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लेखक: space4knews

मोबाइल चोरी के आरोप में पिता द्वारा कुटपिट कर पशुपतिनाथ में हत्या की गई

२ जेठ, काठमाडौं । ६ फागुन २०८२ की शिवरात्रि के अगले दिन पशुपतिनाथ में एक युवक की संदिग्ध मृत्यु हुई। मृत युवक का शव पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में ही मिला था। शव मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल पर मुचलका दर्ज कर जांच शुरू की थी। मृतक के शरीर पर नीला चोट के निशान देखे जाने के कारण मौत संदिग्ध मानी गई और काठमाण्डू उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय की टीम द्वारा भी जांच की गई। जांच के दौरान मृतक की पहचान संखुवासभा जिले के लगभग २५ वर्षीय संतोष गिरी, जिन्हें संतोष परियार भी कहा जाता था, के रूप में हुई। मृतक व्यक्ति पशुपति क्षेत्र में रहकर भीख मांगकर जीवन यापन करता था। शव की स्थिति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुलिस ने हत्या की पुष्टि की।

जांच में जुटी पुलिस ने लगभग चार महीने बाद संतोष की हत्या के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। काठमाण्डू उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय की टीम ने धादिङ के त्रिपुरासुंदरी गाउँपालिका-५ के द्रव्यनाथ बाबा उर्फ सुविन राना मगर को पकड़ा है। उन्हें महोत्तरी के गौशाला नगरपालिका-६ स्थित गौशाला से गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान मोबाइल चोरी का मामला सामने आया है। मृत युवक रात को किन्हीं साथियों के साथ था, इस विषय पर पुलिस और अधिक जांच कर रही है और इस दौरान पिता की संलिप्तता सामने आई।

पुलिस ने एक बाबा को गिरफ्तार किया है, लेकिन भारतीय बाबा अनुपस्थित हैं। चार महीने बाद एक नेपाली बाबा को गिरफ्तार किया गया है, वहीं दूसरे भारतीय बाबा की संलिप्तता भी पुष्टि हुई है। उन्हें अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। घटना के बाद वह भारतीय बाबा भागकर भारत पहुंच गया है, पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी। उक्त भारतीय बाबा का नाम अनुपनाथ बताया गया है। ‘‘भारतीय और नेपाली बाबाओं द्वारा कुटपिट कर हत्या की गई प्रतीत होती है। भारतीय बाबा अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं, लेकिन उनकी पहचान पुलिस लगा चुकी है,’’ जांच अधिकारी ने बताया।

पुलिस ने बताया कि मोबाइल चोरी और अंधविश्वास हत्या के कारण रहे। अब तक की जांच में पता चला है कि मोबाइल चोरी और पशुपतिनाथ क्षेत्र में ‘भोग’ देने से ताकत मिलती है, इस अंधविश्वास के चलते हत्या हुई। शिवरात्रि पर पशुपतिनाथ आए भारतीय बाबा के मोबाइल गायब हो गया था। ‘‘पिता ने ही संतोष गिरी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। इसके अगले दिन संतोष मृत मिला,’’ एक स्रोत ने कहा, ‘‘मोबाइल न मिलने के बाद पिता ने संदेहास्पद को पकड़ कर रात भर प्रताड़ना देकर हत्या की होगी।’’ तांत्रिक शक्ति प्राप्ति के अंधविश्वास के कारण हत्या होने की भी पुलिस ने पुष्टि की है। यह बात गिरफ्तार बाबा ने पुलिस को बताई है।

मेसी के इतिहासिक मैच के लिए अर्जेंटीना की तैयारी

२ असार, काठमाडौं । पूर्व विजेता अर्जेंटीना फिफा विश्वकप २०२६ के अपने पहले मैच में अल्जीरिया के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करते हुए विश्वभर का ध्यान सुपरस्टार लियोनेल मेसी पर केंद्रित होगा। ऐसा क्यों न हो, क्योंकि मेसी इस समय विश्व कप फुटबॉल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं। ३६ वर्षों बाद अर्जेंटीना को विश्वकप ट्रॉफी दिलाने वाली टीम के कप्तान होने के साथ ही वे मैदान पर जादूगर की तरह प्रदर्शन करते हैं। अल्जीरिया के खिलाफ इस मैच में मेसी एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। वे लगातार छठी बार फिफा विश्वकप में खेलने वाले विश्व के पहले फुटबॉलर बनेंगे। इसके अलावा, विश्वकप में उन्होंने सर्वाधिक २६ मैच खेलने का रिकॉर्ड बनाया है और अल्जीरिया के खिलाफ यह मैच उनके करियर का २७वां विश्वकप मैच होगा।

इसके साथ ही, मेसी के लिए एक और व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करने का अवसर है। अल्जीरिया के खिलाफ यह मैच उनके लिए अर्जेंटीना के लिए २००वां अंतरराष्ट्रीय मैच होगा और वे ला अल्बिसेलेस्टे के लिए २०० मैच खेलऩे वाले पहले खिलाड़ी बनेंगे। हाल के समय में हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण मेसी ने मैत्रीपूर्ण मैचों में कम समय खेला है और विश्वकप में पूरी क्षमता से खेलने को प्राथमिकता दी गई है। विश्वकप से पहले आइसलैंड के खिलाफ मैत्रीपूर्ण मैच में उन्होंने दूसरे हाफ में मैदान में प्रवेश कर गोल भी किया था। मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना फिर से विश्वकप ट्रॉफी जीतने के लक्ष्य के साथ अमेरिका पहुंचा है और अल्जीरिया के खिलाफ मैच में एक शानदार शुरुआत करते हुए ट्रॉफी की दौड़ शुरू करेगा। समूह जे में स्थित अर्जेंटीना और अल्जीरिया के बीच यह मैच नेपाली समयानुसार मंगलवार सुबह ६:४५ बजे होगा।

विश्व चैंपियन अर्जेंटीना इस बार विश्वकप में शीर्ष वरीयता में है। जबकि अल्जीरिया २८वें स्थान पर है। इसके अतिरिक्त, अर्जेंटीना इटली और ब्राजील के बाद लगातार विश्वकप जीतने वाला विश्व का तीसरा राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखता है। चार साल पहले कतार में अर्जेंटीना ने विश्वकप ट्रॉफी जीतकर ३६ वर्षों का सूखा खत्म किया था। हालांकि उस संस्करण में पहले मैच में ही उन्हें एशियाई देश सउदी अरब के खिलाफ अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। वह हार अर्जेंटीना के लिए एक महत्वपूर्ण पाठ बन गई और फिर वे बाकी सभी मैच जीतते हुए चैंपियन बन गए थे। इसलिए अल्जीरिया के खिलाफ पहले मैच में अर्जेंटीना इसे हल्के में लेने वाला नहीं है।

सौदी अरबमा सिप परीक्षण बिना कामदार पठाउन नपाइने, सरकार मौन

२ असार, काठमाडौं । अब सिप परीक्षण पास नगर्नेहरूले वैदेशिक रोजगारीका लागि साउदी अरब जान पाउने छैनन्। बुधबारदेखि सिप परीक्षण पास नगरेका कामदारहरू साउदी अरब यात्रा गर्न नपाउने भएका छन्।

साउदी सरकारले नेपाली कामदारका लागि सिप प्रमाणीकरण (स्किल सर्टिफिकेसन) अनिवार्य गरेको छ। नयाँ नियम अनुसार बुधबारदेखि सिप परीक्षा पास नगरेका कामदारहरूले साउदीमा श्रम स्वीकृति प्राप्त गर्न सक्ने छैनन्।

साउदी सरकारले श्रम भिसा प्राप्तिका लागि सिप प्रमाणीकरण कार्यक्रम लागू गरेको जनाएको छ। कामदारहरूले परीक्षा शुल्क ५० अमेरिकी डलर र पूर्वशिक्षा मान्यता (आरपीएल) शुल्क ५० अमेरिकी डलर गरी कुल १०० अमेरिकी डलर (लगभग १५ हजार रुपैयाँ) तिर्नुपर्नेछ।

सिप प्रमाणीकरणका लागि कामदारहरूले ‘स्किल्स भेरिफिकेसन प्रोग्राम’ (एसभीपी) अनलाइनमार्फत आफ्ना आवश्यक प्रमाणपत्रहरू अपलोड गर्नुपर्नेछ।

नेपाल र साउदी अरबबीच गत वर्ष श्रम सम्झौता भएको थियो। उक्त सम्झौतामा श्रम भर्नाको सम्बन्धमा निर्णय अघि संयुक्त प्राविधिक समितिमार्फत छलफल गर्ने व्यवस्था रहेको छ। तर, सिप प्रमाणीकरण कार्यक्रम लागू गर्ने विषयमा दुई देशबीच कुनै औपचारिक छलफल वा सहमति भएको छैन। साउदीले नेपाल सरकारसँगको छलफल वा सहमति बिना एकतर्फी रूपमा निर्णय गरी सिप परीक्षण अनिवार्य गरेको हो।

साउदीको मानव संसाधन तथा सामाजिक विकास मन्त्रालयले जारी गरेको सूचनाअनुसार कामदारको व्यावसायिक दक्षता प्रमाणित गर्न यो कार्यक्रम लागू गरिएको हो। सामान लोड-अनलोड गर्ने, भरिया, ठेला चालक र निर्माण क्षेत्रमा कार्यरत कामदारहरूले पनि सिप परीक्षण गर्नुपर्ने व्यवस्था छ।

सिप परीक्षणका लागि कामदारले साउदीको एसभीपी अन्तर्गत ‘प्रोफेसनल एक्रिडिटेसन’ पोर्टलमा अनलाइन दर्ता गरी शुल्क तिर्नुपर्नेछ। त्यसपछि स्वीकृत परीक्षा केन्द्र र परीक्षा मिति छनोट गर्न सकिनेछ। करिब तीन घण्टाको लामो परीक्षणको नतिजा २४ घण्टादेखि एक साताभित्र प्रकाशित गरिने जनाइएको छ।

