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लेखक: space4knews

बांग्लादेश में शेख हसीना के सरकारी आवास में ‘जुलाई जनविद्रोह स्मारक संग्रहालय’ का उद्घाटन

बांग्लादेश की ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सरकारी आवास गण भवन को ‘जुलाई जनविद्रोह स्मारक संग्रहालय’ के रूप में उद्घाटित किया गया है। यह संग्रहालय 2024 के जुलाई–अगस्त महीनों में हुए छात्र आंदोलन में मारे गए नागरिकों की याद में अंतरिम सरकार द्वारा स्थापित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, उस आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग करने से 1400 से अधिक नागरिकों की मृत्यु हुई थी।

बुधवार को गण भवन में ‘जुलाई जनविद्रोह स्मारक संग्रहालय’ का औपचारिक उद्घाटन किया गया। जुलाई–अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान मृत हुए नागरिकों का सम्मान करने के लिए यह संग्रहालय बनाया गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने राजधानी ढाका के शेर-ए-बांग्ला नगर स्थित गण भवन में संग्रहालय का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम 5 अगस्त को आयोजित किया गया था।

साल 2024 में इसी दिन शेख हसीना देश छोड़कर भारत चली गई थीं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 तक चले छात्र आंदोलन (जुलाई जनविद्रोह) के दौरान 1400 नागरिकों की मौत हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि हसीना सरकार ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध सुरक्षा बलों द्वारा अत्यंत बल प्रयोग की अनुमति दी थी। सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के बाद शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ना पड़ा। इसके तीन दिन बाद मोहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाल रहे थे। संग्रहालय की स्थापना और गण भवन की सुरक्षा की प्रक्रिया यूनुस नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने शुरू की थी।

नेपाल के 136 खिलाड़ी 20वें एशियन गेम्स में प्रतिस्पर्धा करेंगे

जापान में आयोजित होने जा रहे 20वें एशियन गेम्स में नेपाल के 136 खिलाड़ी 22 विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा करेंगे। राष्ट्रीय खेल परिषद ने खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों सहित कुल 168 सदस्यीय टीम घोषित की है। टीम खेलों में नेपाल कबड्डी, वॉलीबॉल और क्रिकेट में भाग लेगा।

20 साउन, काठमांडू। आगामी 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान में होने वाले 20वें एशियन गेम्स में नेपाल के 136 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। राष्ट्रीय खेल परिषद (राखेप) के खेल विकास विभाग प्रमुख सरोजकुमार पोखरेल ने 22 खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या अंतिम रूप से तय होने की जानकारी दी है।

इस बार नेपाल कराटे, कबड्डी, आर्चरी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, साइक्लिंग, गोल्फ, जुडो, स्क्वैश, स्विमिंग, टेबल टेनिस, टेनिस, कुश्ती, वॉलीबॉल, कैनो स्लैलम, डांस एंड स्पोर्ट्स, स्केटबोर्ड, तेक्वांडो और उसु में प्रतिस्पर्धा करेगा। हालांकि, अंतिम समय में ई-स्पोर्ट्स प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो सका।

पिछले 19वें एशियन गेम्स 2023 में चीन के हान्झोऊ में आयोजित हुए थे, जहाँ नेपाल के 253 खिलाड़ियों ने 29 खेलों में भाग लिया था। इस बार नेपाल स्वर्ण पदक सहित दोहरे अंक में पदक जीतने का बड़ा लक्ष्य रख रहा है। अब तक नेपाल ने एशियन गेम्स से केवल 3 रजत और 23 कांस्य पदक ही जीते हैं।

आपके व्यवहार से बच्चों के व्यवहार पर पड़ सकता है प्रभाव

भोजन की मेज, परिवार के साथ बैठने वाला कमरा या सोने वाला कमरा संभव हो तो मोबाइल-रहित क्षेत्र बनाएं। माता-पिता का अत्यधिक मोबाइल उपयोग बच्चों के भावनात्मक विकास, व्यवहार और सामाजिक कौशल पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। डिजिटल युग में बच्चों के स्क्रीन टाइम पर बहुत चर्चा होती है। अधिकांश अभिभावकों को चिंता रहती है कि बच्चे बहुत मोबाइल चलाते हैं, टीवी देखते हैं या वीडियो गेम खेलते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में विशेषज्ञों ने एक और महत्वपूर्ण पक्ष की तरफ ध्यान आकर्षित किया है। समस्या केवल बच्चे के स्क्रीन टाइम तक सीमित नहीं है, बल्कि अभिभावकों के अत्यधिक मोबाइल उपयोग से भी बच्चों के व्यवहार, भावनात्मक विकास और सामाजिक कौशल पर गहरा प्रभाव पड़ता है। बाल मनोविज्ञान में इसे ‘टेक्नोफेरेन्स’ कहते हैं। इसका मतलब है अभिभावक और बच्चे के बीच प्रत्यक्ष संवाद और संबंध में तकनीक के कारण बाधा आना। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल न केवल समय लेता है, बल्कि बच्चे को मिलने वाले ध्यान और स्नेह को भी छीन रहा है।

मोबाइल में व्यस्त अभिभावकों को देखकर बच्चे क्या महसूस करते हैं? छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को शब्दों से ज्यादा चेहरे के हाव-भाव, आंखों के संपर्क और अभिभावक की प्रतिक्रिया से समझते हैं। जब बच्चा कुछ दिखाना चाहता है, बात करना चाहता है या खेलने बोलता है, लेकिन अभिभावक मोबाइल की नोटिफिकेशन देख रहे होते हैं, सोशल मीडिया स्क्रॉल कर रहे होते हैं या चैट में व्यस्त होते हैं, तो बच्चा अवचेतन रूप से यह संदेश लेता है कि मोबाइल उसकी तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह स्थिति बार-बार होने पर बच्चा खुद को उपेक्षित, नजरअंदाज और कम महत्व का महसूस करने लगता है। दीर्घकालिक रूप से इससे उनका आत्मविश्वास, भावनात्मक सुरक्षा और व्यवहार प्रभावित हो सकता है।

