सेल्फ गोल के जरिए पहली बढ़त हासिल करने के बाद अमेरिका के लिए एलेक्स फ्रीमैन ने दूसरा गोल किया। फीफा विश्व कप 2026 के अंतर्गत अमेरिका ने पहले हाफ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो गोल की बढ़त ली है। मैच के 11वें मिनट में ऑस्ट्रेलिया के कैमरून बरगेस के सेल्फ गोल से अमेरिका ने पहली बढ़त पाई। अमेरिका के एलेक्स फ्रीमैन ने 43वें मिनट में हेडर के जरिए गोल कर टीम की बढ़त दुगनी कर दी। 6 जून, काठमांडू। अमेरिका ने फीफा विश्व कप 2026 के तहत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो गोल की बढ़त बनाई है। सिएटल स्टेडियम में जारी मैच के पहले हाफ में अमेरिका ने दो गोल की बढ़त हासिल की। सेल्फ गोल के जरिए पहली बढ़त बनाने के बाद अमेरिका के लिए एलेक्स फ्रीमैन ने दूसरा गोल किया। एलेक्स ने 43वें मिनट में हेडर के जरिए गोल कर टीम की बढ़त दोगुनी कर दी है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के कैमरून बरगेस ने 11वें मिनट में क्लियर करते समय प्रहार किया गया गेंद अपने ही गोलपोस्ट में चली गई, जिससे अमेरिका को पहली बढ़त मिली। अमेरिका पहले हाफ में ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाने में सफल रहा है।
लगभग दो दशकों से बंद पड़े हेटौंडा कपड़ा उद्योग को पुन: संचालित करने के लिए प्रधानमंत्री एवं मन्त्रिपरिषद् कार्यालय ने सीधे पहल की है।
उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री गौरीकुमारी यादव ने इस वित्तीय वर्ष के भीतर हेटौंडा कपड़ा उद्योग को पुनः चलाने की तैयारी बताई है।
उद्योग बंद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से कपड़ा उद्योग परिसर में सफाई अभियान शुरू किया है।
५ असार, हेटौंडा। लगभग दो दशक से बंद पड़े हेटौंडा कपड़ा उद्योग को पुनः संचालित करने के लिए प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय सक्रिय हुआ है। हेटौंडा औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय ने कपड़ा उद्योग के पुनर्चालन में सीधी भागीदारी ली है।
उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री गौरीकुमारी यादव ने भी उद्योग का निरीक्षण किया है। मंत्री सहित टीम के निरीक्षण के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के सूचना अधिकारी हिमालय भण्डारी ने बताया कि उद्योग को जल्द ही पुनः शुरू करने की तैयारी तेज हो रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा हेटौंडा उपमहानगरपालिका की प्रमुख मीनाकुमारी लामा से कपड़ा उद्योग संचालन संबंधी दो दिन पूर्व टेलीफोन पर वार्ता भी हुई। नगर प्रमुख लामा ने बताया कि उपमहानगरपालिका की भूमिका के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ संवाद हुआ है।
उपमहानगरपालिका आगामी वित्तीय वर्ष का पूरा बजट कपड़ा उद्योग संचालन के लिए उपलब्ध कराने को तैयार है, जो मुख्य लामा ने बताया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री कार्यालय की पहल से कपड़ा उद्योग के संचालन की विश्वसनीयता बनी है। यह उद्योग संचालित होने पर देश के आर्थिक विकास में बड़ा योगदान देगा और रोजगार सृजन सहित हेटौंडा व आस-पास के क्षेत्रों को जीवंत बनाएगा।”
प्रधानमंत्री कार्यालय की रुचि के चलते नगर प्रमुख लामा और मकवानपुर के प्रमुख जिल्ला अधिकारी वसंत अधिकारी ने भी कपड़ा उद्योग का निरीक्षण किया है। मंत्री यादव ने १० जेठ को उद्योग का निरीक्षण किया था।
मंत्री यादव ने वित्तीय वर्ष २०८३/०८४ के बजट पर संसद में प्रश्नों का उत्तर देते हुए सरकार ने इस वर्ष हेटौंडा कपड़ा उद्योग को पुनः संचालित करने की योजना बताई।
उन्होंने कहा, “लगभग सभी उद्योगों में हेटौंडा कपड़ा उद्योग पहले संचालित होगा। बुटवल में धागा उत्पादन और बाँके नेपालगंज में कपास खेती भी इसी वर्ष शुरू की जाएगी।”
यो २०३२ साल में स्थापित और २०३५ साल से संचालित हेटौंडा कपड़ा उद्योग के साथ-साथ बुटवल के धागा कारखाने और नेपालगंज के कपास उत्पादन कारखाने का भी संचालन किया जाएगा, जो हेटौंडा औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड के सूचना अधिकारी भण्डारी ने बताया। उद्योग बंद होने के कारण ये दोनों कारखाने भी बंद पड़े थे।
भण्डारी के अनुसार कपड़ा उद्योग पुनः संचालन के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “मशीनों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, कुछ जगह जंग लगी है। सामान्य मरम्मत से इसे चालू किया जा सकता है। भवन भी अच्छी स्थिति में हैं। थोड़ी सुधार के बाद उद्योग पूरी क्षमता से काम करेगा।”
उद्योग परिसर की पहली पूर्ण सफाई
२०७५ साल से कपड़ा उद्योग परिसर में सशस्त्र पुलिस सुरक्षा बल की १४ नंबर गण तैनात है। पहले उद्योग परिसर की सुरक्षा दो गार्ड ही करते थे।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कुछ समय पहले उद्योग के उपकरण चोरी हुए थे और यह क्षेत्र कभी नशा सेवन करने वालों का अड्डा था। मगर सशस्त्र पुलिस की उपस्थिति से परिसर पूरी तरह सुरक्षित हो गया है।
लगभग दो दशकों के बाद पहली बार उद्योग परिसर की पूरी सफाई की गई है। सशस्त्र पुलिस, नेपाली सेना और नेपाल पुलिस ने मिलकर उद्योग परिसर की सफाई की है, जिसे सुरक्षा बल १४ नंबर गण के प्रमुख पुलिस उपरीक्षक निबन श्रेष्ठ ने बताया।
श्रेष्ठ ने बताया कि पहली बार कंक्रीट संरचनाओं की भी सफाई हुई। उन्होंने कहा, “भवन के ऊपरी भाग से पेड़-पौधे हटाए गए हैं। झाड़-फूंक और अन्य सफाई के कार्य जारी हैं।”
बार-बार पुनः संचालन के प्रयास
२०५७ साल में उद्योग बंद होने के बाद कई बार इसे पुनः चालू करने की कोशिश की गई, लेकिन सफल नहीं हुई। २०५८ में निजीकरण का प्रयास भी हुआ, मगर कोई आवेदन नहीं मिला।
२०६५ में जब पुष्पकमल दहाल प्रचण्ड प्रधानमंत्री और डा. बाबुराम भट्टराई अर्थ मंत्री थे, तब उद्योग संचालन के लिए ८ करोड़ से अधिक रुपये आवंटित किए गए, लेकिन कार्य नहीं हो पा सका।
२०६९ में उद्योग की संपूर्ण जिम्मेदारी औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड, बालाजू को दी गई। इसके बाद कई बार पुनः संचालित करने की घोषणाएं भी हुईं। पूर्व उद्योग मंत्रियों ने भी इस उद्योग को पुनः चलाने का विश्वास व्यक्त किया था।
पूर्व उद्योग मंत्री अष्टलक्ष्मी शाक्य, महेन्द्रप्रसाद यादव, अनिलकुमार झा, महेश बस्नेत और नविन्द्रराज जोशी ने हेटौंडा कपड़ा उद्योग पुनः संचालित करने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। उद्योग मंत्री दिलेंद्रप्रसाद बडू के कार्यकाल में मंत्रालय से सहायक सचिवों की टीम भी अध्ययन के लिए गई थी।
प्रधानमंत्री प्रचण्ड के नेतृत्व में नेपाली सेना ने भी इस उद्योग के पुनः संचालन के लिए अध्ययन किया है। सेना ने लगभग दो अरब रुपये का निवेश प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत किया है।
सरकारी अभिलेख से हटाया गया
हेटौंडा कपड़ा उद्योग अब सरकारी अभिलेख से हटा दिया गया है। १२ माघ २०७९ को मंत्रिपरिषद ने उद्योग के भवन और जमीन औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड को हस्तांतरित कर सरकार के शेयर कायम करने का निर्णय लिया था।
उद्योग की २५६ रोपनी जमीन की मूल्यांकन २० करोड़ १९ लाख और भवन एवं पूर्वाधार का मूल्यांकन ८ करोड़ १२ लाख रुपये निर्धारित कर सरकार का शेयर उक्त लिमिटेड में रखा गया।
