भोटेकोशी नदी की बाढ़ से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित, उपत्यका में आवश्यक वस्तुओं का कितना भंडार है?

समाचार सारांश
- रसुवागढ़ी की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद कृष्णभिर में सड़क टूटने से काठमांडू-मुग्लिन मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है।
- सड़क बंद होने के कारण कालीमाटी बाजार में रविवार को सब्ज़ी, फल और मछली की आपूर्ति सात लाख 95 हजार 241 किलोग्राम से घटकर मात्र 1 लाख 51 हजार 912 किलोग्राम हो गई है।
- आयल निगम हेटौंडा और अमलेखगंज मार्ग से ईंधन और गैस आपूर्ति करने की तैयारी कर रहा है, वहीं सरकार ने कालाबाजारी और कृत्रिम कमी करने वालों को चेतावनी दी है।
१४ भदौ, काठमांडू। हाल ही में आयी भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने नेपाल-चीन के प्रमुख व्यापारिक सीमा रसुवागढ़ी को भारी क्षति पहुंचाई है। १० भदौ की विनाशकारी बाढ़ ने इस क्षेत्र की जनधन और राष्ट्रीय संपत्ति को अपूरणीय क्षति दी है।
इस बाढ़ में हजारों लोग लापता हैं और प्रारंभिक अनुमान लगाते हुए क्षति खर्बों में आंकी गई है। सभी सरकारी एजेंसियाँ अभी भी बचाव और राहत कार्य में लगी हैं।
रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। यह विपदा केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहकर देश की राजधानी काठमांडू उपत्यका तक पहुँचने लगी है।
कृष्णभिर में सड़क धंस गई
काठमांडू और देश के अन्य भागों तथा बाहरी बाजारों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पृथ्वी राजमार्ग (काठमांडू-मुग्लिन खंड) पूरी तरह से बंद है।
धादिंग के बेनिघाट रोरांग नगरपालिका के अंतर्गत कृष्णभिर क्षेत्र में त्रिशूली नदी ने सड़क काट दी जिससे सड़क टूट गई है। नदी किनारे बनायी गई पक्की दीवार भी कटाव के कारण टूट गई जिससे सड़क को भारी नुकसान पहुँचा और उस मार्ग से सभी परिवहन गतिविधि बंद हो गई।
पहले भी गल्छी क्षेत्र में पानी के कारण रास्ता बंद हो गया था, जब उसका समाधान हुआ तो दूसरे ही दिन कृष्णभिर सड़क धंसने से राजमार्ग फिर से बंद हो गया।
सड़क विभाग के महानिदेशक डॉ. विजय जैस का कहना है कि कृष्णभिर में सड़क धंसने वाले स्थान पर तकनीकी टीम अध्ययन कर रही है। वे कहते हैं, “यह एक जटिल भौगोलिक क्षेत्र है और नदी नीचे से कटाव कर रही है, इसलिए जोखिम का मूल्यांकन कर ही निर्णय लिया जाएगा।”
इस वजह से फिलहाल सड़क खोलना संभव नहीं दिखता। मुख्य मार्ग बंद होने से काठमांडू उपत्यका में महंगाई और वस्तुओं की कमी की आशंका बढ़ गई है।
अवरुद्ध मार्ग के कारण कालीमाटी फल और सब्जी बाजार में आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।
सब्ज़ी आपूर्ति की स्थिति
कालीमाटी तरकारी बाजार विकास समिति के आंकड़ों के अनुसार रविवार को सब्जी, फल और मछली की आपूर्ति में गिरावट आई है। शनिवार को ७,९५,२४१ किलोग्राम की आपूर्ति हुई थी जो रविवार को घटकर केवल १,५१,९१२ किलोग्राम रह गई।
सूचना अधिकारी विनय श्रेष्ठ ने बताया कि भारत और तराई से आने वाले आलू, प्याज और फलफलों पर खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, “सामानों का आवागमन रात १२ बजे से सुबह ६ बजे तक होता है, सड़क बंद होने से यह मात्रा धीरे-धीरे कम होती जाएगी।”

धादिंग के पालुङ, काभ्रे, नुवाकोट और उपत्यका के अंदरूनी क्षेत्रों से सब्ज़ी आ रही है, इसलिए निकट की आपूर्ति में कोई संकट नहीं है। परन्तु यदि सड़क मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो काठमांडू आने वाली सब्ज़ी को पोखरा, बुटवल या नारायणगढ की ओर मोड़ना पड़ सकता है, जिससे पूरी बाजार व्यवस्था में असर पड़ने की संभावना बनी रहेगी।
खाद्यान्न से भरी मालवाहक गाड़ियां राजमार्ग पर जाम, चावल तीन महीने तक के लिए उपलब्ध
खाद्यान्न आपूर्ति प्रणाली भी प्रभावित हुई है। भारत-तराई से चावल, दाल, तेल जैसे महत्वपूर्ण सामान ले जाने वाली सैकड़ों गाड़ियां राजमार्ग पर फंसी हुई हैं। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि काठमांडू में तत्काल खाद्यान्न की कमी नहीं होगी।
नेपाल चावल, तेल, दाल उद्योग संघ के सदस्य विभोर अग्रवाल ने बताया कि काठमांडू के गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
उनके अनुसार चावल की आपूर्ति में कोई समस्या नहीं है और लगभग दो-तीन महीने के लिए चावल का भंडारण काठमांडू में उपलब्ध है।

