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लेखक: space4knews

मन्त्री पोखरेल ने एन्फा के निलंबन को हटाने के लिए फीफा के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा

शिक्षा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने बताया है कि एन्फा के निलंबन को हटाने के लिए फीफा के साथ निरंतर संवाद जारी है। मंत्री पोखरेल ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “अब होने वाले साफ चैंपियनशिप फुटबॉल में कोई समस्या न हो इसके लिए हम पूरी तैयारी कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि सरकार ने खिलाड़ियों के लिए १० करोड़ रुपये नकद पुरस्कार की घोषणा की है और एशियन गेम्स में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के लिए अतिरिक्त खर्च की भी व्यवस्था की गई है।

मंत्री पोखरेल ने कहा कि फीफा के साथ ईमेल के माध्यम से बातचीत हो रही है और “बाहर से देखने पर ऐसा लग सकता है कि सरकार ने कुछ नहीं किया है, लेकिन मैं मंत्री के तौर पर लगातार संवाद कर रहा हूं और हम एक रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि एन्फा के नेतृत्व में खिलाड़ियों या फुटबॉल को समझने वाले व्यक्ति का होना आवश्यक है।

मंत्री पोखरेल ने दावा किया कि पिछली सरकार द्वारा जिन कामों में देरी हुई थी, वे थोड़े समय में पूरे किए गए हैं। उन्होंने कहा, “हम आए चार महीने हो गए हैं, हमने खिलाड़ियों के लिए १० करोड़ रुपये नकद पुरस्कार की घोषणा की है। वर्षों तक न किए गए काम हमने चार महीनों में कर दिखाए हैं। खिलाड़ियों को इससे खुशी हुई है।” उन्होंने बताया कि एशियन गेम्स में जाने वाले खिलाड़ियों के लिए कुछ अतिरिक्त खर्च भी उपलब्ध कराकर उन्हें भेजा जाएगा।

नास-आईटी यूरोप में ‘नेपाल टेक रोड शो यूरोप-2026’ आयोजित करने जा रहा है

नेपाल एसोसिएशन फर सॉफ्टवेयर एंड आईटी सर्विसेज कंपनिज (नास-आईटी) भाद्र 21 से आश्विन 5 तक यूनाइटेड किंगडम और स्विट्जरलैंड में ‘नेपाल टेक रोड शो यूरोप-2026’ आयोजित करने जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नेपाली आईटी कंपनियों को यूरोप के निवेशकों और तकनीकी समुदाय से जोड़ना तथा नेपाल को विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करना है।

नास-आईटी के अध्यक्ष गौरव पांडे ने कहा, “यह रोड शो नेपाली कंपनियों को नए बाजार, साझेदार और दीर्घकालीन व्यापारिक संबंध बनाने का अवसर प्रदान करेगा।” इससे पहले, सन् 2025 में ऑस्ट्रेलिया और सन् 2026 में अमेरिका में ऐसे रोड शो आयोजित किए गए थे।

रोड शो का पहला चरण 6 से 12 सितंबर तक यूनाइटेड किंगडम में होगा। इसका मुख्य कार्यक्रम 9 सितंबर को लंदन स्थित रेडिसन ब्लू होटल लंदन हीथ्रो में शाम 5 बजे से शुरू होगा। दूसरा चरण 13 से 21 सितंबर तक स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जाएगा, जहां मुख्य कार्यक्रम 16 सितंबर को ज्यूरिख स्थित होटल सेंट गॉठार्ड में शाम 5 बजे होगा।

कार्यक्रम में नास-आईटी की 17 से अधिक सदस्य कंपनियां अपनी सेवाएं और तकनीकियाँ प्रस्तुत करेंगी। वर्तमान में नेपाल का आईटी उद्योग तीव्र गति से बढ़ रहा है, जहां 1 लाख से अधिक कुशल जनशक्ति कार्यरत है।

एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री हिक्मत कार्की को क्यों नहीं हटा पाए

कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री हिक्मतबहादुर कार्की ने पार्टी के नेताओं के ‘इस्तीफा देने’ के दबाव को मानने से इनकार किया है। नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी ओली का संदेश लेकर उनसे मिलने वाले नेता, नेकपा एमाले के सचिव शेरधन राई ने यह जानकारी दी है। साउन ९ को, नेकपा एमाले अध्यक्ष ओली और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ के बीच यह सहमति बनी कि सात में से पांच प्रदेश सरकारों के नेतृत्व में एक-दूसरे का सहयोग किया जाएगा, जिसमें कोशी प्रदेश का नेतृत्व एमाले को मिलने का निर्णय हुआ था। इसी सहमति को लागू करने के लिए नेतृत्व का संदेश लेकर राई कोशी प्रदेश पहुँचे थे, जो पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के कोशी प्रभारी भी हैं।

