नेटो देशों का बयान: यह हमारा युद्ध नहीं है
३ चैत, काठमाडौं। ईरान में खामेनी सहित ४० से अधिक अधिकारी मारे जाने के बाद अमेरिका को यह युद्ध बड़ी सफलता जैसा लगा था। लेकिन १७ दिन बाद स्थिति बदल गई है और युद्ध का कोई स्पष्ट अंत दिखाई नहीं दे रहा है।
ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आपूर्ति रोक दी है, जिसने विश्व अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाला है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वर्तमान में अपने सहयोगी नेटो देशों से होर्मुज स्ट्रेट खोलने की अपील कर रहे हैं।
फिर भी, ये देश बहुपक्षीय प्रयासों में होर्मुज स्ट्रेट पर सैन्य कार्रवाई में भाग नहीं लेने का निर्णय कर चुके हैं। ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि यदि वे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खोलने में मदद नहीं करेंगे तो भविष्य में नेटो का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।
जर्मनी की प्रतिक्रिया: यह युद्ध यूरोप का नहीं है
जर्मनी ने किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल न होने का स्पष्ट संकेत दिया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा है कि इस विषय पर कोई फैसला नहीं हुआ है और जर्मनी किसी सैन्य योगदान में शामिल नहीं होगा। उनका कहना है कि ईरान की वर्तमान सरकार का अंत आवश्यक है, लेकिन बमबारी करके उसे झुकाना सही उपाय नहीं है।
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी अमेरिका से प्रश्न किया, ‘‘यह यूरोप का युद्ध नहीं है और जब अमेरिकी नौसेना इतनी शक्तिशाली है तो यूरोपीय जहाज क्या कर सकते हैं?’’
ब्रिटेन की राय
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर ने स्पष्ट किया है कि उनका देश इस बड़े युद्ध में शामिल होना नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि तेल बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलना आवश्यक है, लेकिन यह कोई आसान काम नहीं है। निर्णय के लिए कई देशों की सहमति जरूरी होगी।
यूरोपीय देशों ने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के लगभग २० प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति का मार्ग है, इसलिए इसकी सुरक्षा और खुलापन अति आवश्यक है, लेकिन अभी ईरान के कारण इसमें बाधा आ रही है।
इटली का दृष्टिकोण: युद्ध नहीं, वार्ता जरूरी
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि संकट का समाधान वार्ता से होना चाहिए और इटली की कोई नौसैनिक मिशन बढ़ाने की योजना नहीं है। उन्होंने यूरोपीय संघ के वर्तमान मिशन को समुद्री डकैती रोकने और रक्षा के लिए बताया और कहा कि इसे युद्ध में नहीं बदला जा सकता। अन्य देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी अपने युद्धपोत नहीं भेजने की घोषणा की है।
यूरोपीय संघ ने ट्रम्प की अपील को ठुकराया
ट्रम्प अपने सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं कि जो देश होर्मुज स्ट्रेट से लाभ उठाते हैं, उन्हें सुरक्षा में भी हिस्सेदारी करनी चाहिए। उन्होंने ब्रिटेन के प्रति असंतोष जताया है लेकिन उनसे सहभागिता की उम्मीद जताई है।
लेकिन यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने अपने रेड सी मिशन का विस्तार होर्मुज तक करने से मना कर दिया है। विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा कि फिलहाल मिशन का दायरा बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
यूरोपीय देशों ने अमेरिकी और इजरायली युद्ध के उद्देश्य को स्पष्ट चाहा है। एस्टोनिया के विदेश मंत्री ने ट्रम्प की रणनीति और आगामी योजना समझने की आवश्यकता जताई है।
इजरायल की तैयारी: तीन हफ्तों के लिए युद्ध योजना
इजरायल ने ईरान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं और पूर्व सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनी से जुड़े एक विमान को नष्ट करने का दावा किया है। इजरायली सेना ने आगामी तीन हफ्तों के लिए युद्ध योजना तैयार की है। सेना प्रवक्ता नादव शोसानी ने सोमवार को कहा, ‘‘उसके बाद के समय के लिए अलग योजना है।’’
उनके अनुसार अभियान सीमित उद्देश्य वाला है जिसका लक्ष्य इजरायल के लिए खतरा बनने वाली ईरान की क्षमताओं को कमजोर करना है। इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ढांचे, आणविक केंद्र और सुरक्षा तंत्र शामिल हैं।
इजरायली सेना ने कहा है कि ईरान में अभी भी निशाना बनाने के लिए हजारों स्थान मौजूद हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने पिछले हफ्ते कहा था कि ईरान में निशाना बनाने के लिए लगभग कुछ बचा नहीं है।
ईरान की चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि युद्ध हुआ तो ऐसा होना चाहिए कि दुश्मन फिर हमला करने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘यदि अमेरिकी सेना जमीन पर उतरी तो उन्हें वियतनाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।’’
इस युद्ध में अमेरिका के लगभग २०० सैनिक घायल हुए हैं और उनमें से कई ड्यूटी पर लौट चुके हैं। अब तक १३ सैनिक मारे जा चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार ईरान में 1,800 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हैं।
लेबनान में इजरायली स्थलगत हमले
इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी भाग में स्थलगत कार्रवाई तेज कर दी है, जहां हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस संघर्ष में लेबनान में १०० से अधिक बच्चों सहित ८५० से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
जर्मनी ने लेबनान में स्थलगत हमले को गलत करार दिया है और कहा है कि इससे मानवीय स्थिति और खराब होगी, इसलिए इजरायल को चेतावनी दी है।
(एजेंसियों के सहयोग से)








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