अन्य खाद्यान्न उद्योगियों के पास १५ दिन से एक महीने तक का भंडार मौजूद है, इसलिए यदि सड़क मार्ग ७-१० दिन तक बंद भी रहा तो बाजार पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा, वे कहते हैं।
लेकिन यदि मार्ग लंबी अवधि तक बंद रहता है तो वेतन भोगी और दैनिक मजदूरी करने वाले वर्ग पर सीधा प्रभाव पड़ेगा, इसलिए सरकार को तत्काल रास्ता खोलने के लिए कदम उठाना चाहिए, यह उनका सुझाव है।
वैकल्पिक मार्ग से पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति के लिए आयल निगम तैयार
राजधानी में प्रवेश करने वाला मुख्य राजमार्ग बंद होने के बाद नेपाल आयल निगम वैकल्पिक मार्ग से ईंधन और खाना पकाने वाली गैस आपूर्ति के लिए उच्च सतर्कता बरत रहा है।
अमलेखगंज और हेटौंडा से वैकल्पिक मार्ग से ईंधन लाने की व्यवस्था की जा रही है।
आयल निगम के कार्यकारी निर्देशक नागेंद्र साह ने बताया कि मकवानपुर (हेटौंडा) से वैकल्पिक मार्ग का उपयोग कर ईंधन और गैस लाई जा रही है।
उनके अनुसार अमलेखगंज डिपो भारत से पाइपलाइन के माध्यम से तेल सीधे आता है, जिससे काठमांडू में तेल की कमी नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि गैस उद्योगपतियों के साथ बातचीत कर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, जिसके अंतर्गत काठमांडू और आस-पास के जिलों में गैस बिक्री करने वाले उद्योग वैकल्पिक जिलों के गैस उद्योगों के साथ समन्वय कर गैस आपूर्ति जारी रखेंगे।
“सिलेंडर भर कर गैस वैकल्पिक मार्ग से काठमांडू लाने की व्यवस्था की गई है,” उन्होंने बताया।
कालाबाजारी और कृत्रिम कमी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी
सरकार ने विपदा के इस संवेदनशील समय में कालाबाजारी और कृत्रिम कमी रोकने के लिए उद्योगपतियों एवं व्यापारियों से अपील करते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
वाणिज्य विभाग ने खाद्यान्न और चिकित्सा सामग्री को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और जोखिम भरे क्षेत्रों से गोदामों को स्थानांतरित करने का आग्रह किया है।
उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय ने आपूर्ति के वैकल्पिक उपायों पर चर्चा कर संबंधित निकायों को जिम्मेदारी सौंपी है।
मंत्रालय के अनुसार छोटे वाहन के माध्यम से भी खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुएं वैकल्पिक मार्ग से लाने की व्यवस्था की गई है।
“बाजार में कृत्रिम कमी और कालाबाजारी न हो, इसके लिए सरकार सतर्क हो”
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिना ने कहा है कि बाजार में कृत्रिम कमी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार को ज़्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि सड़क बंद होने से उपभोक्ता वस्तुओं की कमी और मूल्यवृद्धि का डर उपभोक्ताओं में बढ़ गया है, इसलिए सरकार को आपूर्ति व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखना होगा।
साल्ट ट्रेडिंग, खाद्य प्रबंधन कंपनियों और व्यापारिक संघों के साथ वस्तुओं का स्टॉक कितना है, इस पर नियमित जानकारी सरकार द्वारा जनता को उपलब्ध करानी चाहिए ताकि लोगों में घबराहट न फैले।
“साल्ट ट्रेडिंग के पास ६ महीने तक का नमक स्टॉक है, इसी तरह अन्य खाद्य वस्तुओं के लिए भी सरकार को भरोसा दिलाना चाहिए,” उन्होंने कहा।
राजमार्ग बंद रहने पर भी वैकल्पिक रास्ते अपनाकर आपूर्ति सुगम बनाने के लिए सरकार को पहल करनी होगी, यह उनका जोर है।
ऐसे कठिन समय में सभी पक्षों को जिम्मेदार बनना होगा और व्यापारियों को ईमानदारी से काम करना होगा, उनका मानना है।
“उपभोक्ताओं को भी जरूरत से ज्यादा सामान जमा नहीं करना चाहिए और राज्य संस्थाओं को आपूर्ति में ज़्यादा सक्रियता दिखानी चाहिए।” वे कहते हैं।
प्राकृतिक आपदा के बाद सड़क खोलने की तकनीकी प्रक्रिया के साथ-साथ लाखों नागरिकों के दैनिक जीवन और आर्थिक संकट की चुनौतियाँ भी इस संकट ने पैदा की हैं।
सरकार को अवरुद्ध राजमार्ग खोलने की जिम्मेदारी पूरी करनी होगी और विपदा का फायदा उठाकर बाजार में अनियमितता करने वालों को नियंत्रित करना होगा।
सरकार की सतर्कता, व्यापारियों की ईमानदारी और उपभोक्ताओं की संयमिता से ही इस संकट का प्रबंधन संभव होगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है।