सूचनाअनुसार परीक्षामा सहभागी हुने कामदारलाई तीन पटकसम्म अवसर दिइनेछ। तीनपटक असफल भएमा सम्बन्धित कामदारले साउदीमा रोजगारीका लागि जान पाउने छैनन्।

नेपाल वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघले यस निर्णयप्रति असन्तुष्टि व्यक्त गर्दै श्रमिकमाथि थप आर्थिक भार पर्ने र वैदेशिक रोजगारी प्रक्रिया अझ जटिल हुने जनाएको छ।

नेपाल वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघका अध्यक्ष डिक बहादुर खत्रीले यसलाई ‘सिप परीक्षणको नाममा सिन्डिकेट’ भन्दै आलोचना गरेका छन्। उनले यस व्यवस्थाले कामदारलाई उच्च आर्थिक भारमा पुर्‍याउने र अर्को प्रकारको सिन्डिकेट लाग्ने काम भएको बताए।

छिमेकी देशहरू भारत र बंगलादेशको उदाहरण दिंदै उनले भने, ‘भारतमा सिप परीक्षणका लागि २० हजार भारतीय रुपैयाँ लिने गरिन्छ भने बंगलादेशमा ३ हजार ५ सयको रसिद सहित ३० हजार टाका असुली भइरहेको छ। नेपालमा पनि १५ हजार रुपैयाँसम्म तिर्नुपर्ने र एक महिना पर्खनुपर्ने तयारी भइरहेको छ, जुन कामदारको हितमा छैन।’

कतार र अन्य देशमा दशौं वर्ष मेसन जस्ता दक्ष काम गरेर फर्किएका अनुभवी कामदारलाई फेरि १५ हजार तिरेर एक महिना पर्खन र सिप प्रमाणीकरण गर्न बाध्य गर्नु न्यायोचित हुने छैन भन्ने उनको भनाइ छ।

‘लोडिङ-अनलोडिङ जस्ता सामान्य श्रममा जाने कामदारको के सिप परीक्षण गर्ने? यो निकै विवादस्पद र अव्यावहारिक छ,’ खत्रीले भने। उनले यस विषयमा ध्यानाकर्षण गराउन मंगलबार श्रम मन्त्रालयमा संघको टोली पुगेको जनाए। तर, श्रम मन्त्री रामजी यादवले व्यवसायीहरूलाई समय नदिएको पनि खत्रीले बताए।

‘हामीले डेढ घण्टा कुराकानी गर्यौं, तर मन्त्रीज्यूले समय दिनुभएन। उहाँको सचिवालयले विषयको गम्भीरता नबुझेको देखियो,’ उनले भने, ‘बाहिर रोजगारी सुधारका कुरा गरिए पनि भित्र यस्ता सिन्डिकेटलाई प्रोत्साहन मिल्नु राम्रो सन्देश होइन।’

मन्त्रीको सचिवालयमा बुझाइएको ज्ञापनपत्रमा नेपाली दूतावासले सूचना पार्टमार्फत साउदी जाने कामदारलाई सिप प्रमाणीकरण अनिवार्य भएको जानकारी गराएको छ। उक्त नियम लागू हुँदा कामदारले अतिरिक्त शुल्क तिर्नुपर्ने, प्रमाणीकरण प्रक्रियाले थप समय लाग्ने र रोजगारी प्रक्रियामा झन्झट र खर्च बढ्ने अवस्था आउने जनाइएको छ।

साउदीसँग यस विषयमा कूटनीतिक पहल गरी कामदारमैत्री समाधान खोज्न मन्त्रीसँग आग्रह गरिएको छ। यसअघि युएईको प्रहरी रिपोर्ट प्रमाणीकरणको नाममा आर्थिक भार व्यहोर्ने कामदारलाई साउदीको नयाँ नियमले थप पीडित बनाउने बताइएको छ। राज्यले बेलैमा कदम नचाले वैदेशिक रोजगार क्षेत्रमा ठूलो समस्या निम्त्याउने चेतावनी पनि दिइएको छ।

भारत र बंगलादेशमा लागू गरिएको समान व्यवस्थाले पनि कामदारमैत्री नभएको भन्दै नेपालमा यस्तै समस्या दोहोरिन सक्ने चेतावनी संघले दिएको छ।

५ हजार से अधिक औषधि दुकानों के प्रमाणपत्र रद्द (सूची सहित)

२ असार, काठमाडौं। औषधि व्यवस्था विभाग ने निर्धारित समय सीमा के内 नवीनीकरण न कराने वाले देशभर के हजारों औषधि दुकानों के संचालन प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। विभाग ने मंगलवार को जारी सूचना में ५,३०२ औषधि दुकानों के प्रमाणपत्र स्वतः रद्द होने की पुष्टि की है। विभाग के अनुसार, तय कानूनी अवधि के भीतर नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी न करने वाले अनुज्ञापत्र, सिफारिशपत्र और अन्य संबंधित प्रमाणपत्र स्वतः रद्द होने के प्रावधान के अनुसार यह निर्णय लागू किया गया है। इसके साथ ही उक्त औषधि दुकानें अब कानूनी रूप से औषधि बिक्री–वितरण करने के लिए अयोग्य हो गई हैं।

विभाग द्वारा जारी सूचना में सभी संबंधित औषधि दुकानों के संचालकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने प्रमाणपत्र की स्थिति स्पष्ट करें, आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें और भविष्य में औषधि बिक्री-प्रवितरण करते समय कानूनी नियमों और विभागीय निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। २८ जेठ २०८३ तक नवीनीकरण अवधि समाप्त होने के कारण स्वतः रद्द हुए औषधि दुकानों की विस्तृत सूची भी विभाग ने सार्वजनिक की है। सूची देखें–

जोर्डन विश्वकप में डेब्यू करते हुए ऑस्ट्रिया से भिड़ेगा

२ असार, काठमाडौं । एशियाई फुटबॉल टीम जोर्डन ने फीफा विश्वकप २०२६ में पहली बार प्रतिस्पर्धा करने का मौका पाया है और वह अपनी शुरुआत यूरोपीय राष्ट्र ऑस्ट्रिया के खिलाफ करेगा। उत्तर अमेरिका के संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में आयोजित होने वाले इस विश्वकप में चार नई टीमों ने भाग लिया है, जिनमें कुराकाओ और केप वर्डे पहले ही अपना डेब्यू कर चुके हैं। समूह जे में शामिल जोर्डन बुधवार सुबह ९:४५ बजे ऑस्ट्रिया के खिलाफ विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अपनी पहली कदम रखेगा। फीफा रैंकिंग में ऑस्ट्रिया २४वीं एवं जोर्डन ६३वीं स्थिति पर है। विश्व कप में रैंकिंग में ऑस्ट्रिया से नीचे रहकर भी जोर्डन अच्छे परिणाम की उम्मीद रखता है।

ऑस्ट्रिया दो बार विश्वकप सेमीफाइनल तक पहुंची टीम है। १९३४ में पहली बार सेमीफाइनल खेलने वाली ऑस्ट्रिया २० वर्षों बाद १९५४ में तीसरे स्थान पर आई थी। उसके बाद केवल १९८२ में उसने समूह चरण को पार किया था। विश्वकप के इतिहास में सबसे अधिक गोलों से भरे मैच में १९५४ में ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के बीच १२ गोल हुए थे। उस मैच में ऑस्ट्रिया ने ७-५ से जीत दर्ज की थी, जिसमें उसने ३ गोल से पीछड़ने की स्थिति को उलट दिया था। यह पहली बार होगा जब ऑस्ट्रिया विश्वकप में किसी एशियाई टीम के खिलाफ खेल रहा है। जोर्डन ने ५ जून २०२५ को एशियाई क्वालीफिकेशन में ओमान को ३-० से हराकर पहली बार विश्वकप के लिए टिकट सुनिश्चित किया था। जोर्डन के मुख्य कोच जमाल सेलामी १९८६ के फीफा विश्वकप में मोरक्को टीम के सदस्य रह चुके हैं।

गैस की कमी से उपभोक्ता चिंतित, आधा सिलेंडर नीति से समस्या हल होगी या बढ़ेगी?

२ असार, काठमाडौँ। देश के विभिन्न जिलों में खाना पकाने के लिए एलपी गैस की कमी की शिकायतें तेजी से बढ़ गई हैं।

काठमाडौँ उपत्यका के बाहर पहाड़ी इलाकों से लेकर तराई के जिलों तक गैस के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, वहीं विक्रेता और उपभोक्ताओं ने भी समस्याओं का खुलासा किया है।

सरकार ने सभी उपभोक्ताओं को निष्पक्ष रूप से गैस उपलब्ध कराने और आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए ‘आधा सिलेंडर’ नीति लागू की है, लेकिन इससे समस्या हल होने के बजाय और बढ़ गई है, ऐसा व्यवसायी और उपभोक्ता दोनों ने बताया है।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति में जोखिम को ध्यान में रखते हुए नेपाल आयल निगम ने आधा सिलेंडर गैस नीति लागू की थी।

मार्केट में गैस की कमी को कम करने हेतु निगम संचालक समिति की सिफारिश के अनुसार २९ फाल्गुन २०८२ से ७.१ किलो ग्यास भरा गया सिलेंडर बाजार में वितरित किया गया।

पहले यह नीति १५ दिनों के लिए लागू की गई थी, जो अब तीन महीने से जारी है, लेकिन अभी तक इसका पुनर्निरीक्षण नहीं किया गया है। उद्योगों ने इसे संकट टालने के बजाय गैस की कमी पैदा करने वाला कारण बताया है।

