
अमेरिकी सेना ने ईरान के लाराक द्वीप पर स्थित दो सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर हमला किया है, जो जुलाई के बाद ईरान पर पहला ज्ञात अमेरिकी सैन्य अभियान है। सेन्ट्रल कमान्ड के प्रवक्ता टिम हकिन्स के अनुसार, आईआरजीसी होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंग बिछाने और रॉकेट हमले की तैयारी कर रहा था, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई। आईआरजीसी ने अमेरिकी हमले में कुछ लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात बताई है तथा अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई और सजा की चेतावनी दी है।
१५ भाद्र, काठमांडू । अमेरिकी सेना ने ईरान के लाराक द्वीप पर स्थित दो सैन्य अड्डों पर हमला किया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस आक्रमण की पुष्टि की है। यह जुलाई के बाद ईरान पर हुई पहली ज्ञात अमेरिकी सैन्य कार्रवाई है। अमेरिकी सेन्ट्रल कमान्ड के प्रवक्ता कमांडर टिम हकिन्स के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने और रॉकेट हमले के लिए तैयारी कर रहा था, इसी कारण यह कार्रवाई की गई।
आईआरजीसी ने अमेरिकी हमले में कुछ लोगों के मारे जाने और घायल होने की जानकारी दी है। साथ ही उसने अमेरिका के खिलाफ ‘‘जवाबी कार्रवाई और सजा’’ की चेतावनी भी जारी की है। ईरानी सरकारी संचार माध्यमों ने आईआरजीसी द्वारा जोर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला करने का दावा किया है। इस संबंध में अमेरिकी सेन्ट्रल कमान्ड की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आईआरजीसी के दावे के बाद जोर्डन सेना ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली के जरिए जोर्डन के एयरस्पेस में प्रवेश करने वाले आठ मिसाइलों को रोकने की सूचना दी है। जोर्डन सशस्त्र बलों ने सोमवार सुबह एक विज्ञप्ति जारी कर आठ मिसाइलों को अपनी एयर डिफेंस प्रणाली ने बेअसर किया बताया है। इससे पहले जुलाई के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान रोकने की घोषणा की थी। तब से यह ईरान पर अमेरिका का पहला ज्ञात हमला है। इस नवीनतम घटना से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ने की चिंता व्यक्त की जा रही है, जो विश्व के प्रमुख समुद्री मार्गों में से एक है।