“केन्द्रीय अध्यक्ष ने स्पष्ट निर्देश भी दे चुके हैं, ऐसे में हम तीनबिंदु सहमति और अध्यक्ष के निर्देश को लागू करने के लिए चर्चा कर रहे हैं,” राई ने कहा। वहीं, मुख्यमंत्री कार्की, जो स्वयं पार्टी के सचिव भी हैं, ने कहा कि पार्टी ने उनसे इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा है, बल्कि केवल कुछ नेताओं ने ऐसा कहा है। उन्होंने बताया, “प्रदेश के प्रभारी [राई] मेरे समकक्ष सचिव पद पर आकर इस्तीफे की बात करने लगे। मैंने कहा कि ‘आपकी बात पार्टी का निर्णय नहीं है। पार्टी की संस्थागत प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष द्वारा लिखित निर्देश आएँगे तभी संभव होगा।’” कार्की ने कहा कि उन्होंने राई को जवाब दिया है कि अभी इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं है।

एमाले अध्यक्ष ओली का निर्देश लेकर कोशी प्रदेश आए राई ने कहा कि उन्होंने कार्की के साथ वर्तमान मुख्यमंत्री के कार्यकाल को जारी रखने या नए व्यक्तियों को अवसर देने पर चर्चा की है। “अब उनकी निरंतरता और नए साथियों को पालो देने के विषय में हम थोड़ी चर्चा कर रहे हैं,” उन्होंने कहा। “वर्तमान मुख्यमंत्री लंबे समय से पद पर हैं, इसलिए अब नए साथियों को अवसर देना या उनका पालोपन विचाराधीन है। लंबे अनुभव वाले साथी भी हैं, इस पर विचार किया जा रहा है।” कार्की के दो वर्ष से मुख्यमंत्री रहने के कारण अन्य नेताओं का तर्क है कि उन्हें हटाकर नए नेताओं को मौका दिया जाना चाहिए, जबकि कार्की का तर्क है कि ऐसा करने से अस्थिरता होगी।

प्रदेश सभा के मुख्यमंत्री का कार्यकाल लगभग एक वर्ष ही शेष रहने के कारण कार्की का कहना है कि सरकार में बदलाव नहीं होगा। कार्की ने पार्टी से इस्तीफे के लिए संस्थागत निर्णय की मांग की है। “संस्थागत प्रक्रिया से हुआ निर्णय स्वीकार्य होगा,” कार्की ने मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष से संवाद के लिए काठमांडू जाने से पहले कहा। हालांकि पार्टी के अंदर दबाव होने के बावजूद, नेताओं का कहना है कि अध्यक्ष ओली ने प्रदेश सरकार में बदलाव के संबंध में कोई बैठक नहीं बुलाई है। कोशी प्रदेश एमाले समिति के अध्यक्ष घनश्याम खतिवड़ा ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से बातचीत के लिए काठमांडू बुलाया है। यह बातचीत के बाद एक निष्कर्ष निकलेगा और प्रदेश सरकार आगे बढ़ेगी, यह पूर्व मुख्यमंत्री राई का विश्वास है।

बांग्लादेश में जबरन गायब करने वालों को मौत की सजा का प्रस्ताव

बांग्लादेश सरकार ने जबरन गायब करने वालों को मौत तक की सजा देने वाले कानूनी प्रावधान सहित एक विधेयक पेश किया है। जांच आयोग की रिपोर्ट के अनुसार शेख हसीना के १७ साल के शासनकाल में १५६९ से अधिक व्यक्ति जबरन गायब हुए थे। प्रस्तावित विधेयक में दंडित की संपत्ति से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का प्रावधान भी शामिल होगा। १९ साउन, ढाका (रासस/एएफपी)।

सरकार ने जबरन गायब करने की घटनाओं में शामिल लोगों को मौत की सजा तक देने के लिए कानूनी प्रावधान आगे बढ़ाया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन में १५०० से अधिक लोग गायब होने के आधिकारिक जांच के बाद यह विधेयक तैयार किया गया है। २०२४ के जनविद्रोह और सत्ता परिवर्तन के बाद गठित जांच आयोग ने शेख हसीना के १७ वर्ष के शासनकाल में कम से कम १५६९ लोगों के जबरन गायब होने का आंकड़ा जुटाया था।

आयोग के अनुसार, उनमें से २५१ लोग अभी भी लापता हैं और उन्हें मृत माना गया है। सरकार द्वारा तैयार किया गया ‘जबरन गायब करने की रोकथाम और उपचार अधिनियम’ संबंधी विधेयक अभी संसद में पारित होना बाकी है। मंत्रिपरिषद् ने सोमवार रात स्वीकृत मसौदे में जबरन गायब कर पीड़ित की मृत्यु होने पर दोषी को मौत की सजा तक देने का प्रस्ताव रखा है।

