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लेखक: space4knews

भारतमा ९ दिनमा तेस्रोपटक बढ्यो इन्धनको मूल्य, नेपालमा पनि पर्नसक्छ प्रभाव

भारत में ९ दिनों में तीसरी बार ईंधन मूल्य वृद्धि, नेपाल पर भी पड़ सकता है प्रभाव

भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम ९ दिनों के अंदर तीसरी बार बढ़ाए गए हैं, और दिल्ली में पेट्रोल का दाम ९९.५१ भारतीय रुपये तथा डीजल का दाम ९२.४९ भारतीय रुपये पहुंच गया है। नेपाल भारत से पेट्रोलियम पदार्थ आयात करता है, इसलिए भारत में हुई इस मूल्य वृद्धि का नेपाल पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के कारण भारत की तेल कंपनियां घाटे में आ गईं, जिससे उन्हें दाम बढ़ाने का कदम उठाना पड़ा है।

९ जेठ, काठमांडू। भारत में फिर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। दिल्ली में पेट्रोल प्रति लीटर ८७ पैसे महंगा होकर ९९.५१ रुपये हो गया है, जबकि डीजल का दाम भी प्रति लीटर ९१ पैसे बढ़कर ९२.४९ रुपये हो गया है। भारतीय मीडिया के अनुसार यह वृद्धि ९ दिनों के भीतर तीसरी बार की गई है। इससे पहले १९ मई को पेट्रोल व डीजल के दाम औसतन प्रति लीटर ९० पैसे बढ़ाए गए थे, तथा १५ मई को भी प्रति लीटर ३ रुपये की वृद्धि हुई थी।

नेपाल पर भी हो सकता है प्रभाव
नेपाल भारत से पेट्रोलियम पदार्थों का आयात करता है। नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन भारतीय ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) से पेट्रोल, डीजल सहित अन्य ईंधन खरीदता है। इसलिए भारत में ईंधन के दामों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव नेपाल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। नेपाल ऑयल निगम के एक संचालक समिति सदस्य ने कहा, ‘भारत से खरीद मूल्य सूची उच्च दर पर आने पर नेपाल ऑयल निगम की लागत बढ़ जाएगी, जिसके कारण हमें अंदरूनी बाजार में भी दाम समायोजित करने की स्थिति आ सकती है।’ हालांकि फिलहाल दामों में वृद्धि या कमी को लेकर कोई निश्चित जानकारी नहीं है।

नेपाल ऑयल निगम की संचालक समिति अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार लगभग १५ दिनों में अपने स्वचालित प्रणाली के ज़रिए दाम समायोजन करती है। कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक उच्च बने रहने से नेपाल में भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने ईंधन की खपत घटाने के लिए शनिवार और रविवार को सार्वजनिक छुट्टी घोषित की है।

भारत में ईंधन के दाम क्यों बढ़े?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इसके मुख्य कारण हैं। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल ७० डॉलर थी, अब यह १०० डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। तेल महंगा होने से तेल कंपनियां आर्थिक दबाव में आईं और घाटा पूरा करने के लिए दाम बढ़ाने पड़े। यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक उच्च रही, तो पेट्रोल और डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के विनिमय दर के आधार पर ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘‘डेली प्राइस रिविजन’’ या ‘‘डायनामिक प्राइसिंग सिस्टम’’ के माध्यम से रोज सुबह ६ बजे नए दाम जारी करती हैं। उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले विभिन्न कर और खर्च जुड़ने के कारण अंतिम मूल्य आधार मूल्य से कहीं अधिक होता है।

२०२४ से दाम स्थिर थे
मार्च २०२४ से भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर थे। लोकसभा चुनाव २०२४ से पहले सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए प्रति लीटर २ रुपये की कटौती की थी। भारत में राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण लंबे समय तक दैनिक मूल्य समायोजन नहीं किया गया, लेकिन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के १५ दिन के औसत कच्चे तेल मूल्य के आधार पर समय-समय पर मूल्य समायोजन का प्रावधान रखा है।

सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के कारण घाटे में थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री से कंपनियों को महीने में लगभग ३० हजार करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इसे कम करने के लिए सरकार ने विशेष एक्साइज ड्यूटी घटाने की नीति अपनाई थी। पेट्रोल पर १३ रुपये का शुल्क घटाकर ३ रुपये किया गया था, जबकि डीजल पर १० रुपये का शुल्क शून्य कर दिया गया।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले रविवार तेलंगाना में आयोजित कार्यक्रम में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों के संयमित उपयोग का सुझाव दिया था। उन्होंने पेट्रोल, गैस और डीजल के सावधानीपूर्वक उपयोग की अपील करते हुए विदेशी मुद्रा बचत और युद्ध के नकारात्मक प्रभाव को कम करने की आवश्यकता जताई थी।

कैलाली पुलिस ने भारत से चोरी हुए दो करोड़ १० लाख रुपये मूल्य के आभूषण और नकद बरामद किए

सुदूर पश्चिम ने भारत के दिल्ली में चोरी हुए दो करोड़ १० लाख रुपये मूल्य के आभूषण और नकद बरामद किए हैं। तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास हीरे, मोती, सोने-चांदी के आभूषण के साथ-साथ विभिन्न देशों की मुद्राएँ भी मिलीं। भारतीय दूतावास के माध्यम से पीड़ित पक्ष को बरामद सामग्री सुपुर्द की गई है, जबकि चोरी में शामिल अन्य लोगों की खोज जारी है। ९ जेठ, धनगढी।

सुदूर पश्चिम पुलिस ने भारत में चोरी हुए बड़ी मात्रा में आभूषण और नकद बरामद किए हैं। प्रदेश पुलिस कार्यालय और जिला पुलिस कार्यालय कैलाली की संयुक्त टीम ने लंबी जांच के बाद भारत के दिल्ली में हुई चोरी के मामले में सफलता हासिल की है। पुलिस ने हीरे, मोती, सोने-चांदी के आभूषण, विभिन्न कंपनियों की घड़ियां, नेपाल समेत कई देशों की मुद्राओं सहित कुल दो करोड़ १० लाख रुपये से अधिक मूल्य की सामग्री बरामद की है।

