महंगे पर्यटकों को आकर्षित करने वाले प्रमुख करिडोर संकट में, देशभर प्रतिक्रिया

समाचार सारांश
समीक्षा और संक्षेप किया गया।
- भोटेकोशी/त्रिशूली करिडोर में आई बाढ़ से पर्यटन क्षेत्र को लगभग 50 अरब रूपए का नुकसान हुआ है, जिससे 142 होटल, 57 रेस्टोरेंट और 141 वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं।
- बाढ़ का प्रभाव मानसरोवर और गोसाइँकुण्ड यात्राओं पर पड़ा, जहां सैकड़ों पर्यटक प्रभावित हुए हैं, और लगभग 995 विदेशी पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं, जो पर्यटन व्यवसायियों ने बताया है।
- भोटेकोशी बाढ़ के कारण नेपाल के पर्यटन पर प्रभाव पड़ा है; अगस्त में केवल 85,444 अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.6 प्रतिशत कम है।
17 भदौ, काठमांडू। नेपाल में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार से खर्चालु पर्यटकों को लाने वाला प्रमुख मार्ग ‘भोटेकोशी/त्रिशूली करिडोर’ में आई संकट ने पूरे देश के पर्यटन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
मानसरोवर और गोसाइँकुण्ड यात्रा पर निकले सैकड़ों नेपाली और विदेशी पर्यटक 10 भदौ को आई विनाशकारी बाढ़ में जान गंवा चुके हैं और कई अभी भी लापता हैं। सरकार के ताजा अनुमान के अनुसार पर्यटन क्षेत्र को लगभग 50 अरब रूपए का नुकसान हुआ है।
संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री खड्कराज पौडेल ने बताया कि इस नदी करिडोर में लगभग 142 होटल बह गए हैं।
प्रतिनिधि सभा की पर्यटन समिति में मंत्री पौडेल के अनुसार 57 रेस्टोरेंट और 141 पर्यटन वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ ने नेपाल के 27 सांस्कृतिक धरोहर स्थलों को नुकसान पहुंचाया है। गोसाइँकुण्ड, लांगटांग सहित हजारों पर्यटकों के साप्ताहिक आने वाले इन प्रसिद्ध पदयात्रा स्थलों के मार्गों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई मार्ग पूरी तरह बह गए हैं और उनका पुनर्निर्माण करना आवश्यक है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के पूर्व सीईओ दीपकराज जोशी ने भोटेकोशी बाढ़ के कारण पर्यटन उद्योग पर बहुआयामी प्रभाव पड़ा बताया है।
उनके अनुसार कैलाश मानसरोवर यात्रा, जो मानसून सीजन में लगने वाला खर्चालु पैकेज है, अधिकांश भारतीय पर्यटक नेपाल में इस यात्रा के दौरान काफी खर्च करते हैं, जिससे नेपाल के पर्यटन उद्योग को महत्वपूर्ण लाभ होता है।
हाल में भारतीय और गैर-आवासीय भारतीयों की बड़ी संख्या नेपाल से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकल रही थी। जोशी के अनुसार ये सभी पर्यटक नेपाल की रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
यह नदी करिडोर नेपाल के प्रमुख पदयात्रा क्षेत्र लांगटांग और गोसाइँकुण्ड का आधार है। लांगटांग राष्ट्रीय उद्यान के मुताबिक यहाँ प्रति वर्ष 50,000 से अधिक पर्यटक आते हैं, जो आंतरिक एवं बाहरी दोनों पर्यटकों के लिए लोकप्रिय हैं।
गोसाइँकुण्ड भी हर वर्ष धार्मिक पर्यटकों का बड़ा आकर्षण केंद्र है। ये स्थल स्थानीय और राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जोशी ने बताया।
पर्यटन व्यवसायी और श्रमिक भी हुए प्रभावित
