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जीवनशैली की मुख्य आधार बनीं विमला श्रेष्ठ और उनके बेटे की पीड़ादायक कहानी

विमला श्रेष्ठ ने दुबई में अंतरजातीय विवाह के बाद इलाम में रहकर गर्भावस्था के दौरान यूरिन संक्रमण होने के कारण साढ़े ६ महीने में शल्यक्रिया के जरिए अपने बेटे को जन्म दिया। उनके बेटे को मोतियाबिंद और रेटिना की समस्या के कारण आंखें ठीक से नहीं देख पातीं, कान कम सुनते हैं और शारीरिक विकास में भी बाधा आई है। पति के शराबी व्यवहार और आर्थिक तंगी के बीच विमला अपने बेटे की देखभाल करते हुए पार्ट टाइम काम करती हैं। घर में दुखों का साया था।

अभाव के बीच दिन कठिन होते गए, तब विमला श्रेष्ठ ने घर छोड़ दिया और श्रम वीजा के जरिए दुबई पहुंचीं। वहां रहकर उन्होंने एक युवक से प्यार किया और अंतरजातीय विवाह किया। विवाह के बाद वे अपने पति के साथ इलाम आईं और वहां रहकर जीवन का नया अध्याय शुरू किया। गर्भावस्था के छठे महीने में अचानक यूरिन संक्रमण हुआ। यूरिन में जलन के अलावा खून दिखने पर वे स्वास्थ्य चौकी पहुंचीं। स्वास्थ्य चौकी में यूरिन टेस्ट के बाद संक्रमण की पुष्टि हुई और दवा दी गई। लेकिन उसी रात गर्भ का पानी फट गया और असंयमित रूप से निकलने लगा।

अगले दिन वे इलाम अस्पताल पहुंचीं, लेकिन अल्ट्रासाउंड के लिए झापा के मनमोहन सामुदायिक अस्पताल जाना पड़ा। वहां अल्ट्रासाउंड से पता चला कि गर्भ में पानी नहीं है। संक्रमण के कारण बच्चे को खतरा था, इसलिए शल्यक्रिया करनी पड़ी। बच्चे के फेफड़े पूर्ण विकसित नहीं थे, इसलिए उसे इंजेक्शन देकर विकास कराया गया और २४ घंटों के भीतर प्रसव करना आवश्यक हो गया। साढ़े ६ महीने में शल्यक्रिया द्वारा विमला ने बेटे को जन्म दिया। बच्चा समय से पहले पैदा हुआ, जिसका वजन अपेक्षित से कम था। नवजात को कुछ दिन NICU में रखा गया। जन्म के १० दिन बाद घर लाया गया।

बच्चा सामान्य दिखता था, लेकिन घर लौटने के कुछ दिनों बाद विमला ने बच्चे की आँखों में सफेद हिस्सा देखा। यह समस्या बढ़ने लगी। दो महीने बाद विमला अपनी मायादेवी इचंगु नारायण पहुँचीं, लेकिन लॉकडाउन के कारण लौट नहीं सकीं। तीन महीने बाद उनकी बहन ने बच्चे का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी। बहन के सुझाव पर विमला त्रिवि शिक्षण अस्पताल गईं। वहां जांच में मोतियाबिंद की आशंका जताई गई। डॉक्टर ने आंख की शल्यक्रिया की सिफारिश की।

विमला के बेटे की आंखें नहीं देख पातीं, कान ठीक से सुनते नहीं, बोल नहीं पाते और चल नहीं पाते। परिवार में कलह तब शुरू हुआ जब बच्चे की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ीं। विमला के पति शराब के आदी हो गए। घर में पैसों की कमी हो गई। विमला को बच्चे और पति दोनों की देखभाल करनी पड़ी। पति ने गुस्से में बच्चे को भी मारने की कोशिश की। यह स्थिति देख विमला मायके चली गईं। अब उनका बेटा ६ वर्ष का हो चुका है और उसे विशेष स्कूल में रखा गया है।

विमला खुद बेटे को स्कूल लेकर जाती और लाती हैं। स्कूल में शारीरिक और मानसिक विकास पर ध्यान दिया जाता है। विमला स्कूल के पास ही कुछ घंटे पार्ट टाइम काम करती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की, “बच्चे का भविष्य थोड़ा आसान हो सकेगा, ऐसी उम्मीद है।”

उनका बेटा अब धीरे-धीरे चलने की कोशिश कर रहा है, उसकी थेरेपी जारी है। अपने बच्चे के कारण सारी कठिनाइयों के बावजूद एक मां कभी निर्दयी नहीं बन सकती। यही नियति विमला के जीवन में आई है।