जिला पुलिस कार्यालय कैलाली के अनुसार, भारत के दिल्ली के राजेन्द्रनगर में संजय कुमार माखीजा के घर में फागुन १३ को चोरी हुई थी। माखीजा के घर में काम करने वाले बाजुरा के बुढीगंगा नगरपालिका–१० के उपेन्द्र रावत के समूह द्वारा चोरी किए जाने की पुष्टि भारतीय पुलिस ने नेपाल पुलिस को शिकायत के तौर पर दी थी। इसी आधार पर जांच के दौरान पुलिस ने रावत समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार व्यक्तियों में बाजुरा के खप्तडछेडेदह गाउँपालिका–३ के लोकेश धामी और चोरी की हुई संपत्ति खरीदने वाले अछाम के साफेबगर नगरपालिका–४ के अर्जुन सुनार शामिल हैं, जैसा कि पुलिस ने बताया। तीनों को गिरफ्तार करते हुए उनके पास से आभूषण सहित दो करोड़ ७ लाख रुपये मूल्य के माल बरामद किए गए। सुदूर पश्चिम के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) ओमबहादुर राणा ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान उनके पास से चोरी के भारतीय रुपये के साथ १२ घड़ियां, ४३ लाख ३३ हजार १४५ रुपये मूल्य के विभिन्न सुन के आभूषण, १५ लाख ५६ हजार रुपये के हीरे और सोने की अंगूठियां, २ लाख १५ हजार ५३० रुपये के चांदी के आभूषण और तीन लाख रुपये के सोने के आभूषण बरामद हुए।

बरामद नकद और विभिन्न देशों की मुद्राएँ संबंधित व्यक्तियों को सौंप दी गई हैं। भारतीय दूतावास के माध्यम से नेपाली प्रतिनिधिमंडल सहित पीड़ित पक्ष शुक्रवार को कैलाली पहुँचा था, जहां उन्हें सामग्री हस्तांतरित की गई। जिला पुलिस कार्यालय के माध्यम से भी सामग्री संबंधित पक्ष को दी गई है, जैसा कि प्रदेश पुलिस कार्यालय ने बताया। कैलाली के प्रमुख पुलिस अधीक्षक नरेन्द्र चन्द ने बताया कि संयुक्त ऑपरेशन के तहत बरामद किए गए आभूषण और नकद सामग्री को जनप्रतिनिधि और संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा में धनाढ्य को सौंपा गया है।

उनके अनुसार चोरी गए सामान लौटाने पर भारतीय नागरिक संजय कुमार माखीजा ने नेपाल पुलिस द्वारा किए गए कार्य की प्रशंसा की। “मेरे घर से चोरी हुई कुछ सामग्री अभी भी नहीं मिली है। मुझे विश्वास है कि नेपाल पुलिस सहयोग करेगी,” माखीजा ने कहा, “चोरी हुए सामान बरामद कराने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सभी नेपाली पुलिसकर्मियों को मेरा हार्दिक धन्यवाद।” पुलिस के मुताबिक माखीजा के घर से चोरी हुआ पूरा सामान अभी पाया नहीं गया है। गिरफ्तार व्यक्तियों ने अन्य लोगों के नाम लिए हैं, लेकिन वे अभी तक पकड़े नहीं गए हैं और उनकी तलाश जारी है। हाल के समय में भारत में घरेलू कामगार के रूप में जाने वाले कुछ लोग मकान मालिकों का विश्वास जीतकर आभूषण और नकद चोरी कर लाते हैं। हालांकि, कानूनी प्रावधान स्पष्ट न होने के कारण सार्वजनिक मुकदमा चलाने के अलावा अधिक कार्रवाई करना पुलिस के लिए मुश्किल बताया जाता है।

६ वर्षदेखि अलपत्र एसियन हाइवे : स्थानीयलाई सास्ती, कष्टकर यात्रा

छ सालों से अटका हुआ एशियन हाईवे: स्थानीय लोगों के लिए यात्रा चुनौतीपूर्ण

निर्माण में हुई देरी ने प्रदेश पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। योजना की प्रारंभिक लागत से लगभग तीन अरब रुपये अधिक खर्च हो चुका है।

सांसद सिंह ने सामाजिक मीडिया पर फैली अफवाह को अतिरंजित बताया

रास्वपा सांसद चन्दन सिंह ने बारामा आयोजित विस्तारित बैठक में सामाजिक मीडिया पर फैली अफवाह को अत्यधिक अतिरंजित बताया है। पूर्व सभापति चन्दन स्वर्णकार के उकसावे पर पांच कार्यकर्ताओं को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सिफारिश की गई है। बैठक में बाराका चार निर्वाचन क्षेत्रों के सांसदों के पांच- पांच प्रतिनिधियों सहित तदर्थ जिला समिति गठन का निर्णय लिया गया है। ९ जेठ, बारा। रास्वपा सांसद चन्दन सिंह ने शनिवार बारामा हुई विस्तारित बैठक में कहा कि सामाजिक मीडिया पर फैल रही अफवाहें अत्यंत अतिरंजित हैं। सांसद सिंह के अनुसार पार्टी से निष्कासित पूर्व सभापति चन्दन स्वर्णकार की सुनियोजित उकसावे में प्रभावित पांच कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है। ‘‘हमें उनकी योजना के बारे में सुबह ही सूचना मिल गई थी और उसी अनुरूप हमने कार्यक्रम की रणनीति बनाई थी,’’ उन्होंने बताया।

सांसद ने कहा कि बैठक स्थल पर आने के बाद ही अफवाहें फैलाई गईं और मुझे हटाया गया यह प्रचार अत्यंत दुखद है। ‘‘हम अभी भी बैठक स्थल पर हैं और जिस उद्देश्य से बैठक बुलाई गई थी, वह पूरी हो चुकी है,’’ सांसद सिंह ने कहा। शनिवार को कैलाय स्थित करणराज पार्टी पैलेस में हुई विस्तारित बैठक में विघटित जिला सभापति स्वर्णकार के उकसावे पर हुई अफवाहों को लेकर सोशल मीडिया पर अनावश्यक हंगामा फैला है, जिसे सांसद सिंह ने स्पष्ट किया है।

बारा-२ से निर्वाचित सांसद सिंह ने बताया कि वे अभी भी बैठक स्थल पर हैं और बैठक संपन्न हो चुकी है। ‘‘हमने बैठक समाप्त कर निर्णय सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और इसी आयोजन स्थल पर हैं,’’ उन्होंने कहा। सांसद सिंह के अनुसार बाराका चारों निर्वाचन क्षेत्रों के सांसदों के पांच- पांच प्रतिनिधियों सहित तदर्थ जिला समिति गठन करने का निर्णय लिया गया है। ‘‘अभी बारा जिला में वाडा और पालिका के अधिवेशन संपन्न कराने के उद्देश्य से तदर्थ समिति गठन किया जाएगा,’’ उन्होंने जानकारी दी।