प्रस्तावित कानून में पीड़ित परिवार को दोषी व्यक्ति की संपत्ति से मुआवजा देने की व्यवस्था भी रखी गई है। शेख हसीना पर अपने शासनकाल में असहमति दबाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों का उपयोग करने का आरोप लगा रहा है। विशेष रूप से उनके राजनीतिक विरोधी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर गायब कराने का आरोप जांच आयोग ने उल्लेख किया है।

फरवरी २०२६ में हुए चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बने तारिक रहमान ने हसीना शासनकाल में देखी गई राज्य-समर्थित हिंसा को समाप्त करने का संकल्प व्यक्त किया है। अधिकारों की ओर समर्पित संस्थाओं के अनुसार, शेख हसीना सत्ता से हटने के बाद भी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, कमजोर कानून के क्रियान्वयन और दंडहीनता के माहौल के कारण बांग्लादेश में हिंसक घटनाएं चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं।

७८ वर्षीय शेख हसीना फिलहाल भारत में निर्वासन में हैं।

धनकुटा में प्रतिबंधित खैरो हेरोइन के साथ एक व्यक्ति गिरफ्तार

धनकुटा नगरपालिका-१ के हिले क्षेत्र से पुलिस ने ३२ वर्षीय हरि तामाङ को प्रतिबंधित खैरो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तामाङ के पास से लगभग १ ग्राम ६८० मिलीग्राम वजन के १८ पैकेट लागूऔषध बरामद किए हैं। गिरफ्तार तामाङ को जिल्ला अदालत से म्याद बढ़ाकर आगे की जांच जारी है। १९ साउन, धनकुटा।

प्रतिबंधित लागूऔषध खैरो हेरोइन के साथ एक व्यक्ति को धनकुटा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जिल्ला प्रहरी कार्यालय धनकुटा तथा प्रहरी चौकी हिले की संयुक्त पुलिस टीम ने धनकुटा नगरपालिका वडा नं १ के हिले क्याम्पस के समीप सड़क पर संदिग्ध रूप से घूम रहे व्यक्ति की जांच के दौरान खैरो हेरोइन बरामद की है। गिरफ्तार व्यक्ति पाख्रिबास नगरपालिका वडा नं. ७ मुगा टोल का निवासी ३२ वर्षीय हरि तामाङ है।

उनकी तलाशी लेने पर पुलिस ने उनके गोजी में छुपाए गए हरे रंग के प्लास्टिक में पैक किया हुआ खैरो हेरोइन जैसा रेशेदार पदार्थ पाया, जिसकी जानकारी जिल्ला प्रहरी कार्यालय धनकुटा की सूचना अधिकारी, प्रहरी नायब उपरिक्षक हेमन्त भण्डारी क्षेत्री ने दी। उनके मुताबिक, उक्त पदार्थ १८ छोटे-छोटे पैकेटों में था, जिसमें प्लास्टिक सहित कुल वजन १ ग्राम ६८० मिलीग्राम और प्लास्टिक को हटा कर १ ग्राम आसपास का था।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार तामाङ के विरुद्ध लागूऔषध सम्बन्धी आरोप में जिल्ला अदालत धनकुटा से म्याद बढ़ा कर जांच जारी है।

सोफी वुड्स: २९ दिनों में २,००० किलोमीटर लंबे आल्प्स मार्ग को दौड़ कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली धाविका

अल्ट्रा-दौड़ की धाविका के रूप में प्रसिद्ध सोफी वुड्स ने विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले ‘भीआ आल्पिना’ मार्ग को दौड़कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। उन्होंने मात्र २९ दिनों में २,००० किलोमीटर की दूरी पूरी की। इस दौड़ में आठ देशों को छुआ गया।

सोफी वुड्स ने बताया, “आईवीएफ के प्रयासों के बावजूद संतान नहीं हो पाने के बाद मैंने जीवन को एक नए नजरिए से देखना शुरू किया।” ‘भीआ आल्पिना’ मार्ग पर दौड़ने का निर्णय लेकर वे एक नया कीर्तिमान बनाने में सफल रहीं। यह मार्ग आल्प्स पर्वत की पूरी क्षेत्रफल में फैला हुआ है और इसमें १२ गुना सगरमाथा की ऊंचाई के बराबर चढ़ाई-उतराई जैसी चुनौतियां हैं।

न्यूज़ीलैंड की सोफी वुड्स और उनकी टीम को डबल गर्म हवाओं, आंधी और हॉर्सफ्लाई नामक जंगली मच्छरों का सामना करना पड़ा। आग लगने के कारण मार्ग बदलना पड़ा, जिससे पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी और २०० मीटर जोखिम भरी चढ़ाई जुड़ी।

