
भारत की ककरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अक्टूबर 2 से ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। गांधी जयंती के आस-पास यह आंदोलन मुंबई के शिवाजी पार्क से आरंभ किया जाएगा। हालांकि मुंबई पुलिस ने दीपके को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से दी है। पुलिस के इस फैसले को उन्होंने आम नागरिक की आवाज़ दबाने की साज़िश बताया है। इस योजना को विफल करने के लिए उन्होंने पूर्व निर्धारित दिन पर ही प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान किया है। मुंबई पुलिस के प्रति असंतोष जताते हुए उन्होंने लिखा, ‘मुंबई पुलिस ने अक्टूबर 2 को होने वाले हमारे प्रदर्शन की अनुमति अस्वीकार कर दी है, नागरिकों की आवाज़ दबाने के ये तरीके बिल्कुल अस्वीकार्य हैं।’ 28 सितंबर को उन्होंने ‘जेल भरो आंदोलन’ की घोषणा करते हुए एक संक्षिप्त और स्पष्ट पोस्ट किया था।
इस आंदोलन की पृष्ठभूमि को समझने के लिए इंडियन एक्सप्रेस की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट देखनी होगी। इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा के खोज रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 से शुरू हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) अभियान के तहत देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसके बाद चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए। तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के दो सदस्यों, सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया के खिलाफ लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। भारत के चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची में हेरफेर करने और निष्पक्षता न दिखाने का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने इस विरोध की बुनियाद रखी है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नई दिल्ली में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में आयोग की कार्यशैली को लोकतंत्र विरोधी और सत्ताधारी दल के पक्ष में बताकर कड़ी आलोचना की। पार्टी के अन्य सहसंयोजकों के साथ मंच पर बैठकर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग करते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। दीपके ने कहा, ‘कुल मिलाकर 13 करोड़ से अधिक मत (नामावली से) हटाए गए हैं। यह कोई मामूली संख्या नहीं है। इसे क्यों किया जा रहा है? इतने सारे वोट हटाने की क्या जरूरत थी?’ उन्होंने सम्मेलन में सवाल उठाया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा भी बताया और कहा कि वोट देने का अधिकार छीनने वाले अधिकारी उनके योग्य नहीं हैं।
उन्होंने चुनाव आयुक्त के कदम को विपक्ष खत्म करने का प्रयास भी बताया। सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 26 सितंबर तक इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था; पर इस्तीफा नहीं मिलने पर आंदोलन की घोषणा की गई। इसके बाद दीपके ने मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगते हुए पुलिस को आवेदन दिया। लेकिन मुंबई पुलिस ने यह आवेदन खारिज कर प्रदर्शन की अनुमति देने से मना कर दिया। पुलिस ने सीजेपी के आवेदन खारिज करने के पीछे ध्वनि प्रदूषण, ट्रैफिक प्रबंधन और बॉम्बे उच्च न्यायालय के पुराने आदेश को प्रमुख कारण बताया। पुलिस ने शिवाजी पार्क को ‘साइलेंस ज़ोन’ घोषित किया है और बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार वहां सार्वजनिक शांति और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बड़े राजनीतिक और सार्वजनिक प्रदर्शन पर कड़ी पाबंदी लगाई है।
अक्टूबर 2 को सार्वजनिक छुट्टी के दिन शिवाजी पार्क के आसपास भारी ट्रैफिक जाम और माइकिंग तथा प्रदर्शन शुरू होने से स्थानीय निवासियों को ध्वनि प्रदूषण होगा, यह पुलिस का तर्क है। त्योहारों और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के समय कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल व्यस्त रहते हैं, इसलिए राजनीतिक प्रदर्शन के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराना संभव नहीं है, पुलिस ने कहा। शिवाजी पार्क में सभा या प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के बाद सीजेपी ने अपनी रणनीति बदल दी है। दीपके ने पुलिस की रोकथाम के बावजूद समर्थकों से शिवाजी पार्क और नजदीकी पुलिस थानों में जाकर स्वयं को गिरफ्तार कराने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप हमें पार्क में शांतिपूर्ण तरीके से बैठने नहीं देंगे तो अपनी जेलें खोलो। अक्टूबर 2 को हम शांतिपूर्ण तरीके से शिवाजी पार्क की ओर बढ़ेंगे और खुद को पुलिस के हवाले कर देंगे। हम सभी को गिरफ्तार कर लो।’ गांधीवादी शैली में सत्याग्रह करते हुए गिरफ्तारी देकर जेल भरने की रणनीति के जरिये लोकतंत्र और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को बचाना सीजेपी का मुख्य उद्देश्य नजर आता है।





