
तस्वीर स्रोत, EPA/Shutterstock
चीन की ओर से प्राप्त जानकारी और तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने तुरंत बड़े बाढ़ के खतरे से इनकार किया है।
नेपाल की ओर हिमस्खलन वाली जगह की हवाई निगरानी के लिए चीन ने सहूलियत दी है, जिससे विभाग को चीन की ओर से नियमित अद्यतन जानकारी मिल रही है।
बीते बुधवार हिमस्खलन वाली जगह के पास दो तालों में से एक ताल ने रविवार से निकासी शुरू कर दी है, जबकि दूसरा ताल फटने की स्थिति में नहीं है।
‘पहले ताल में केवल पानी का स्तंभ’
“रविवार को निकासी शुरू हुए ताल में फिलहाल केवल पानी का स्तंभ है और वह फटने की हालत में नहीं है। दूसरा ताल वैसे का वैसे ही बना है और कल रात तक कोई नई जानकारी नहीं आई,” बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा के वरिष्ठ मौसमविद् विनोद पराजुली ने बताया।
दूसरे ताल को चारों ओर चट्टानें घेरती हैं और निकासी के बाहर भारी मोरियन (चट्टान और हिम के ढेर) होने के कारण फटने का खतरा कम है, उन्होंने जानकारी दी।
हालांकि, उन्होंने कहा कि स्थानीय निरीक्षण के बिना सटीक स्थिति बताना मुश्किल है।
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फिलहाल उस क्षेत्र की नदियाँ और बस्तियाँ तबाह हो चुकी हैं और लोगों को वहां वापस लौटने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
“विशेष रूप से सुरंग में बचाव कार्य कर रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी भी समस्या की सूचना देना आवश्यक होगा। दोपहर में बचाव कार्य जारी रख सकते हैं लेकिन रात में अवकाश देने का अनुरोध किया गया है।”
त्रिभुवन विश्वविद्यालय जल तथा मौसम विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. टेकबहादुर क्षेत्री ने भी प्रारंभिक अध्ययन से बड़े बाढ़ के खतरे को ना के बराबर बताया है।
“सैटेलाइट से लिये गये तस्वीरों में मुख्य बाढ़ क्षेत्र में कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आता।” उन्होंने जानकारी दी।
विश्वविद्यालय आने वाले दिनों में विपद् संबंधी अध्ययनों को और व्यापक बनाने की योजना बना रहा है।
चीन की स्रोत जानकारी पर निर्भरता क्यों?
वर्तमान में उक्त क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करने के लिए चीन की ओर निर्भर होना जरूरी है, अधिकारीयों ने यह बात कही है।
प्रतिदिन दो-तीन बार सूचना हासिल हो रही है और फटे हुए ताल की स्थिति के बारे में नियमित अपडेट मिल रहे हैं।
साथ ही चीन सरकार के आँधिकारिक मीडिया में प्रकाशित तस्वीरों की भी जाँच की जाती है।
यह सूचनाएँ विदेश मंत्रालय के जरिए प्राप्त होती हैं और विशेषज्ञों के व्हाट्सएप ग्रुप में भी साझा की जाती हैं।
यह क्षेत्र नेपाल-चीन सीमा पर है, लेकिन स्थानीय निरीक्षण के लिए चीन की ओर से आसान पहुंच उपलब्ध है।
“यहां पहुंचने के लिए पहाड़ पार करना पड़ता है और हेलीकॉप्टर से भी चीन के क्षेत्र को छुए बिना पहुंचना संभव नहीं है।”
क्या जल्द ही भारी बारिश हो सकती है?
जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार शनिवार सुबह की जानकारी में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों का बहाव सतर्कता स्तर से कम है, लेकिन उच्च सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
भोटेकोशी नदी के लिए सोमवार से बुधवार तक अरेन्ज अलर्ट जारी किया गया है। सामान्य वर्षा से बाढ़ आने की स्थिति में ऐसी सतर्कता आवश्यक बताई गई है।
इस विषम परिस्थिति में सामान्य पानी भी ज्यादा तलछट बहा सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
“फिलहाल कोई बड़ा या लंबी अवधि की भारी बारिश का खतरा कम है।”
प्रोफेसर क्षेत्री के अनुसार बादल की स्थिति देखकर तत्काल बड़े स्तर की बारिश की संभावना कम लगती है।
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