अमेरिका में दूषित खाद्य पदार्थों से फैले संक्रमण से दो की मौत

समाचार सारांश
मिशिगन राज्य, अमेरिका में दूषित खाद्य पदार्थों के कारण फैले साइक्लोस्पोरियासिस संक्रमण से दो लोगों की मौत हुई है। मिशिगन स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के अनुसार मृतकों को पूर्व में ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं। संक्रमण का मुख्य स्रोत अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन टेलर फार्म्स के उत्पादों से कई मरीज जुड़े हुए हैं।

१९ साउन, काठमांडू। अमेरिका के मिशिगन राज्य में दूषित भोजन से फैलने वाले साइक्लोस्पोरियासिस संक्रमण से दो लोगों की मृत्यु हुई है। मिशिगन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने सोमवार को इस संबंध में पुष्टिकरण किया। यह फूडबोर्न बीमारी के कारण पहली बार हुई मौत का मामला है। अमेरिका में हजारों लोग इस रोग से प्रभावित हुए हैं। संक्रमण के स्रोत और प्रसार के तरीके को संघीय अधिकारी अभी तक खोजने में सफल नहीं हुए हैं।

मृतकों के चिकित्सा रिकॉर्ड के बारे में मिशिगन स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग ने सोमवार को बताया, ‘मृतकों को पहले से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं, तथा साइक्लोस्पोरियासिस के साथ-साथ डिहाइड्रेशन ने भी असर डाला हो सकता है।’ सामान्यतः स्वास्थ्य विशेषज्ञ साइक्लोस्पोरियासिस को जानलेवा बीमारी नहीं मानते हैं। यह संक्रमण पहली बार जून के अंत में मिशिगन में दिखाई दिया था। तब से रोगी संख्या लगातार बढ़ रही है।

सीडीसी के अनुसार अमेरिका भर में 11,000 से अधिक संक्रमित मामले हैं, लेकिन सभी का पंजीयन नहीं होने से संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। संक्रमण का मुख्य स्त्रोत अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, परन्तु टेलर फार्म्स द्वारा उत्पादित ताजे सब्जियों से जुड़े कई संक्रमित पाए गए हैं। टेलर फार्म्स के उत्पाद टाको बेल में बेचे जा रहे थे। जुलाई के मध्य में टेलर फार्म्स ने मेक्सिको से आयातित आइसबर्ग लेटस को वापस बुलाया था। टाको बेल ने यह भी घोषणा की है कि वह टेलर फार्म्स की लेटस का उपयोग नहीं करेगा।

सीडीसी के मुताबिक साइक्लोस्पोरियासिस एक पेट से संबंधित रोग है और यह आमतौर पर गर्मियों में फैलता है। दूषित मल और दूषित भोजन के संपर्क में आने से यह रोग फैलता है। कच्चे फल और सब्जियां इसके मुख्य स्रोत मानी जाती हैं। संक्रमण होने पर दस्त, पेट में गैस, वजन घटना, पेट दर्द, थकान और उल्टी जैसे लक्षण दिखते हैं। इसके इलाज में एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है। कभी-कभी बिना इलाज के भी लक्षण खुद ही ठीक हो जाते हैं।

भीमदत्त बहुप्राविधिक शिक्षालय के करार कर्मचारियों ने प्रशासन और लेखा विभाग में ताला लगाया

बैतीडी के पाटन में स्थित भीमदत्त बहुप्राविधिक शिक्षालय के करार कर्मचारियों ने अपनी मांगें पूरी कराने के लिए प्रशासन और लेखा विभाग में ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया है। सीटीईभीटीअंतर्गत देश भर में काम करने वाले कर्मचारियों ने सामाजिक सुरक्षा और सेवा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया है। शिक्षालय के सूचना अधिकारी महेशराज भट्ट के संयोजन में गठित संघर्ष समिति ने 20 से अधिक करार कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हुए यह आंदोलन आगे बढ़ाया है।

आज दोपहर 2 बजे प्रशासन और लेखा विभाग में ताला लगाया गया है। प्राविधिक शिक्षा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (सीटीईभीटी) के अंतर्गत कार्यरत करार, मासिक एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने यही आंदोलन शुरू किया है। इसी क्रम में पाटन स्थित भीमदत्त बहुप्राविधिक शिक्षालय में आज तालाबंदी की कार्रवाई की गई, जिसकी जानकारी शिक्षालय के सूचना अधिकारी महेशराज भट्ट ने दी है।

