
२२ असोज, काठमाडौं। इटली में चुनावी प्रणाली में बदलाव करने वाले विवादित विधेयक पर आज संसद के निचले सदन में अंतिम मतदान हो रहा है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा प्रस्तुत नए चुनावी कानून के अनुसार, ४२ प्रतिशत वोट का सीमा पूरी करने वाले सबसे अधिक वोट पाने वाले पार्टी या गठबंधन को संसद में १०५ सीटों का बोनस दिया जाएगा। इस बोनस में चेंबर ऑफ डिप्टियुस के लिए ७० और सीनेट के लिए ३५ सीटें शामिल हैं। यह सीटें संसद की कुल संख्या के अंदर रहेंगी और अतिरिक्त नहीं होंगी। इटली की संसद में कुल ६०० सीटों में से ७० और ३५ सीटें विजयी गठबंधन को बोनस के रूप में दी जाएंगी।
विधेयक के अनुसार, बोनस पाने के लिए पार्टी या गठबंधन को दोनों सदनों – चेंबर ऑफ डिपुटीज और सीनेट – में कम से कम ४२ प्रतिशत वोट हासिल करना होगा। यदि ४२ प्रतिशत से कम वोट मिले या दोनों सदनों में अधिकतम वोट पाने वाली पार्टी या गठबंधन अलग-अलग हुए, तो बोनस सीटें नहीं दी जाएंगी और सीटें समानुपाती प्रणाली के आधार पर बांटी जाएंगी। आज का मतदान विधेयक पर अंतिम गोपनीय मतदान होगा। यदि विधेयक पारित होता है तो वर्तमान ‘रोसाटेल्लुम’ चुनावी प्रणाली की जगह नई प्रणाली लागू होगी। सरकार ने इसे ‘स्ट्याबिलिकम’ नाम दिया है जबकि विपक्ष प्रधानमंत्री मेलोनी के नाम से जोड़कर इसे ‘मेलोनेल्लुम’ कहते हुए आलोचना कर रहा है।
४२ प्रतिशत वोट पूरी करने पर बोनस सीटें कैसे मिलेंगी?
इटली की संसद में चेंबर ऑफ डिपुटीज में ४०० और सीनेट में २०० सीटें हैं, कुल ६००। प्रस्तावित प्रणाली के अनुसार, चेंबर ऑफ डिपुटीज की ४०० सीटों में से ७० और सीनेट की २०० सीटों में से ३५ सीटें बोनस के रूप में आवंटित होंगी। बाकी की सीटें समानुपाती व्यवस्था से बांटी जाएंगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई गठबंधन दोनों सदनों में ४२ प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त करता है तो उसे ७० बोनस सीटें मिलेंगी। समानुपाती सीटों और बोनस सीटों को मिलाकर विजयी गठबंधन को संसद में स्पष्ट बहुमत देने का लक्ष्य विधेयक का है।
हालांकि विजयी गठबंधन के लिए सीटों की अधिकतम सीमा भी तय की गई है। चेंबर में अधिकतम २२0 और सीनेट में ११3 सीटें दी जा सकेंगी। इसका मतलब, ४२ प्रतिशत वोट पाने वाला गठबंधन स्वचालित रूप से संसद की ४२ प्रतिशत सीटें नहीं पायेगा, बल्कि विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त सीटें भी प्राप्त कर सकता है। इसी प्रावधान को लेकर विपक्ष प्रतिनिधित्व में असंतुलन का हवाला देते हुए विरोध कर रहा है।
प्रधानमंत्री उम्मीदवार पहले से घोषित करने का नया प्रावधान
नई प्रणाली के तहत चुनाव में भाग लेने वाले दलों को उम्मीदवारों का पंजीकरण करते समय प्रधानमंत्री पद के लिए राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तावित व्यक्ति का नाम और अपने चुनावी अभियान की घोषणा भी करनी होगी। इसका उद्देश्य मतदाताओं को चुनाव से पहले प्रधानमंत्री उम्मीदवार से परिचित कराना है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि मतदाता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव करेंगे या विजेता उम्मीदवार को प्रधानमंत्री बनने का अधिकार स्वतः मिलेगा। इटली के संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री नियुक्ति का अधिकार राष्ट्रपति के पास रहता है और यह संवैधानिक अधिकार नए कानून में भी सुरक्षित है।
सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और मतदाताओं को स्पष्टता मिलेगी। लेकिन विपक्ष इस बात को लेकर चिंता जता रहा है कि इससे राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है।





