
म्यान्मा के राष्ट्रपति मिन आङ ह्लाइङ ने आसियान के साथ संबंधों को सुधारने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के प्रयास के तहत शुक्रवार को वियतनाम का दौरा किया। हनोई में उन्होंने राष्ट्रपति टो लाम सहित उच्च स्तरीय अधिकारियों से मुलाकात करने और व्यापारिक पैनल में भाग लेने की उम्मीद है। वियतनाम और म्यान्मा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2020 में 85 करोड़ 30 लाख डॉलर से घटकर 2025 में 59 करोड़ डॉलर हो गया है। 19 भाद्र, बैंकाक (रासस/एपी)।
2021 में सेना द्वारा सत्ता कब्जा करने के बाद क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े राजनीतिक अलगाव को समाप्त करने के प्रयास के रूप में इस यात्रा को देखा जा रहा है। राष्ट्रपति पद संभालने के तुरंत बाद मिन आङ ह्लाइङ ने भारत, चीन, लाओस, थाईलैंड, कजाखस्तान, बेलारूस और रूस का दौरा किया। उन दौरों में उन्होंने संबंधित देशों के नेताओं से मुलाकात कर व्यापारिक पैनल के माध्यम से विदेशी निवेश लाने का प्रयास किया था। आलोचक इन कूटनीतिक गतिविधियों को सैन्य शासन की पकड़ मजबूत करने के लिए की गई कार्रवाई बता रहे हैं।
वियतनाम और म्यान्मा के बीच सुरक्षा एवं संचार के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग है, लेकिन व्यापार कम रहा है। 2020 में 85 करोड़ 30 लाख डॉलर था द्विपक्षीय व्यापार, जो 2025 में 59 करोड़ डॉलर तक घट गया। 2026 के पहले छह महीनों में व्यापार 33 करोड़ 50 लाख डॉलर तक पहुंचा है। हनोई में मिन आङ ह्लाइङ वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम सहित वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और व्यापार मंच में भाग लेंगे।
वियतनाम का यह दौरा उनके लिए आसियान सदस्य देशों में तीसरा है। फरवरी 2021 में सेना द्वारा आङ सान सुकी की निर्वाचित सरकार को अपदस्थ करने के बाद म्यान्मा और आसियान संबंध बिगड़ गए थे। आसियान ने शांति योजना के कार्यान्वयन में प्रगति न होने के कारण मिन आङ ह्लाइङ को उच्चस्तरीय बैठक में भाग लेने से रोका है। पश्चिमी देशों ने भी उनके और उनके सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। मिन आङ ह्लाइङ की ताजा कूटनीतिक सक्रियता को म्यान्मा को क्षेत्रीय ढांचे में पुनः स्थापित करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है। वहीं, 2021 के सैन्य दमन के बाद म्यान्मा में राष्ट्रव्यापी सशस्त्र प्रतिरोध और गृहयुद्ध जारी है।