भट्ट के संयोजन में बनायी गई संघर्ष समिति ने सामाजिक सुरक्षा और सेवा सुनिश्चित करने की मांग के तहत चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा घोषित की है। इस प्राविधिक शिक्षालय में 20 से अधिक करार कर्मचारी कार्यरत हैं और सामाजिक सुरक्षा तथा सेवा की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए आंदोलन को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

गण्डकी प्रदेश द्वारा गाँजा खेती के कानूनी रास्ते खुलने के बावजूद बने हुए हैं अनेक चुनौतियाँ

गण्डकी प्रदेश के प्रदेश प्रमुख ने सोमवार को प्रमाणीकरण की गई ‘गाँजासम्बन्धी विधेयक’ अन्य लागू कानूनों के साथ تضاد हो सकता है, इस बात को लेकर विभिन्न स्तरों से चिंता व्यक्त की जा रही है। वहीं, संघीय सरकार के कानून मंत्रालय के अधिकारीयों ने कहा है कि इस विषय पर अध्ययन जारी है।

विधेयक प्रमाणीकरण के बाद गण्डकी प्रदेश सरकार के अधिकारी यह कह रहे हैं कि गाँजा खेती के लिए कानूनी रास्ता खुल गया है, लेकिन कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने इसे “संघीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप न होने” के चलते लागू करना चुनौतीपूर्ण होने का निष्कर्ष दिया है। कानून मंत्रालय के सचिव पार्श्वर ढुङ्गाना के अनुसार, तीनों स्तर की सरकारों द्वारा बनाए गए कानूनों के बीच तालमेल के अध्ययन की जिम्मेदारी कानून मंत्रालय को सौंपी गई है।

गण्डकी प्रदेश की उद्योग एवं पर्यटन मंत्री यशोदा रिमाल ने बताया कि कुछ दिनों के भीतर इस संबंध में जानकारी राजपत्र में प्रकाशित होगी। “राजपत्र में आने के बाद यह कानून बन जाएगा और उसके अनुसार नियमावली तथा निर्देशिकाएँ तैयार की जाएँगी। इसके बावजूद, विधेयक प्रमाणीकरण के बाद औषधीय तथा औद्योगिक प्रयोजनों के लिए गाँजा खेती का मार्ग खोलने वाला माना जा सकता है,” उन्होंने कहा। गण्डकी प्रदेश प्रमुख डिल्लीराज भट्ट ने प्रदेशसभा द्वारा हाल ही में पारित किए गए गाँजा सम्बन्धी विधेयक को सोमवार को प्रमाणीकरण किया था।

कानूनी दृष्टि से लागुऔषध ऐन, २०३३ अब भी लागू है और नेपाल संयुक्त राष्ट्र संघ की लागुऔषध सम्बन्धी अभिसंधि का पक्षकार है, इस बात का उल्लेख करते हुए कुछ कानूनी विद्वानों ने गण्डकी में गाँजा खेती शुरू होने पर संदेह जताया है। लेकिन गण्डकी की मंत्री रिमाल विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा गाँजा के औषधीय गुणों को स्वीकार किए जाने के कारण अन्य कानून इसे विशेष रूप से रोक नहीं पाएंगे, यह विश्वास रखती हैं। “हमारा विधेयक प्रदेश के अधिकार सम्बंधी अनुसूची नं. २० के प्रावधानों के अनुसार पेश किया गया है,” उन्होंने कहा।

ट्रम्प के नए आयात शुल्क के खिलाफ 25 राज्यों ने दायर की याचिका

19 साउन, वाशिंगटन (रासस/एएनआई) । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा ‘जबरदस्ती श्रम’ से उत्पादित वस्तुओं के आयातों को नियंत्रण करने के कथन के साथ यूरोपीय संघ सहित लगभग 60 देशों पर लगाए गए नए आयात शुल्क के खिलाफ अमेरिका के 25 राज्यों ने अदालत में मामला दायर किया है। इन राज्यों का कहना है कि यह शुल्क कानूनी अधिकारों से परे, अमेरिकी कानूनों के विपरीत है और इसका भार अंततः उपभोक्ताओं एवं व्यवसायों को उठाना पड़ेगा। कैलिफोर्निया के महान्यायाधिवक्ता रॉब बोंटा के नेतृत्व में एरिज़ोना और ओरेगन के महान्यायाधिवक्ताओं सहित गठबंधन ने अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत में यह याचिका दायर की है। मामला 1974 के ‘ट्रेड एक्ट’ की धारा 301 के तहत किए गए एक जांच के आधार पर लगाए गए शुल्क को कानूनी मानकों के अनुरूप नहीं होने का दावा करता है।