इस बाढ़ ने हजारों मनुष्यों की जान ली है। विभिन्न क्षेत्र के कुशल जनशक्ति भी इस आपदा का शिकार हुए हैं। पर्यटन क्षेत्र ने व्यवसायी, निवेशक और मेहनती श्रमिकों को भी खोया है।
पूर्व सीईओ जोशी ने कहा कि इस उद्योग को इनमें हुए नुकसान की भरपाई के लिए अभी कई वर्षों तक मेहनत करनी होगी। “मानवीय क्षति की तुलना संभव नहीं है, इसके अतिरिक्त व्यवसायी और श्रमिक भी बाढ़ में प्रभावित हुए, जिन्होंने पर्यटन क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया,” उन्होंने कहा।
टूर गाइड, ट्रेकिंग गाइड समेत बड़ी संख्या में श्रमिक भी बाढ़ में अपनी जान गंवा चुके हैं, पर्यटन क्षेत्र से संबद्ध संस्थाओं ने इसकी पुष्टि की है।
पर्यटन छवि में बना आशंकित माहौल
भोटेकोशी बाढ़ के बाद अमेरिका समेत अन्य देशों ने अपने नागरिकों को नेपाल यात्रा से सचेत करते हुए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की, जिससे नेपाल की नकारात्मक छवि फैल गई और इसे ‘रेड जोन’ गंतव्य बना दिया गया।
हालांकि वास्तविकता यह है कि समस्या केवल इस नदी करिडोर और त्रिशूली नदी किनारे के सड़क नेटवर्क तक सीमित है।
जोशी के मुताबिक जब नेपाल को कुल मिलाकर एक डरावना पर्यटक स्थल के रूप में प्रचारित किया गया, तब पर्यटन पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा, “नेपाल एक ऐसा प्राकृतिक स्थल है जहाँ विश्वभर के पर्यटक बार-बार आना पसंद करते हैं। हमारी प्राकृतिक धरोहर पर्यटकों को आकर्षित करती है, पर जब इन धरोहरों में जोखिम और असुरक्षा का संदेश दिया जाता है तो नेपाल के दीर्घकालिक हित के लिए यह अच्छा नहीं।” उन्होंने सरकार से तत्परता से संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर इस नकारात्मक छवि को हटाने का आग्रह किया।

आगमन में कमी के आंकड़े
भोटेकोशी/त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने पर्यटकों की संख्या पर स्पष्ट असर डाला है। वर्ष 2026 के अगस्त महीने में नेपाल में 85,444 अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 3,336 कम हैं। वर्ष 2025 के अगस्त में 88,680 पर्यटक आए थे। यह आगमन में 3.6 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
अगस्त के अंतिम सप्ताह (26 तारीख) को रसुवागढ़ी बॉर्डर से आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धादिङ और आसपास के नदी क्षेत्रों में भारी मानवीय और भौतिक नुकसान पहुंचाया है।
इस बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर और गोसाइँकुण्ड यात्रा पर निकले आंतरिक और बाहरी पर्यटकों को भी प्रभावित किया है। बाढ़ के बाद अमेरिका समेत कई देशों ने यात्रा चेतावनी जारी की।
पर्यटन बोर्ड के अनुसार अगस्त में सबसे अधिक पर्यटक भारत से आए, संख्या 26,373, जो कुल पर्यटकों का 30.87 प्रतिशत था। भारत के बाद चीन से 10,304 पर्यटक आए, जो पिछले वर्ष के अगस्त की तुलना में 7,533 अधिक है (36.78 प्रतिशत वृद्धि)।
इसी तरह से श्रीलंका से 8,710 पर्यटक आए, जो पिछले साल की तुलना में 46.24 प्रतिशत अधिक है। अमेरिका से 6,293, बांग्लादेश से 4,487 और बेलायत से 3,476 पर्यटक आए।
संबंधित पक्ष क्या कहते हैं?
