहीं आई थी। इतनी विनाशकारी बाढ़ की कल्पना भी नहीं की गई थी।” इससे पहले विक्रम संवत 2042 में रसुवा के धुन्चे क्षेत्र में भूस्खलन के कारण त्रिशूली नदी थम गई थी, उस समय बाजार खाली करा दिया गया था पर बाढ़ अंदर तक नहीं पहुंची थी।
नुवाकोट के ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार, जिसे ‘साँघुबजार’ के नाम से जाना जाता है, में लगभग 500 परिवार रहते हैं और वहां की जनसंख्या 2,000 से अधिक है, अधिकारीयों ने यह जानकारी दी है।