कैलिफोर्निया के महान्यायाधिवक्ता कार्यालय के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ने सोमवार को यूरोपीय संघ समेत 80 से अधिक व्यापारिक साझेदारों से होने वाले आयातों पर नया शुल्क लगाया है। ये देश अमेरिका के कुल आयात का लगभग 99.4 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करते हैं। गठबंधन ने नए शुल्क के अतिरिक्त आर्थिक बोझ को अमेरिकी उपभोक्ता और व्यापारियों पर पड़ने की बात कही है और आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ऐसी नीति अपनाकर जीवनयापन लागत बढ़ा रहे हैं। महान्यायाधिवक्ता बोंटा का कहना है कि प्रशासन पूर्व में अदालत द्वारा रोके गए व्यापारिक कदमों को अलग आधार पर फिर से लागू करने का प्रयास कर रहा है।

याचिका में कहा गया है कि धारा 301 के तहत की गई जांच पारंपरिक देश-विशिष्ट प्रक्रियाओं से अलग, केवल लगभग ढाई महीनों में लगभग 60 अर्थव्यवस्थाओं पर एक साथ पूरी की गई। यह जांच प्रत्येक देश की परिस्थितियों का समग्र एवं व्यापक विश्लेषण नहीं करती है, जिससे व्यापार एवं प्रशासनिक प्रक्रिया कानूनों का उल्लंघन होता है। याचिका में याद दिलाया गया है कि ट्रम्प प्रशासन के पिछले दो व्यापारिक निर्णय अदालतों द्वारा रोके जा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम के तहत लगाए गए शुल्क पहले ही अदालत द्वारा गैरकानूनी घोषित हो चुके हैं, जबकि 1974 के ‘ट्रेड एक्ट’ की धारा 122 के तहत व्यापक शुल्क लगाने का एक अन्य प्रयास भी असफल रहा है।

नेपाल की पहली ऐतिहासिक खेल प्रदर्शन ‘बियोन्ट दी मेडल्स’ का शुभारंभ

बबरमहल स्थित नेपाल आर्ट काउंसिल में Nepal की पहली ऐतिहासिक खेल प्रदर्शनी ‘बियोन्ट दी मेडल्स’ मंगलवार से प्रारंभ हुई है। शिक्षा एवं खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए सरकार की ओर से संग्रहालय के उचित प्रबंधन हेतु पूर्ण सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया। नेपाल ओलंपिक संग्रहालय की अध्यक्ष सोन्सी श्रेष्ठ ने अपने माता-पिता के सपने को साकार करने तथा खेलकूद के इतिहास के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

नेपाल ओलंपिक संग्रहालय द्वारा आयोजित पहली बार ऐतिहासिक खेल प्रदर्शनी मंगलवार से बबरमहल में स्थित नेपाल आर्ट काउंसिल में शुरू हुई है। ‘बियोन्ट दी मेडल्स: प्रिजर्विंग नेपाल्स स्पोर्ट्स हिस्ट्री’ नामक इस प्रदर्शनी का उद्घाटन शिक्षा एवं खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने किया। स्वर्गीय क्षितिज अरुण श्रेष्ठ ने वर्ष १९९४ में नेपाल एवं दक्षिण एशिया का पहला खेल संग्रहालय स्थापित किया था।

अध्यक्ष सोन्सी श्रेष्ठ ने अपने पिता स्वर्गीय क्षितिज अरुण श्रेष्ठ और माता स्वर्गीय मन्जु तुलाधर की स्मृति में आयोजित इस खेल प्रदर्शनी पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मेरे पिताजी ने ३३ वर्ष पहले शुरू किया नेपाल ओलंपिक संग्रहालय का विस्तार और इसे अधिक सुव्यवस्थित बनाने की योजना है। यह हमारे खेलों का अमूल्य इतिहास है। मेरा उद्देश्य पिताजी और माँ के सपने को पूरा करना है।”

शिक्षा और खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा कि नेपाली खेलों के इतिहास को समेटे इस संग्रहालय को और व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार पूरी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। तीन दिन तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में नेपाली खेल इतिहास, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खेलों में भागीदारी तथा जीते गए पदक सहित ऐतिहासिक क्षण प्रस्तुत किए गए हैं।

रागिनी उपाध्याय स्वर्ण पदक २०२६ युवा कलाकार नैन्सी विश्वकर्मा को प्रदान

१९ साउन, काठमाडौं। यस वर्षको रागिनी उपाध्याय स्वर्ण पदक २०२६ युवा कलाकार नैन्सी विश्वकर्मालाई प्रदान गरिएको छ। उत्कृष्ट शैक्षिक उपलब्धि हासिल गरेपछि नैन्सीलाई यो प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक प्रदान गरिएको हो। हालै सम्पन्न लखनउ विश्वविद्यालयको दीक्षांत समारोहमा यो पुरस्कार प्रदान गर्न लागिएको थियो। यो पुरस्कार भारतको लखनउ विश्वविद्यालयले नेपाली चित्रकार रागिनी उपाध्यायको सम्मानमा स्थापना गरेको हो।