अभिभावकों के अत्यधिक मोबाइल उपयोग से बच्चों पर पड़ने वाले मुख्य प्रभाव: 1. भावनात्मक संबंध कमजोर हो सकते हैं। जब बच्चा रोता है, हंसता है या कुछ नया सीखता है और अभिभावक तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देते, तो बच्चे में भावनात्मक असुरक्षा की भावना विकसित हो सकती है। बच्चे खुद को समझे बिना अकेला महसूस करने लगते हैं। विकास के लिए अभिभावक की प्रत्यक्ष ध्यान और स्नेहपूर्ण प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है। 2. चिड़चिड़ापन और जिद्दी व्यवहार बढ़ सकता है। बच्चे ध्यान पाने के लिए विभिन्न तरीके अपनाते हैं। यदि अभिभावक का ध्यान सहज रूप से नहीं मिलता, तो बच्चे चिल्ला सकते हैं, जिद्दी कर सकते हैं, समान फेंक सकते हैं या नकारात्मक व्यवहार द्वारा ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर सकते हैं। 3. सामाजिक और भाषा विकास प्रभावित हो सकता है। बच्चे बोलने की शैली, चेहरे के भाव देखकर प्रतिक्रिया देना, संवाद की क्षमता और सामाजिक व्यवहार सबसे पहले घर पर सीखते हैं। यदि अभिभावक का ध्यान हमेशा मोबाइल पर केंद्रित रहेगा, तो बच्चे को आवश्यक संवाद और नेटवर्किंग कम मिलेगी।

बच्चों को ‘मोबाइल कम चलाओ’ कहने से पहले अभिभावकों को अपनी आदतों में बदलाव करना जरूरी है। मोबाइल उपयोग को पूरी तरह बंद करना हल नहीं है। काम, पढ़ाई और दैनिक जीवन के लिए स्मार्टफोन आवश्यक है। लेकिन इसके उपयोग में संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। घर में ‘नो-फोन जोन’ बनाएं। खाने के समय सभी सदस्य मोबाइल दूर रखें यह आदत डालना उचित है। बच्चे के साथ होने पर मोबाइल को प्राथमिकता न दें, उनके साथ खेलें, पढ़ाई में मदद करें या उनकी बातें सुनते समय मोबाइल साइलेंट मोड पर रखें। परिवार के लिए ‘डिजिटल डिटॉक्स’ समय निर्धारित करें, जिसमें कम से कम 1-2 घंटे सभी सदस्य मोबाइल, टैबलेट या टीवी से दूर रहें।

यदि कार्यालय के अत्यावश्यक काम के कारण मोबाइल देखना जरूरी हो तो बच्चे को स्पष्ट रूप से बताएं, ‘मैं पांच मिनट में काम खत्म करके तुम्हारे साथ खेलूंगा।’ इससे बच्चे को लगेगा कि उसे नजरअंदाज नहीं किया गया है। बच्चे को सबसे ज्यादा चाहिए आपका समय। महंगे खिलौने, नए गैजेट या कड़े नियमों से ज्यादा महत्वपूर्ण है अभिभावक का पूरा ध्यान। यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चा स्क्रीन की लत से बचे, भावनात्मक रूप से मजबूत हो और स्वस्थ सामाजिक विकास करे, तो इसकी शुरुआत अपनी मोबाइल उपयोग की आदतों से करें।

मेटा ने मोदी का वीडियो हटाने पर भारत सरकार से मांगी माफी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वीडियो मेटा ने गलती से हटाने पर मेटा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत सरकार से औपचारिक रूप से माफी मांगी है। भारतीय संसदीय पैनल द्वारा माफी न मांगने पर कार्रवाई का अघोषित चेतावनी देने के बाद मेटा के प्रतिनिधि आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिले और माफी मांगी। मेटा ने साफ किया है कि प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो तकनीकी त्रुटि के कारण हटाया गया था, लेकिन बाद में इसे प्लेटफार्म पर पुनः स्थापित कर दिया गया। २० साउन, काठमाडौं।

पिछले महीने फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले में बुधवार को फेसबुक कंपनी मेटा के एक वरिष्ठ कार्यकारी ने माफी मांगी। हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, भारत के संसदीय पैनल ने मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटाने पर माफी मांगने के लिए तीन दिन की अवधि दी थी। माफी न आने पर कार्रवाई की चेतावनी के कुछ घंटे बाद मेटा के अधिकारियों ने माफी मांगी।

फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की मूल कंपनी मेटा के वरिष्ठ ग्लोबल अधिकारी आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिलने आए और माफी मांगी, यह जानकारी जानकार लोगों ने दी। मेटा के ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान वैष्णव से मिलने गए टीम के सदस्य थे और उन्होंने आईटी सचिव एस कृष्णन से भी अलग से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटाने पर माफी मांगने के साथ-साथ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के नेतृत्व वाली सूचना प्रौद्योगिकी संम्बंधी संसदीय स्थायी समिति के माध्यम से बाल यौन दुर्व्यवहार सामग्री और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री रखने वाले मध्यस्थता प्लेटफार्मों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में फेसबुक पोस्ट में थोड़े समय के प्रतिबंध के बाद भारत सरकार द्वारा मेटा का ध्यानाकर्षण करवाए जाने पर भारतीय युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। मेटा ने कहा है कि सामग्री त्रुटिवश हटाई गई थी, लेकिन बाद में उसे प्लेटफार्म पर पुन: रखा गया।

काठमाडौँ विश्वविद्यालय में विश्वस्तरीय अनुवाद कार्यशाला, बुकर पुरस्कार विजेता अनुवादकों द्वारा प्रशिक्षण