प्लांट और मशीनरी का मूल्य ८ करोड़ १४ लाख रुपये निर्धारित किया गया, जिसमें ७ करोड़ रुपये सरकार को दिए जाएंगे और बाकी लिमिटेड को वार्षिक ५ प्रतिशत निवेश के रूप में दिया जाएगा। इस निर्णय के अनुसार कपड़ा उद्योग का विवरण कंपनियों के रजिस्ट्रार कार्यालय और उद्योग विभाग से हटा दिया गया है।
अब उद्योग की कोई जमीन, भवन या मशीनरी सरकार के स्वामित्व में नहीं है। उद्योग ने अपनी भूमि के अतिरिक्त बाकी जमीन औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड ने २३ अन्य उद्योगों को किराए पर दी है।
२०७१ साल फागुन २० को दिन तत्कालीन उद्योग मंत्री महेश बस्नेत ने हेटौंडा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार (औद्योगिक क्षेत्र-२) की आधारशिला रखी थी। २० विघा १२ कठ्ठा ८ धुर जमीन आईडीएम द्वारा क्षेत्र विस्तार में शामिल की गई।
उद्योग की कुल २४३ रोपनी जमीन में से ५५ रोपनी जमीन औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन कार्यालय द्वारा अन्य उद्योगों के लिए किराए पर दी गई है। साउथ एशियन ब्रुअरी प्रालि ने सबसे अधिक १०५ रोपनी और अविनाश एग्स प्रालि ने ९.७५ रोपनी जमीन किराए पर ली है।
वर्तमान में कपड़ा उद्योग स्थित १८८ रोपनी जमीन में विभिन्न छोटे तथा मध्यम दर्जे के लगभग बारह उद्योग संचालित होने की संभावना है, परन्तु जर्जर भवन और मशीनें बंद कमरों में रखी हुई हैं। यहाँ न कपड़ा उद्योग संचालित हो रहा है और न ही नई उद्योग स्थापना के लिए जमीन का उपयोग हो रहा है।
ताप्लेजुङ के रमेश लिम्बू और नेपाल आर्मी की सुनसरी रोकाया ने रामारोशन स्काई रनिंग चैंपियनशिप २०२६ का ख़िताब जीता।
सुदूरपश्चिम के पर्यटक क्षेत्र रामारोशन में आयोजित इस प्रतियोगिता में देश भर के 57 जिलों के 153 धावकों ने भाग लिया।
28 किलोमीटर दूरी की इस रेस में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले धावकों को क्रमशः 1 लाख, 75 हजार और 50 हजार रुपए पुरस्कार दिए गए।
5 आषाढ़, काठमांडू। ताप्लेजुङ के रमेश लिम्बू और नेपाल आर्मी की सुनसरी रोकाया ने रामारोशन स्काई रनिंग चैंपियनशिप २०२६ का खिताब अपने नाम किया है।
नेपाल एडवेंचर रनिंग फेडरेशन (एनएआरएफ) ने पहली बार आयोजित ‘रामारोशन स्काई रनिंग २०२६’ में, रमेश लिम्बू पुरुष खुला वर्ग के विजेता तथा सुनसरी महिला खुला वर्ग की विजेता बनीं।
खुली 28 किलोमीटर की दूरी रमेश लिम्बू ने 3 घंटे 28 मिनट 15 सेकंड में पूरी कर पहले स्थान पर रहे।
वहीं, जुम्ला के सोनम बहादुर रावत ने 3 घंटे 30 मिनट 45 सेकंड में दौड़ पूरी कर दूसरे स्थान पर कब्ज़ा जमाया। अर्जुन बुढा ने 3 घंटे 41 मिनट में तीसरा स्थान हासिल किया।
महिलाओं के खुला वर्ग में सुनसरी रोकाय ने 4 घंटे 32 मिनट 44 सेकंड में दौड़ समाप्त कर पहला स्थान प्राप्त किया। खोटांग की निर्मला राई ने 4 घंटे 34 मिनट 17 सेकंड में दूसरा स्थान लिया।
स्थानीय युवाओं के प्रोत्साहन के लिए 20 वर्ष से कम उम्र के खिलाड़ियों के लिए 5 किलोमीटर की सामुदायिक दौड़ भी आयोजित की गई जिसमें पुरुष वर्ग में पञ्चदेवल विनायक नगरपालिक के सुशील तिमिल्सिना 24 मिनट में दौड़ पूरी करके पहले स्थान पर रहे। महिला वर्ग में देबकी धामी ने 29 मिनट 27 सेकंड में दौड़ समाप्त कर पहला स्थान हासिल किया।
28 किलोमीटर की स्काई रनिंग चैलेंज में पुरुष और महिला दोनों वर्गों में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पाने वाले धावकों को क्रमशः 1 लाख, 75 हजार और 50 हजार रुपए नकद पुरस्कार दिए गए।
साथ ही दोनों वर्गों के शीर्ष 10 स्थान पाने वाले धावकों को भी नकद पुरस्कार प्रदान किया गया है।
5 किलोमीटर सामुदायिक दौड़ के पुरुष और महिला श्रेष्ठ खिलाड़ियों को क्रमशः 15 हजार और 10 हजार रुपए नकद पुरस्कार मिले।
सभी विजेताओं को ट्रॉफी, मेडल और प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए।
सुदूरपश्चिम प्रदेश के पर्यटक क्षेत्र रामारोशन में सम्पन्न इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न 57 जिलों के 153 धावकों ने भाग लिया।
2,150 से 3,830 मीटर की ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण मार्ग पर हुई इस प्रतियोगिता से साहसिक खेल को बढ़ावा ही नहीं मिलेगा, बल्कि रामारोशन के पर्यटन विकास में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।
वित्तीय प्रणाली में अत्यधिक तरलता और कर्ज की निम्न मांग के कारण बैंक आपस में ब्याजदर घटाकर एक-दूसरे के ऋणी आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा में जुटे हुए हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार वर्तमान वित्तीय प्रणाली में लगभग १३ खरब रूपये निवेश योग्य राशि जमा है, परंतु कर्ज की मांग कम है। नेपाल बैंकर्स संघ के अध्यक्ष संतोष कोइराला ने वित्तीय वर्ष के अंत में बैंक कर्जा प्रवाह से अधिक असुली पर केंद्रित होने की बात कही है।
५ असार, काठमांडू। वित्तीय प्रणाली में अत्यधिक तरलता की समस्या तीव्र होने के कारण बैंक और ऋणग्राही घटे ब्याजदर में प्रतिस्पर्धा करने लगे हैं। इस प्रकार ब्याजदर घटाकर एक बैंक के ऋणी को दूसरे बैंक में लाने की होड़ तेज हो गई है। चालू आर्थिक वर्ष के वैशाख महीने तक बैंक द्वारा निजी क्षेत्र में प्रवाहित किया गया कर्जा ३ खरब १२ अरब रूपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में ५६ अरब रूपये कम है।
बैंक आधारदर पर कर्जा प्रदान कर अन्य बैंक से ग्राहक आकर्षित करने लगे हैं। एक वाणिज्य बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा, “कर्ज की मांग कम है, इसलिए निक्षेप आते ही ब्याज देना पड़ता है।” इसी दौरान, वाणिज्य बैंकों के असार माह में व्यक्तिगत मुद्दती निक्षेप पर अधिकतम औसत ब्याजदर ४.२७ प्रतिशत दर्ज की गई है। जबकि जेठ माह की औसत कर्ज ब्याजदर ६.७३ प्रतिशत रही।
नेपाल पूर्वाधार विकास बैंक (निफ्रा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कृष्णबहादुर अधिकारी ने बताया, “ग्राहक और बैंक के बीच असंतोष बढ़ने से कर्ज स्थानांतरण की प्रवृत्ति देखने को मिल रही है।” वर्तमान समय में ब्याजदर कम है और बैंकों का फिक्स्ड ब्याजदर ७ से ९ प्रतिशत के बीच है। इससे ग्राहक कर्जा स्थानांतरण का प्रयास कर रहे हैं, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
टोखा के बसुन्धरा स्थित श्री चंद्रविंदु इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल के आयोजन में शनिवार से 10वीं स्किब्स थ्री बाय थ्री बास्केटबॉल प्रतियोगिता की शुरुआत होगी।
प्रतियोगिता में 33 स्कूलों की 48 टीमें प्रतिस्पर्धा करेंगी और इसके लिए लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये खर्च होंगे, आयोजकों ने बताया।
दो दिन तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में सीनियर बॉयज, जूनियर बॉयज और गर्ल्स समूह के खेल आयोजित होंगे।
5 आसार, काठमाडौं। श्री चंद्रविंदु इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल (स्किब्स) के आयोजन में 10वीं स्किब्स थ्री बाय थ्री बास्केटबॉल प्रतियोगिता शनिवार से शुरू हो रही है।
प्रतियोगिता में 33 स्कूलों की 48 टीमें भाग लेंगी, यह जानकारी स्किब्स के प्रिंसिपल अरुणकुमार केसी ने शुक्रवार को पत्रकार सम्मेलन में दी। सीनियर बॉयज में 24 तथा जूनियर बॉयज और गर्ल्स में समान रूप से 12-12 टीमें भाग लेंगी।