पहाड़ी जिले सल्यान, सुर्खेत, गुल्मी से लेकर तराई के जनकपुर और सर्लाही तक गैस न मिलने पर उपभोक्ताओं ने कष्ट झेला है।

गैस आपूर्ति में समस्या होने के कारण कुछ व्यवसायी गैस छिपाकर कृत्रिम कमी पैदा करने की भी आशंका व्यक्त कर रहे हैं।

नेपाल गैस विक्रेता महासंघ ने समस्या को कृत्रिम अभाव नहीं बताया बल्कि आधा सिलेंडर नीति के कारण ढुलाई खर्च बढ़ना और उद्योगों द्वारा मांग के अनुसार पर्याप्त स्टॉक न पहुंचा पाने से उत्पन्न तकनीकी जटिलताओं की वजह से माना है।

महासंघ ने खासकर राजधानी के बाहर दूर-दुर्गम जिलों में ढुलाई लागत अधिक होने को गैस आपूर्ति में देरी का मुख्य कारण बताया है।

जनकपुर में स्थिति

जनकपुर क्षेत्र में एलपी गैस की आपूर्ति में समस्या देखी जा रही है। गैस विक्रेता गणेश झाले ने बाहरी जिलों से गैस आपूर्ति में देरी और ढुलाई खर्च बढ़ने के कारण बाजार में कठिनाइयां आने की बात कही।

‘वीरगंज, बारा और सिमरा से गैस आने में लंबा समय लग रहा है। उद्योगी भेजेंगे तो भी ७ दिन बाद गैस आती है, जिसका अर्थ क्या है?’ उन्होंने कहा, ‘पहले गैस दो-तीन दिन में आती थी, अब बहुत देरी हो रही है।’

उन्होंने कहा कि विक्रेता और उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ा है, और उद्योगी सिर्फ देरी नहीं कर रहे, बल्कि विभिन्न बहाने बना रहे हैं।

‘पूरा सिलेंडर लाने पर भी गाड़ी में लगने वाला तेल उतना ही लगता है, आधा सिलेंडर लाने पर भी तेल उतना ही खर्च होता है,’ उन्होंने बताया, ‘वीरगंज से जनकपुर १५० किलोमीटर है, आने-जाने में ३०० किलोमीटर से अधिक हो जाता है, जिससे तेल और ढुलाई लागत दोगुनी हो जाती है।’

महंगी ढुलाई लागत के कारण उद्योगी नजदीकी इलाकों में गैस प्राथमिकता से बेच रहे हैं, जिससे गैस पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

गुल्मी में स्थिति

सरकार द्वारा सुगम गैस आपूर्ति के उद्देश्य से लागू की गई आधा सिलेंडर नीति पहाड़ी जिले गुल्मी में पूरी तरह विफल साबित हुई है। बढ़ती ढुलाई लागत और तकनीकी समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है।

गुल्मी के गैस विक्रेता मनिराम अर्याल ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में गैस की स्थिति बहुत जटिल और असहनीय है।

आधा सिलेंडर में दबाव कम होने के कारण घरेलू और बड़े उद्योगों में परेशानी आ रही है, उन्होंने बताया।

‘७.१ किलो वाले सिलेंडर में १ से डेढ़ किलो गैस नीचे बच जाती है, जिससे दबाव न हो पाने के कारण काम नहीं चल पाता,’ उन्होंने कहा, ‘यहाँ होटल, रेस्टोरेंट और बेकरी उद्योग विशेष रूप से संकट में हैं, कई लोग कोयला भट्टी की ओर जाने लगे हैं।’

भैरहवा से गुल्मी तक ढुलाई लागत के कारण गैस की कीमत बहुत महंगी हो गई है। अर्याल के मुताबिक, एक आधा सिलेंडर गुल्मी पहुंचते उपभोक्ता को १२५० रूपये खर्च करने पड़ते हैं।

‘भैरहवा से १५० रूपये गाड़ी का भाड़ा लगता है, १०-१० रूपये लोडिंग और अनलोडिंग में खर्च होता है, साथ ही भौगोलिक कठिनाइयों के कारण घर तक पहुंचाने के लिए जीप से १५०-२०० रूपये तक लिए जाते हैं,’ उन्होंने बताया।

सुर्खेत में गैस की मांग दोगुनी

सुर्खेत में भी खाना पकाने के लिए गैस की कमी देखी जा रही है।

सुर्खेत के गैस विक्रेता विनोद दाहाल ने बताया कि बाजार में गैस की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बहुत अधिक है। ‘सुर्खेत में गैस की मांग दोगुनी हो गई है,’ उन्होंने कहा, ‘यह सब आधा सिलेंडर नीति के कारण है।’

दाहाल ने बताया कि पहले मासिक लगभग २५-२६ हजार पूरा सिलेंडर की खपत होती थी, लेकिन अब उसी मांग को पूरा करने के लिए उद्योगों को आधा सिलेंडर भेजना पड़ रहा है।

‘पहले २५-२६ हजार पूरा सिलेंडर लाते थे, अब ५२ हजार आधा सिलेंडर लाना पड़ता है, परंतु ढुलाई साधन कम होने से यह संभव नहीं है,’ उन्होंने कहा, ‘अभी २७-२८ हजार आधा सिलेंडर ही आ रहा है, जो कमी बढ़ा रहा है।’

ढुलाई साधनों की कमी के कारण मांग के अनुसार आधा सिलेंडर आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे उद्योगी और ग्राहक दोनों घाटे में हैं।

सुर्खेत में विद्युत् पोल गिर जाने के कारण लगभग ३५ दिनों तक बिजली सेवा बाधित रही, जिससे उपभोक्ताओं को इंडक्शन की बजाय गैस पर निर्भर होना पड़ा।

महंगी ढुलाई के कारण गैस की कमी: एलपी गैस उद्योग संघ

मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण डीजल की कीमत बढ़ी है और इसलिए ढुलाई भाड़ा महंगा हो गया है, जिससे उद्योगों को भारी नुकसान हुआ है, उद्योग संघ ने बताया।

आधा सिलेंडर वितरण के फैसले से गैस उद्योगी और डीलरों की आमदनी काफी कम हो गई है।

पहले सिलेंडर पर ५८ रूपये कमीशन पाने वाले डीलर अब २९ रूपये पर संतुष्ट हो रहे हैं, वहीं उद्योगी का कमीशन ३१.९० रूपये से घटकर लगभग १६ रूपये हो गया है।

ढुलाई खर्च से मिलने वाली ४५.८८ रूपये की आमदनी भी आधा हो कर २३ रूपये रह गई है। इसके कारण व्यवसाय में कठिनाई आ रही है।

नेपाल एलपी गैस उद्योग संघ ने स्वीकार किया कि पहाड़ी और तराई के जिलों में महंगी ढुलाई के कारण गैस की कमी हो रही है।

भारत से गैस का आयात नियमित होने के बावजूद आधा सिलेंडर गैस भेजने से ढुलाई की लागत दोगुनी हो गई है, जिससे कमी आई है, संघ के अध्यक्ष दिवान चंद ने बताया।

वे बताते हैं कि कैलाली अत्तरिया से बैतड़ी, दार्चुला भेजने में एक ट्रक का भाड़ा १ लाख रूपये तक पहुंच जाता है।

१५ दिन के लिए लागू की गई आधा सिलेंडर नीति तीन महीने से जारी है, जिससे उद्योगों को भारी घाटा हुआ है और इसे कृत्रिम कमी नहीं कहा जा सकता, उनका कहना है।

उद्योगियों का दावा: तराई से भारत की तरफ गैस की तस्करी हो रही है

तराई क्षेत्र में गैस की कमी होने का एक कारण खुली सीमा से भारत की तरफ गैस की तस्करी भी बताई जा रही है।

जनकपुर सहित कुछ खुली सीमा वाले क्षेत्रों से गैस भारत की तरफ जा रही है, ऐसा उद्योगी बताते हैं।

‘पहले डीलर १०० सिलेंडर बेचते थे, अब २००-२५० सिलेंडर की मांग हो रही है,’ उद्योगी ने कहा, ‘मांग बढ़ने का कारण गैस का भारत तक तस्करी होना है।’

भारत में गैस की कीमत बढ़ने और कड़े नियमों के कारण नेपाल की सस्ती गैस भारत में तस्करी हो रही है।

‘भारत में २८ दिन में सिर्फ एक सब्सिडी वाला सिलेंडर मिलता है, उससे ज्यादा लेने पर कीमत बहुत बढ़ जाती है,’ उन्होंने कहा, ‘वहाँ ५ किलो सिलेंडर नीति भी है, नेपाल में आधा सिलेंडर (७.१ किलो) सस्ता मिलने के कारण गैस सीमा से बाहर जाने लगी है।’

भारत ने नेपाल को दी जाने वाली गैस की कोटा कटौती नहीं की है, इसलिए तेल निगम को आधा सिलेंडर नीति खत्म कर पूर्ण सिलेंडर वितरण करने की मांग संघ ने की है।

गैस की कमी नहीं, मांग कम हुई: आयल निगम

बाजार में गैस की कमी होने की चर्चा हो रही है, लेकिन आयल निगम ने गैस आपूर्ति में कोई कमी नहीं होने की बात कही है।

निगम के प्रवक्ता मनोज ठाकुर ने बताया कि के अनुसार गैस की आपूर्ति हो रही है।

‘हमारा कोटा लगभग ४९ हजार ५०० टन है, जो उद्योगी भी ले रहे हैं, हमें आयात में कोई दिक्कत नहीं है,’ उन्होंने कहा।

प्रवक्ता ठाकुर ने दावा किया कि आधा सिलेंडर नीति लागू होने के बाद से गैस की मांग कम हुई है।

‘फरवरी महीने में ५१ हजार टन गैस आई थी, आधा सिलेंडर व्यवस्था के बाद गैस की खपत कम होने लगी,’ उन्होंने कहा, ‘अब मांग घटकर लगभग ३५ हजार टन रह गई है।’