काठमाडौँ विश्वविद्यालय ने शिकागो विश्वविद्यालय के सहयोग से २६ से २८ भदौ तक धुलिखेल में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद कार्यशाला आयोजित करने जा रहा है। इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता डेजी रकवेल समेत विश्वप्रसिद्ध अनुवादक प्रशिक्षण देंगे। इस कार्यशाला के लिए २४ प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा। निःशुल्क आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य नेपाली साहित्य के अंग्रेजी अनुवाद को बढ़ावा देना और नए अनुवादकों की क्षमता विकास में सहायता प्रदान करना है।

कार्यशाला काठमाडौँ विश्वविद्यालय के भाषा और जनसंचार विभाग तथा शिकागो की ‘दक्षिण एशियाई साहित्य अनुवाद परियोजना’ (एसएएलटी) के संयुक्त आयोजन में संचालित होगी। आयोजकों के अनुसार, नेपाली और दक्षिण एशियाई भाषाओं के साहित्य को अंग्रेजी में अनुवाद करने में रुचि रखने वाले अनुवादकों को लक्षित करते हुए कविता और गद्य अनुवाद के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कार्यशाला के लिए आवेदन साउन २४ गते तक खुले हैं।

कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता अनुवादक डेजी रकवेल और दीपा भस्थी सहित विश्वप्रसिद्ध अनुवादक प्रशिक्षण देंगे। रकवेल ने भारतीय लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास ‘टम्ब ऑफ सैंड’ का अंग्रेजी अनुवाद किया था, जिसे सन् २०२२ में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला था। दीपा भस्थी ने भारतीय लेखिका बानू मुश्ताक की कहानी संग्रह ‘हार्ट लैम्प’ का अंग्रेजी अनुवाद किया था, जिसने सन् २०२५ में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार प्राप्त किया था।

अन्य प्रशिक्षकों में अनुवादक जेसन ग्रुनेबाम और डैनियल हान भी शामिल होंगे। ग्रुनेबाम शिकागो विश्वविद्यालय के एसएएलटी परियोजना के सह-निर्देशक हैं, जबकि डैनियल हान साहित्य अनुवाद के क्षेत्र में विश्व स्तर पर विख्यात अनुवादक हैं। इस निःशुल्क कार्यशाला में चयनित प्रतिभागियों को आवश्यकतानुसार यात्रा व्यय और आवास की सुविधा प्रदान की जाएगी। आवेदन करते समय प्रतिभागियों को अपने अनुवाद नमूने, अनुवाद शैली और कार्यशाला में भाग लेने के कारण प्रस्तुत करने होंगे। काठमाडौँ विश्वविद्यालय के अनुसार, यह कार्यशाला नेपाली साहित्य के अंग्रेजी अनुवाद को प्रोत्साहित करने और नई पीढ़ी के अनुवादकों की क्षमता विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

नेतान्याहू ने ट्रम्प की गाजा योजना को ठुकराया

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने कहा है कि हमास पूरी तरह से असशस्त्र नहीं होगा तब तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी और उन्होंने अमेरिकी प्रशासन द्वारा प्रस्तुत मसौदा प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। शांति बोर्ड ने भी पुष्टि की है कि गाजा में पूर्ण हथियार निरस्त्रीकरण के बिना इजरायली रक्षा बल ‘‘पीला रेखा’’ से पीछे नहीं हटेंगे। प्रधानमंत्री नेतान्याहू और शांति बोर्ड के प्रतिनिधि निकोले म्लादेनोव के बीच गाजा में सशस्त्र नियंत्रण हटाकर स्थिर नागरिक प्राधिकरण स्थापित करने को लेकर उच्चस्तरीय वार्ता हुई है।

२० साउन, वाशिंगटन – इजरायली प्रधानमंत्री नेतान्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाले प्रशासन द्वारा प्रस्तुत गाजा के निःशस्त्रीकरण और इजरायली सैन्य वापसी से संबंधित मसौदा योजना को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है। नेतान्याहू ने स्पष्ट कहा है कि हमास पूरी तरह से असशस्त्र नहीं होगा तब तक इजरायली सेना क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में गाजा पट्टी में राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिक उपस्थिति को महत्व दिया। अपनी सुरक्षा के प्रति दृढ़ रहते हुए उन्होंने कहा कि हमास के पूर्ण निःशस्त्रीकरण तक वर्तमान स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।

नेतान्याहू ने इजरायली सेना को दिए गए जनादेश की पुनः पुष्टि की और कहा कि अपने देश और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले, शांति बोर्ड ने गाजा पट्टी में सभी हथियारों के निरस्त्रीकरण के बिना इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) ‘‘पीला रेखा’’ से पीछे नहीं हटेंगे, ऐसा साफ कर दिया था।

पीला रेखा वह सैन्य क्षेत्र है जो मध्य पूर्व में दक्षिणी लेबनान की सीमा से लगभग १० किलोमीटर उत्तर तक फैला हुआ है। अल जजीरा के अनुसार, इजरायली अधिकारी हिज़बुल्लाह के उन्मूलन प्रयासों को उजागर करते हुए इस क्षेत्र में हमला करने का अधिकार सुरक्षित रखना और नियंत्रण कायम रखना अपनी प्राथमिकता मानते हैं।

उच्च प्रतिनिधि निकोले म्लादेनोव, शांति बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल और प्रधानमंत्री नेतान्याहू तथा उनकी वरिष्ठ टीम के बीच हुई उच्चस्तरीय और रचनात्मक बैठक के बाद यह घोषणा सार्वजनिक की गई है। शांति बोर्ड ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि इजरायल की वर्तमान गतिविधियों की वजह से युद्धविराम की समयसीमा में आई अनिश्चितताओं और विरोधाभासी रिपोर्टों के खिलाफ उचित कदम उठाए गए हैं। उन्होंने प्रारंभिक या आंशिक गलत रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा है कि हमास के साथ प्रतिबद्धता बनाए रखने के लिए पूर्ण निःशस्त्रीकरण आवश्यक है इससे पहले और कोई बल प्रयोग नहीं होना चाहिए।

