
रूस–यूक्रेन युद्ध में एआई-संचालित ड्रोन, स्वतः लक्ष्य पहचान सॉफ्टवेयर और स्वायत्त सैन्य कमांड सिस्टम की प्रतिस्पर्धा तीव्र हो रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण के अनुसार 6 जुलाई को जापोरिज्जिया में रूसी ड्रोन हमले में 18 वर्षीय तेतियाना बुबिनेट्स समेत तीन आम नागरिकों की मौत हुई, जो पहला दर्ज एआई-स्वायत्त हमला था। विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई लक्ष्य पहचान और हमले की गति बढ़ाता है, लेकिन नागरिक और सैनिकों के बीच भेद करने में कठिनाइयाँ नैतिक और कानूनी सवाल खड़े करती हैं। 30 सितंबर, काठमांडू। रूस और यूक्रेन के बीच विवाद पुराने सैन्य तकनीकों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित पूर्ण स्वायत्त युद्ध युग में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्ष एआई-संचालित ड्रोन, स्वतः लक्ष्य पहचान सॉफ्टवेयर और अत्याधुनिक सैन्य कमांड सिस्टम विकसित कर तीव्र प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
6 जुलाई को यूक्रेन के दक्षिणी शहर जापोरिज्जिया स्थित एक पेट्रोल पंप पर रूसी ड्रोन विस्फोट में 18 वर्षीय लेखाशास्त्र की छात्रा तेतियाना बुबिनेट्स की मृत्यु हुई। विस्फोट और ड्रोन के टुकड़ों के कारण हमले में बुबिनेट्स के साथ अन्य दो आम नागरिक भी मारे गए। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार यह पहला दर्ज रूसी एआई-संचालित पूर्ण स्वायत्त ड्रोन हमला था। यूक्रेनी अधिकारियों ने ड्रोन के अवशेषों की जांच में अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी एनविडिया का एआई-संचालित मिनी कंप्यूटर पाया।
युद्ध क्षेत्र में एआई का उपयोग केवल ड्रोन तक सीमित नहीं है। किंग्स कॉलेज लंदन की रक्षा अध्ययन शोधकर्ता मरीना मिरोन के अनुसार इस प्रणाली को ‘रिकग्निशन-स्ट्राइक आर्किटेक्चर’ कहा जाता है। मिरोन बताती हैं, “यह केवल ड्रोन में एआई और उस पर आधारित हमले का मामला नहीं; ड्रोन द्वारा संग्रहीत जानकारी सॉफ़्टवेयर कॉम्प्लेक्स को भेजी जाती है, जो युद्ध क्षेत्र के नक्शे में जीपीएस कोड मानचित्रित करती है और निकटतम तोपखाने इकाई को सूचित करती है।” ऐसे सिस्टम केंद्रीय कमांड की तरह काम करते हैं और एआई विमान या अन्य सैन्य उपकरणों से प्राप्त बड़े डेटा को तत्काल संसाधित करता है।
यूक्रेन ने अपनी एकीकृत कमांड प्रणाली का नाम ‘डेल्टा’ रखा है, वहीं रूस ‘स्वॉर्ड टैक्टिकल सिचुएशनल अवेयरनेस कॉम्प्लेक्स’ नामक कमांड सिस्टम का परीक्षण 2025 के अंत तक सफलतापूर्वक कर युद्ध के लिए तैनात करेगा। दोनों पक्ष कहते हैं कि एआई द्वारा डेटा संसाधन के बाद डिविजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) कमांडर को विकल्प प्रदान करता है और अंतिम निर्णय मनुष्य का होता है। लेकिन मिरोन इस पर संदेह प्रकट करती हैं, “यह सत्य है या नहीं पता नहीं चलता। तनावपूर्ण स्थिति में कमांडर अक्सर एआई के सुझाव के अनुसार ही निर्णय लेते हैं।”
यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के सलाहकार सर्ही बेस्क्रेतनोव (जिन्हें ‘फ्लैश’ कहा जाता है) ने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा, “सब कुछ इस पर निर्भर करेगा। नेविगेशन, लक्ष्य खोज और हमले पूर्ण स्वायत्त होंगे।” वर्तमान में एआई ड्रोन का इस्तेमाल लंबी दूरी के हमले के अंतिम चरण (लास्ट-माइल ऑपरेशन्स) तक सीमित है। यूक्रेन की ‘यास्नी ओछी’ ड्रोन स्ट्राइक यूनिट के कमांडर हेओर्घी भोल्कोव कहते हैं कि फर्स्ट-पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (रेडियो सिग्नल जाम करने वाली तकनीक) के कारण सिग्नल खो सकते हैं।
ऐसे सिग्नल हटने पर जुड़े एआई मोड्यूल स्वतः नियंत्रण लेकर लक्ष्य पर सही हमला करने में सक्षम होते हैं। यूक्रेनी तकनीकी कंपनी ‘द फोर्थ एल’ के संस्थापक यारोस्लाव अझन्युक के अनुसार यह केवल स्वायत्त ड्रोन प्रदर्शन की प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि स्वायत्तता को विश्वसनीय, सस्ता और बड़े पैमाने पर तैनात करने की होड़ है। अझन्युक का कहना है, “इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, बढ़ती संलग्नता दूरी और ड्रोन की संख्या मानवीय नियंत्रण वाली प्रणालियों को कम प्रभावी बना रही है। स्वायत्तता इन सीमाओं को ठीक कर सकती है।” उनकी भविष्यवाणी है कि आने वाले 6 से 12 महीनों में यह तकनीक युद्ध के परिणाम बदल देगी।
हालांकि, इस तेज़ एआई उपयोग ने गंभीर नैतिक और कानूनी सवाल भी उठाए हैं। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) की वरिष्ठ फेलो कटरिना बॉन्डर कहती हैं, “एआई में विवेक नहीं होता। सिस्टम अपने कार्य का मर्म नहीं समझता; यह केवल एल्गोरिदम और मानवीय नियमों का पालन करता है। एआई को लक्ष्य पहचान और उन पर हमला करने की ट्रेनिंग दी जाती है।”
बॉन्डर बताती हैं, “बस और टैंक के बीच अंतर करना आसान है, लेकिन रूसी और यूक्रेनी सैनिक और आम नागरिकों में भेद करना कठिन है। खराब मौसम और कमजोर कैमरा स्थितियों की वजह से नागरिक और सैनिकों के बीच अंतर करने में एआई त्रुटि कर सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “इसलिए निर्णय कौन करेगा और गलतियों के लिए जिम्मेदारी किसकी होगी, इस पर बड़ा विवाद चल रहा है।” इस तेज़ एआई के इस्तेमाल से युद्ध और अधिक घातक और असंयमित होने का खतरा बढ़ गया है।