निगम के अनुसार विभिन्न जिलों में दिख रही कमी उद्योगी और वितरकों के बीच आंतरिक समस्या है।

आधा सिलेंडर व्यवस्था को हटाकर पूर्ण सिलेंडर वितरण पर लौटने को लेकर निगम में अभी कोई चर्चा नहीं हुई है, उन्होंने बताया।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के समाप्त होने के संकेत से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिर रही हैं, जिससे भविष्य में कीमतें और कम होने की संभावना है।

निगम और विक्रेता संघ में मतभेद

आयल निगम ने आधा सिलेंडर नीति के तुरंत बाद गैस की मांग और खपत में कमी की बात कही है, लेकिन नेपाल गैस विक्रेता महासंघ ने इसे अस्वीकार किया है।

महासंघ ने बताया कि उपभोक्ता आधा सिलेंडर भरवाने में झंझट मान कर खाली सिलेंडर घर में रखे हुए पूर्ण सिलेंडर के इंतजार में हैं, जो इस कमी का प्रमुख कारण है।

महासंघ के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर अर्याल ने बताया कि जल्दी गैस खत्म हो जाने का डर और ढुलाई में झंझट के कारण उपभोक्ता आधा सिलेंडर भरवाना छोड़ चुके हैं।

‘निगम मांग घटी कहता है, लेकिन असलियत में नहीं है, पूरा सिलेंडर आएगा यह आशा लेकर कई लोग खाली सिलेंडर घर में रखे हुए हैं,’ उन्होंने कहा।

बीच में निगम की ओर से लोडिंग कम देने और भारत से कम आपूर्ति होने के कारण बड़ी उद्योगों को ठीक से गैस नहीं मिल पाई है, महासंघ का तर्क है।

पूर्ण सिलेंडर भरने के निर्णय तक उपभोक्ताओं द्वारा होल्ड किए गए खाली सिलेंडर बड़ी संख्या में बाजार में आने की संभावना है, महासंघ ने निगम को सचेत किया है।

पूरा सिलेंडर में उपयोगी गैस सुनिश्चित करने के लिए रोजाना १०० से १२० वाहन गैस लोडिंग आवश्यक हैं, लेकिन अभी केवल ७०-८० वाहन ही आ रहे हैं, जिससे आपूर्ति प्रबंधन में समस्या आ रही है।

निगम लौटने को तैयार न होने और उद्योगी तथा परिवहनकर्ताओं के लिए आधा सिलेंडर के तकनीकी व आर्थिक भार को वहन करना मुश्किल होने से बाज़ार में गैस की कमी हुई है।

इसका सीधा असर यह हुआ है कि रोजाना उपभोक्ताओं को लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है और उन्हें उच्च कीमत चुकानी पड़ती है।

६० हजार रुपैयाँ घुस सहित चाबहिल नापी कार्यालयका अमिन पक्राउ

२ असार, काठमाडौं । चाबहिलस्थित नापी कार्यालयका २ नं. नापी टोलीका एक अमिन ६० हजार रुपैयाँ घुस रकमसहित पक्राउ परेका छन्। अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोगले मंगलबार अमिन टोपजंग खत्रीलाई सेवाग्राहीसँग घुस लिएको आरोपमा पक्राउ गरेको छ। अमिन खत्रीले हालै जग्गाधनीको पुर्जा बनाइदिन सहजीकरण गर्ने नाममा घुस लिएको सूचना अख्तियारले पाएको जनाएको छ। उक्त सूचनाको आधारमा अख्तियारको कार्यालय टंगालबाट खटिएको टोलीले ६० हजार रुपैयाँ लिइरहेको अवस्थामा उनलाई काठमाडौंको गोकर्णेश्वर नगरपालिका–४ माकलवारीबाट पक्राउ गरेको अख्तियारका प्रवक्ता सुरेश न्यौपानेले बताएका छन्।

बुढानिलकण्ठ और आईएसए नेपाल ने लगातार दूसरी जीत हासिल की

२ असोज, काठमाडौं। बुढानिलकण्ठ नगरपालिका और आईएसए नेपाल ने १०वें राष्ट्रीय महिला खुला बास्केटबॉल चैंपियनशिप में लगातार दूसरी जीत दर्ज की है। नेपाल बास्केटबॉल संघ (नेबा) के आयोजन में कीर्तिपुर कवरडहल में जारी प्रतियोगिता के दूसरे दिन, समूह बी में शामिल बुढानिलकण्ठ ने लुम्बिनी प्रदेश को ५४-२५ के बड़े अंतर से हराया। बुढानिलकण्ठ ने तीन क्वार्टर अपने पक्ष में किए जबकि एक क्वार्टर दोनों टीमें बराबर रहीं। उन्होंने २०-६, १४-१४, १०-३ और १०-२ का प्रदर्शन किया। बुढानिलकण्ठ की लोरिशा गौचन को प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया, वहीं अनुसा मल्ल ने सर्वाधिक ११ अंक बनाए। बुढानिलकण्ठ ने अपने पहले मैच में ग्रांडी स्टार्स को हराया था।

समूह बी के दूसरे मैच में ग्रांडी स्टार्स ने ट्रेनिंग ग्राउंड को ५५-३४ से पराजित कर अपनी पहली जीत हासिल की। ग्रांडी स्टार्स ने इस मैच में १५-६, ९-१४, १७-७ और १४-८ का प्रदर्शन किया। ग्रांडी स्टार्स की विनामनी योन्जन ने १४ अंक बनाकर प्लेयर ऑफ द मैच का सम्मान पाया। पहली जीत के बाद लुम्बिनी को हराने वाली ट्रेनिंग ग्राउंड को यह पहला हरा हुआ मैच रहा।

वहीं, समूह ए से आईएसए नेपाल ने अन्नपूर्ण बास्केटबॉल एसोसिएशन को ४८-२३ से हराकर लगातार दूसरी जीत पाई। आईएसए ने पहला क्वार्टर ५-८ से पिछड़ने के बाद अगले तीन क्वार्टर में १४-६, १५-२ और १४-७ का शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की। खेल में सर्वाधिक १२ अंक बनाने वाली आर्शा राज भंडारी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। मैच से पहले, आईएसए नेपाल ने लेट्स गो बास्केटबॉल एकेडमी को हराया था।

इसी तरह, समूह के दूसरे मैच में सुनसरी ने लेट्स गो बास्केटबॉल एकेडमी को ४१-३३ से हराकर अपनी पहली जीत दर्ज की। सुनसरी ने इस खेल में १२-५, १४-१६, ५-८ और १०-४ का प्रदर्शन किया। आस्था राई को प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया जिन्होंने १२ अंक बनाए।

नेपाल बास्केटबॉल संघ ने एक दशक बाद महिला बास्केटबॉल की राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन किया है। यह प्रतियोगिता साबा महिला बास्केटबॉल चैंपियनशिप के लिए राष्ट्रीय टीम चयन का आधार भी होगी, जैसा कि बास्केटबॉल संघ ने बताया। प्रतियोगिता में आठ टीमें दो समूहों में विभाजित होकर खेल रही हैं। समूह चरण के बाद दोनों समूहों के शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगी। प्रतियोगिता असार ६ तक चलेगी, जिसमें विजेता टीम को ५० हजार और उपविजेता को ३० हजार रुपये पुरस्कार मिलेंगे। इसके अलावा, प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी (एमवीपी) को १० हजार, उदीयमान टीम को १० हजार और उपत्यका के बाहर से भाग लेने वाले उदीयमान खिलाड़ी को ५ हजार रुपये दिए जाएंगे।

तस्वीर: नेबा

‘चीन को समझ है—नेपाल को भी उन शक्तियों के प्रति सजग रहना होगा जो नुकसान पहुँचा सकती हैं’

परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल का चीन दौरा केवल पारंपरिक कूटनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। भारत भ्रमण के बाद बीजिंग पहुंचे उन्होंने बीआरआई के अंतर्गत परियोजनाओं के पीछे की प्रशासनिक अस्थिरता और संस्थागत क्षमता की कमी को उजागर करते हुए ‘अपनी ही व्यवस्था की कमजोरी’ स्वीकार की।

पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भ्रष्टाचार जांच संबंधी चीन की आशंकाओं को दूर करने से लेकर लिपुलेख-लिम्पियधुरा क्षेत्र में भारत और चीन के बीच मानसरोवर समझौते पर नेपाल की कूटनीतिक नोट और चीन के जवाब जैसे संवेदनशील विषयों पर इस बार बीजिंग में महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के संबंधों से लेकर आने वाले पांच वर्षों के भीतर नेपाल-चीन आर्थिक एकीकरण के रोडमैप तक के विभिन्न विषयों पर चीन दौरे पर मौजूद परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल के साथ ऑनलाइन संवाददाता बिनु सुवेदी ने बीजिंग में विस्तृत बातचीत की:

चीन दौरे के औपचारिक कार्यक्रम लगभग समाप्त होने वाले हैं। इस दौरे का आप समग्र रूप में कैसे मूल्यांकन करते हैं?

मेरी दृष्टि से इस दौरे के दो मुख्य उद्देश्य थे। पहला, चुनाव के बाद बने नए सरकार के तहत द्विपक्षीय उच्चस्तरीय यात्राओं का आरंभ होना और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करना। दूसरा, नई सरकार के प्राथमिकताओं को चीनी पक्ष के साथ साझा करना। साथ ही, चीन के साथ पारंपरिक कूटनीतिक नीति को जारी रखने का लक्ष्य भी इस दौरे का हिस्सा था। मुझे लगता है कि औपचारिक और अनौपचारिक मुलाकातों के जरिए सकारात्मक माहौल बनाया गया है।

‘जेन-जी’ आंदोलन के बाद बने नए राजनीतिक नेतृत्व को चीन आपके आने से पहले भी समझने की कोशिश कर रहा था। सरकार के स्वरूप, चीन के साथ निकटता या दूरी को लेकर संदेह थे। क्या आपके दौरे ने उन संशयों का समाधान किया?