गलत रिपोर्टों की ओर ध्यान दिलाते हुए शांति बोर्ड ने कहा है कि पीला रेखा से बाहर इजरायली वापसी हमास के पूर्ण निःशस्त्रीकरण के बाद ही संभव होगी। निकोले म्लादेनोव और प्रधानमंत्री नेतान्याहू की बैठक में गाजा में सशस्त्र नियंत्रण हटाकर स्थिर नागरिक प्राधिकरण की स्थापना पर व्यापक संक्रमण प्रक्रिया को केंद्रित चर्चा की गई।

यह घटनाक्रम उस वक्त सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नए गाजा समझौते के तहत हमास को असशस्त्र कराने के शांति समझौता बोर्ड के प्रयासों को ‘‘बड़ी सफलता’’ बताया था।

कनाडा में आग से बचने के लिए कार में भाग रहे जोड़े फंसे

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में आग से बचने के लिए कार में भाग रहे एक जोड़े आग की चपेट में फंस गए हैं। हाल ही में अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र और कनाडा के विभिन्न स्थानों में आग फैल गई है, जिसके कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

ओडीआई विश्व कप चयन प्रतियोगिता फरवरी–मार्च में होगी

साल 2027 के आईसीसी एकदिवसीय विश्व कप के लिए चयन प्रतियोगिता आगामी वर्ष 22 फरवरी से 23 मार्च तक आयोजित की जाएगी। आईसीसी ने विश्व कप चयन की तारीखें घोषित कर दी हैं, लेकिन प्रतियोगिता के आयोजन स्थल का अभी तक निर्धारण नहीं किया गया है। दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले विश्व कप में कुल 14 टीमें भाग लेंगी। 20 सावन, काठमांडू।

आईसीसी ने प्रतियोगिता की तारीख तय कर ली है लेकिन आयोजन स्थल अभी भी अज्ञात है। आईसीसी द्वारा पहले घोषित नए विश्व कप प्रारूप के अनुसार, चयन प्रतियोगिता में 10 टीमें हिस्सा लेंगी, जिसमें विजेता टीम सीधे 14 टीमों के विश्व कप में स्थान हासिल करेगी। चयन प्रतियोगिता में दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान वाली टीमें विश्व कप के पहले चरण ‘सुपर सीरीज’ में भाग लेंगी। इन तीनों टीमों में से सर्वश्रेष्ठ एक टीम मुख्य 12 टीमों के चरण में जगह बनाएगी।

साल 2027 का विश्व कप 4 अक्टूबर से 21 नवंबर तक दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया के 12 स्टेडियमों में आयोजित होगा। चयन प्रतियोगिता में आयोजक दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के अलावा 30 सितंबर 2026 तक आईसीसी एकदिवसीय रैंकिंग में निचले स्थान पर मौजूद दो पूर्ण सदस्य राष्ट्र, विश्व कप लीग–2 की शीर्ष चार टीमें और विश्व कप चयन प्लेऑफ़ से आने वाली चार टीमें भाग लेंगी।

विश्व कप चयन प्लेऑफ़ में लीग–2 की निचली चार टीमें और चैलेंज लीग की चार टीमें कुल आठ टीमों के बीच मुकाबला होगा। यहां से शीर्ष चार टीमें विश्व कप चयन प्रतियोगिता में जगह बनाएंगी। चैलेंज लीग में 12 टीमें दो समूहों में विभाजित की जाएंगी। प्रत्येक समूह की टीमें तीन चरणों में राउंड रोबिन मैच खेलेंगी। दोनों समूहों की शीर्ष दो टीमें चयन प्लेऑफ़ में पहुँचेंगी। वर्तमान में वेस्ट इंडीज आईसीसी एकदिवसीय रैंकिंग में 10वें स्थान पर है। सितंबर में भारत के खिलाफ होने वाले दो ओडीआई मैचों के बाद यह निर्णय होगा कि वेस्ट इंडीज सीधे विश्व कप के लिए चयनित होते हैं या उन्हें चयन प्रतियोगिता से गुजरना होगा। यदि शीर्ष आठ में नहीं आते हैं तो वेस्ट इंडीज को भी विश्व कप खेलने के लिए चयन प्रतियोगिता में भाग लेना होगा। वेस्ट इंडीज साल 2023 के विश्व कप में चयनित नहीं हो पाया था। तब हरारे में हुई चयन प्रतियोगिता में नेदरलैंड्स के खिलाफ सुपर ओवर में हारकर वेस्ट इंडीज विश्व कप से बाहर हो गया था। -क्रिकइन्फो से

धनिया और हरी मिर्च को लंबे समय तक ताजा रखने के तरीके

बरसाती मौसम में नमी के कारण जल्दी खराब होने वाली धनिया और हरी मिर्च को विशेष ध्यान देकर रखने से इन्हें लंबे समय तक ताजा रखा जा सकता है। बारिश के दौरान कई जगह पानी भर जाता है और हवा में आर्द्रता अधिक रहती है। इससे बाजार से लाई गई सब्जियां जल्दी खराब हो सकती हैं। धनिया और हरी मिर्च हमारी रसोई के अनिवार्य घटक हैं। ये दोनों सब्जियां जल्दी खराब और सड़ने की समस्या झेलती हैं। हालांकि, कुछ सरल उपाय अपनाकर घर में लाई गई धनिया और मिर्च को लंबे समय तक ताजा रखा जा सकता है।