सीनियर बॉयज में टीआईए, जूनियर बॉयज में पैरामाउंट एकेडमी और गर्ल्स में वैली पब्लिक डिफेंडिंग इस प्रतियोगिता के चैंपियन हैं। प्रतियोगिता का संचालन करने में लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये की लागत आएगी, प्रतियोगिता संयोजक सागर शर्मा ने बताया।
पहले दिन सीनियर बॉयज में प्रीक्वार्टर फाइनल और जूनियर बॉयज व गर्ल्स में क्वार्टर फाइनल तक के मैच खेले जाएंगे, यह जानकारी स्किब्स के बास्केटबॉल प्रशिक्षक संजय प्रजापति ने दी।
दो दिन तक चलने वाली प्रतियोगिता के मैच टोखा नगरपालिका वडा नं. 5 के बसुन्धरा में आयोजक के कोर्ट में आयोजित किए जाएंगे।
रसुवा नाका से गाड़ी आयात में अनियमितता पाए जाने के बाद, कस्टम विभाग ने तत्कालीन कार्यालय प्रमुख सहित १३ कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। भौतिक रूप से गाड़ियों के न आने के बावजूद जाँच पास किए जाने की पुष्टि हुई है, जिसके कारण लक्ष्मी ई-मोबिलिटी, साइमेक्स, सीजी मोटर्स समेत अन्य आयातक कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई प्रक्रिया शुरू की गई है। ५ असार, काठमांडू।
कस्टम विभाग के अध्ययन से पता चला है कि मुस्तांग नाका से आयातित ६४९ इलेक्ट्रिक वाहनों की जाँच पास प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं थी। मुस्तांग और रसुवा नाकाओं से गाड़ी आयात संबंधी अध्ययन में बजट से पहले मुस्तांग कोरला नाका से आयातित वाहनों में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं देखी गई। लेकिन रसुवा नाका से गाड़ी आयात के दौरान भौतिक रूप से वाहन न पहुँचने के बावजूद दस्तावेज़ों के आधार पर जाँच पास किए जाने की पुष्टि विभाग ने की है।
समीक्षा टीम ने रसुवा कस्टम कार्यालय में इलेक्ट्रिक वाहनों की कस्टम जाँच पास के दौरान कर्मचारियों द्वारा उचित सावधानी या जिम्मेदारी का पालन न करने का पता लगाया है। ऐसे कानूनी प्रक्रिया में कमी के कारण अर्थ मंत्रालय और कस्टम विभाग ने रसुवा कस्टम कार्यालय के तत्कालीन प्रमुख समेत १३ कर्मचारियों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की है।
रसुवा नाके से वाहन आयात में अनियमितता मिलने पर भन्सार विभाग ने तत्कालीन कार्यालय प्रमुख समेत १३ कर्मचारियों को निलंबित किया है।
भौतिक रूप से वाहन न पहुंचने के बावजूद जांच-पास की पुष्टि होने पर लक्ष्मी ई-मोबिलिटी, साइमेक्स, सीजी मोटर्स सहित अन्य आयातक कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
मुस्ताङ नाके से आयातित ६४९ इलेक्ट्रिक वाहनों के जांच-पास प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है, भन्सार विभाग ने अध्ययन के माध्यम से पुष्टि की है।
५ आसार, काठमांडू। बजट से पहले मुस्ताङ और रसुवा नाकों से वाहन आयात से सम्बंधित भन्सार विभाग के अध्ययन ने यह पुष्टि की है कि मुस्ताङ के कोरला नाक से बजट से पहले आयातित वाहनों में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।
मुस्ताङ नाके से नेपाल प्रवेश करने वाले वाहनों को सशस्त्र पुलिस द्वारा नियंत्रण में लेकर जांच शुरू होने के बाद यह मुद्दा काफी चर्चा में आया था। हालांकि विभाग ने बताया कि इसी नाके से जांच प्रक्रिया पूरी कर १४ जेठ से पहले ही वाहन नेपाल में आ चुके थे।
लेकिन रसुवा नाके से वाहन आयात के दौरान भौतिक रूप से वाहन न पहुंचने के बावजूद केवल कागजात के आधार पर जांच-पास कराने की पुष्टि विभाग ने की है।
विभाग के अध्ययन में प्रज्ञापनपत्र, कार्यालय अभिलेख सहित अन्य विषयों के स्थल अध्ययन के दौरान रसुवा नाके से आने वाले कुछ वाहनों की जांच में गड़बड़ी पाई गई है, हालांकि विभाग ने कितने यूनिट्स में समस्या है इसके बारे में जानकारी अभी नहीं दी है।
मुस्ताङ भन्सार में तैनात अनुगमन टीम की रिपोर्ट के अनुसार उक्त कार्यालय से १२ तथा १३ जेठ को कुल ६४९ इलेक्ट्रिक वाहनों की घोषणा कर ९ प्रज्ञापनपत्रों के माध्यम से जांच-पास प्रक्रिया पूरी की गई।
अधिकारी अभिलेख और सीसीटीवी फुटेज का गहराई से अध्ययन एवं विश्लेषण किया गया। विभाग ने बताया कि ये ६४९ इलेक्ट्रिक वाहन १४ जेठ के भीतर नेपाल पहुंच चुके हैं और उस तारीख तक भन्सार कार्यालय द्वारा नियमों के अनुसार जांच-पास हो चुका था।
बजट आने से पहले कर दरों संबंधी सूचना लीक कर वाहन आयात किये जाने पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठे थे। इसे लेकर जांच करने हेतु भन्सार विभाग ने मुस्ताङ के लिए २१ जेठ और रसुवा के लिए १७ जेठ को अलग-अलग अध्ययन समितियाँ बनाई थीं। अध्ययन टीम ने अपनी रिपोर्ट भन्सार विभाग को सौंप दी है, जिसे अर्थ मन्त्रालय ने भी स्वीकार किया है।
रसुवा भन्सार कार्यालय में इलेक्ट्रिक वाहनों की भन्सार जांच-पास के दौरान कर्मचारियों द्वारा उचित सावधानी या पदानुकूल जिम्मेदारी पूरी न करने की अनुगमन टीम ने पुष्टि की है।
अनुगमन टीम द्वारा प्रज्ञापनपत्र, कार्यालय अभिलेख आदि की स्थल पर जांच में पता चला है कि कई वाहन भौतिक रूप से न आगए होने के बावजूद बस कागजी तौर पर जांच-पास कर दिए गए।
इस प्रकार कानूनी प्रक्रिया न पूरी करने पर अर्थ मन्त्रालय और भन्सार विभाग ने रसुवा भन्सार कार्यालय के तत्कालीन प्रमुख समेत १३ कर्मचारियों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की है।
साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन तस्करी में लिप्त लक्ष्मी ई-मोबिलिटी, साइमेक्स इंक, सीजी मोटर्स, पूजा इंटरनैशनल और पूजा कंस्ट्रक्शन नेपाल प्रा.लि. के खिलाफ कार्रवाई हेतु रसुवा भन्सार को पत्र भेजा गया है, भन्सार विभाग ने बताया।
इसी तरह २४८, ८३३ और ४७८ नंबर के भन्सार एजेंटों पर भी कार्रवाई के लिए रसुवा भन्सार कार्यालय को पत्र भेजे जाने की जानकारी विभाग ने दी है।
विश्व बुद्धिचाल महासंघ द्वारा आयोजित 46वें चेस ओलम्पियाड के लिए नेपाल बुद्धिचाल महासंघ ने पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार पुरुष और महिला दोनों वर्ग में 5-5 खिलाड़ी का चयन कर दिया है। झापा के दमक में सम्पन्न राष्ट्रीय बुद्धिचाल प्रतियोगिता में खुल्ला वर्ग में रुपेश जैसवाल और महिला वर्ग में कृतिसरा अधिकारी ने उपाधि जीती है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से आगामी सितंबर में उज्बेकिस्तान में आयोजित होने वाले 46वें चेस ओलम्पियाड के लिए नेपाल से 10 खिलाड़ियों का चयन किया गया है।
खुल्ला वर्ग के विजेता रुपेश ने 11 मैचों में 9.5 अंक तथा महिला वर्ग की विजेता कृतिसरा ने 8.5 अंक प्राप्त कर उपाधि अपने नाम की है। 5 असार को दमक के होटल कामाक्ष में सम्पन्न 26वें खुल्ला और 11वें महिला राष्ट्रिय बुद्धिचाल प्रतियोगिता में एफएम रुपेश जैसवाल एवं कृतिसरा अधिकारी विजेता घोषित हुए। इस प्रतियोगिता का सफल आयोजन प्रदेश खेलकुद विकास बोर्ड, कोशी प्रदेश और जिला बुद्धिचाल संघ झापा के सहयोग से नेपाल बुद्धिचाल महासंघ ने किया।
खुल्ला वर्ग में रौतहट के एफएम रुपेश जैसवाल ने 11 मैचों में 9.5 अंक के साथ अपनी उपाधि सफलतापूर्वक बचाई। यह उनके लिए तीसरी बार राष्ट्रीय विजेता बनने की उपलब्धि है। अंतिम मैच में उन्होंने सिएम सुश्रुत दहाल के साथ बराबरी की। दोलखा के युवा आशिष फुयाल ने 7.5 अंक के साथ दूसरा स्थान तथा पूर्व नेपाल चैंपियन राजन सुबेदी ने 7 अंक के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। 7 अंक बराबर होने पर टाईब्रेक के आधार पर झापा की सिएम सुश्रुत दहाल चौथे, काठमांडू के सिएम पुरुषोत्तम सिलवाल पाँचवें और पाँचथर के रिशोन थापा छठे स्थान पर रहे।
