
यूट्यूब पर मोदी सरकार के गलत कदमों का पर्दाफाश कर रहे यूट्यूबर ध्रुव राठी इस बार सार्वजनिक सड़क पर उतर आए हैं। ककरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘जेल भरो आंदोलन’ में राठी ने स्वयं सहभागिता व्यक्त की है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगते हुए शनिवार से शुरू हुए आंदोलन में उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से बिंदुवार तौर पर भाग लेने के कारण साझा किए हैं। उस वीडियो में राठी ने ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाते हुए कड़े शब्दों में कहा है कि राजीनामा न होने की स्थिति स्वीकार्य नहीं है। इसी प्रकार, उन्होंने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित नागरिक समाज के विरोध प्रदर्शन में भी सक्रिय भूमिका निभाई और आरोप लगाया कि भारत का निर्वाचन आयोग निष्पक्षता खो चुका है तथा सामान्य मताधिकार के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने राठी को शनिवार को हिरासत में लिया है। हालांकि, गिरफ्तारी से पहले ही राठी ने यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से जो सामग्री साझा की, उसका देशभर व्यापक प्रभाव पड़ा है।
भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत फर्जी और मृत मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई, पर वास्तविक और जीवित मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप राठी ने लगाया है। उन्होंने कर्नाटक में ऐसे कई आम लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनी बताई हैं। राठी ने ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे के लिए तीन मुख्य कारण और प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। पहला, पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 70 हजार वास्तविक मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए गए थे। चुनाव संपन्न होने के बाद उन सभी 70 हजार से अधिक मतदाताओं को पुनः सूची में शामिल किया गया। राठी ने सवाल उठाया, ‘यदि वे मतदाता मृत या अवैध घुसपैठिया थे, तो चुनाव खत्म होते ही फिर से सूची में कैसे वापस आ गए? यह सीधे तौर पर चुनाव में गड़बड़ी है।’
दूसरा, बिहार में चुनाव आयोग ने लगभग 65 लाख व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से पहले आयोग ने नामावली सार्वजनिक करने से मना कर दिया था। वहीं, उत्तर प्रदेश में हाल ही में 14 लाख से अधिक नए मतदाताओं को रहस्यमय तरीके से सूची में जोड़ा गया है। इसके अलावा गोवा में योग्य मतदाता के नाम जोड़ने के प्रयास में वहां के सॉफ़्टवेयर में उस विकल्प की कमी होने का आरोप लगाया गया है। तीसरा, दशकों तक भारत के निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्था माना जाता रहा है, पर ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में आयोग की प्रतिष्ठा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। राठी ने कहा कि उनके नेतृत्व में मतदाता सूची में निरंतर व्यापक धोखाधड़ी हो रही है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे हालात में उनका पद पर बने रहना खतरनाक है।
ध्रुव राठी और आंदोलनकारी ज्ञानेश कुमार तथा सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रख चुके हैं। पहली मांग – निर्वाचन आयोग की प्रतिष्ठा और मर्यादा वापस लाने हेतु तत्काल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। दूसरी मांग – नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री और विपक्षी दलों के नेता दोनों की आम सहमति और सर्वसम्मति से निष्पक्ष रूप से की जाए। तीसरी मांग – मतदाता सूची में व्यापक फेरबदल करने वाले वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत वापस लेकर पूर्ववत मतदाता सूची कायम की जाए और मृतक और दोहरे मतदाताओं को हटाने का कार्य पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाए।