धनिया को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए धनिया की जड़ों को पानी में भिगोकर रखा जा सकता है। धनिया की मात्रा के अनुसार किसी जग, बर्तन या कंटेनर में धनिया डालकर उसके डंठल तक पानी से भिगोना जरूरी है। इस तरह रखने से धनिया लंबे समय तक ताजा रहता है। धनिया के डंठल को पूरी तरह से पानी में डुबाना आवश्यक होता है। कुछ अन्य उपाय भी हैं। धनिया को टिशू पेपर में लपेटकर रखने से मोटे टिशू या मुलायम कागज में मौजूद नमी सोख ली जाती है और जल्दी खराब होने से बचाया जा सकता है। हवा न आने वाले कंटेनर में रखने से पहले धनिया को अच्छी तरह साफ करके उसके ऊपर टिशू, कागज या साफ कपड़ा डालकर भंडारण करना लाभकारी होता है।

हरी मिर्च को ताजा कैसे रखा जाए? मिर्च के डंठल हटा देने पर उसे फ्रिज में रखने से मिर्च जल्दी खराब होने से बचती है। डंठलों में नमी अधिक होती है जो सड़न का कारण बन सकती है, इसलिए डंठल हटाना बेहतर रहता है। बाजार या बगीचे से सीधे लाई गई मिर्च पर कीचड़, दाग या गंदगी लग सकती है। इस स्थिति में धोकर पानी सुखाकर ही फ्रिज में रखना चाहिए, जिससे ताजगी लंबे समय तक बनी रहती है। हरी मिर्च को हवा न आने वाले कंटेनर में रखने पर नीचे पेपर या साफ कपड़ा रखना चाहिए और कंटेनर को अच्छी तरह बंद करना चाहिए, इससे मिर्च ताजी रहती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि धनिया तोड़ते समय जड़ सहित तोड़ना उपयुक्त होता है। बाजार से जड़ सहित धनिया खरीदने से उसे लंबे समय तक ताजा रखना आसान होता है। मिर्च संग्रह करते समय एक ही जगह पर ज्यादा मात्रा में रखना और बार-बार निकालना-फिर से रखना खराब होने का खतरा बढ़ाता है, इसलिए छोटी-छोटी मात्राओं में अलग-अलग बर्तनों या जगहों पर रखकर जरूरत अनुसार निकालना बेहतर है जिससे ताजगी बनी रहती है।

फिर से शिक्षक आंदोलन की धमकी क्यों? सरकार की प्रतिक्रिया क्या है?

शिक्षा विधेयक पारित करने की मांग के साथ 2 अप्रैल 2025 को काठमांडू की सड़कों पर प्रदर्शन करते शिक्षक

तस्वीर स्रोत, NurPhoto via Getty Images

प्राचीन ग्रीक कथा में राजा सिसिफस पहाड़ के ऊपर एक बड़ा पत्थर धकेलने की कोशिश करते थे, लेकिन हर बार वह पत्थर ऊपर पहुँचते ही नीचे गिर जाता था और उन्हें फिर से मेहनत करनी पड़ती थी।

आज शिक्षक आंदोलन की बहस के साथ-साथ विद्यालय शिक्षा विधेयक भी इसी तरह दोहराव वाली स्थिति झेल रहा है।

पिछली बार कई बार विधेयक पास कराने के लिए हुए आंदोलन और समझौतों को लेकर शिक्षक असंतुष्ट हैं कि अब फिर सब कुछ शून्य की ओर जा रहा है।

शिक्षा विधेयक की कहानी

पिछले शिक्षक आंदोलन का एक दृश्य

तीन साल पहले 2080 भाद्र 27 को संसद में दायर विद्यालय शिक्षा विधेयक पारित कराने के लिए शिक्षक लगातार आंदोलन करते रहे। संविधान 2072 साल में लागू हुआ था, लेकिन इसके अनुसार शिक्षा विधेयक लाने में आठ साल लग गए।

देशभर से हजारों शिक्षक राजधानी काठमांडू की सड़कों पर कई हफ्ते दबाव डालने के बाद सरकार ने शिक्षक महासंघ के साथ 2082 वैशाख 17 को नौबिंदु समझौता किया था। उसी वर्ष असार 15 तक विधेयक पारित करने का वादा भी किया गया था।

नेपाली बैंक में १३ खरब रुपये जमा, ब्याज दर घटने के बाद भी व्यापारी ऋण क्यों नहीं ले रहे?

हजार रुपैयाँका नोटका बिटाको खात

तस्बिर स्रोत, Getty Images

कुछ समय से प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और अर्थ मंत्री स्वर्णिम वाग्ले उद्योगपतियों, व्यापारियों और आर्थिक क्षेत्र के विभिन्न लोगों से लगातार मुलाकात कर रहे हैं। इन बैठकों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि व्यापारी अब भी निवेश विस्तार करने में क्यों हिचकिचा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में नेपाली बाजार में बड़ी मात्रा में तरलता है और बैंक भी ऋण देने के लिए तैयार हैं। ब्याज दर न्यूनतम स्तर पर है। फिर भी, व्यवसायी ऋण मांग अपेक्षित स्तर तक बढ़ा नहीं पा रहे हैं। इससे अर्थव्यवस्था अपेक्षित गति से गतिशील नहीं हो पा रही है।

नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरुप्रसाद पौडेल के अनुसार बैंक में वर्तमान में १३ खरब ३६ अरब रुपये ऋण देने योग्य राशि जमा है। “यह तरलता इस वर्ष का सबसे उच्च स्तर है और ब्याज दर औसतन केवल ६.५ प्रतिशत है,” उन्होंने कहा।

साल २०२२ के बाद ऋण वृद्धि नहीं होने से बैंक में राशि जमा होती गई है, ऐसा उन्होंने बताया।

आर्थिक विशेषज्ञ इस स्थिति को चिंताजनक मानते हैं। यह निवेश अवसरों की कमी या व्यवसायियों के निवेश पर भरोसा न करने का संकेत देता है।