महिला वर्ग में झापा की कृतिसरा अधिकारी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 8.5 अंक हासिल कर राष्ट्रीय महिला चैंपियन का खिताब जीता। झापा की पूजा भंडारी 7.5 अंक के साथ दूसरे तथा दोलखा की निहाना श्रेष्ठ 7 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। 7 अंक बराबर करने वाली एन्जल महर्जन टाईब्रेक के आधार पर चौथे स्थान पर हैं। डाइरेक्ट इन्काउंटर और सोन्नेवर्ग बर्जर टाईब्रेक के जरिये समान 6.5 अंक हासिल करने वाली काठमांडू की बिनिता कपाली, निवर्तमान ओमन नेपाल चैंपियन सिन्दिरा जोशी, और झापा की प्रिया क्षेत्री क्रमशः छठे स्थान पर हैं।
विश्व बुद्धिचाल महासंघ द्वारा आयोजित 46वें चेस ओलम्पियाड के लिए पुरुष वर्ग में एफएम रुपेश जैसवाल, आशिष फुयाल, राजन सुवेदी, सिएम सुश्रुत दहाल और सिएम पुरुषोत्तम सिलवाल का चयन हुआ है, वहीं महिला वर्ग में पूर्व विजेता सिन्दिरा जोशी, कृतिसरा अधिकारी, पूजा भंडारी, निहाना श्रेष्ठ और एन्जल महर्जन को चुना गया है। इस जानकारी महासंघ के सदस्य राजु ताम्राकार ने दी है।
आदित्य सुवेदी और कनाडा के इब्राहिम हुसेन द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित आर्किटेक्ट लैब्स ने कस्टम चिप निर्माण के लिए २४ मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ३ अरब ६२ करोड़ नेपाली रुपये) का निवेश जुटाने में सफलता हासिल की है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, १९ वर्षीय सुवेदी और हुसेन द्वारा विकसित ये चिप्स ब्रॉडकैम और इसके प्रतिद्वंद्वी मार्वल द्वारा अमेज़न और अल्फाबेट की गूगल जैसी क्लाउड कंप्यूटिंग कंपनियों के लिए एआई और अन्य सामान्य उपयोग के कंप्यूटिंग चिप्स को डिजाइन करने में मदद करेंगी। रॉयटर्स ने बताया कि मार्वेल और ब्रॉडकैम द्वारा डिजाइन की गई ये कस्टम चिप्स अरबों डॉलर का राजस्व उत्पन्न करने का अनुमान है और ये एनवीडिया के शक्तिशाली हार्डवेयर का विकल्प प्रदान करेंगी।
सुवेदी ने काठमांडू के कांडाघारी स्थित अक्षरा स्कूल से कक्षा १० और आईबी युलेन्स से कक्षा १२ उत्तीर्ण कर हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था। हार्वर्ड में एआई का उपयोग कर कोड वेरिफिकेशन पर शोध करते हुए, वे अन्य प्रसिद्ध विश्वविद्यालय स्टैनफोर्ड गए जहाँ उन्होंने हुसेन से मुलाकात की। हुसेन १५ साल की उम्र में कालेज में दाखिला लेकर स्कूल छोड़ चुके थे और बाद में एप्पल और टेस्ला में कस्टम चिप विकास के क्षेत्र में काम कर चुके हैं। दोनों ने मिलकर आर्किटेक्ट लैब्स की स्थापना की है।
दोनों ने मिलकर एआई प्रणाली विकसित करने के लिए चिप डिजाइन और प्रमाणीकरण संबंधी शोध शुरू किया। एआई प्रगति और हार्डवेयर विकास के बीच दूरी देखकर उन्होंने पढाई छोड़कर आर्किटेक्ट लैब्स की शुरुआत की। आर्किटेक्ट लैब्स का उद्देश्य डिज़ाइन प्रक्रिया को सस्ता और तेज बनाना है, जिसमें अभी लगभग दो साल लगते हैं। श्रम लागत और शोध एवं विकास पर अरबों का अतिरिक्त खर्च आता है, जिसका उल्लेख सुवेदी और हुसेन ने किया। कंपनी का लक्ष्य चिप निर्माता कंपनियों को डिज़ाइन प्रक्रिया में तेजी लाना ही नहीं बल्कि उन सॉफ़्टवेयर कंपनियों को भी कस्टम चिप उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है जो अपने ऐप्लिकेशन तेज़ और प्रभावी चलाना चाहते हैं, आर्किटेक्ट के सह-संस्थापक इब्राहिम हुसेन ने रॉयटर्स को बताया।
हुसेन ने कहा, ‘बड़ी कंपनियों को जो सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है वह सिर्फ बैकएंड एक्सीक्यूशन या लेआउट की समस्या नहीं है, बल्कि यह भी कि वे जो कुछ दुनिया को देना चाहते हैं, उस कार्यभार को कैसे मैनेज करें और उपयुक्त (चिप) आर्किटेक्चर को कैसे डिज़ाइन करें।’ पालो अल्टो, कैलिफोर्निया में स्थित इस कंपनी की स्थापना हुसेन और आदित्य सुवेदी ने की है और यह मशीन लर्निंग तथा हार्डवेयर क्षेत्र में लगभग १८ कर्मचारी रखती है। ताइवानी कंपनी TSMC की तरह जिसने चिप उत्पादन को सर्वसुलभ बनाया, वैसे ही आर्किटेक्ट लैब्स चिप डिज़ाइन को भी आसान बनाना चाहता है, सुवेदी ने बताया। कंपनी के फंडिंग राउंड का नेतृत्व काइंड्रेड वेंचर्स ने किया था, जिसमें टीक्यू वेंचर्स, रेस कैपिटल और टुगेदर फंड शामिल थे। गूगल डीपमाइंड के मुख्य वैज्ञानिक जेफ डिन और ओपनएआई तथा एनवीडिया के कार्यकारी भी इस कंपनी में निवेशक हैं। आर्किटेक्ट लैब्स विभिन्न कंपनियों, एआई रिसर्च लैब और देशों के साथ साझेदारी करके जटिल कंप्यूटिंग कार्यभार के लिए विशिष्ट चिप्स विकसित कर रहा है। चिप डिज़ाइन टेक्नोलॉजी क्षेत्र में यह सबसे चुनौतीपूर्ण और सीमित पहुंच वाला कार्य है। इसके लिए वर्षों का विकास, करोड़ों डॉलर का निवेश और कुछ विशेष कंपनियों में सीमित विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
18 जून की शाम अटलांटा में मैदान के बीच में खड़ी टोरी पेंसो, ब्रुक मेयो और कैथरीन नेसबिट का नाम विश्व फुटबाल लंबे समय तक याद रखेगा। क्योंकि उस दिन उन्होंने केवल मैच का संचालन ही नहीं किया, बल्कि संभावनाओं के एक नए युग की शुरुआत भी की।
समाचार सारांश
अटलांटा स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका और चेक गणराज्य के बीच मैच का संचालन करते हुए तीन महिला रेफ्री ने पुरुष विश्व कप में इतिहास रचा।
मुख्य रेफ्री टोरी पेंसो फ्रांस की स्टेफनी फ्रापार्ट के बाद पुरुष विश्व कप में मैच संचालन करने वाली दूसरी महिला बनीं।
सहायक रेफ्री ब्रुक मेयो और कैथरीन नेसबिट सहित टीम ने 1-1 की बराबरी पर समाप्त मैच को व्यवस्थित किया।
काठमांडू। अटलांटा स्टेडियम। गुरुवार, 18 जून।
ग्रुप ए के तहत मैच शुरू होने में कुछ ही मिनट बाकी थे। स्टेडियम में हजारों दर्शक की निगाहें मैदान पर टिकी थीं।
चेक गणराज्य और दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी सुरंग से बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे। राष्ट्रगान बजने से पहले ही मैदान का माहौल धीरे-धीरे रोमांचक होता जा रहा था।
विश्व कप के एक और अहम मुकाबले के शुरू होने की उत्तेजना ने पूरे वातावरण में एक जश्न जैसा प्रकाश बिखेर दिया था।
उस दिन दर्शक, मीडिया और फुटबाल समर्थकों का ध्यान कुछ पलों के लिए खिलाड़ियों से हटकर मैदान के केंद्र हिस्से की ओर चला गया।
कारण था वहां सिटी (सीटी) लिए खड़ी तीन महिलाएं।
मुख्य रेफ्री टोरी पेंसो और उनके सहायक ब्रुक मेयो तथा कैथरीन नेसबिट खेल का संचालन करने के लिए मैदान में उतरे थे।
मुख्य रेफ्री टोरी पेंसो और उनके सहायक ब्रुक मेयो तथा कैथरीन नेसबिट खेल शुरू होने से पहले फोर्स ऑफिशियल्स के साथ
आमतौर पर रेफ्री का मैदान पर आना बड़ी खबर नहीं होती। लेकिन उस दिन की स्थिति बिल्कुल अलग थी।
मैच शुरू होने से पहले ही मैदान में उनकी उपस्थिति के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस मैच को विशेष महत्व देना शुरू कर दिया। खबर का केंद्र खिलाड़ी नहीं, बल्कि रेफ्री टीम थी।
सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं। मैच शुरू होने से पहले ही कई खेल पत्रकार इसे विश्व कप के इतिहास के एक ऐतिहासिक पल के रूप में वर्णित कर रहे थे।
इतना खास क्यों था?
