
नेपाल में आई आकस्मिक बाढ़ के एक महीने बाद भारत के हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड ने एक हिमताल में पूर्वसूचना प्रणाली स्थापित करने की तैयारी की है। उत्तराखण्ड के ऊंचे हिमालयी इलाकों में हिमताल के फूटने से होने वाले नुकसान को कम करने, ताल की निगरानी करने और पूर्वसूचना प्रणाली को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की गई है। चमोली के वसुधारा हिमताल में पूर्वसूचना प्रणाली लगाने के लिए वैज्ञानिकों की टीम गत मंगलवार देहरादून से रवाना हुई है। वसुधारा ताल को वसुन्धरा ताल भी कहा जाता है। हिमताल में लगाई जाने वाली यह राज्य की पहली पूर्वसूचना प्रणाली होगी। अत्याधुनिक सेंसर, उपग्रह संचार और वास्तविक समय के आंकड़ों के माध्यम से ताल में हो रहे परिवर्तनों की निगरानी की जा सकेगी। इससे संभावित जोखिमों का समय से अनुमान लगाकर मदद मिलेगी।
ताल के क्षेत्रफल में तीव्र वृद्धि: नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह दशकों में वसुधारा ताल का जलक्षेत्र लगभग पाँच गुना बढ़ा है। साल 1962 में यह ताल 10.53 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला था। 2024 में इसका जलक्षेत्र बढ़कर 51.07 हेक्टेयर पहुंच गया है। यह हिमनदी की सतह पर बना ताल है। कई छोटे ताल एक-दूसरे से मिलकर यह ताल विकसित हुआ है। राज्य सरकार के अनुसार ताल के बढ़ते आकार और नीचे के इलाकों में बसे गांवों व महत्वपूर्ण संरचनाओं पर पड़ने वाले संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए लगातार निगरानी और समय पर चेतावनी देने के लिए पूर्वसूचना प्रणाली लगाई जा रही है। 29 सितंबर से शुरू हुई यह मुहिम 15 अक्टूबर तक चलाने का प्रस्ताव रखा गया है।
अभियान टीम में रुड़की स्थित केन्द्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) और देहरादून स्थित वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। ऊंचे हिमालयी और दुर्गम क्षेत्रों में अभियान टीम की सुरक्षा, आवागमन और स्थलीय सहयोग के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और ITBP के सुरक्षा कर्मी भी टीम के साथ रहेंगे। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वैज्ञानिक संस्थान, विशेषज्ञ और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी निकायों के बीच समन्वय से ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में आधुनिक निगरानी और पूर्वसूचना प्रणाली को मजबूत करने के सरकार के प्रयास होने की जानकारी दी है।