निर्वासन में रहते हुए भी शेख हसनाह की राजनीतिक सक्रियता कायम

समाचार सारांश बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसनाह ने निर्वासन में होने के बावजूद देश वापस लौटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए राजनीतिक सक्रियता जारी रखने का संकेत दिया है। उनके संभावित पुनरागमन से अवामी लीग के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ने और वर्तमान सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है, यह विश्लेषकों का अनुमान है। बांग्लादेश सरकार ने हसनाह के देश लौटने पर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने और उन्हें सुपुर्दगी के लिए भारत से औपचारिक अनुरोध भी किया है। २० साउन, ढाका (रासस/एएफपी)।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसनाह ने देश लौटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए निर्वासन के दौरान भी देश की राजनीति में सक्रिय रहने के संकेत दिए हैं। विश्लेषक उनके हालिया बयानों को अवामी लीग के समर्थकों को एकजुट रखने, पार्टी का राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी सान्दर्भिकता को कायम रखने के प्रयास के रूप में देखते हैं। भारत में निर्वासन में रह रहीं ७८ वर्षीय हसनाह ने जुलाई में एएफपी के साथ बातचीत में वर्ष के अंत तक बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, जेल जाना पड़ सकता है या जान गंवानी पड़ सकती है, फिर भी जनता के आग्रह पर वे देश लौटना चाहती हैं।

भारत जा रही हेलीकॉप्टर के दो वर्ष पूरे होने पर बुधवार को ‘शेख हसनाह का घर वापसी’ शीर्षक से नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में वे टेलीफोन के जरिए संबोधित करेंगी। ढाका के नॉर्थ साउथ विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर मोहम्मद जलाल उद्दीन सिकदर के अनुसार, हसनाह आज भी अवामी लीग के लिए एक प्रभावशाली राजनीतिक प्रतीक हैं और उनका संभावित पुनरागमन पार्टी के अस्तित्व से जुड़ा विषय बन गया है। अवामी लीग के एक वरिष्ठ नेता ने भी कहा कि पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता गिरफ्तार होने के कारण हसनाह का वापस आने की इच्छा जताना उनके प्रति जिम्मेदारी का भाव है।

उनके अनुसार यह दल के भीतर मनोबल बनाए रखने में मदद कर सकता है। ढाका से प्रकाशित ‘प्रथम आलो’ दैनिक ने हसनाह के देश वापसी की घोषणा को पार्टी पर लगे प्रतिबंध हटाने, कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और राजनीतिक स्थिति पुनः स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा बताया है। हालांकि, अवामी लीग के पूर्व वरिष्ठ नेता और वर्तमान आलोचक महमूदुर रहमान मन्ना ने इस धारणा को नकारते हुए कहा कि पार्टी को पुनर्गठन के लिए अन्य नेताओं को अवसर दिया जा सकता है, लेकिन हसनाह ने ऐसा नहीं किया है।

विश्लेषक सिकदर के अनुसार हसनाह का संभावित पुनरागमन प्रधानमंत्री तारिक रहमान की वर्तमान सरकार पर और अधिक राजनीतिक दबाव डाल सकता है। वे मानते हैं कि हसनाह के देश लौटने पर कानूनी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इससे राजनीतिक अस्थिरता भी उत्पन्न हो सकती है। इस बीच, प्रधानमंत्री के सलाहकार झाहेद उर रहमान ने स्पष्ट किया है कि सरकार हसनाह का स्वागत करेगी और कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने भारत से हसनाह की सुपुर्दगी के लिए औपचारिक अनुरोध किया है।

हसनाह के ढाका की अदालत में गैरहाजिरी पर उन्हें उकसाने, हत्या करवाने का आदेश देने और अत्याचार रोकने में विफल रहने के आरोप में फैसला सुनाया गया था। हसनाह के संभावित पुनरागमन का विषय बांग्लादेश और भारत के बीच सुधरते संबंधों में संवेदनशील माना जाता है। ढाका ने उनकी सुपुर्दगी के लिए बार-बार अनुरोध किया है, जबकि भारत ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया चल रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयस्वाल ने ‘शेख हसनाह का घर वापसी’ कार्यक्रम में भारत सरकार की कोई भागीदारी नहीं होने और वे उसमें व्यक्त विचारों का समर्थन नहीं करने की बात कही है। हालांकि, बांग्लादेश के कुछ विश्लेषक हसनाह के मामले को दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों पर प्रभाव डालने वाला मसला मानते हैं। ढाका के ‘अमर देश’ दैनिक के संपादक महमूदुर रहमान ने इसे नई दिल्ली और ढाका के बीच शक्ति संतुलन से जुड़ा राजनीतिक मुद्दा बताया है।

‘फुटबल बचाऔं…’ खेलाडीहरूको सहमति सहित अपील

यस्तो संवेदनशील अवस्थामा, नेपाल फुटबल खेलाडी संघले राष्ट्रिय टोलीका खेलाडीहरूको सन्देशसहित सामूहिक भिडियो सार्वजनिक गर्दै नेपाली फुटबल रक्षा गर्नुपर्ने मांग उठाएका छन्। नेपाली राष्ट्रिय महिला तथा पुरुष फुटबल खेलाडीहरूले अखिल नेपाल फुटबल संघको निलम्बनले सिर्जना गरेको संकट समाधान गर्दै फुटबल जोगाउन एकजुट अपील गरेका छन्। फिफाद्वारा एन्फा निलम्बनमा पर्दा खेलाडी, प्रशिक्षक र रेफ्रीहरूको भविष्य अनिश्चित बनेपछि तत्काल समाधानको लागि सरोकारवाला निकायहरूसँग उनीहरूले माग राखेका छन्।

खेलकुद मन्त्री सस्मित पोखरेलले निलम्बन फुकुवाका लागि फिफासँग निरन्तर सम्पर्कमा रहेको र समस्या समाधानका प्रयासहरू जारी रहेको जानकारी दिएका छन्। २० साउन, काठमाडौं – नेपाली राष्ट्रिय महिला र पुरुष फुटबल टोलीका खेलाडीहरूले नेपाली फुटबल बचाऔं भन्दै सामूहिक अपील गरेका छन्। हाल अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) फिफाको निलम्बनमा परेको र नेपाली फुटबल गतिविधि ठप्प रहेको कारण खेलाडी, प्रशिक्षक र रेफ्रीहरूको भविष्य अनिश्चित छ।