चीन की आधिकारिक धारणा है कि नेपाल में जो भी राजनीतिक परिवर्तन आएं, वे नेपाल के साथ काम करना चाहते हैं और पारंपरिक संबंधों की स्थिरता चाहते हैं। मैंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के विदेश विभाग के प्रमुख के रूप में चीनी पार्टी के साथ पहले से संबंध बनाए हुए थे। इसलिए हम चीनी पक्ष के लिए नए नहीं हैं। बाहर कही गई बड़ी संशय की बात नहीं थी। यदि थी भी तो यह दौरा उन्हें स्पष्ट करने और विश्वास के स्तर को बढ़ाने में सफल रहा।

कल आपने परराष्ट्र मंत्रियों से मुलाकात की, और रास्वपा के विदेश विभाग प्रमुख के रूप में चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश विभाग प्रमुख से भी मिले। इन मुलाकातों के अलग-अलग आयाम और अर्थ क्या हैं? आपने कहा कि ‘दूर का रिश्तेदार से ज्यादा नजदीकी पड़ोसी काम आता है।’ इसका संदर्भ क्या था?

वे मंगोलिया दौरे से लौटे थे, उस समय मंगोलिया की ‘तीसरी पड़ोसी’ नीति और अमेरिका के संबंध में बात हुई। उन्होंने नेपाल और मंगोलिया को समान भू-आकृत वाले राष्ट्र मानते हुए बताया कि चीन को नजदीकी पड़ोसी को प्राथमिकता देना चाहिए। “दूर का रिश्तेदार से नजदीकी पड़ोसी काम आता है” का यही संदर्भ था, जिसमें नेपाल को भी ऐसे समझना आवश्यक बताया गया।

रास्वपा सरकार के पश्चिमी देशों की ओर झुकी हुई नीति और एमसीसी, एसपिपी जैसी परियोजनाओं को लेकर चीन की चिंताएं चर्चा का विषय बनीं? क्या इस दौरे में इस विषय को उठाया गया?

बातचीत में एमसीसी और एसपिपी विषय छुआ गया। चीनी पक्ष की समझ है कि कुछ शक्तियां नेपाल का उपयोग कर चीन को नुकसान पहुंचा सकती हैं, इसलिए नेपाल को सजग रहना चाहिए। एमसीसी के तहत सड़क और आधारभूत संरचना निर्माण कार्य प्रगति पर है। एसपिपी जैसी परियोजनाओं में भी गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना आवश्यक बताया गया। हमने स्पष्ट किया कि नेपाल किसी सुरक्षा गठबंधन में नहीं है और निरपेक्ष परराष्ट्र नीति अपनाता है।

तिब्बती शरणार्थी गतिविधियों में वृद्धि को लेकर चीन की चिंता भी रही होगी? इस विषय पर क्या चर्चा हुई?

यह एक पारंपरिक मुद्दा है। संभव है पिछले सरकारों के साथ भी इस पर संवाद होता रहा हो। हमने अपनी पारंपरिक स्थिति दोहराई—नेपाल की भूमि पर चीन के खिलाफ कोई गतिविधि नहीं होगी। यह बात चीनी पक्ष को स्पष्ट कर दी गई। किसी विशेष व्यक्ति के नाम या खुली आरोपों के बिना उन्होंने भी यही अपेक्षा जताई।

क्या बीआरआई के अंतर्गत 10 परियोजनाओं पर चर्चा हुई? योजना कैसे आगे बढ़ेगी? इसके बारे में क्या होगा?

विशिष्ट परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा नहीं हुई, लेकिन बीआरआई से जुड़ी परियोजनाएं कैसे आगे बढ़ाई जा सकती हैं इस पर विचार विमर्श हुआ। हमने मुख्य रूप से कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे के निर्माण पर जोर दिया है।

क्या बीआरआई फ्रेमवर्क समझौते के वित्तीय मोडल पर चर्चा हुई?

फाइनेंसिंग मोडल पर केवल सैद्धांतिक चर्चा हुई। हमें यह स्पष्ट है कि परियोजना चयन और प्राथमिकता महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से कनेक्टिविटी परियोजनाओं में वित्तीय सहमति पर काम हो सकता है।

आप रास्वपा के विदेश विभाग प्रमुख भी हैं और पार्टी की परराष्ट्र नीति निर्माण में सक्रिय हैं। चीन से बीआरआई परियोजनाओं के बारे में आपकी क्या राय है?

बीआरआई परियोजनाएं स्वयं में बुरी नहीं हैं, पर परियोजना का आर्थिक मूल्यांकन और लाभ अहम होता है। कुछ सूचीबद्ध परियोजनाएं अच्छी हैं, लेकिन हर परियोजना को उसकी गुणवत्ता के आधार पर आकलित कर आगे बढ़ाना चाहिए।

अमरगढी स्पोर्ट्स स्टेडियम और झापा के रंगशाला परियोजना पर सरकारी दृष्टिकोण क्या है?

अमरगढी परियोजना बीआरआई से पहले शुरू हुई थी। निवेश बोर्ड के साथ कानूनी और भूमि संबंधी समस्याएं हैं। व्यापार संचालन लागत अधिक होने की संभावना है। इसलिए परियोजना व्यवहार्यता के आधार पर चर्चा होगी।

नेपाल और चीन के बीच व्यापार असंतुलन बहुत बड़ा है। नेपाली वस्तुओं के लिए चीनी बाजार में प्रवेश के लिए कोई पहल हो रही है?

नेपाल चीन से बहुत सी वस्तुएं आयात करता है, लेकिन चीन को निर्यात कम है। चीन ने लगभग 8 हजार उत्पादों पर ड्यूटी फ्री सुविधा दी है, लेकिन हम इसका सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण उत्पादन मात्रा और मानकों का अभाव है।

हमें उच्च मूल्य वाली कृषि निर्यात और औषधीय हर्बल उत्पादों पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए चीन के साथ मिलकर गुणवत्ता परीक्षण और प्रमाण पत्र के लिए प्रयोगशाला बनाने में सहयोग चाहिए। शुरुआत में उपकरण से ज्यादा मानव संसाधन महत्वपूर्ण होगा। चीनी पक्ष इस पर सकारात्मक है।

क्या नेपाल के छोटे-छोटे निर्यातों का चीन के बाजार में निर्यात-आयात कार्य पर प्रभाव पड़ा है?

संभावना है। चीनी बाजार के गुणवत्ता और मात्रा के मानकों को हम पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

हमें उच्च तकनीक और कम वजन वाले सामानों पर ध्यान देकर सप्लाई चेन में जुड़ना होगा। चीन से प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धा करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन वैल्यू चेन और सप्लाई चेन में जुड़कर तकनीक सीखने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावना है।

तकनीक, पर्यटन, निवेश और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नेपाल किस प्रकार का सहयोग चाहता है?

मैंने उच्चस्तरीय व्यापारिक चर्चा में सबसे अधिक पर्यटन क्षेत्र पर जोर दिया है। वर्तमान में नेपाल की अर्थव्यवस्था को जल्दी सुधारने के लिए पर्यटन एक तुलनात्मक रूप से आसान विकल्प है। चीन से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक विदेश जाते हैं लेकिन नेपाल आने वाले केवल लगभग 95 हजार हैं, जो चीनी बाजार का बहुत छोटा हिस्सा है। इसे जल्दी सुधारना जरूरी है।

आधारभूत ढांचे को जोड़ना, आंतरिक नेटवर्क सुधारना, हवाई कनेक्टिविटी की समस्या हल करना और होटल तथा आतिथ्य क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना चर्चा का हिस्सा था। यदि चीनी सरकार सकारात्मक नजरिए से देखेगी तो सहयोग सरल होगा।

नेपाल की पर्यटन प्रचार-प्रसार में कमजोरी है। बीजिंग में भी लोगों को नेपाल के बारे में कम जानकारी है। प्रचार-प्रसार के लिए क्या योजना है?

यह बात मैंने परराष्ट्र मंत्रालय में आने के बाद कई बार सुनी है। नेपाल की चीनी भाषा में सोशल मीडिया पर उपस्थिति थोड़ी कमजोर है। मैं सोशल मीडिया का उपयोग करके ‘चाइना स्पेसिफिक डेस्क’ खोलने का विचार कर रहा हूँ जो प्रचार-प्रसार में मदद करेगा।

हाल ही खत्म हुए निवेश सम्मेलन में चीनी व्यवसायियों ने नेपाल में निवेश के लिए कौन से प्रश्न पूछे?

चीनी व्यापारी विभिन्न संभावनाओं और विशेषकर टेक्नोलॉजी, एआई, स्मार्ट सिटी और पर्यटन क्षेत्र में निवेश दिखाते हैं। कुछ ने दक्षिण एशियाई बाजार और कानूनी ढांचे के बारे में सवाल किए। हमें नेपाल की संभावनाओं को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने की जरूरत महसूस हुई।

निवेश में संपर्क व्यक्ति और कानूनी व्यवस्था की स्पष्टता आवश्यक है। हमारी वित्तीय संबंध भी कमजोर हैं, हमें ‘डेडिकेटेड चाइना डेस्क’ खोलने की जरूरत है।

पिछले उच्चस्तरीय दौरे और परियोजना प्रगति में समस्या कहां देखते हैं?

सबसे बड़ी समस्या प्रबंधन और फॉलो-अप में है। कई परियोजनाएं घोषित होती हैं, लेकिन प्रस्ताव समय पर प्रस्तुत नहीं होते। हमारे सरकारी तंत्र में संस्थागत क्षमता की कमी प्रमुख कारण है।

पोखरा हवाई अड्डा भ्रष्टाचार मामले पर चीनी पक्ष की प्रतिक्रिया क्या थी?