एफआईभीबी विश्व वरियतामा नेपाली महिला भलिबल टोली ५८औं स्थानमा

एफआईभीबी विश्व महिला भलिबल वरियतामा नेपाली टोली ५८औं स्थानमा पहुंचा

नेपाली राष्ट्रिय महिला भलिबल टोली एफआईभीबी विश्व वरियतामा ५८औं स्थानमा छ। नेपालले काभा महिला भलिबल च्याम्पियनसिपमा कीर्गिस्तानलाई सोझो सेटमा पराजित गरेपछि ५८औं स्थानमा उक्लिएको हो। एफआईभीबीको महिला वरियतामा नेपाल ५८.९९ अंकसहित ५८औं स्थानमा छ भने भारत ६४औं स्थानमा छ।

९ जेठ, काठमाडौं। नेपाली राष्ट्रिय महिला भलिबल टोली एफआईभीबी विश्व वरियतामा समावेश भएको छ। घरेलु मैदानमा भइरहेको एफआईभीबीको विश्व वरियतामूलक काभा महिला भलिबल च्याम्पियनसिप खेलेपछि नेपालकी महिला टोली वरियतामा समावेश भएको हो। एफआईभीबीको पछिल्लो अपडेट अनुसार महिलातर्फ नेपाल ५८औं स्थानमा उक्लिरहेको छ। शनिबार कीर्गिस्तानलाई सोझो सेटमा पराजित गरेपछि नेपालले ठूलो प्रगति गर्दै ५८औं स्थान हासिल गरेको हो।

शुक्रबार भारत विरुद्ध पहिलो खेलपछि नै नेपाल वरियतामा समावेश भएको थियो। Indiaसँग ३-२ सेटमा हार्दा पनि नेपाल ६२औं वरियतामा थियो। एफआईभीबीका अनुसार नेपालको अंक ५८.९९ रहेको छ। भारत भने नेपालभन्दा पछि ६४औं स्थानमा छ। त्यस्तै, कीर्गिस्तान ६३औं स्थानमा छ। माल्दिभ्स ६६औं, बंगलादेश ६८औं र श्रीलंका ८५औं स्थानमा छन्। नेपालमा प्रतियोगिता खेल्न आएका अन्य राष्ट्रहरूमध्ये कजाखस्तान ३६औं र इरान ४५औं स्थानमा छन्। एफआईभीबीको महिला वरियतामा हाल ९४ राष्ट्र आधिकारिक रूपमा समावेश छन्। युरोपेली राष्ट्र इटाली विश्व वरियतामा शीर्ष स्थानमा रहँदै आइरहेको छ भने एसियाबाट जापान पाँचौं र थाइल्यान्ड १८औं स्थानमा छन्।

महोत्तरी में मातृनाम से २०९ लोगों ने नागरिकता पाई

९ जेठ, जलेश्वर (महोत्तरी) । पिछले चार महीनों में महोत्तरी में २०९ लोगों ने मातृनाम से नागरिकता प्राप्त की है। माघ महीने से चार个月ों के दौरान मातृनाम से नागरिकता प्राप्त करने वालों की संख्या २०९ तक पहुंची है, यह जानकारी प्रमुख जिला अधिकारी इन्द्रदेव यादव ने दी है। गत पुस ११ गते मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि पिता की पहचान न होने वाले बच्चों को मातृनाम से नागरिकता दी जाएगी। इसके बाद पुस २१ को नेपाल राजपत्र में सूचना प्रकाशित हुई। इसके पश्चात गृह मंत्रालय ने सभी जिला प्रशासन कार्यालयों को परिपत्र जारी कर इस व्यवस्था को लागू करने का निर्देश दिया था।

उसी क्रम में आवश्यक सभी कागजी प्रक्रिया पूरी कर माघ ६ गते से जिला प्रशासन कार्यालय द्वारा मातृनाम में नागरिकता वितरण शुरू किया गया, प्रमुख जिला अधिकारी यादव ने बताया। जनसंख्या के आधार पर नेपाली नागरिक मातृ से नेपाल में जन्मे और पिता की पहचान न होने वाले व्यक्तियों ने आवश्यक स्वघोषणा एवं प्रक्रिया पूरी कर वंशज के आधार पर नागरिकता प्राप्त की है, उन्होंने जानकारी दी। –रासस

सन्तोषी श्रेष्ठ ने 1500 मीटर दौड़ में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया

नेपाल की ओलंपियन धाविका सन्तोषी श्रेष्ठ ने 1500 मीटर दौड़ में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड 4 मिनट 27.35 सेकंड में स्थापित किया है। उन्होंने एक ही वर्ष में सात राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर ‘रेकॉर्ड गर्ल’ का खिताब हासिल किया है। सन्तोषी भारत के झारखंड में आयोजित 29वें नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में भाग ले रही थीं।

गोल्डेन गर्ल खिताब से परिचित सन्तोषी ने शनिवार को 1500 मीटर दौड़ में पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को अपने प्रदर्शन से प्रतिस्थापित किया। उन्होंने 1500 मीटर की दूरी 4 मिनट 27.35 सेकंड में पूरी की, जिससे सरस्वती भट्टराई द्वारा 2016 में बनाए गए 4 मिनट 33.94 सेकंड के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा। सन्तोषी ने कुल 6.59 सेकंड से यह रिकॉर्ड सुधारा।

सन्तोषी के बड़े भाई केदार श्रेष्ठ के अनुसार, उन्हें एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने निमंत्रण दिया था और नेपाल एथलेटिक्स संघ की सिफारिश पर इस प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिला। इससे पहले उन्होंने पोखरा में महिला 3000 मीटर दौड़ में 35 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा था और नया रिकॉर्ड बनाया था। सन्तोषी ने 2019 में काठमांडू में सम्पन्न 13वें दक्षिण एशियाई खेलकूद में नेपाल के लिए एथलेटिक्स में पहली स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला खिलाड़ी के रूप में इतिहास रचा था।