शायद, उस पल का महत्व खेल या खिलाड़ियों से कहीं अधिक था।
आमतौर पर विश्व कप की चर्चा उस समय के स्टार खिलाड़ियों की रहती है। कौन गोल करेगा? कौन सी टीम जीतेगी? या कौन अगली चुनौती तक पहुंचेगा? यही विषय समाचार का मुख्य हिस्सा बनते हैं।
उस दिन वर्षों की मेहनत, संघर्ष और उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद फुटबाल के सबसे बड़े मंच पर अपनी जगह बनाने वाली ये तीन महिलाएं मुख्य फोकस बन गईं।
फुटबाल इतिहास में महिलाएं रेफ्री की भूमिका निभाती आ रही हैं। लेकिन विश्व कप जैसे पुरुष प्रधान प्रतियोगिता में मैच संचालन करने का अवसर पाना अब भी दुर्लभ उपलब्धि माना जाता है।
और उस दिन पूरे मैच की ऑन-फील्ड रेफ्री टीम ही महिला थी, जो एक अत्यंत असाधारण घटना थी।
इसलिए ये केवल एक नियुक्ति नहीं थी, बल्कि विश्व फुटबाल में बदलाव का एक संकेत था।
टोरी पेंसो, ब्रुक मेयो और कैथरीन नेसबिट की नियुक्ति उसी बदलाव का परिणाम थी।
उनका मैदान भेजा जाना केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं था। उन्होंने घरेलू लीग, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और उच्च दबाव वाले मैचों में अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया था और उसी आधार पर यह अवसर मिला था।
फीफा, अमेरिकी फुटबाल कम्युनिटी और विश्व भर के खेल विश्लेषकों ने इसे फुटबाल इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में माना। अधिकांश ने कहा, ‘यह केवल प्रतिनिधित्व नहीं, योग्यताओं की जीत है।’
आइए जानते हैं कैसे चुनी गईं ये महिला रेफ्री।
टोरी पेंसो: 117 रेफ्री सूची में एकमात्र महिला
उस दिन सबसे ज्यादा चर्चा मुख्य रेफ्री टोरी पेंसो की रही। फ्लोरिडा के स्टुअर्ट की रहने वाली पेंसो का फुटबाल से जुड़ाव बचपन से था।
10 साल की उम्र में उन्होंने मां से कहा था कि वे फुटबाल खेलना चाहती हैं। यह फैसला बाद में उनके जीवन की दिशा बदल गया।
मैदान में खेल की गति समझने की क्षमता, नियमों का गहरा ज्ञान और दबाव में भी स्पष्ट निर्णय लेने की योग्यता ने उन्हें लगातार आगे बढ़ाया।
शुरुआत में कम वेतन पर छोटे मैचों में रेफ्री करने लगीं। लेकिन इसी छोटे काम ने उनका जीवन पूरी तरह बदल दिया।
‘द सन’ में प्रकाशित लेख के अनुसार उनकी प्रतिभा ने जल्दी ही ध्यान आकर्षित किया और उन्हें टेक्सास के ओलंपिक डेवलपमेंट प्रोग्राम द्वारा आयोजित रेफ्री कैंप में आमंत्रित किया गया।
उस समय टोरी स्वयं फुटबाल खेल रही थीं और विश्वविद्यालय में मार्केटिंग की पढ़ाई कर रही थीं। उन्हें रेफ्रींग को पूर्णकालिक करियर बनाने में शुरुआत में विश्वास नहीं था।
समय के साथ वह अमेरिकी शीर्ष प्रतियोगिताओं से लेकर फीफा के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट तक पहुंचीं।
कई वर्षों की मेहनत के बाद वर्ष 2021 में फीफा मान्यता प्राप्त रेफ्री बनीं।
अब तक उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय फुटबाल में बेहतरीन प्रदर्शन किया।
2023 महिला विश्व कप के फाइनल का संचालन करना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि थी। उन्होंने चार मैच संचालित किए, जिनमें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच सेमीफाइनल तथा स्पेन और इंग्लैंड के बीच फाइनल भी शामिल था।
उसके बाद वे विश्व फुटबाल की सबसे सम्मानित रेफ्री में से एक बन गईं।
टोरी पेंसो की योग्यता ने वर्ष 2025 में रंग दिखाया। फीफा ने क्लब विश्व कप के लिए चुनी गई 117 रेफ्री की सूची में वह एकमात्र महिला थीं।
उनकी क्षमता की प्रशंसा करते हुए फीफा ने उन्हें 2026 विश्व कप के लिए भी चुना।
दक्षिण अफ्रीका और चेक गणराज्य के बीच मैच का संचालन करते हुए वे पुरुष विश्व कप में मुख्य रेफ्री बनने वाली दूसरी महिला बनीं। इससे पहले फ्रांस की स्टेफनी फ्रापार्ट ने 2022 में यह उपलब्धि हासिल की थी।
फीफा के साथ बातचीत में उन्होंने बताया, ‘आरंभिक दिनों में अमेरिका में कोई पूर्णकालिक महिला रेफ्री नहीं थी। इसलिए मुझे इस करियर को अपनाना मुश्किल लग रहा था। लेकिन मुझे लगता था, ये केवल अस्थायी काम नहीं, बल्कि देश और दुनिया को जानने का मौका है।’
बाद में उन्होंने एक विज्ञापन एजेंसी की नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक रेफ्री बनने का साहसिक निर्णय लिया।
उनका यह निर्णय सार्थक साबित हुआ।
फुटबाल के उच्चतम स्तर पर रेफ्री बनने का मतलब है केवल नियमों का ज्ञान नहीं, बल्कि उत्कृष्ट फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, खेल की गहरी समझ और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता भी आवश्यक होती है।
पेंसो ने वर्षों तक ये सभी गुण मैदान पर साबित किए।
ब्रुक मेयो: 13 वर्ष की उम्र में सिटी बजाना शुरू किया
टोरी पेंसो के साथ इतिहास रचने वाली दूसरी नाम थी ब्रुक मेयो।
टेक्सास के गार्यान्ड में पली-बढ़ी मेयो ने 13 वर्ष की उम्र में पहली बार रेफ्री की सिटी बजाई। उस समय शुरू हुई यात्रा ने उन्हें विश्व फुटबाल के सबसे बड़े मंच तक पहुंचाया।
अमेरिकी फुटबाल महासंघ से बातचीत में मेयो ने कहा था कि विश्व कप उनका संभावित लक्ष्य था, जिसके लिए वह पूरी तरह समर्पित थीं।
जिम में अधिक समय बिताना, फिटनेस और रिकवरी पर ध्यान देना और हर मैच को सीखने का अवसर मानना उनकी विशेषताएं थीं।
लंबे समय की निरंतरता के बाद उन्होंने विश्व कप में इतिहास रचने वाली टीम में जगह बनाई।
कैथरीन नेसबिट: अलग पृष्ठभूमि से विश्व कप तक
कैथरीन नेसबिट की कहानी भी कम रोचक नहीं है। वह केवल फुटबाल रेफ्री नहीं, बल्कि विज्ञान से जुड़ी प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं।
जैविक विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन और शोध के साथ उन्होंने रेफ्री का करियर भी आगे बढ़ाया।
फीफा की आधिकारिक रेफ्री प्रोफाइल के अनुसार, नेसबिट विश्व फुटबाल में सबसे अनुभवी सहायक रेफ्री में से एक हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने अनुभव और प्रदर्शन के आधार पर विश्व कप तक का सफर तय किया।
विश्व फुटबाल में स्थापित होने से पहले भी नेसबिट ने जैविक विज्ञान में अध्ययन और शोध की। फुटबाल और विज्ञान दो अलग क्षेत्र होते हुए भी दोनों ने अनुशासन, विश्लेषण क्षमता और सटीकता प्रदान की।
अमेरिकी फुटबाल महासंघ द्वारा जारी उनकी प्रोफाइल के अनुसार, विज्ञान क्षेत्र के साथ-साथ रेफ्री की जिम्मेदारी भी उन्होंने निरंतर निभाईं।
वर्षों के घरेलू, अंतरराष्ट्रीय मैचों और फीफा टूर्नामेंट के अनुभव के बाद वे विश्व कप के मंच तक पहुंचीं।
‘हम केवल महिलाएं नहीं, योग्य रेफ्री हैं’
ब्रुक मेयो ने विश्व कप से पहले दिए अपने बयान में इस उपलब्धि के महत्व को स्पष्ट किया।