नेपाल फुटबल खेलाडी संघले राष्ट्रिय टोलीका खेलाडीहरूको सन्देशसहितको सामूहिक भिडियो सार्वजनिक गर्दै नेपाली फुटबल रक्षा गर्नुपर्ने आवाज उठाएका छन्। उनीहरूले फिफा, एएफसी, राष्ट्रिय खेलकुद परिषद (राखेप) र नेपाल सरकारसँग नेपाली फुटबल जोगाउन पहल गर्न आग्रह गरेका छन्। फुटबल खेलाडी संघले सार्वजनिक गरेको सामूहिक भिडियोमा राष्ट्रिय टोलीका अधिकांश खेलाडीहरूको सन्देश समावेश छ, जसमा रोहित चन्द, पुरुष खेलाडीहरू सहित महिला टोलीकी सावित्रा भण्डारी, एन्जिला तुम्बापो लगायतका सन्देशहरू रहेको छ।

तर राष्ट्रिय पुरुष फुटबल टोलीका कप्तान किरण चेम्जोङ भने त्यो भिडियोको बारेमा अनभिज्ञ छन् र उनले छुट्टै भिडियो सन्देश आफ्नो फेसबुकमा सेयर गरेका छन्, जसमा रोहित चन्द र महिला टोलीकी सदस्य प्रीति राईको सन्देश पनि राखिएको छ। हाल कतारमा पुनःस्वास्थ्य उपचार गराइरहेकी महिला टोलीकी कप्तान सावित्राले भिडियोको सुरुमै शीर्ष डिभिजनको लिग नहुँदा खेलाडीहरू प्रभावित भएको उल्लेख गरेकी छिन् भने अन्त्यमा सनिश श्रेष्ठले आफूहरूलाई फुटबल खेल्ने अवसरको आवश्यकता रहेको र आफ्ना सपनाहरूलाई जगेर्ना गर्ने अवसर मागेका छन्। फुटबलसँग सम्बन्धित खेलाडीदेखि प्रशिक्षक र रेफ्रीहरूको करियर समाप्त हुन लागिरहेको भन्दै उनीहरूले गम्भीर चिन्ता व्यक्त गरेका छन् र फिफादेखि नेपालसम्मका सबै सरोकारवाला निकायलाई शीघ्र समाधानका लागि अनुरोध गरेका छन्।

एन्फामा तेस्रो पक्षको हस्तक्षेप भएकाले विश्व फुटबलको सर्वोच्च निकाय फिफाले २५ जनवरीमा एन्फालाई निलम्बन गरेको थियो। अर्को सूचना नआएसम्म निलम्बन जारी रहने फिफाले जनाएको छ। एन्फा निलम्बन हुँदा नजिकिरहेको साफ च्याम्पियनसिपमा नेपालको सहभागिता अनिश्चत देखिएको छ। साफ च्याम्पियनसिप बंगलादेशमा नोभेम्बर ४ देखि सुरु हुँदैछ र यसको ड्र भइसकेको छ। नेपाल ड्रमा समावेश गरिएको छैन। तर सेप्टेम्बर १ भित्र फिफाले निलम्बन फुकुवाको निर्णय गरेमा नेपाल समूह ए मा रहँदै साफ च्याम्पियनसिप खेल्न पाउनेछ।

यस्तै, शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्री सस्मित पोखरेलले मंगलबार सञ्चारकर्मीहरूसँग अन्तर्क्रियामा निलम्बन फुकुवाका लागि फिफासँग निरन्तर संपर्कमा रहेको र निकास निकाल्ने प्रयास भइरहेकाले आशावादी रहेको बताएका छन्। फुटबलर्स म्यान टुगेदरले पनि नेपाली फुटबल विवाद समाधानका लागि तदर्थ समिति गठन गर्नुपर्ने भन्दै फिफा अध्यक्षलाई पत्र लेखेको छ र आफूहरू मध्यस्थताको लागि तयार रहेको जनाएका छन्।

अमेरिका जापानी येन की स्थिरता पर ज़ोर देता है

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार।

  • अमेरिकी वित्तमंत्री स्कट बेसेन्ट ने जापानी येन की स्थिरता को पूरे एशियाई अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक बताया है।
  • कमजोर येन के कारण क्षेत्रीय मुद्रा बाजार में अस्थिरता आ सकती है, इसलिए अमेरिका और जापान ने संयुक्त हस्तक्षेप कर येन का समर्थन किया है।
  • 1998 के बाद पहली बार इस संयुक्त हस्तक्षेप का मकसद अमेरिकी ऋण बाजार पर अनावश्यक दबाव कम करना है।

20 साउन, वाशिंगटन (रासस/एएफपी) – अमेरिकी वित्तमंत्री स्कट बेसेन्ट ने कहा है कि जापानी येन की स्थिरता न केवल जापान या अमेरिका के लिए बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र की आर्थिक संतुलन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

बेसेन्ट ने चेतावनी दी है कि कमजोर येन की वजह से क्षेत्रीय मुद्रा बाजार में अस्थिरता फैल सकती है। इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान ने मिलकर इस मुद्रा को समर्थन देने के लिए हस्तक्षेप किया है।

सिएनबीसी के साथ मंगलवार को बातचीत में बेसेन्ट ने 1990 के दशक के अंत में हुए एशियाई वित्तीय संकट का उल्लेख करते हुए बताया कि बहुत कमजोर येन की वजह से अन्य एशियाई मुद्राओं पर भी दबाव पड़ सकता है।

उनके अनुसार, येन अत्यधिक कमजोर होने पर कोरियाई वोन सहित दूसरी क्षेत्रीय मुद्राओं पर भी असर पड़ सकता है और चाइनीज रेनमिन्बी के मूल्यांकन को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में विभिन्न राय बनी हुई है।