श्रेयसको शतकमा पन्जाबको शानदार जित, प्लेअफ सम्भावना कायमै

श्रेयस के शतक से पंजाब ने शानदार जीत दर्ज की, प्लेऑफ की संभावना बरकरार

कप्तान श्रेयस अय्यर ने 51 गेंदों में 101 रन बनाए और पंजाब किंग्स को आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जाइंट्स के खिलाफ जीत दिलाई। पंजाब ने 197 रन के लक्ष्य को 18 ओवर में 3 विकेट खोकर पूरा किया और प्लेऑफ की संभावना को कायम रखा। फिलहाल पंजाब ने 14 मैचों में 15 अंक हासिल करते हुए चौथे स्थान पर पहँच गया है और रविवार को होने वाले दो मैच प्लेऑफ का फैसला करेंगे। 9 जेठ, काठमाडौं।

श्रेयस अय्यर के शानदार शतक की बदौलत पंजाब किंग्स ने आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जाइंट्स को हराकर प्लेऑफ की संभावना मजबूत कर दी है। लखनऊ द्वारा दिए गए 197 रन के लक्ष्य को पंजाब ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर पूरा किया। श्रेयस ने विजयी छक्का लगाते हुए अपना शतक पूरा किया। वह 51 गेंदों में नाबाद 101 रन बनाकर बल्लेबाजी करते रहे। इसी तरह प्रभसिमरन सिंह ने 69 रन बनाए। कूपर कोनोली ने 18 रन का योगदान दिया जबकि सूर्यांश शेड्गे 9 रन पर नाबाद रहे।

लखनऊ के मोहम्मद शमी ने 2 विकेट लिए जबकि अर्जुन तेंडुलकर ने 1 विकेट हासिल किया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरे लखनऊ ने 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 196 रन बनाए। ओपनर जोश इंग्लिस ने सर्वाधिक 72 रन बनाए। आयुष बदोनी ने 43 रन बनाए और अब्दुल समद नाबाद 37 रन पर रहे। पंजाब के लिए मार्को यानसेन और युवराजेंद्र चहल ने 2-2 विकेट लिए जबकि विजयकुमार वैशाक और अजमतुल्लाह ओमरजाई ने 1-1 विकेट लिया। इस जीत के साथ पंजाब 14 मैचों में 15 अंक लेकर चौथे स्थान पर आ गया है। अब रविवार को होने वाले दोनों मैच प्लेऑफ का फैसला करेंगे।

शशांक कोइरालाले पोखरामा भने– सर्वोच्च अदालतले कांग्रेस फुटायो

९ जेठ, काठमाडौं । नेपाली कांग्रेसका पूर्वमहामन्त्री डा. शशांक कोइरालाले सर्वोच्च अदालतले कांग्रेस फुटाएको टिप्पणी गरेका छन्। शनिबार संस्थापन इतर समूहले पोखरामा गरेको गण्डकी प्रदेशस्तरीय भेलामा सम्बोधन गर्दै नेता कोइरालाले सर्वोच्च अदालतले कांग्रेस फुटाएको भन्दै अब पार्टी एकता गरेर जानु अपरिहार्य रहेको बताएका छन्। ‘गगन थापाजीको समूह थिएन, तैपनि फुट्यो। यो आश्चर्यजनक कुरा हो। किन फुट्यो भन्दाखेरी यो सर्वोच्च अदालतले फुटायो,’ नेता कोइरालाले भने। यसलाई अर्कै दृष्टिकोणबाट हेरिनुपर्ने उनले बताए।

‘म बीपी कोइरालाको पुत्र, बीपी कोइरालाले बनाएको पार्टी, कत्रो पीडा होला ममा,’ उनले भने, ‘यो यस्तो राम्रो, यत्रो सुन्दर पार्टी, यत्रो राम्रो विचार भएको, आज विभाजन भयो र चुनावमा हामीले परिणाम पनि भोग्यौं।’ अब पार्टीलाई कसरी एक गर्ने भन्ने चिन्ता आफूलाई रहेको उनले बताए। ‘धेरैजसो व्यक्तिले भने, तर स्पष्टताका साथ भनेनन्। कि हामीले वार्ता गर्नुपर्ने गगन जीसँग। त्यो पनि एउटा बाटो हो,’ उनले भने।

कसैले १५ औं महाधिवेशन एकताको गर्ने प्रस्ताव गरेको पनि उनले बताए। उनले अगाडि भने, ‘हो, १५ औं महाधिवेशन गर्ने हो भने पहिले एउटा न्युट्रल समिति गठन गर्नुपर्‍यो।’ त्यसका लागि दुई वटै पक्षको मुख्य मान्छे राखेर १५ औं महाधिवेशन गर्ने अर्को बाटो रहेको उनले बताए। यस्ता बाटा रहेपनि कुन बाटो उपयुक्त हो त्यो सोच्नुपर्ने बेला रहेको उनले बताए। ‘पार्टी एकता गर्न के गर्नुपर्छ राय सुझाव आओस्, म त्यसमा सहभागी हुन चाहन्छु। मलाई केही चाहिँदैन हेर्नुस्। पार्टी एक गर्नुपर्छ,’ नेता कोइरालाले भने।

विराटनगर महानगरपालिका लगातार तेस्रोपटक इटहरी मेयर कप च्याम्पियन

विराटनगर महानगरपालिका ने लगातार तीसरी बार इटहरी मेयर कप चैंपियनशिप जीती

समाचार सारांश

  • विराटनगर महानगरपालिकाने इटहरी मेयर कप क्रिकेट प्रतियोगिता के तीसरे संस्करण में लगातार तीसरी बार उपाधि जीती।
  • फाइनल मुकाबले में विराटनगर ने कटहरी गाउँपालिका को 27 रनों से हराते हुए 167 रनों का प्रतिस्पर्धात्मक स्कोर बनाया।
  • विराटनगर के कप्तान फिरदोस अंसारी को प्लेयर ऑफ द फाइनल चुना गया, जबकि दीपेश कँडेल को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी और सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज का पुरस्कार मिला।

९ जेठ, विराटनगर। तीसरे संस्करण की इटहरी मेयर कप अंतरपालिका क्रिकेट प्रतियोगिता की उपाधि विराटनगर महानगरपालिकाले लगातार तीसरी बार जीती है।

शनिवार सम्पन्न फाइनल मुकाबले में मोरङ की कटहरी गाउँपालिका को 27 रनों से हराते हुए विराटनगर ने अपनी दबदबा कायम रखते हुए ट्रिपल हेट्रिक पूरी की।