अमेरिकी फुटबाल महासंघ के साथ इंटरव्यू में मेयो ने कहा, ‘‘हमें ‘महिला रेफ्री टीम’ नहीं बल्कि ‘मजबूत रेफ्री टीम’ के रूप में देखा जाए। लेकिन जब कोई पिता अपनी बेटी से प्रेरित होकर हमारी तस्वीर मांगता है या महिलाएं अपने समय में ऐसे मौके असंभव समझती हैं, तब हमें हमारी मेहनत की अहमियत महसूस होती है।’’
विश्व कप का वह पल ब्रुक मेयो के लिए सिर्फ एक मैच नहीं था।
मैदान से सुरंग में आते समय कैसा महसूस होता है, पूछे जाने पर उनका जवाब भावुक था।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं भावुक व्यक्ति हूं और बड़े मैच में मैदान में उतरते समय आंसू रोकना मुश्किल होता है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘मैं अपने सपने जी रही हूं। परिवार और दोस्त स्टेडियम में बैठे मुझे प्रोत्साहन दे रहे हैं। ऐसे क्षणों को मैं कभी सामान्य नहीं मान सकती।’’
शायद इसीलिए विश्व कप का वह मैच उनके लिए केवल नियुक्ति नहीं, बल्कि वर्षों की त्याग, मेहनत और सपनों की मंजिल था।
मैच में भी दिखा आत्मविश्वास
इतिहास रचना एक बात है, लेकिन मैच को निष्पक्ष और सफलतापूर्वक संचालित करना दूसरी चुनौती थी।
मैच के दौरान टोरी पेंसो ने दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में पेनल्टी का निर्णय दिया। पेनल्टी क्षेत्र में हाथ के नियम उल्लंघन के बाद उन्होंने नियम के अनुसार फैसला लिया।
उस मौके का फायदा उठाते हुए दक्षिण अफ्रीका ने मैच के अंतिम क्षणों में बराबरी का गोल किया। अंततः मैच 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ। अंक बांटे गए और टीमों ने अपनी-अपनी यात्रा जारी रखी।
मगर मैच के बाद चर्चा स्कोरलाइन से ज्यादा इतिहास पर रही।
फिर 18 जून की वह शाम अटलांटा में मैदान के बीच में खड़ी टोरी पेंसो, ब्रुक मेयो और कैथरीन नेसबिट का नाम विश्व फुटबाल कई वर्ष तक याद रखेगा। क्योंकि उस दिन उन्होंने सिर्फ मैच संचालन ही नहीं किया, बल्कि संभावनाओं का नया अध्याय भी खोला।
कानून, न्याय तथा संसदीय मामला मंत्रालय ने आगामी आर्थिक वर्ष में संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों को लेकर मंत्रालयीय चर्चा संपन्न की है। कानून मंत्री सोबिता गौतम ने विधायन अधिनियम के अनुसार असार के अंत तक संघीय संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों की प्राथमिकता सूची तैयार करने पर चर्चा की है। मंत्री गौतम ने सभी मंत्रालयों से आग्रह किया है कि वे कानून निर्माण में जल्दबाजी न करें, बल्कि गुणवत्ता और लागू करने योग्य कानून बनाने के लिए पूर्व तैयारी को प्राथमिकता दें।
कानून मंत्री गौतम विभिन्न मंत्रालयों के मंत्रियों, सचिवों और अन्य कर्मचारियों के साथ प्रतिदिन चर्चा करती रही हैं। उन्होंने संसद में भेजे जाने वाले कानूनों के संबंध में मंत्रालय की कार्यप्रणाली और उन विधेयकों को लेकर चर्चा की जो प्राथमिकता सूची में शामिल किए गए हैं। विधायन अधिनियम के तहत हर वर्ष असार के अंत तक संघीय संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों की प्राथमिकता सूची तैयार करना कानूनी व्यवस्था है।
चर्चा के दौरान मंत्री गौतम ने मंत्रालयों से अनुरोध किया कि वे आवश्यक कानूनों का मसौदा जल्द तैयार करें। मंत्रियों ने इस बात का प्रतिबद्धता जताई कि वे शीघ्र ही विधेयकों की सूची प्रस्तुत करेंगे। विधेयकों की अंतिम सूची समय पर प्रस्तुत करने और प्रत्येक विधेयक के स्पष्ट समयसारिणी निर्धारण पर भी चर्चा हुई। मंत्री गौतम ने कहा कि बिना जल्दबाजी के कानून निर्माण में पर्याप्त पूर्व तैयारी के बाद लागू करना सुगम होगा, और अस्पष्ट तथा विरोधाभासी कानून राज्य के समय, श्रमशक्ति और संसाधनों का अनावश्यक खर्च करते हैं।
५ असार, काठमांडू। इजरायल और लेबनान के सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति हुई है। अमेरिकी एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से इस युद्धविराम की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि यह समझौता स्थानीय समयानुसार शुक्रवार शाम ४ बजे से लागू होगा। इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने युद्धविराम की स्थिति पर एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा, ‘हम वर्तमान में युद्धविराम की स्थिति में हैं। आवश्यकता पड़ने पर इजरायल युद्ध जारी रखने को तैयार है।’
इससे पहले गुरुवार रातभर इजरायली सेना ने हिजबुल्लाह को निशाना बनाते हुए लेबनान के कई इलाकों में बमबारी की, जिसमें दक्षिणी लेबनान में १८ लोगों की मौत हो गई। इजरायल ने इस दौरान अपने ४ सैनिकों के घायल होने का भी दावा किया है। इस युद्ध का प्रभाव अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर भी पड़ा है। दोनों देशों ने युद्ध रोकने और शांति समझौता करने पर सहमति जताई थी। आज स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता और समझौता तय होना था। लेकिन गुरुवार रात इजरायल के लेबनान पर हमला करने के बाद यह प्रक्रिया बाधित हो गई। अमेरिका और ईरान के इस समझौते में ईरान ने लेबनान के युद्ध को भी शामिल करने का कड़ा रुख अपनाया है, जिससे असमंजस और बढ़ा है।
सूर्य नेपाल प्रीमियर गोल्फ चैंपियनशिप की उपाधि सुबाश तामाङ ने प्लेऑफ़ में भुवन नगरकोटी और सदभाव आचार्य को हराकर हासिल की। उपाधि के साथ ही सुबाश ने 3 लाख 20 हजार रुपये का पुरस्कार प्राप्त किया, जबकि तीनों खिलाड़ियों ने 72 होल का खेल 18-अंडर 270 स्कोर पर पूरा किया। इस सीजन में कुल 10 लाख 33 हजार 500 रुपये जीतकर भुवन नगरकोटी सूर्य नेपाल गोल्फ टूर के नंबर एक खिलाड़ी बनने में सफल हुए हैं।
4 असार, काठमांडू। सूर्य नेपाल गोल्फ टूर 2025–26 के अंतर्गत इस सीजन के अंतिम प्रतियोगिता सूर्य नेपाल प्रीमियर गोल्फ चैंपियनशिप की उपाधि प्लेऑफ़ में सुबाश तामाङ ने जीती। प्लेऑफ़ के पहले होल में उन्होंने भुवन नगरकोटी और शौकिया सदभाव आचार्य को हराकर चैंपियनशिप हासिल की। उन्हें उपाधि के साथ 3 लाख 20 हजार रुपये नगद पुरस्कार मिला। सुबाश, भुवन और सदभाव तीनों ने 72 होल की कुल खेल 18-अंडर 270 पर समाप्त की।
प्लेऑफ़ में सुबाश ने पार खेला जबकि भुवन और सदभाव दोनों ने पार से अधिक स्ट्रोक लिए। इसके साथ ही सुबाश ने चैंपियनशिप समेत उपाधि अपने नाम की। भुवन दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें 2 लाख 6 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। सुबाश ने आज 3-अंडर 69 का स्कोर बनाया। तीसरे होल में बोगी के बाद सातवें होल में बर्डी लगाई और फ्रंट नाइन को इवन-पार 36 पर पूरा किया। उसके बाद 11वें से 13वें होल तक तीन बर्डी के साथ 3-अंडर 33 खेलकर उन्होंने फिनिश किया।