कला क्षेत्रमा उत्कृष्टता प्राप्त गर्ने युवा विद्यार्थीहरूलाई सन् २०२५ देखि यो पुरस्कार प्रदान गरिँदै आएको छ। यसले युवा पुस्ताका कलाकारहरूलाई सिर्जनात्मकता, समर्पण र उत्कृष्टताको मार्गमा प्रेरणा प्रदान गर्ने काम गरिरहेको छ, जसको श्रेय चित्रकार उपाध्यायलाई जान्छ। रागिनी उपाध्यायको भनाइअनुसार, यो स्वर्ण पदकले आगामी दिनहरूमा पनि अनगिन्ती युवा कलाकारहरूलाई आफ्ना सपना पूरा गर्न र कला साधनामा निरन्तर अगाडि बढ्न प्रेरित गर्नेछ।

ग्रीस में आग से बचने के लिए घोड़ों की भागदौड़

ग्रीस के एथेंस के उत्तर-पश्चिम में स्थित कांडिली गांव के पास एक खेत में सोमवार, 3 अगस्त को आग लगी और घोड़े समूह में दौड़ते हुए दिखाई दिए। स्थानीय मीडिया द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो के अनुसार, इन घोड़ों को कोई चोट नहीं आई है।

इस समय ग्रीस के विभिन्न हिस्सों में व्यापक आग लगी हुई है। कुछ समय पहले आग बुझाने के लिए भेजे गए दो हेलीकॉप्टरों की टक्कर में, उनमें से एक हेलीकॉप्टर पर सवार दो व्यक्ति की मौत हो गई थी।

होटलों में वाईफाई इस्तेमाल करते समय माइक्रोसॉफ्ट की सावधानी

समाचार सारांश

  • माइक्रोसॉफ्ट ने रूस समर्थित हैकर्स द्वारा होटल और सार्वजनिक वाईफाई उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाने पर विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया है।
  • हैकर्स सार्वजनिक वाईफाई के लॉगिन पोर्टल पर नकली विंडोज या सॉफ्टवेयर अपडेट के मैसेज दिखाकर उपयोगकर्ताओं के उपकरणों में वायरस फैलाते हैं।
  • माइक्रोसॉफ्ट ने उपयोगकर्ताओं से सार्वजनिक वाईफाई के बजाय अपने मोबाइल हॉटस्पॉट का उपयोग करने और संदिग्ध पॉप-अप संदेश या फाइल डाउनलोड न करने का अनुरोध किया है।

१९ साउन, काठमाडौँ। माइक्रोसॉफ्ट ने होटलों की वाईफाई नेटवर्क का उपयोग करते समय सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की है। रूस समर्थित हैकर्स होटल और सार्वजनिक स्थानों के वाईफाई नेटवर्क को निशाना बना रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट के थ्रेट इंटेलिजेंस विभाग के अनुसार, इस हमले में ‘स्टॉर्म-२९४५’ नामक हैकिंग समूह सक्रिय है।

हैकर्स होटेल, हवाई अड्डा या सम्मेलन स्थल के वाईफाई लॉगिन में दिखने वाले ‘कैप्टिव पोर्टल’ का दुरुपयोग कर रहे हैं। वाईफाई में कनेक्ट होने का प्रयास करने वाले उपयोगकर्ताओं को नकली सॉफ्टवेयर अपडेट या सुरक्षा फाइल डाउनलोड करने का संदेश दिखाया जाता है।

उपयोगकर्ता की स्क्रीन पर विंडोज अपडेट, विंडोज सिक्योरिटी वायरस स्कैन, ब्राउजर अपडेट या Google का ‘Verify it is you’ जैसे झूठे विंडो दिखाई दे सकते हैं। ऐसी फाइल या अपडेट पर क्लिक करने से डिवाइस में वायरस प्रवेश कर जाता है।

वायरस डिवाइस में प्रवेश करने के बाद हैकर्स ब्राउजर कुकीज, पासवर्ड और महत्वपूर्ण दस्तावेज चुराते हैं। साथ ही माइक्रोसॉफ्ट ३६५ अकाउंट, ईमेल और वनड्राइव तक पहुंच कर डिवाइस को दूर से नियंत्रित करने की स्थिति बना लेते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट ने ऐसी हैकिंग से बचने के लिए उपयोगकर्ताओं को होटल, हवाई अड्डा या सार्वजनिक वाईफाई की बजाय अपने मोबाइल हॉटस्पॉट या निजी नेटवर्क का उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही सार्वजनिक वाईफाई पर आने वाले पॉप-अप संदेश या फाइल डाउनलोड करने के अनुरोध को अस्वीकार करने की चेतावनी दी है।

कैप्टिव पोर्टल या संदिग्ध वेबसाइटों से ब्राउजर अपडेट, सुरक्षा उपकरण या सॉफ्टवेयर अपडेट डाउनलोड न करने के लिए भी माइक्रोसॉफ्ट ने सचेत किया है। सार्वजनिक नेटवर्क पर डिवाइस में दिखने वाली असामान्य गतिविधि या लॉगिन स्क्रीन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

सफल अभिभावक कैसे बनें?