पहले दो संस्करणों में भी विराटनगर ने इटहरी उपमहानगरपालिका को हराकर उपाधि हासिल की थी। इस बार भी विराटनगर ने अपनी दमदार प्रदर्शन जारी रखी और तीसरे संस्करण की ट्रॉफी अपने नाम की।

इटहरी के डीवीएम स्कूल परिसर के मैदान में हुए फाइनल मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए विराटनगर ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 167 रनों का प्रतिस्पर्धात्मक स्कोर बनाया। विराटनगर के कृतिक कामत ने नाबाद 56 रन की बेहतरीन पारी खेली, जिसमें उन्होंने 45 गेंदों पर 4 छक्के और 3 चौके लगाए।

कप्तान फिरदोस अंसारी ने भी आक्रामक खेल दिखाते हुए 23 गेंदों में 4 चौके और 4 छक्के लगाते हुए 51 रन बनाये। दीपक पासवान ने 32 रन जोड़े और विराटनगर ने अतिरिक्त के तौर पर 20 रन हासिल किये।

168 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए कटहरी गाउँपालिकाले 20 ओवर में 9 विकेट खोकर केवल 140 रन ही बना सकी। कटहरी के बल्लेबाजों ने कुछ समय तक संघर्ष किया, लेकिन लक्ष्य हासिल नहीं कर सके।

कटहरी के कप्तान लव कामत ने 8 चौकों की सहायता से 49 रन बनाकर टीम को मैच में लौटाने का प्रयास किया, लेकिन पर्याप्त समर्थन न मिलने की वजह से टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। रुद्र प्रताप शाह ने 29, दिपु भुजेल ने 13, निर्देश बस्नेत ने 12 और अभय कामत ने 11 रन जोड़े।

बॉलिंग में विराटनगर के श्रवण किस्कु, अमर यादव और श्रवण यादव ने समान रूप से 2-2 विकेट लेकर कटहरी के बल्लेबाजी क्रम को दबाव में रखा।

उपाधि के साथ विराटनगर महानगरपालिकाले 75 हजार रुपये नगद पुरस्कार प्राप्त किया, जबकि उपविजेता कटहरी गाउँपालिकाले 40 हजार रुपये पुरस्कार प्राप्त किया।

फाइनल में शानदार प्रदर्शन करने वाले विराटनगर के कप्तान फिरदोस अंसारी को ‘प्लेयर ऑफ द फाइनल’ घोषित किया गया, जिन्हें 1500 रुपये नगद पुरस्कार मिला।

साथ ही, विराटनगर के दीपेश कँडेल को प्रतियोगिता का ‘सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी’ और ‘बेस्ट गेंदबाज’ घोषित किया गया; उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए 7 हजार और बेस्ट गेंदबाज के लिए 4 हजार रुपये नगद पुरस्कार मिला। कटहरी के लव कामत को ‘सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज’ घोषित किया गया, जिन्होंने प्रतियोगिता में कुल 114 रन बनाए और 4 हजार रुपये नगद पुरस्कार प्राप्त किया।

इटहरी उपमहानगरपालिका के संयोजन में आइडियल स्पोर्ट्स एकेडमी द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में कोशी प्रदेश की 12 पालिकाओं की टीमें भाग ले रही थीं।

विजेता तथा उपविजेता टीम को कोशी प्रदेश के सामाजिक विकास मंत्री रामप्रसाद मेहेता और राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के पूर्व सदस्य सचिव केशवकुमार बिष्ट ने पुरस्कार वितरित किए।

नकली रसीद बना कर कर राजस्व चोरी के आरोप में शुभलाभ लेखापढ़ी के संचालक ओमप्रकाश यादव गिरफ्तार

पर्सा में शुभलाभ लेखापढ़ी के संचालक ओमप्रकाश यादव को नकली रसीद का उपयोग कर लगभग चार लाख ७२ हजार रुपये कर राजस्व चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। भूमि प्रशासन कार्यालय वीरगंज ने यादव के खिलाफ ६ जेठ को शिकायत दर्ज कराई थी और आंतरिक जांच के बाद जिला पुलिस कार्यालय पर्सा को लिखित शिकायत सौंपी थी। गिरफ्तार यादव को पर्सा जिला अदालत ने पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है, वहीं नकली रसीद बनाने की प्रक्रिया और अन्य संभावित संलिप्तताओं की जांच जारी है।

गिरफ्तारी के पीछे भूमि प्रशासन कार्यालय, पर्सा से मिली शिकायत थी, जिसमें यादव पर नकली रसीद बनाकर सरकारी राजस्व की चोरी करने का आरोप लगाया गया था। भूमि प्रशासन कार्यालय, पर्सा के प्रमुख खेमराज खत्री के अनुसार ६ जेठ को यादव के विरुद्ध नकली रसीद बनाकर राजस्व चोरी करने की लिखित शिकायत मिली थी। कार्यालय की आंतरिक जांच में लगभग चार लाख ७२ हजार रुपये के राजस्व की चोरी के तथ्य सामने आने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई हेतु जिला पुलिस कार्यालय, पर्सा को लिखित शिकायत प्रदान की गई, खत्री ने बताया।

पुलिस के अनुसार भूमि प्रशासन द्वारा दी गई शिकायत के बाद यादव को आवश्यक जांच के लिए हिरासत में लिया गया है। यादव के खिलाफ नकली रसीद बनाकर सरकारी राजस्व का हेराफेरी करने के मामले में जांच जारी है, पर्सा के पुलिस प्रवक्ता और पुलिस उपनिरीक्षक हरिबहादुर बस्नेत ने बताया। नकली रसीद कैसे बनाई गई, चोरी हुई राजस्व राशि का उपयोग कहां हुआ, और क्या इसमें अन्य लोगों की संलिप्तता है या नहीं, इस पर भी जांच केंद्रित है। लेखनदास यादव को शुक्रवार को पर्सा जिला अदालत में पेश कर पाँच दिनों की न्यायिक हिरासत प्राप्त की गई और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, बस्नेत ने बताया। इस घटना के बाद सेवाग्राही से अनुरोध है कि वे सरकारी कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक रसीद एवं अनुमोदित भुगतान प्रणाली का ही उपयोग करें, भूमि प्रशासन कार्यालय वीरगंज के प्रमुख खत्री ने कहा।

