
भोटेकोशी नदी की बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट और धादिङ में स्थित ३२ विद्यालयों के ९ हजार ४२८ बालक-बालिकाएं प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुई हैं, यह जानकारी बालबालिका शांति क्षेत्र राष्ट्रीय अभियान (सिजप) ने दी है। २८ भदौ, काठमाडौँ। सिजप के अध्यक्ष तिलोत्तम पौडेल ने बताया कि ये बालबालिकाएं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से हैं। शुक्रवार को सिजप द्वारा आयोजित “बाढ़ का बालबालिकाओं पर प्रभाव और संवाद माध्यमों का दायित्व” विषयक चर्चा में उन्होंने यह तथ्य साझा किया।
पौडेल के अनुसार प्रभावित बालबालिकाओं में से १,३७३ विस्थापित होकर होल्डिंग सेंटर में रह रहे हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक ४८८ विद्यार्थी अभी भी सम्पर्क विहीन हैं जबकि ५ विद्यार्थियों की मृत्यु हो चुकी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में किए गए प्रत्यक्ष निरीक्षण से यह पता चला कि बालबालिकाएं, वरिष्ठ नागरिक, प्रसूता महिलाएं और विकलांग बालबालिकाएं अधिक जोखिम में हैं, उन्होंने बताया।
बालबालिकाओं की सुरक्षा, संरक्षण और शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए राज्य तथा सम्बंधित निकायों को तुरंत कार्रवाई शुरू करनी चाहिए, पौडेल ने जोर दिया। अभिभावक खो चुके बालक-बालिकाओं के संरक्षण में विशेष संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है, उनका कथन है। नेपाल पत्रकार महासंघ के पूर्वअध्यक्ष धर्मेन्द्र झा ने कहा कि विपत्ति के समय मीडिया को आवाजविहीनों की आवाज को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बालबालिकाओं से संबंधित समाचार तैयार करते समय उनके अधिकार, गोपनीयता और मानसिक स्थिति का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है, उन्होंने बताया। प्लान इंटरनेशनल के नीति प्रबंधक इर्शाद अहमद अंसारी ने भी विपत्ति काल में बालबालिका से जुड़ी मुद्दों को संचार माध्यमों द्वारा विशेष प्राथमिकता मिलने चाहिए, इस पर बल दिया।
चर्चा में शामिल संवादकर्ताओं ने बालबालिका संबंधी मामलों में यदि किसी संचार माध्यम, सरकारी निकाय या संगठन द्वारा गलत या तथ्यहीन सूचना प्रसारित की जाती है तो सिजप को सार्वजनिक रूप से आवाज उठानी चाहिए, यह मांग रखी। उन्होंने बालबालिका मामलों में संबंधित निकायों के साथ प्रभावशाली पैरवी और advocacy पर भी ज़ोर दिया।