पर्यटन बोर्ड के कार्यवाहक सीईओ हिकमतसिंह ऐर ने बताया कि संकट के समय बोर्ड के द्वारा संयुक्त सूचनाएं जारी की जा रही हैं। पर्यटन समिति में चर्चा के दौरान उन्होंने ‘कॉलिंग नेपाल’ अभियान को और प्रभावी बनाने, जरूरत पड़ने पर हवाई टिकट और होटलों में छूट या मुफ्त सुविधाएं देने की योजना की जानकारी भी दी।
होटल एसोसिएशन नेपाल (हान) के अध्यक्ष विनायक शाह ने वर्तमान संकट को अभूतपूर्व बताते हुए विदेशों में स्थित नेपाली दूतावास और मिशनों के माध्यम से ‘नेपाल सुरक्षित है’ संदेश फैलाने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ‘नेपाल खुले हैं’ के संदेश के साथ अभियान को और मजबूत करना चाहिए और सरकार को पर्यटन क्षेत्र को पुनः गतिशील बनाने के लिए निजी क्षेत्र के साथ सहयोग प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए।
ट्रेकिंग एजेंसियंस एसोसिएशन ऑफ नेपाल (टान) के अध्यक्ष सागर पाण्डे ने लगभग 995 विदेशी पर्यटकों के साथ ही भारतीय नागरिकों के भी प्रभावित क्षेत्र में लापता होने की जानकारी दी और पर्यटन पूर्वाधार को हुए भारी नुकसान की सूचना दी।

पाण्डे ने कहा कि नेपाल में मौजूद अंतरराष्ट्रीय संचार माध्यमों के जरिये बचाव एवं पुनर्स्थापन के साथ नेपाल पर्यटकों के लिए तैयार है, यह स्पष्ट सन्देश दिया जाना चाहिए।
नेपाल एसोसिएशन ऑफ टूर एंड ट्रैवल एजेंट्स (नाट्टा) के अध्यक्ष भरतजंग पाण्डे ने कहा कि राहत और पुनर्निर्माण के निर्णय मानवीय आधार पर होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार का विश्वास जीतने के लिए जब तक नेपाल आने वाले पर्यटकों के लिए असुविधाजनक स्थिति बनी रहे, तब तक निशुल्क वीजा, होटल की छूट और आवागमन को सहज बनाने जैसी सुविधाएं सरकार द्वारा प्रदान की जानी चाहिए।
नेपाल पर्वतारोहण संघ (एनएमए) के अध्यक्ष फुर्गेल्जे शेर्पा ने कहा कि बाढ़ के बाद प्राथमिकता खोज और बचाव कार्य होना चाहिए। एनएमए की विशेष टीम प्रभावित क्षेत्रों में पहले दिन से मौजूद है और संघ के पास लगभग 12,600 प्रशिक्षित उद्धार कर्मी हैं। सरकार आवश्यक निर्देश देने पर तत्काल उनकी तैनाती कर सकती है।
शेर्पा ने हेलीकॉप्टरों को बचाव कार्य के लिए तैयार रखने और उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर भी बल दिया।
एक्सपेडिशन ऑपरेटर एसोसिएशन नेपाल के महासचिव ऋषि भंडारी ने पर्यटन श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा के लिए दीर्घकालीन व्यवस्था की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि तातोपानी और केरुङ सीमा नाकाओं से आवागमन और कूटनीतिक समन्वय को प्राथमिकता देनी होगी। मृतकों की कानूनी पहचान, मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी प्रक्रियाओं को भी सरल बनाना चाहिए।
सरकार क्या कर रही है?
पर्यटन मंत्री खड्कराज पौडेल ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी कर दुनिया भर के पर्यटकों को नेपाल आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समय पर्यटकों की यात्रा केवल भ्रमण ही नहीं, बल्कि बाढ़ पीड़ितों की सहायता का माध्यम भी है।
मंत्री ने कहा, भले ही बाढ़ ने नेपाल के कुछ क्षेत्रों में समस्या पैदा की है, लेकिन अन्य पर्यटन स्थल सुरक्षित हैं और नेपाल पर्यटकों के लिए सुरक्षित है यह संदेश प्रसारित करने का प्रयास जारी है। उसी दिन उन्होंने संबंधित हितधारकों के साथ बैठक भी आयोजित की।

बैठक में पर्यटन बोर्ड समेत क्षेत्रीय संघ संस्थाओं की सहभागिता में प्रभावित पर्यटकों की स्थिति की नियमित निगरानी और प्रबंधन के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीम बनाने का निर्णय लिया गया है।
आपदा के कारण समय पर देश लौट न पाने वाले विदेशी पर्यटकों के हवाई टिकटों को पुनः निर्धारित करने के निर्देश संबंधित निकायों को दिए गए हैं।
साथ ही, प्रभावित, मृत और संपर्क में न आने वाले विदेशी पर्यटक परिवारों को सही जानकारी उपलब्ध कराने की पहल जारी है। नेपाल आने वाले पर्यटक परिवारों के प्रवेश को आसान बनाने और उत्तरी सीमा से आवागमन करने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के स्वदेश लौटने में सहूलियत के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
मंत्रालय ने प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन, निजी क्षेत्र और पर्यटन संबंधित संघ संस्थाओं के साथ समन्वय कर आपदा का असर कम करने, पर्यटन गतिविधियों की पुनरुद्धार, व्यवसायियों और श्रमिकों के हित की सुरक्षा तथा पर्यटन क्षेत्र को सामान्य स्थिति में लौटाने के निर्णय की जानकारी रक्षा अधिकारी शोभाखर रेग्मी ने दी है।