अनेरास्ववियुको बैठकमा पनि मागियो ओलीको राजीनामा, केहीबेर विवाद

अनेरास्ववियुको बैठक में ओली के इस्तीफे की मांग, विवाद खड़ा

नेकपा एमाले के सचिवालय बैठक में अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग उठने पर अनेरास्ववियु की केन्द्रीय समिति बैठक में भी इस विषय पर विवाद हुआ। एमाले सचिवालय बैठक में ११ एजेंडा तय किए गए हैं और चार उपाध्यक्षों ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग की है, जबकि ओली ने इस्तीफा देने से इनकार किया है। ओली ने बैठक में कहा कि उन्हें इस तरह याद न किया जाए और कहा कि निर्णय केन्द्रीय समिति बैठक में लिया जाएगा, साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका आधार अभी भी मजबूत है। ९ जेठ, काठमाडौं।

नेकपा एमाले के सचिवालय बैठक में अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग जारी रहने के बीच विद्यार्थी संगठन अनेरास्ववियु की बैठक में भी यह विषय शामिल हो गया है। आज कीर्तिपुर में शुरू हुए अनेरास्ववियु के केन्द्रीय समिति बैठक में पार्टी नेतृत्व परिवर्तन (अध्यक्ष ओली के इस्तीफे) को लेकर कुछ देर विवाद भी हुआ। पार्टी नेतृत्व परिवर्तन को एजेंडा में शामिल करने की कोशिश करने पर बैठक में कुछ देर विवाद हुआ, एक नेता ने बताया।

बैठक में अध्यक्ष दीपक धामी द्वारा प्रस्तावित एजेंडों पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान संगठन के उपमहासचिव कमलराज जोशी ने अतिरिक्त एजेंडा शामिल करने का आग्रह किया। जोशी ने कहा कि विद्यार्थी संगठन को सक्रिय बनाए रखने के लिए ‘पुरानी बातें साफ़ करनी होंगी’ और इसके लिए नेतृत्व परिवर्तन आवश्यक है। अध्यक्ष धामी ने उनके प्रस्ताव को औपचारिक एजेंडा में शामिल करने से इनकार किया।

अनेरास्ववियु की बैठक लगभग एक वर्ष बाद हो रही है, जिसका उद्देश्य ‘वर्तमान राजनीतिक स्थिति की समीक्षा और आगामी कार्यदिशा निर्धारित करना’ है। सचिवालय में भी विरोधी आवाजें तेज़ हो रही हैं। उपमहासचिव लेखराज भट्ट के अनुसार, कल दोपहर ११ बजे फिर से सचिवालय बैठक होगी। बैठक में विभिन्न ११ एजेंडा तय किए गए हैं। ओली इस्तीफा नहीं देना चाहते, जबकि नेताओं ने लगातार इस्तीफे की मांग की है, लेकिन ओली ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है।

अनेरास्ववियुको बैठकमा पनि मागियो ओलीको राजीनामा, केहीबेर विवाद

तनाव के बीच ANERASWVIYU बैठक में ओली के इस्तीफ़े की मांग

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद तैयार।

  • UML सचिवालय बैठक के दौरान अध्यक्ष कपिल शर्मा ओली के इस्तीफ़े की मांग से विवाद उत्पन्न हुआ, और यह मुद्दा ANERASWVIYU केन्द्रीय समिति की बैठक में भी चुनौती बना।
  • UML सचिवालय बैठक के लिए 11 एजेंडा बिंदु तय किए गए थे, जहां चार उपाध्यक्षों ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग की, लेकिन ओली ने इस्तीफ़ा देने से इंकार किया।
  • ओली ने बैठक में दबाव डालने से बचने का अनुरोध किया और कहा कि निर्णय केन्द्रीय समिति द्वारा लिया जाएगा; उन्होंने अपनी मजबूत स्थिति दोहराई।

23 मई, काठमांडू – नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (UML) सचिवालय बैठक में अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के इस्तीफ़े की मांग लगातार जारी रहने के बीच, यह विषय छात्र संगठन ANERASWVIYU की बैठक में भी उठा है।

कीर्तिपुर में आज से शुरू हुई ANERASWVIYU केन्द्रीय समिति की बैठक में पार्टी नेतृत्व परिवर्तन, खासकर अध्यक्ष ओली के इस्तीफ़े का मुद्दा उठकर विवाद उत्पन्न हुआ।

एक नेता ने नेतृत्व परिवर्तन को एजेंडा में शामिल करने का प्रयास किया, जिससे बैठक में छोटा विवाद हुआ, ऐसी जानकारी मिली है।

अध्यक्ष दीपक धामी द्वारा प्रस्तावित एजेंडा पर चर्चा के दौरान संगठन के उपमहासचिव कमलराज जोशी ने अतिरिक्त एजेंडा शामिल करने का अनुरोध किया।

जोशी के प्रस्ताव पर एक नेता ने कहा, ‘यदि ANERASWVIYU UML का छात्र संगठन रहना है, तो पार्टी नेतृत्व परिवर्तन की मांग करनी ही होगी।’

जोशी ने कहा कि छात्र संगठन को सक्रिय रखने के लिए पुराने मुद्दों का समाधान आवश्यक है और इसके लिए नेतृत्व परिवर्तन जरूरी है।

अध्यक्ष धामी ने जोशी के प्रस्ताव को एजेंडा में आधिकारिक रूप से शामिल करने से मना कर दिया, जिससे बैठक में थोड़ी हलचल हुई, ANERASWVIYU के एक केन्द्रीय सदस्य ने बताया।

केन्द्रीय सदस्यों ने अपनी राय व्यक्त करने की मांग की, जिसके बाद बैठक फिर से शुरू की गई।

लगभग एक साल बाद होने वाली यह पहली बैठक वर्तमान राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करने और ANERASWVIYU के भविष्य की दिशा तय करने के उद्देश्य से आयोजित हो रही है।

सचिवालय में भी तेज आवाज़ें

UML सचिवालय की बैठक शुक्रवार और शनिवार लगातार होती रही है। उपमहासचिव लेखराज भट्ट के अनुसार, सचिवालय कल सुबह 11 बजे फिर से बैठक करेगा। चर्चा के लिए 11 एजेंडा बिंदु निर्धारित किए गए हैं।