सदभाव ने आज उम्दा प्रदर्शन करते हुए 6-अंडर 66 का स्कोर कार्ड तैयार किया। उन्होंने फ्रंट नाइन और बैक नाइन दोनों में 3-अंडर 33 स्कोर किया। प्लेऑफ़ में पहुंचे सदभाव को शौकिया वर्ग में विजेता घोषित किया गया। उन्होंने राहुल विश्वकर्मा को 8 स्ट्रोक से पराजित किया। आज अंतिम ग्रुप में खेले शुक्र बहादुर राई ने कुल मिलाकर 15-अंडर 273 के साथ चौथा स्थान हासिल किया।
विजेता खिलाड़ियों को सूर्य नेपाल प्रालि के प्रबंध निदेशक गौरव तयाल और एनपिजि के अध्यक्ष रविंद्रमान श्रेष्ठ ने पुरस्कार प्रदान किए। कुल 18 लाख रुपये नकद पुरस्कार राशि वाली इस प्रतियोगिता में शीर्ष 18 प्रो खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार मिले। सूर्य नेपाल गोल्फ टूर 2025–26 के आठ प्रतियोगिताओं के समाप्ति के बाद आगामी सत्र में भुवन नगरकोटी खिलाड़ी नंबर एक बनने के लिए निश्चित हो गए हैं।
खेल के अनुकूल समय न होना और सुरक्षा कड़ाई के कारण काठमांडू और सौराहा के होटल और रेस्तरां में इस बार वर्ल्ड कप फुटबॉल का उत्साह काफी कम नजर आ रहा है।
भारतीय पर्यटकों के आने और रात्रीकालीन व्यवसाय सुविधा के कारण पोखरा के स्पोर्ट्स बार और रेस्तरां में वर्ल्ड कप फुटबॉल की चहल-पहल बढ़ी है।
काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय ने बिना पूर्व अनुमति के बड़े पर्दे पर मैच दिखाने पर रोक लगा रखी है, जिससे व्यवसायी वर्ल्ड कप के लिए विशेष पैकेज नहीं ला पा रहे हैं।
५ असार, काठमांडू। नेपाल में फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक बड़ा उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
डेढ़ महीने तक चलने वाले इस फुटबॉल टूर्नामेंट के प्रति नेपाली समर्थक बेहद उत्साही हैं। वे इतना क्रेजी होते हैं कि अकेले टीवी के सामने बैठने के बजाय दोस्तों, परिजनों और परिवार के साथ मिलकर मैच देखने में आनंद लेते हैं।
अपने पसंदीदा टीम की जर्सी पहनना, चेहरे पर झंडा पेंट करना और समर्थन करने का आनंद लेना नेपाली फैंस की सामूहिक भावना है, जिसे देखते हुए नेपाल के विभिन्न ताजे होटल, रेस्तरां, बार और सार्वजनिक स्थान विशेष माहौल तैयार करते हैं।
वर्ल्ड कप के दौरान आतिथ्य क्षेत्र फुटबॉल विषयक माहौल बनाने के लिए तेज प्रयास करता है। काठमांडू के ताजे और सुविधाजनक होटल अपने लाउंज, गार्डेन या पूलसाइड में बड़े एलईडी स्क्रीन लगाकर मिनी स्टेडियम जैसा अनुभव देते हैं।
मनोरंजन को दोगुना करने हेतु कई होटल और बड़े रेस्तरां लाइव बैंड प्रदर्शन, चियरलीडर प्रदर्शन और दर्शकों को झंडा पेंट करने की सुविधाएँ देते हैं।
खानपान में भी विशेष मेन्यू तैयार किया जाता है, जो वर्ल्ड कप के थीम पर आधारित होता है।
बार और पब में बियर की खरीद पर ‘बकेट ऑफर’ (एक खरीदो, एक मुफ्त या समूहों के लिए छूट), अनलिमिटेड स्नैक्स के साथ इन्ट्री पैकेज और बड़े समूहों के लिए विशेष वीआईपी लाउंज या टेबल आरक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।
सजावट में रेस्तरां विभिन्न देशों के झंडे सजाते हैं और कर्मचारी रेफरी या प्रसिद्ध खिलाड़ी की जर्सी पहनकर सेवा देते हैं।
इस बार का वर्ल्ड कप अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में होने के कारण मैच मध्यरात्रि और सुबह के समय होते हैं।
काठमांडू के ताजे होटल, रेस्तरां, पब और स्पोर्ट्स बार में पिछले संस्करणों की तुलना में कम चहल-पहल देखी जा रही है।
दोस्तों के साथ बड़ी स्क्रीन पर मैच देखना, जोरदार उत्सव मनाना एक चलन था, लेकिन इस बार मुख्य शहरों के आतिथ्य स्थल अपेक्षाकृत शांत हैं, ऐसा व्यवसायी बताते हैं।
सुबह जल्दी होने वाले मैचों के लिए काठमांडू के कुछ रेस्तरां और कैफ़े ‘मॉर्निंग वॉच एक्सपीरियंस’ पैकेज चला रहे हैं जिसमें सुबह कॉफी, बेकरी और नाश्ते के साथ मैच देखने की सुविधा है, किन्तु ग्राहक कम आते हैं।
काठमांडू में उत्साह कम होने का प्रमुख कारण जिला प्रशासन कार्यालय द्वारा जारी एक नोटिस है, जिसमें बिना अनुमति के बड़े समूह में बड़ी स्क्रीन पर मैच दिखाने पर रोक लगाई गई है।
समूह में प्रत्यक्ष प्रसारण के लिए संस्था या कंपनी को पूर्व स्वीकृति लेनी होती है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जिसके चलते व्यवसायी उत्साहित नहीं हैं।
बुद्धनगर के बागमती कॉरिडोर स्थित लोकप्रिय ‘रेल स्टेशन कैफे’ ने भी इस वर्ल्ड कप के लिए कोई विशेष कार्यक्रम नहीं रखा है।
कैफे संचालक केशव पौडेल ने बताया कि मैचों के समय उपयुक्त नहीं होने और वर्ल्ड कप के लिए कोई खास स्कीम नहीं ला पाए। ‘मैच या तो बहुत देर रात होते हैं या सुबह-सुबह, इसलिए कोई विशेष कार्यक्रम नहीं है,’ उन्होंने कहा।
हालांकि कैफे ने नियमित ‘कम्बो ऑफर’ ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराई है।
व्यापार मंदी की वजह से पहले की तुलना में कारोबार में थोड़ा गिरावट आई है, पौडेल ने बताया। ‘व्यापार तो है, लेकिन पहले जैसा नहीं,’ उन्होंने कहा, ‘आर्थिक हालत ने भी व्यापार को प्रभावित किया है।’
सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती ने भी रात में मैच दिखाने में बाधा उत्पन्न की है। रात १०:३० बजे के बाद पुलिस सख्ती करते हैं, जिससे फ़ुटबॉल प्रेमियों की सेवा देना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास बड़े पर्दे होने के बावजूद मैच नहीं दिखा पाए।’
ताजे होटलों में भी कम रौनक
छोटे होटल और रेस्तरां के अलावा बड़े और ताजे होटल में भी चहल-पहल कम है, व्यवसायी बताते हैं।
नक्साल स्थित पांचतारा होटल मैरियट काठमांडू के संचालक शशिकांत अग्रवाल ने कहा कि ज्यादातर मैच रात में होने के कारण होटल ने बाहरी ग्राहकों के लिए कोई विशेष पैकेज या कार्यक्रम नहीं बनाया है।
‘पांचतारा होटल में रात को बहुत देर तक बाहर से ग्राहक नहीं आते,’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए कोई विशेष योजना या कार्यक्रम नहीं है।’
हालांकि, होटल में रहने वाले आंतरिक और बाहरी मेहमानों के लिए हर कमरे में वर्ल्ड कप मैच देखने की व्यवस्था है, जिससे वे अपने कमरे में बैठकर मैच का आनंद ले सकते हैं।
अग्रवाल ने बताया कि फाइनल के लिए कुछ विशेष कार्यक्रम हो सकते हैं, लेकिन बाकी मैचों के लिए कोई खास योजना नहीं है।
सौराहा के होटल में भी समान स्थिति
होटल एसोसिएशन नेपाल (हान)–चितवन चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष तथा जंगल सफारी लॉज संचालक सुमन घिमिरे ने बताया कि इस बार सौराहा के होटल वर्ल्ड कप के लिए कोई विशेष ऑफर नहीं ला पाए हैं।
‘पहले खेल शाम के समय होते थे और रेस्तरां में बड़ी स्क्रीन पर मैच दिखाकर विभिन्न ऑफर देते थे,’ उन्होंने कहा, ‘अब मैच मध्यरात्रि में होने के कारण सार्वजनिक स्थानों पर मैच देखने की स्थिति नहीं है।’