चीनी पक्ष को यह चिंता थी कि कहीं यह मामला चीन की बदनामी करने का प्रयास तो नहीं है। मैंने स्पष्ट किया कि अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जांच कर रहा है और चीनी पक्ष से इसका कोई संबंध नहीं। आवश्यक होने पर तथ्य सहित सहकार्य के लिए तत्पर हैं।

भारत से लौटते ही चीन पहुंचना और संतुलित संबंधों की धारणा पर क्या कहेंगे?

भारत जाना पहले से तय था लेकिन कार्यक्रम रि-स्केड्यूल होने के कारण दो दौरे संक्षिप्त अवधि में हुए। हमारी नीति है कि पड़ोसियों के साथ मधुर संबंध बनाए रखें, लेकिन हर संबंध के अपने आयाम और विशिष्टता होती हैं। मैंने भी इन्हीं लक्ष्यों को लेकर अलग लेकिन समानांतर रूप में संबंधों को विकसित करने का प्रयास किया है।

लिपुलेख, लिम्पियधुरा, कालापानी क्षेत्रों के विवादों में चीन की भूमिका और रुख क्या है?

चीनी पक्ष ने मानसरोवर यात्रा खोलने के पुराने समझौते को स्वीकार किया, लेकिन भारत और नेपाल के बीच इस विषय में संवाद की आवश्यकता बताई। मुख्य धारणा है कि यह मुद्दा द्विपक्षीय है और चीन इसमें हस्तक्षेप नहीं करता। हमने अपनी भौगोलिक चिंता स्पष्ट की।

विदेश मंत्री से मिलने से पहले CPC विदेश विभाग प्रमुख से भी मिले। उस मुलाकात का महत्व क्या था?

पार्टी के दृष्टिकोण से वे मेरे समकक्ष हैं और चीन में पार्टी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। चीन की सरकार पार्टी नेतृत्व में होती है। ऐसी बैठक से पार्टी-से-पार्टी संबंध मजबूत होते हैं।

रास्वपा के सिद्धांत और CPC के मार्गदर्शक सिद्धांत अलग हो सकते हैं, तो संबंध कैसे संभव हैं?

चीनी पक्ष का कहना है कि नेपाल में जो भी पार्टी हो, वे संबंध रखना चाहते हैं, खासकर सरकार में पार्टी होने पर। वे व्यावहारिक अभ्यास और सीखने के आदान-प्रदान के इच्छुक हैं। हमने चीन की आर्थिक प्रगति और विकास से सीखने की इच्छा जताई है।

अंत में, आने वाले पांच वर्षों में नेपाल-चीन संबंधों को आप कैसे देखते हैं?

हमारे बीच राजनीतिक, सांस्कृतिक, जनस्तरीय और भौगोलिक संबंध हैं। आने वाले पांच वर्षों में आर्थिक संबंध और कनेक्टिविटी में विशेष प्रगति होगी। पर्यटन, आधारभूत संरचना, कृषि और औद्योगिकीकरण के क्षेत्रों में भी बड़ा विकास होगा। मुझे विश्वास है कि यह सरकार पिछले पांच वर्षों से अधिक प्रगति करेगी।

झापा छोड़कर कोशी प्रदेश के अधिकांश एमाले जिला अध्यक्ष पुनर्गठन के पक्ष में

२ असार, विराटनगर । प्रतिनिधि सभा निर्वाचन में अप्रत्याशित परिणाम झेलने वाले नेकपा एमाले के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की बहस तेज हो गई है। निर्वाचन समीक्षा और पार्टी पुनर्गठन से जुड़ी चर्चाओं में नेताओं ने केन्द्र से लेकर वडा स्तर तक नेतृत्व में बदलाव की आवाज उठाई है। विराटनगर में मंगलवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक में नेताओं ने कहा कि वर्तमान नेतृत्व के साथ एमाले आगे बढ़ नहीं सकता। बैठक में शामिल कई नेताओं के अनुसार सुझाव संकलन के दौरान अधिकांश जिला अध्यक्ष नेतृत्व पुनर्गठन के पक्ष में थे। इलाम के अध्यक्ष अनुपस्थित थे जबकि झापा के अध्यक्ष प्रेम गिरी ने पुनर्गठन की चर्चा से असंतोष जताया। उन्होंने कहा, ‘पुनर्गठन का मुद्दा जल्दी में उठाने जैसा नहीं है, अभी हाल ही में महाधिवेशन हुआ है, ऐसे समय में जल्दबाजी क्यों?’, ‘निर्वाचन के २-३ महीनों के भीतर मतदाताओं में पश्चाताप शुरू हुआ, इतनी जल्दी पुनर्गठन क्यों?’

एमाले अध्यक्ष केपी ओली के गृह जिले झापा को छोड़कर अन्य जिलों के अध्यक्षों ने वर्तमान नेतृत्व के साथ पार्टी आगे बढ़ाने असंभव बताया है। बैठक में शामिल एक नेता ने कहा, ‘कुछ साथियों ने स्पष्ट कहा, कुछ ने परोक्ष रूप से कहा कि वर्तमान नेतृत्व के साथ आंदोलन आगे नहीं बढ़ सकता।’, ‘यह सवाल केवल अध्यक्ष केपी ओली के लिए नहीं बल्कि सभी नेतृत्व पदाधिकारियों के लिए है।’ एमाले के नेता विनोद ढकाल ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन के गांडीव के न चलने का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान नेतृत्व पार्टी का संचालन नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा, ‘महाभारत युद्ध के बाद वापसी के दौरान अर्जुन का गांडीव काम नहीं आया।’ समीक्षा बैठक में ढकाल ने कहा, ‘यह प्रश्न अध्यक्ष के लिए ही नहीं, बल्कि सभी पांडव (पदाधिकारी) के लिए है जिनकी कार्यकुशलता पर आंदोलन ने सवाल उठाया है।’ उन्होंने कहा कि नेतृत्व की गंभीर समीक्षा कर कदम उठाना आवश्यक है।

अध्यक्ष ओली ने बैठक को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। संबोधन में उन्होंने चुनाव में मिली हार का मुख्य कारण ‘डिजिटल कमजोरी’ बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार द्वारा किए गए विकास और सुशासन की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने में असफलता और विपक्ष द्वारा चलाए गए ‘भ्रमपूर्ण प्रचार’ का प्रभावी प्रतिवाद न कर पाने को हार का प्रमुख कारण माना जाना चाहिए। ओली ने कहा, ‘हमारी सरकार द्वारा किए गए असाधारण कामों के विरुद्ध विपक्ष ने झूठ फैलाया।’, ‘हम सच्चाई का प्रचार नहीं कर पाए और हमारे खिलाफ गलत प्रचार का समय पर खंडन नहीं कर सके।’ पार्टी विरोधी योजनाबद्ध भ्रम फैलाने वाले तत्वों ने एमालेलाई बदनाम करने में भूमिका निभाई, इस बात का भी उन्होंने उल्लेख किया।

एमाले कोशी के अध्यक्ष घनश्याम खतिवड़ा ने समीक्षा बैठक को एमालेलाई बेहतर और जनमैत्री पार्टी बनाने के विषय पर केंद्रित बताया। उन्होंने कहा, ‘कई साथियों ने अपने विचार रखे, सभी का मकसद एमालेलाई बेहतर पार्टी बनाना है।’, ‘एक-दो लोगों ने नेतृत्व पुनर्गठन की भी बात कही।’

फीफा विश्व कप 2026 समूह ‘आई’ के प्रमुख खिलाड़ी

2 असार, काठमांडू। फीफा विश्व कप 2026 के समूह ‘आई’ के तहत कैलिफोर्निया के प्रसिद्ध सैन फ्रांसिस्को स्टेडियम में एक रोमांचक और रणनीतिक मुकाबला आयोजित किया जाएगा। एशियाई शक्तिशाली टीम इराक और यूरोपीय आक्रामक टीम नॉर्वे के बीच प्रतिस्पर्धा होगी। ऐतिहासिक रूप से यह मैच दोनों देशों के लिए एक बड़ा ‘पुनरागमन उत्सव’ माना जा रहा है। इराक ने 1986 में मेक्सिको विश्व कप के बाद 40 वर्षों के अंतराल के बाद पुनः विश्व कप में जगह बनाई है, वहीं नॉर्वे भी 1998 के बाद पहली बार मुख्य विश्व कप प्रतियोगिता में चयनित हुआ है। फ्रांस और सेनेगल जैसे विश्व फुटबॉल के महाशक्तियों के समक्ष समूह ‘आई’ को ‘मौत का समूह’ कहा जा रहा है। नॉकआउट चरण की संभावना बनाए रखने के लिए दोनों टीमों को अपनी शुरुआत के मैच में जीत हासिल करनी होगी।

इराक की टीम अपने डच कोच डिक एडवोकेट की रणनीतिक अनुशासन और मजबूत रक्षा प्रणाली पर निर्भर रहेगी, जो यूरोपीय टीम के लिए चुनौती प्रस्तुत करेगी, जबकि नॉर्वे विश्व के बेहतरीन स्ट्राइकर और प्रीमियर लीग के कप्तान के नेतृत्व में तीन अंक लेने की योजना बनाएगी। इराक और नॉर्वे के बीच फुटबॉल का इतिहास पुराना लेकिन सीमित है। दोनों टीमें अब तक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में केवल एक बार आमने-सामने आई हैं। 2002 में हुए एकमात्र मैत्रीपूर्ण मैच में नॉर्वे ने इराक को 1-0 से हराया था। विश्व कप के मुख्य मंच पर यह दोनों देशों का पहला मुकाबला होगा। खेल के ऐतिहासिक अनुभव और इतिहास को देखते हुए नॉर्वे को मजबूत माना जा रहा है, लेकिन इराक की मेहनती और दृढ़ रक्षात्मक शैली यूरोपीय टीम के लिए कड़ी चुनौती साबित होगी।