शुक्रवार को पांच उपाध्यक्षों ने अपने विचार रखे, जिनमें से चार—गोकार्ण विष्ट, पृथ्वी सुब्बा गुरुङ, रघुजी पन्त, और विष्णु पौडेल ने नेतृत्व परिवर्तन का समर्थन किया, जबकि राम बहादुर थापा बदले नेतृत्व को इस संकट के समय बचाने पर ज़ोर दिए।

चुनाव के बाद समीक्षा कार्यक्रम में महासचिव शंकर पोखरेल, उपमहासचिव योगेश भट्टराई, लेखराज भट्ट और रघुवीर महसरेठ ने शनिवार को अपनी राय प्रस्तुत की।

महासचिव पोखरेल ने अप्रत्यक्ष रूप से अपनी राय व्यक्त करते हुए वर्तमान स्थिति की जटिलता को स्वीकार किया और सुधार के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उपमहासचिव भट्टराई ने सीधे तौर पर ओली के इस्तीफ़े की मांग की और 60 वर्ष से ऊपर के सभी नेताओं से लगभग उम्र के कारण खुद को हटाकर परिवर्तन के रास्ते खोलने का सुझाव दिया।

इसके अलावा पांच सचिवालय सदस्यों—छबीलाल विश्वकर्मा, पद्मा कुमारी अर्याल, महेश बस्नेत, यमलाल कंडेल, और हिकमत कार्की—ने भी अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं।

अभी चार अन्य सचिव—शेरधन राई, भनु भक्त ढकाल, राजन भट्टराई, और खगराज अधिकारी—कल अपनी बात करेंगे। भट्ट के अनुसार, उनकी अभिव्यक्ति के बाद बैठक निर्देशानुसार आगे बढ़ेगी।

ओली इस्तीफ़ा देने को तैयार नहीं

लगातार इस्तीफ़े की मांगों के बावजूद, ओली ने कोई संकेत नहीं दिया कि वे इस्तीफ़ा देंगे।

अपने ही पार्टी नेताओं से बढ़ते दबाव के बीच शनिवार को ओली ने इस तरह के दबाव न डालने का आग्रह किया।

उपमहासचिव भट्ट के अनुसार, बैठक में ओली ने अन्य सदस्यों को अपनी राय व्यक्त करने से रोकते हुए निर्देश दिया।

बढ़ते दबाव के बावजूद, ओली ने बताया कि वे मानसिक रूप से इस मांग को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

शुक्रवार की बैठक में ओली के कथन उद्धृत करते हुए एक नेता ने कहा, ‘मैं इतने दबाव में नहीं रह सकता। मैं स्वीकार नहीं करता। मैं इस तरह हार नहीं मानता।’

सचिवालय की बैठक में जब अन्य नेताओं ने आगे बढ़ने के रास्ते सुझाए, तो ओली ने यह बात कही कि वे केन्द्रीय समिति में मजबूत हैं और निर्णय वहीं लिया जाएगा।

नेप्का गाँव में त्रासदीपूर्ण रात की घटना

९ जेठ, हुम्ला। जेठ ५ की रात ११ बजे चंखेली गाउँपालिका–५ के नेप्का गाँव में एक भयंकर तूफान शुरू हुआ। इसके बाद तेज बारिश होने लगी। कुछ ही समय में ऊपर से मिट्टी और कीचड़ की बाढ़ गिरने लगी। गाँव के लोग कुछ सहमे, कुछ चिल्लाए। सभी ने अचानक खुद को असहाय महसूस किया। ‘उस तूफान और कीचड़ की बाढ़ ने ६० किलोवाट की लघु जलविद्युत परियोजना को भी बंद करवा दिया। अंधेरी रात में सभी बेहद भयभीत थे,’ चंखेली–५ के वडाध्यक्ष हर्कधन तामाङ ने याद करते हुए कहा, ‘सबने बाहर मौजूद अपने रिश्तेदारों को फोन कर अपनी जान-माल के खतरे की खबर दे दी थी।’ वह रात नेप्का गाँव में त्रासदीपूर्ण रूप से बीती।
‘मेरी भेड़गोठ बह गई, लेकिन शुक्र है कि भेड़ों और बकरियों को कोई नुकसान नहीं हुआ,’ वडाध्यक्ष हर्कधन ने बताया, ‘लेकिन धनसिंह तामाङ के गोठ टूटने से ५३ भेड़-बकरी दब गए।’ गाँव के डांफे आधारभूत विद्यालय को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। पत्थर और मिट्टी से बने दो भवनों के चार कमरे टूट गए हैं। विद्यालय के सात कंप्यूटर, दो लैपटॉप और फर्नीचर भी नुकसान में हैं। गाँव की पेयजल व्यवस्था के लिए बनाए गए ५ हजार लीटर क्षमता वाले टंकी को भी क्षति हुई है। पुलिस के अनुसार, गाँव के ७५ घरों में से ४५ घरों की कृषि योग्य जमीन और फसल की लेदो मिट्टी में दबकर नष्ट हो गई है।
सात घंटे पैदल यात्रा कर नेप्का पहुंचे पुलिस दल के अनुसार, मेल्छाम पुलिस चौकी ने असई नन्दबहादुर शाही के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम परिचालित की थी। असई शाही ने कहा कि उनकी टीम सात घंटे पैदल चलकर नेप्का पहुंची। घटना के बाद जिला सदरमुकाम सिमकोट से प्रमुख जिल्ला अधिकारी टेककुमार रेग्मी की टीम निरीक्षण के लिए हेलिकॉप्टर से पहुँची थी। उनके साथ जिला पुलिस प्रमुख डीएसपी शंकर खड़खा, सशस्त्र पुलिस के डीएसपी पुष्करबहादुर सिंह और नेपाली सेना के मेजर हरिबाबु श्रेष्ठ भी मौजूद थे। लेकिन, स्थानीय लोगों ने पुलिस और सिडीओ टीम पर किसी भी राहत सामग्री के बिना वापस लौट जाने की शिकायत की है। चार दिन बीत जाने के बाद भी बाढ़ प्रभावितों ने सरकार से किसी भी प्रकार की राहत न मिलने की बात कही है।

