युद्ध के समय नागरिक संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकेगा – चीन ने राष्ट्रीय रक्षा कानून में संशोधन किया

समाचार सारांश
संपादकीय समीक्षा के साथ।
- चीन की संसद ने राष्ट्रीय रक्षा परिचालन कानून में संशोधन पारित किया है, जिसके तहत युद्ध या संकट के दौरान आम जन और निजी संसाधनों का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
- यह नया कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा और आदेश न मानने या देरी करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई व जुर्माना होगा।
- कानून यातायात, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और तकनीकी क्षेत्रों को राष्ट्रीय रक्षा से सम्बंधित जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहने का प्रावधान करता है।
१६ भदौ, काठमाडौँ। चीन ने राष्ट्रीय रक्षा कानून में बड़ा संशोधन किया है। अब युद्ध या गंभीर संकट के दौरान सरकार अकेले सेना पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि जरूरत के अनुसार आम जनता, निजी कंपनियों और देश के अन्य संसाधनों का भी उपयोग कर सकती है।
चीन की संसद (नेशनल पीपुल्स कांग्रेस) ने 28 अगस्त को राष्ट्रीय रक्षा परिचालन कानून में संशोधन मंजूर किया। यह नया कानून १ अक्टूबर से लागू होगा।
नए कानून में केवल संसाधनों को लेने का प्रावधान नहीं है, बल्कि उन्हें सरकार के नियंत्रण में रखने का अधिकार भी दिया गया है। आदेश न मानने या जानबूझकर विलंब करने पर कड़ी कार्रवाई व जुर्माना होगा।
१६ वर्षों बाद बड़ा बदलाव
राष्ट्रीय रक्षा परिचालन कानून २०१० में बनाया गया था और यह पहला बड़ा संशोधन है। नए कानून में १४ अध्याय और ८२ धाराएँ शामिल हैं।
चीन के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी खतरे की स्थिति में देश को शांतिपूर्ण से युद्धावस्था में तेजी से परिवर्तित करना है। इसके लिए आर्थिक और सामाजिक शक्तियों को भी रक्षा में जोड़ने का प्रावधान किया गया है।
नया कानून देश की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा सुनिश्चित करता है।
पार्टी नेतृत्व में सैन्य और नागरिक संसाधनों के परिचालन का तंत्र
अमेरिकी संस्था जेम्सटाउन फाउंडेशन की विशेषज्ञ सामन्था हॉफमैन के मुताबिक, नए कानून में पार्टी नेतृत्व, संगठन, रिजर्व फोर्स, भर्ती, आवश्यक सामग्री भंडारण और रक्षा संबंधी शिक्षा में बदलाव किए गए हैं।
कानून की धाराओं ३ और १७ के तहत राष्ट्रीय रक्षा परिचालन अब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अधीन होगा, जबकि पहले यह स्टेट काउंसिल और सेन्ट्रल मिलिट्री कमिशन के अधीन था।
हॉफमैन कहती हैं कि जरूरत पड़ने पर पार्टी सैन्य, नागरिक, आर्थिक और सामाजिक संसाधनों को एकत्रित कर अपने रणनीतिक लक्ष्यों के लिए उपयोग कर सकती है।
अस्पताल, इंटरनेट, और यातायात क्षेत्र भी तैयार रहेंगे
नए कानून के तहत यातायात, हुलाक, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा, औषधि आपूर्ति, खाद्य और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहेंगे।
इन क्षेत्रों के विभाग विशेष टीम बनाकर तैयार रहेंगे और नियमित प्रशिक्षण भी लेंगे ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे तुरंत कार्य कर सकें।
साइबर सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है और नई तकनीकों के इस्तेमाल से रक्षा क्षमता बढ़ाने का उल्लेख किया गया है।
रिजर्व फोर्स तैयार करने, भर्ती प्रणाली मजबूत करने और रणनीतिक रूप से आवश्यक सामग्री भंडारण बढ़ाने का भी प्रावधान है।
चीन ने विकास को भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बनाया
२०१० के कानून में चीन की संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा हेतु खतरा होने पर रक्षा परिचालन का प्रावधान था। नए कानून में इसे ‘विकास हित’ से भी जोड़ा गया है।
इसका अर्थ है कि अब चीन खतरे को केवल सीमा सुरक्षा या देश की रक्षा तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था, संसाधन, विदेशों में चीनी संपत्ति और तकनीकी विकास को भी राष्ट्रीय सुरक्षा में शामिल करेगा।
जेम्सटाउन फाउंडेशन की हॉफमैन अनुसार, यह बदलाव २०२० में संशोधित चीन के राष्ट्रीय रक्षा कानून से भी जुड़ा है, जिसने विकास हितों में खतरा आने पर रक्षा परिचालन की अनुमति दी है।
क्या चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है?
नए कानून के पश्चात यह सवाल उठ रहा है कि क्या चीन वास्तव में युद्ध की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों की राय विभाजित है।
ब्रसेल्स स्थित सेंटर फॉर रशिया यूरोप एशिया स्टडीज की निदेशक थेरेसा फालन चिंतित हैं। वे कहती हैं कि विश्व में युद्ध का खतरा बढ़ रहा है और इसे नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है।
उन्होंने प्रश्न उठाया है कि क्या अमेरिका के सैन्य संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़ा इज़राइल-अमेरिका संघर्ष चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को युद्ध के करीब सोचने पर मजबूर कर रहा है?
वहीं एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टिट्यूट की लाइल मोरिस कहती हैं कि इसे अचानक शुरू हुई युद्ध तैयारी समझना गलत होगा, चीन लंबे समय से इस तरह की तैयारियां कर रहा है।
नए कानून से स्पष्ट है कि चीन केवल सेना नहीं, बल्कि आम जनता, कंपनियां, आवश्यक सेवाएं, तकनीक और डेटा को भी युद्ध तैयारी का हिस्सा बनाना चाहता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में ताइवान और अमेरिका चीन के संभावित मुख्य सैन्य प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं।
(एजेंसियों से)





