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उद्योगमंत्री ने गैस आपूर्ति में कमी छुपाने पर उद्योगपतियों को ‘पता कसने’ की चेतावनी दी

उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री गौरीकुमारी यादव ने उद्योग समिति में ५८ गैस उद्योगों के लाइसेंस रद्द करने तथा उद्योगपतियों को ‘पता नकसे’ तक गैस की कमी सहन नहीं करने की चेतावनी दी। काठमाडौं उपत्यका में खाना पकाने के गैस की तीव्र कमी के कारण उपभोक्ता दिन-रात लाइन में खड़े हैं और गैस सिलेंडर की कीमत ३ हजार रुपये तक पहुँच चुकी है। मंत्री के बयान पर उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं और गैस उद्योगियों ने आपत्ति जताई है, उन्होंने इसे वापस लेने और सरकार से निजी क्षेत्र के साथ मिलकर आपूर्ति प्रबंधन करने का आग्रह किया है। २४ भाद्र, काठमाडौं।

बुधवार सुबह उद्योग समिति की बैठक में मंत्री यादव ने कहा, ‘वर्तमान गैस की कमी उद्योगपतियों की वजह से है, उद्योगी जब तक ‘‘पता नकसे’’ नहीं किए जाएंगे, तब तक गैस की कमी सहनीय नहीं होगी।’ उन्होंने अभी चल रहे ५८ गैस उद्योगों के लाइसेंस रद्द करने की आवश्यकता भी बताई। ‘देश में इतने सारे गैस उद्योगों की आवश्यकता नहीं है, केवल दो ही पर्याप्त होंगे,’ उन्होंने जोड़ा। इसी बीच काठमाडौं उपत्यका में खाना पकाने के गैस की भारी कमी बनी हुई है। उपभोक्ता एक सिलेंडर गैस पाने के लिए दिन-रात लाइन में खड़े हैं जबकि गैस की कीमत २,६०० से ३,००० रुपये तक पहुंच गई है।

नेपाल आयल निगम और उद्योग मंत्रालय बारी-बारी से गैस आपूर्ति के आंकड़े जारी करते हैं, लेकिन सरकार द्वारा जारी आंकड़े बाजार की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। उपभोक्ता घंटों लाइन में लगने के बाद भी गैस नहीं पा रहे हैं। लंबे समय से गैस की कमी का सामना कर रहे क्षेत्र में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने स्थिति और चुनौतीपूर्ण बना दी है। १४ भाद्र से कृष्णभीर में सड़क धंसने के कारण पर्याप्त गैस नहीं पहुंच पा रही है। वैकल्पिक मार्ग से पहुंची गैस भी सहजता से उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच पाई है, औऱ सरकार इसके प्रबंधन में सफल नहीं रही है।

मंत्री यादव ने समस्या के समाधान की बजाय विवादास्पद बयान दिए हैं। उद्योग समिति की बैठक में मंत्री यादव के इस बयान से उद्योगपतियों और सरकार के बीच तनाव बढ़ा है। मंत्री यादव ने कहा कि जब वे उद्योगपतियों के विरुद्ध कार्रवाई करना चाहती हैं, तब अपने ही मंत्रालय के कर्मचारी सहयोग नहीं करते, और इस पर उन्होंने असहायता भी जताई। सरकार के पास गैस आयात, भंडारण और वितरण के कोई पूर्वाधार नहीं है। नेपाल में चल रहे ५८ गैस उद्योग पूरी तरह से निजी क्षेत्र के हैं।

गैस की कमी और कालाबाजारी के मुद्दे पर सोमवार को उद्योग मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री यादव और गैस उद्योगपतियों के बीच तीखी बहस हुई। प्रधानमंत्री के सलाहकार, मंत्रालय के सचिव, नेपाल आयल निगम के अधिकारी तथा गैस उद्योगी उपस्थित इस बैठक में मंत्री ने उद्योगपतियों और विक्रेताओं को ‘जेल भेजने’ की धमकी दी थी। बैठक में शामिल एक गैस उद्योगी ने बताया कि मंत्री ने उद्योगपतियों को एकतरफा दोषी ठहराते हुए जेल भेजने की बात कही।

मंत्री के ‘उद्योगी को जेल भेजो तो जनता खुश होती है’ जैसे कथन ने उद्योगपतियों में निराशा और हतोत्साह पैदा किया है। गैस उद्योग संघ नेपाल के अध्यक्ष दिवान चन्द ने कहा कि मंत्री के इस अभिव्यक्ति से वे निराश और हतोत्साहित हैं। ‘मंत्री द्वारा दिया गया पाता कसने जैसा अनादरपूर्ण शब्द तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। इस विषय में हमने प्रधानमंत्री तथा मंत्री परिषद कार्यालय से मांग भी कर दी है,’ अध्यक्ष चन्द ने कहा।