देखने योग्य खिलाड़ी
इराक
आयमेन हुसैन (स्ट्राइकर): इराक के मुख्य आक्रमणकारी और प्रमुख गोल स्कोरर आयमेन हुसैन घरेलू क्लब अल-कुवा अल-जाविया से जुड़े हैं। 6 फुट 2 इंच लंबाई वाले 28 वर्षीय हुसैन का अंतरराष्ट्रीय करियर प्रेरणादायक है; उन्होंने एएफसी एशियाई कप और विश्व कप क्वालीफायर में सबसे अधिक गोल करके टीम को यहां तक पहुंचाया है। उनकी शारीरिक ताकत, हवाई क्षेत्र पर प्रभुत्व और पेनाल्टी क्षेत्र में उत्कृष्ट फिनिशिंग क्षमता नॉर्वे की रक्षा पंक्ति को चुनौती देगी।

अली जसिम (विंगर): इराक के 20 वर्षीय युवा सितारा अली जसिम इटली की प्रसिद्ध सीरी ए क्लब कोमो 1907 में खेल रहे हैं। राष्ट्रीय टीम के लिए रचनात्मकता और नवीनता के मुख्य स्रोत माने जाने वाले जसिम के पास तेज गति, उत्कृष्ट ड्रिब्लिंग और कम जगह में भी डिफेंडर को मात देने की क्षमता है। मैदान के विंग पर वे इराक के आक्रमण को गतिशील बनाएंगे।

जलाल हसन (गोलकीपर): इराक के अनुभवी 34 वर्षीय कप्तान जलाल हसन घरेलू क्लब अल-जोरआ के प्रमुख गोलकीपर हैं। 110 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हसन इराक की रक्षा पंक्ति की मजबूत दीवार हैं। वे नॉर्वे के हमलों को रोककर टीम को मजबूती प्रदान करेंगे।

नॉर्वे
एर्लिंग हालैंड (स्ट्राइकर): नॉर्वे के उपकप्तान और विश्व फुटबॉल के घातक गोल मशीन एर्लिंग हालैंड मैनचेस्टर सिटी के प्रमुख आक्रमणकारी हैं। प्रीमियर लीग में लगातार गोल करते हुए गोल्डन बूट जीत चुके 25 वर्षीय हालैंड की शारीरिक ताकत, तेज दौड़ और दोनों पैरों से सटीक फिनिशिंग इराकी डिफेंडरों को पूरे मैच में दहशत में रखेगी।

मार्टिन ओडेगार्ड (मिडफील्डर): नॉर्वे के कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड आर्सेनल एफसी के मुख्य प्लेमेकर हैं। विश्व के श्रेष्ठ मिडफील्डरों में गिने जाने वाले ओडेगार्ड खेल की गति नियंत्रित करते हुए विरोधी रक्षा को सटीक थ्रू-पास से चकमा देंगे और हालैंड के लिए गोल के अवसर बनाएंगे।

एंटोनियो नुसा (विंगर): जर्मनी के आरबी लाइपज़िग के 20 वर्षीय युवा विंगर एंटोनियो नुसा नॉर्वे फुटबॉल के नए चमकते सितारे हैं। उनकी तेज गति, उत्कृष्ट एकल क्षमता और ड्रिब्लिंग काबिलियत है। बाएं विंग से वे रक्षा-पंक्ति में घुसकर पेनाल्टी क्षेत्र में हालैंड को अधिक जगह उपलब्ध कराएंगे।

चीन की कार निर्माता कंपनियों ने शुरू किया अपनी ‘स्मार्ट-ड्राइविंग’ चिप का विकास

२ असार, काठमाडौं । चीन की इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों ने अपनी खुद की ‘स्मार्ट-ड्राइविंग’ चिप डिजाइन करना शुरू कर दिया है। यह विश्व के सबसे बड़े ऑटो मार्केट में ‘कस्टम सिलिकॉन’ (विशेष रूप से निर्मित चिप) उद्योग को नेतृत्व देने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण बनेगा। सोमवार को ‘ली ऑटो’ ने स्वायत्त ड्राइविंग के लिए विशेष रूप से तैयार की गई ५ नैनोमीटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप ‘माक एम१००’ का खुलासा किया। कंपनी के नए ‘एल९ लिविस’ एसयूवी मॉडल के लिए डिज़ाइन की गई इस चिप ने प्रति सेकंड १२८० ट्रिलियन ऑपरेशन (१२८० TOPS) की कम्प्यूटिंग क्षमता दिखाई है, जैसा कि ली ऑटो ने बताया। यह माप एआई प्रणाली द्वारा डेटा को कितनी जल्दी प्रोसेस किया जा सकता है, इसका संकेत देता है। कंपनी ने यह भी बताया कि इस चिप ने ८२ प्रतिशत उपयोग दर (यूटिलाइजेशन रेट) हासिल की है।

यह घोषणा अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों द्वारा प्राप्त सफलता के बीच आई है। कुछ ही सप्ताह पहले, विश्व की अग्रणी ईवी निर्माता ‘बीवाईडी’ ने अपनी ‘सुआन्जी ए३’ नामक ४ नैनोमीटर स्मार्ट-ड्राइविंग चिप का अनावरण किया था, जो अब व्यावसायिक रूप से बड़े पैमाने पर बन रही है। लेवल ३ और लेवल ४ स्वायत्त ड्राइविंग सुविधाओं का समर्थन करने में सक्षम सुआन्जी ए३ के तीन चिप्स एक साथ काम करते हुए २१०० से अधिक TOPS प्रोसेसिंग पावर प्रदान करते हैं, कंपनी ने बताया। उच्च TOPS क्षमता वाहन के कंप्यूटर को राडार और लिडार सेंसरों से आने वाले डेटा को तेजी से प्रोसेस करते हुए सही निर्णय लेने में सहायता करती है।

इसी बीच, ‘नियो’ ने भी अपनी ५ नैनोमीटर ‘एनएक्स९०३१’ चिप पुनः बाजार में लॉन्च की है, जबकि ‘एक्सपेंग’ अगली पीढ़ी की बुद्धिमान ड्राइविंग प्रणाली के लिए अपनी ‘ट्यूरिंग’ चिप विकसित कर रहा है। चीनी कार निर्माता कंपनियां स्वयं चिप डिजाइन कर उन्नत ड्राइवर-असिस्टेंस सिस्टम के हार्डवेयर पर नियंत्रण बढ़ाना चाहते हैं। वे अमेरिकी कंपनी ‘एनविडिया’ और हांगकांग में सूचीबद्ध चीनी ऑटोमोटिव चिप और सॉफ्टवेयर कंपनी ‘होराइजन रोबोटिक्स’ पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।

चीन भर में स्मार्ट-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी आम जनता तक पहुंच रही है जिससे आत्मनिर्भरता के प्रयास तीव्र हो गए हैं। पहले लक्ज़री कारों में सीमित यह तकनीक अब मध्यम से सस्ते वर्ग की कारों में भी उपलब्ध हो रही है। होराइजन रोबोटिक्स की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, २०२५ तक बुद्धिमान ड्राइवर-असिस्टेंस सुविधाओं वाली यात्री कारों का बाजार हिस्सा ६७.६ प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। राजमार्ग तथा शहर क्षेत्रों में स्वतः चलने वाली ‘नेविगेट ऑन ऑटोपायलट’ जैसी मध्यम से उच्च स्तर की प्रणालियों के साथ नई ‘स्मार्ट’ कारों का हिस्सा २०२४ में २१.६ प्रतिशत से बढ़कर २०२५ में लगभग ४२.६ प्रतिशत पहुंच चुका है।

यह बदलाव विशेष रूप से सस्ती कारों में तेज़ी से देखा गया है। २ लाख युआन से कम कीमत वाली कारों में मध्यम से उच्च स्तर की ड्राइवर-असिस्टेंस प्रणाली की पहुंच २०२५ की शुरुआत में ५ प्रतिशत से बढ़कर वर्ष के अंत तक ५० प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। आम बाजार में आए इस बदलाव ने कार निर्माताओं पर बुद्धिमान ड्राइविंग हार्डवेयर की लागत कम करने का दबाव डाला है। गोल्डमैन सैक्ज़ के विश्लेषकों के अनुसार, बीवाईडी की शहरी नो-ऑटो (NOA) सुविधा वाली ‘गॉड्स आई बी’ प्रणाली अब सभी मॉडलों में १२ हजार युआन के अतिरिक्त विकल्प के रूप में उपलब्ध है। इससे बीवाईडी के शहरी NOA मॉडल की शुरुआती कीमत प्रभावी रूप से ७८,८०० युआन तक आ गई है।

बैंक के अनुसार, ‘सीगल’ और अन्य मॉडलों को खरीदने वाले ६० प्रतिशत से अधिक ग्राहक इस पैकेज को चुनते हैं। गोल्डमैन के विश्लेषकों ने बीवाईडी के ताज़ा स्मार्ट-ड्राइविंग प्रयास को “पार्ट्स लागत कम करने और लाभ स्तर सुधारने में सक्षम” बताया है। उन्होंने २०२५ में एनविडिया और होराइजन रोबोटिक्स के कुल सकल मार्जिन क्रमशः ७५ और ६५ प्रतिशत होने का अनुमान भी लगाया है। कार निर्माताओं के लिए खुद के डिज़ाइन किए गए चिप दीर्घकालिक तौर पर पार्ट्स लागत घटाने, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच बेहतर समन्वय करने तथा उत्पादन प्रक्रिया में कंपनी के नियंत्रण को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं। ‘हुआताई सिक्योरिटीज’ के विश्लेषकों ने बीवाईडी की ‘सुआन्जी ए३’ को कार की लागत कम करते हुए स्मार्ट-ड्राइविंग क्षमताओं में उच्च स्तर प्रदान करने वाला बताया है। उन्होंने नियो की इन-हाउस चिप का उदाहरण देते हुए कहा है कि इस कदम ने उत्पादन लागत में सीधे तौर पर १०,००० युआन की कटौती की है।