पिछले सप्ताह, 1998 के बाद पहली बार, अमेरिका और जापान ने संयुक्त रूप से येन की खरीद के माध्यम से हस्तक्षेप किया था। इससे पहले येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 164 येन प्रति डॉलर तक कमजोर होकर लगभग चार दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था।

बेसेन्ट ने कहा कि जापान की अर्थव्यवस्था के आकार, विश्व व्यापार में उसकी भूमिका और अंतरराष्ट्रीय बचत बाजार में जापान के योगदान को ध्यान में रखते हुए स्थिर येन विश्व अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।

जापान अमेरिकी सरकारी ऋणपत्रों का सबसे बड़ा धारक है, इसलिए एकतरफा हस्तक्षेप से अमेरिकी ट्रेजरी ऋणपत्रों की बिक्री हो सकती है, जिससे अमेरिकी ऋण बाजार में दबाव उत्पन्न होने का खतरा वाशिंगटन में है।

विश्लेषक ट्रम्प प्रशासन की अमेरिकी व्यापार घाटा कम करने की नीति और 2025 के व्यापार समझौते के तहत जापान की अमेरिका में 5.5 खरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता को इस कदम से जोड़कर देख रहे हैं। संयुक्त हस्तक्षेप से पहले भी जापान ने खुद येन का समर्थन करने के लिए दशकों तक अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन यह मुद्रा लगातार कमजोर होती रही।

येन के अवमूल्यन के कारणों में जापान और अमेरिका के बीच ब्याज दर अंतर, उच्च अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें और प्रधानमंत्री साने ताकाइची की खर्चीली नीतियों के कारण जापान का सार्वजनिक ऋण बढ़ने की चिंता शामिल है।

संयुक्त हस्तक्षेप के बाद वाशिंगटन और टोक्यो ने जरूरत पड़ने पर पुनः बाजार में हस्तक्षेप करने का संकेत दिया है। बुधवार तक येन पिछले महीने के निचले स्तर से लगभग चार प्रतिशत मजबूत हो चुका है।

बेसेन्ट ने कहा कि अंततः विनिमय दर बाजार के तत्काल संकेतों से अधिक जापान की आर्थिक और मौद्रिक नीतियां निर्धारित करेंगी। इसी बीच, गोल्डमैन सैक्स के शोधकर्ताओं ने बताया कि संयुक्त हस्तक्षेप तत्काल प्रभाव तो दिखा सकता है, लेकिन जब तक विश्व आर्थिक स्थिति और जापान की घरेलू नीतियों में ठोस बदलाव नहीं होते, इसका दीर्घकालीन प्रभाव सीमित रहेगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी की भागीदारी येन के विनिमय दर नियंत्रण के बजाय अमेरिकी ऋण बाजार में अनावश्यक अस्थिरता को कम करने के उद्देश्य से अधिक जुड़ी है।

फिफा के अध्यक्ष इन्फान्टिनो ने मोरक्को में आकस्मिक बैठक बुलाई

फिफा के अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो ने मोरक्को में वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक आकस्मिक बैठक आह्वान की है। इस बीच, फिफा के ग्लोबल स्ट्रैटेजी और गवर्नेंस सलाहकार कार्लोस कॉर्डेरो ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। 20 साउन, काठमांडू। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फिफा) के अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो ने विवादित व्यावसायिक योजना वापस लेने के बाद उत्पन्न विवाद को सुलझाने के लिए बुधवार को मोरक्को में वरिष्ठ पदाधिकारियों की आकस्मिक बैठक बुलाई है। फिफा की व्यावसायिक एवं प्रतियोगिता प्रबंधन अधिकार निजी संस्थाओं को हस्तांतरित करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘फिफा फॉरवर्ड इंटरप्राइज’ योजना व्यापक आलोचनाओं के बाद रद्द कर दी गई थी।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में फिफा के महासचिव माटियास ग्राफस्ट्रोम, मुख्य वित्त अधिकारी थोमस पेयर, कानूनी प्रमुख एमिलियो गार्सिया सिल्वेरे, प्रमुख सदस्य संघ के अध्यक्ष एलखान मम्मादोव, संचार निदेशक ब्रायन स्वानसन सहित शीर्ष अधिकारी उपस्थित होंगे। फिफा के मुख्य ग्लोबल फुटबॉल विकास अधिकारी और आर्सेनल के पूर्व कोच आर्सेन वेंगर ने योजना को वापस लेना एक आवश्यक और सही कदम बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस योजना से किसी भी तरह से जुड़े नहीं थे और इस संदर्भ की जानकारी केवल मीडिया से प्राप्त हुई है। वेंगर ने कहा कि फिफा को फुटबॉल की सेवा पारदर्शिता, ईमानदारी और स्वतंत्रता के आधार पर करनी चाहिए।

इसी बीच महासचिव ग्राफस्ट्रोम ने आंतरिक ईमेल के माध्यम से हाल की घटनाओं को ‘दुखद और निंदनीय’ बताया है। जॉर्डन फुटबॉल संघ के अध्यक्ष प्रिंस अली ने पुरस्कार राशि रोकने और इन्फान्टिनो के पुनर्निर्वाचन का समर्थन करने के दबाव को ‘ब्लैकमेल’ नहीं बल्कि एक नियतपूर्ण प्रयास करार दिया है। विवाद के बीच फिफा के ग्लोबल स्ट्रैटेजी और गवर्नेंस सलाहकार कार्लोस कॉर्डेरो ने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस योजना को ‘फुटबॉल के लिए खराब समझौता’ कहा और कहा कि यह फुटबॉल के भविष्य के लिए खतरा है। यूरोपियन फुटबॉल संघ (यूईएफए) ने भी फिफा को इस योजना से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित करने के लिए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।