कुछ होटल और रेस्तरां ने आंतरिक तौर पर अपने मेहमानों के लिए मैच देखने की व्यवस्था की है, लेकिन वह सीमित है।
‘लॉबी या सार्वजनिक जगह में टीवी रखना और मैच दिखाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है।’
पहले लोग दोस्तों के साथ रेस्तरां या बार में मिलकर मैच देखते थे, अब बहुत से दर्शक अपने घर या मोबाइल पर मैच देखना पसंद करते हैं।
‘पब्लिक स्क्रीनिंग में कोई दिक्कत नहीं थी, अब कानूनी और अधिकार संबंधी विषयों के कारण आसानी नहीं है, इसलिए अधिकतर लोग घर में ही बैठकर देखना पसंद करते हैं।’
पर्यटन के ऑफ-सीजन होने के कारण सौराहा में विदेशी पर्यटक कम हैं, परन्तु आंतरिक पर्यटकों के आने से व्यापार संतोषजनक है, व्यवसायियों ने बताया।
पोखरा के रेस्तरां और बार में बढ़ी चहलपहल
पर्यटन राजधानी पोखरा में ‘इंडियन सीजन’ के कारण होटल, रेस्तरां और स्पोर्ट्स बार ज्यादा व्यस्त नजर आते हैं। भारत से गर्मी के मौसम में ठंडक का आनंद लेने पर्यटकों की अच्छी आवक है और वर्ल्ड कप युवा वर्ग को आकर्षित कर रहा है तथा रात्रीकालीन व्यवसाय को उत्साहित कर रहा है।
रेस्टोरेंट एंड बार एसोसिएशन नेपाल (रेबान)–पोखरा चैप्टर के अध्यक्ष विश्व पौडेल ने कहा कि पोखरा में भी वर्ल्ड कप फुटबॉल का प्रभाव पड़ा है। इससे स्पोर्ट्स बार, क्लब और रेस्तरां को खासतौर पर फायदा हुआ है।
‘देखा गया है कि 10:45, 12:45 और 3 बजे के मैच आसानी से लोग देख रहे हैं,’ अध्यक्ष पौडेल ने कहा। ‘स्पोर्ट्स बार में बड़ी स्क्रीन पर दोस्त मिलकर मैच देखना बढ़ा है, रेस्तरां देर रात तक खुले रहते हैं।’
युवा वर्ग की इस तरह की गतिविधियों से व्यवसाय में वृद्धि हुई है और भारतीय पर्यटकों की भी अच्छी संख्या है, उन्होंने कहा। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन और पर्यटन मंत्रालय के साथ मिलकर ट्रैफिक और कमरे की व्यवस्थाएँ भी की हैं।
पोखरा होते हुए उत्तरी हिमालयी क्षेत्र, मुक्तिनाथ और अपर मुस्तांग जाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ने से पर्यटकों को आवश्यक जानकारी और प्रबंधन भी किया जा रहा है, उन्होंने बताया।
पहले जैसा व्यापक नहीं : होटल एसोसिएशन
होटल एसोसिएशन नेपाल के अध्यक्ष विनायक शाह ने बताया कि इस बार होटल और रेस्तरां में वर्ल्ड कप के लिए सीमित ऑफर ही मौजूद हैं और पहले जितने व्यापक नहीं हैं।
उनके अनुसार कुछ व्यवसायी ने सीमित पैकेज बनाए हैं, पर व्यापक रूप से फैल नहीं पाए हैं।
समय के अनुकूल न होने और देर रात तक खुलना मुश्किल होने से छोटे और मध्यम वर्ग के रेस्तरां और बार बड़े वर्ल्ड कप ऑफर नहीं ला पाए हैं।
छोटे खुले रेस्तरां से लेकर बड़े ताजे होटल तक सुरक्षा और समय की बाधाओं के कारण ऑफर लाने में कठिनाई रही है, अध्यक्ष शाह ने बताया।
‘ताजे होटल में सुरक्षा कड़ी होती है, इसलिए वहां अंदर मैच दिखाना बेहतर होता है ताकि बाहर शांति बनी रहे।’
फीफा वर्ल्ड कप के बावजूद रात के समय और सुरक्षा संबंधित संवेदनशीलता के कारण नेपाल के आतिथ्य क्षेत्र में इस बार ऑफर सीमित और निश्चित दायरे में ही रह गए हैं, व्यवसायी बताते हैं।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इजरायल और लेबनान के हिज़बुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति हुई है।
इजरायली सैनिक प्रवक्ता ने कहा कि युद्धविराम लागू है, लेकिन आदेश मिलने पर सेना फिर से सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
यह सहमति अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, लेबनान में जारी संघर्ष के नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए की गई है।
शुक्रवार स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष वार्ता होने वाली थी, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया है।
लेबनान ने कहा कि हाल के इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 18 लोग मारे गए हैं, जबकि इजरायल ने बताया कि हिज़बुल्लाह के चार सैनिकों की मौत के बाद वे जवाबी हमले में जुटे थे।
चिन्ताजनक ‘सहमति’
तस्वीर स्रोत, Reuters
इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने हिज़बुल्लाह और इजरायल के बीच हुए युद्धविराम की पुष्टि की है। IDF के प्रवक्ता एफी डेफ्ररिन ने कहा, “हम युद्धविराम की स्थिति में हैं। यदि आदेश मिलेगा तो लड़ाई फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं।”
अमेरिका और ईरान के समझौते के तहत लेबनान में भी युद्ध समाप्त होना था, लेकिन लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इजरायली हवाई हमलों में दक्षिणी क्षेत्र में पिछले रात कम से कम 47 लोग मारे गए।
इजरायली सेना ने कहा कि उनके चार सैनिकों की मौत हुई है और उन्होंने ईरान समर्थित हिज़बुल्लाह को निशाना बनाया है।
इजरायली सैनिकों की मौत पर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इत्मा बेन गविर ने कहा कि पूरा लेबनान जलना चाहिए।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इजरायली हमलों के विस्तार को खतरनाक बताते हुए कहा कि इससे तनाव बढ़ेगा।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी भान्स ने कहा कि स्विट्जरलैंड यात्रा इसी तनाव के कारण विलंबित हुई।
इसी सप्ताह हुई अमेरिका-ईरान समझौते की तकनीकी पहलुओं पर चर्चा के लिए आज स्विट्जरलैंड में वार्ता होनी थी।
लेकिन व्हाइट हाउस ने गुरुवार को घोषणा की कि भान्स वार्ता में नहीं जाएंगे, क्योंकि यात्रा सामान्य या पूर्वानुमेय नहीं है।
समझौते के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी भी हटाई थी।
व्हाइट हाउस की यह घोषणा आने से कुछ घंटे पहले, हिज़बुल्लाह से जुड़े लेबनानी मीडिया ने इजरायली हमलों की वजह से वार्ता के स्थगित होने की खबर दी थी।
ईरान युद्ध में कैसे जुड़ा हिज़बुल्लाह
फरवरी के अंत में ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्यारोपित इजरायली हमले के बाद हिज़बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे थे। इसके बाद मार्च की शुरुआत में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध में लेबनान भी शामिल हो गया।
इजरायल ने पूरे लेबनान में बमबारी की और उत्तर सीमा से हिज़बुल्लाह के लड़ाकों को हटाने के लिए कई क्षेत्रों पर कब्जा किया।
हाल के संघर्ष में लेबनान में कम से कम 3,912 लोग मारे गए और 11,699 घायल हुए हैं, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है।
दक्षिण लेबनान के दर्जनों समुदाय पूरी तरह से तबाह हो गए हैं और लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।
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