रास्वपा सांसद दिपककुमार साहले सरकारसँग तीन बुँदे माग राखे

२ असार, काठमाडौं । राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टीका सांसद दिपककुमार साहले यस पटकको बजेटलाई आवश्यकता र दिगो विकासलाई केन्द्रमा राखेर तयार गरिएको दस्तावेजको रूपमा व्याख्या गरेका छन्। मंगलबार प्रतिनिधि सभाको बैठकमा बोल्दै उनले सङ्कुचित सोचभन्दा माथि उठेर समग्र देशको उत्पादन बढाउने बृहत्तर सोचका साथ बजेट आएको बताए। उनले भने कि यो बजेट थिति बसाल्न र राष्ट्र निर्माणको महाअभियानका लागि आफ्नो निर्वाचन क्षेत्रमै केन्द्रित नभई समग्र देशका लागि तयार गरिएको हो। तथापि, नीति र बजेट राम्रो हुँदैमा भुइँसतहको यथार्थमा कुनै परिवर्तन नआएपछि प्रश्न उठेको उनले बताए। उदाहरणस्वरूप राष्ट्रिय गौरवको हेटौंडा–ढल्केबर–दुहवी ४०० केभी प्रसारण लाइन आयोजना उद्धृत गरे।

नेपाल सरकार र विद्युत प्राधिकरणको संयुक्त लगानीमा निर्माणाधीन यो रणनीतिक आयोजनाको अधिकांश कार्य सम्पन्न भइसकेको छ। अब केवल १८ वटा टावरमा तार तान्न बाँकी छ। तर वन क्षेत्रभित्र पर्ने करिब १२ किलोमिटर खण्डमा रुख कटानको स्वीकृति नपाउँदा आयोजनाले अहिले ठप्प जस्तो अवस्था भोगिरहेको छ। यस विषयमा साहले सरकारको ध्यानाकर्षण गराएका छन्।

शासकीय सुधारको १०० बुँदे कार्यसूचीको बुँदा नम्बर ४८ मा यसलाई १०० दिन भित्र सम्पन्न गर्ने लक्ष्य राखिएको थियो भन्दै साहले स्मरण गराए। तर, परिमार्जित प्रारम्भिक वातावरणीय परीक्षण प्रतिवेदन दर्ता भएको ७८५ दिनभन्दा बढी समय हुँदाहुँदै रुख कटान स्वीकृति प्राप्त हुन नसकेको भन्दै उनले सरकारसँग तीनवटा माग राखेका छन्।

  • पहिलो: हेटौंडा–ढल्केबर–दुहवी प्रसारण लाइनको रुख कटान स्वीकृतिको प्रक्रिया तत्काल कुनै बहानाबाजी बिना टुंग्याइयोस्।
  • दोश्रो: राष्ट्रिय महत्वको फाइललाई ७८५ दिनसम्म रोकिएको मुख्य कारण के हो? यस विषयमा निष्पक्ष छानबिन गरी जिम्मेवार पदाधिकारीलाई कानुनी कारबाही अन्तर्गत ल्याइयोस्।
  • तेश्रो: राष्ट्रिय गौरवका 이런 प्रशासनिक अवरोधहरू हटाउन ‘समयसीमा सहितको एकल विन्दु स्वीकृति प्रणाली’ लागू गरियोस्।

साथै साहले राम्रो उदाहरणीय कार्यहरूलाई अवलम्बन गर्न आग्रह गरेका छन्। उदाहरण स्वरूप भारतमा राष्ट्रिय महत्वका प्रसारण लाइन, सडक तथा रेल आयोजना लागि वन स्वीकृतिको प्रक्रिया अनलाइन प्रणालीमा राखिएको छ र सम्बन्धित निकायले तोकिएको समयमा निर्णय नगरेमा स्वतः उच्च तहमा मुद्दा जाने व्यवस्था गरिएको छ।

साहले भने, ‘अबको प्रशासन प्रक्रियामुखी होइन, परिणाममुखी हुन आवश्यक छ। बजेट निर्माण गर्नु मात्र पर्याप्त छैन, त्यसको सफल कार्यान्वयन नै महत्त्वपूर्ण कडी हो।’

फ्रांस और सेनेगल के ऐतिहासिक मुकाबले में एमबाप्पे और साडियो माने की नजरें टिकीं

२ असार, काठमाडौं । फिफा विश्वकप २०२६ के समूह ‘आई’ के सबसे प्रतीक्षित और ऐतिहासिक महत्व के मुकाबले में उपाधि दावेदार फ्रांस और अफ्रीकी पावरहाउस सेनेगल न्यूयॉर्क न्यूजर्सी स्टेडियम में आमने-सामने होंगे। मुख्य कोच डिडिएर डेसचाम्प्स के इस अंतिम विश्वकप अभियान में फ्रांस की टीम एक शानदार शुरुआत करना चाहेगी। वहीं, हाल ही में खेले गए मैत्रीपूर्ण मुकाबले में संयुक्त राज्य अमेरिका के हाथों ३-२ की हार के बावजूद सेनेगल विश्व को फिर से चौंकाने की रणनीति पर काम कर रहा है। हेड-टू-हेड हिसाब से यह मैच विश्वकप इतिहास के सबसे चर्चित और रोमांचक ‘अपसेट’ से जुड़ा हुआ है। २४ साल पहले, २००२ के विश्वकप के उद्घाटन मैच में तत्कालीन चैंपियन फ्रांस को सेनेगल ने १-० से हरा कर पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था, जिसमें पापा बुबा डियोप ने ऐतिहासिक गोल किया था। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल इतिहास में यह दोनों टीमें अब तक केवल एक ही आधिकारिक मुकाबला खेल चुकी हैं। इसलिए २४ साल बाद होने वाली यह दूसरी भिड़ंत फ्रांस के लिए उस ऐतिहासिक हार का बदला लेने और अपनी दबदबा कायम करने का मौका है, जबकि सेनेगल इतिहास दोहराने की पूरी कोशिश में है।

देखने लायक खिलाड़ी
फ्रांस के किलियन एमबाप्पे (स्ट्राइकर) : फ्रांस के कप्तान और विश्व फुटबॉल के सबसे खतरनाक फारवर्ड किलियन एमबाप्पे, जो रियल मैड्रिड के प्रोफेशनल फुटबॉल खिलाड़ी हैं, इस सीजन अब तक ४२ गोल कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ५६ गोल का स्कोर रखने वाले २७ वर्षीय एमबाप्पे राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक ओलिवियर जिरुड के ५७ गोल के केवल एक गोल पीछे हैं। उनकी अद्भुत गति और ‘फिनिशिंग’ क्षमता सेनेगल के लिए मैच के दौरान सबसे बड़ी चुनौती होगी।
माइकल ओलिस (मिडफील्डर) : जर्मन दिग्गज बायर्न म्यूनिख की ओर से खेल रहे २५ वर्षीय माइकल ओलिस फिलहाल फ्रांसीसी टीम के सबसे स्वरूप में खिलाड़ी हैं, जिन्होंने इस सीजन क्लब के लिए २६ असिस्ट दिए हैं। हाल ही में उत्तर आयरलैंड के खिलाफ वार्म-अप मैच में शानदार हैट्रिक करते हुए उन्होंने अपनी विस्फोटक फुटबॉल प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। मिडफील्ड से एमबाप्पे को आक्रमणीय बल प्रदान करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।

सेनेगल के साडियो माने (फॉरवर्ड) : सेनेगल के ३४ वर्षीय लेजेंडरी स्टार साडियो माने सऊदी प्रो लीग के क्लब अल नासर से जुड़े हुए हैं। उम्र बढ़ने के बावजूद वह देश के लिए महत्वपूर्ण मैचों और दबावपूर्ण मंचों पर जादुई प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। टीम को काउंटर अटैक में आगे बढ़ाने और फ्रांस की मजबूत रक्षा को तोड़ने में उनका अनुभव और नेतृत्व सेनेगल की रीढ़ बनेगा।
मैच की तारीख और समय: ३ असार, सुबह १२:४५ बजे।

परराष्ट्रमंत्री शिशिर खनाल ने चीनी व्यवसायियों से नेपाल में निवेश का आग्रह किया

२ असार, काठमाडौं। परराष्ट्रमंत्री शिशिर खनाल ने चीनी निवेशकों से नेपाल में निवेश करने का आह्वान करते हुए ‘पार–हिमाली’ क्षेत्र की समृद्धि में योगदान देने का आग्रह किया है। चीन के चार दिवसीय औपचारिक दौरे पर मौजूद मंत्री खनाल ने मंगलवार को बेइजिंग स्थित नेपाली दूतावास द्वारा आयोजित निवेश सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। मंत्री खनाल ने नेपाल के आर्थिक अवसरों और जनसांख्यिकीय सामर्थ्य को उजागर करते हुए कहा कि नेपाल सरकार एक सक्षम और व्यवसाय मित्रवत वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

चीन में नेपाली राजदूतावास द्वारा चीनी निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित सम्मेलन के दौरान उन्होंने चीनी व्यवसायी, उद्यमी और निवेशकों से भी मुलाकात की। इस मौके पर नेपाल में उपलब्ध निवेश के अवसरों पर नेपाल निवेश बोर्ड के प्रतिनिधि ने प्रस्तुतीकरण किया। वहीं, मंत्री खनाल ने मंगलवार को बेइजिंग में चीन की चीनी जनराजनीतिक परामर्श सम्मेलन की राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष वांग हुनिंग से भी बातचीत की। –रासस