समाचार सारांश

प्रौद्योगिकी और एआई के युग में छात्रों को सही सूचना पहचानने और उसका विवेकपूर्ण उपयोग करने का मार्गदर्शन देना आवश्यक है।

  • प्रौद्योगिकी और एआई के युग में छात्रों को सही सूचना पहचानने और उसका विवेकपूर्ण उपयोग करने का मार्गदर्शन देना आवश्यक है।

प्रकृति के नियम भिन्न हैं। प्रकृति के साथ मित्रता कायम करने पर ही जीवन सहज होता है, अन्यथा प्रकृति अपना मार्ग स्वयं तय करती है। यह सत्य है। इसी प्रकार हमारे संतान भी प्रकृति के अंग हैं।

उन्हें केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रकृति के अनुकूल मूल्य, संस्कार और उपयोगी शिक्षा देना प्रत्येक अभिभावक एवं शिक्षण संस्थान की जिम्मेदारी है।

शिक्षण पेशे और पिछले चार दशकों के अनुभव से मैंने एक बात समझी है। जीवन का एक महत्वपूर्ण समय बाल्यावस्था से युवा अवस्था तक पार करते हुए मैं अब एक जिम्मेदार माँ और शिक्षिका की भूमिका में हूँ।

हम जो शिक्षा और संस्कार प्राप्त करते हैं, उसके आधार पर अब भविष्य के निर्माणकर्ता (हमारे संतान) को क्या और कैसा बनाना है, यह प्रश्न उठता है। शिक्षक और शिक्षण संस्थाओं की जिम्मेदारी तो है, लेकिन घर-परिवार से मिलने वाले मूल्य और संस्कार उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हैं।

आज की पीढ़ी प्रौद्योगिकी और एआई के युग में हैं। इंटरनेट अधिकांश घरों में पहुंच चुका है। इसलिए छात्रों को ज्ञान अर्जित करने के लिए केवल अभिभावक या शिक्षक का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। मुख्य आवश्यकता है ज्ञान के सही स्रोत खोजने और उसका सही उपयोग करने की।

धन-संपत्ति केवल जीवन यापन के साधन हैं। अभिभावकों को धन-संपदा की दौड़ से समय प्रबंधन कर अपने संतान के भविष्य की देखभाल करनी चाहिए।

प्रेम, अपनत्व, खुला संवाद और एक-दूसरे की परवाह करने की प्रवृत्ति संतान को करीब लाती है। उज्जवल भविष्य बनाने की जिम्मेदारी भी अभिभावकों की ही है।

कितनी भी वैभव और सुख-शांति हो, यदि संतान सही मार्ग पर नहीं है, तो वे सभी मूल्य शून्य हो जाते हैं। जैसे मिट्टी के झरोकों को आकार दिया जाता है, वैसे ही अभिभावकों को अपने बच्चों का सही आकार देने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। सफल अभिभावक बनने के लिए न्यूनतम कर्तव्यबोध आवश्यक है।

कहावत है – ‘संगत का फल गुण होता है।’ घर का वातावरण, समाज और मित्र संतान को किस मार्ग पर ले जाते हैं, यह निर्धारित करते हैं। धूम्रपान, मद्यपान और नशीली दवाइयों जैसी चुनौतियाँ भी हो सकती हैं।

इसलिए निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी अभिभावकों के कंधों पर होती है, बाकी जिम्मेदारी शिक्षण संस्थानों की।

घर का उचित वातावरण और सही संस्कार पाना संतान का अधिकार है। पढ़ाई, लेखन और अधिकारों की रक्षा करते हुए उज्जवल भविष्य बनाने की जिम्मेदारी अभिभावकों और शिक्षण संस्थाओं की ही है।

शिक्षण संस्थानों की शिक्षा महत्वपूर्ण होते हुए भी घर से मिलने वाले संस्कार और मूल्य ही चरित्र निर्माण की मुख्य नींव हैं। एआई और इंटरनेट के युग में बच्चों को सूचना की कमी नहीं है, लेकिन सही और गलत की पहचान करना और तकनीक का सही उपयोग सिखाना आवश्यक है।

(लेखक पूजा खड़का, गोरखा मॉडल सेकेंडरी स्कूल, लमही-६, दाङ में कार्यरत शिक्षिका हैं।)