न्याय खोज्दै सडकमै बित्छ रात – Online Khabar

रास्ते पर रात बिताकर न्याय की तलाश

रात के साढ़े 11 बज रहे थे। 5 जेठ की मध्यरात्रि थी, लेकिन काठमाडौं का माइतीघर अभी भी सोया नहीं था। न्याय की गुहार लगाते धरने पर बैठे लोगों की वजह से माइतीघर मण्डल जागरूक था। दिन भर जैसी जाम या भीड़ नहीं थी। कभी-कभी कुछ लोग बाइक लेकर अराजकता फैलाते थे, जिन्हें छोड़ दें तो माहौल शांत था। पास की सड़क पर चलने वाले वाहनों की आवाज़ भी ज्यादा तेज़ नहीं सुनाई देती थी। लेकिन कभी-कभी शराब पीकर आए लोगों की आवाज़ों से वहां मौजूद कुछ लोगों को डर लग सकता था। इसी शांत दिखने वाले माइतीघर मण्डल की सड़कों के किनारे कई टेंट लगे हुए थे। जब हम मध्यरात्रि वहां पहुंचे तो सात टेंट लगे थे। टेंट न होने वाली एक महिला खुली हवा के नीचे सो रही थी। बाकी कुछ समूह पतली चादर बिछाकर इसी तरह सो रहे थे और एक-दूसरे से बातचीत कर रहे थे। कुछ अपने टेंट में सोने की तैयारी कर रहे थे। पर खुला आसमान के नीचे सड़क पर रात बिताना धरने वाले लोगों का मन नहीं था। वहां के मच्छर काटने की वजह से उन्हें बहुत पीड़ा सहनी पड़ती थी। ऐसी परिस्थितियों में भी अपने मुद्दे को सरकार तक पहुंचाने के लिए उन्हें सड़क पर ही रहना पड़ता था। ‘मच्छर काटकर परेशान करते हैं, लेकिन फिर भी रहना पड़ता है, सरकार सुनती नहीं,’ वहां के एक व्यक्ति ने कहा।

उनकी सुरक्षा के लिए दो पुलिस कर्मी ड्यूटी पर थे। उनकी मांगें विभिन्न थीं। झापा की कृष्णमाया उप्रेती खुले आसमान के नीचे केवल एक ओढ़नी पहनें माइतीघर की सड़क पर सो रही थीं। जब हम वहां पहुंचे तो कुछ देर बाद 48 वर्षीय वह महिला उठीं। गोठाटार की रहने वाली वे अब रातभर माइतीघर में धरने पर हैं। उन्हें खाने-पीने की व्यवस्था आसान नहीं है। इसलिए सहयात्री संस्था महांकाल समूह द्वारा दिया गया भोजन खाने के बाद वे गोठाटार लौटने की योजना बना रही थीं। लेकिन रात की गाड़ी छूट जाने के कारण वे मजबूरन खुले आसमान के नीचे ही रुक गईं। उन्होंने कहा, ‘झापे में किसी ने मेरे साथ यौन दुराचार किया है। इसलिए मैं न्याय की तलाश में आई हूं। लेकिन अदालत और प्रशासन ने मेरा पक्ष नहीं लिया।’ न्याय की मांग को लेकर वे 13 वर्षों से संघर्षरत हैं। मौजूदा स्थिति के अनुसार वे 15 चैत से माइतीघर में धरने पर हैं। रात के गाड़ी छूट जाने के बाद वहां मौजूद लोगों ने उन्हें अपने टेंट के अंदर रखने का प्रस्ताव दिया, जिसके बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ माइतीघर में ही रात बिताई।

टेंटों के बीच एक समूह बात-चीत कर रहा था। एक ट्रिपाल बिछाकर खुलकर बातचीत कर रहे समूह में जानकी विष्ट, रमिला कार्की, जमुना खत्री और पुष्पमाया कार्की थीं। उनकी बातचीत सुनकर ऐसा महसूस हुआ कि माइतीघर में रातभर धरने पर बैठने वाले उनका अलग सा गांव बस गया हो। वे एक-दूसरे के दुख-सुख साझा कर रही थीं। जानकी विष्ट ने अपना अनुभव साझा किया। दार्चुला, ब्यास गाउँपालिका की जानकी विष्ट कुछ दिन से माइतीघर मण्डला में हैं। वे भले मानव तस्करी के जाल से बच निकली हैं, लेकिन दिदीबहनों को बचाने के लिए सात दिन तक वहीं रहने का निर्णय लिया है। उन्होंने पुष्पमाया कार्की से कहा, ‘तुम टेंट मत खरीदो, मैं सात दिन बाद जाऊंगी, मेरा टेंट उपयोग कर लेना, छोड़ दूंगी।’ जानकी के अनुसार, उन्हें सुदूरपश्चिम के एक व्यक्ति ने वीरगंज जाकर बुनाई के प्रशिक्षण देने के लिए बुलाया। परिवार से चर्चा करके वे वीरगंज गईं। लेकिन वहां से उन्हें बिहार के एक स्थान पर रातों-रात ले जाया गया। मोबाइल इस्तेमाल करने नहीं दिया गया, बंधक बनाया गया। होस्टल शुल्क के तौर पर 18 हजार रुपए देने को कहा गया। ‘फिर दो लाख रुपए जमा करने को कहा गया। मना करने पर जबरदस्ती करने की कोशिश हुई,’ जानकी ने अपनी त्रासदी सबके सामने बताई।

इस पूर्ण मानव तस्करी के जाल में फँसने के बाद उन्हें मार-पीट और यातना सहनी पड़ी। अंत में उन्होंने ऑटो से कूदकर भागने की कोशिश की। मदद के लिए भारतीय पुलिस की सहायता मांगी। भारतीय पुलिस, रिश्तेदार और कुछ संगठनों की मदद से वे नेपाल लौट पाईं। भारत में जो दृश्य उन्होंने देखा, वह अत्यंत भयानक था, जानकी ने बताया। युवाओं को नौकरी के नाम पर वहां ले जाकर कुटपिट, यातना, किडनी बेचने, बालिकाओं को यौन शोषण और मुंबई की कच्ची बस्तियों में बेचने जैसी घटनाएं हो रही थीं। पहाड़ी सीधी लड़कियां बलात्कार के बाद डर की वजह से बोलने की स्थिति में नहीं रहतीं। मानव तस्करी करने वाले 2065 साल से सक्रिय हैं। खुद बचकर आने के बाद जानकी ने कई पीड़ितों को बचाने का दावा किया। उनके अनुसार, किंग इंडिया संस्था के साथ मिलकर 52 लोगों को बचाया गया था। उन्होंने तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक, आईपीजी दीपक थापा, श्रम मंत्री और मानव अधिकार आयोग तक पहुंचकर आवाज़ उठाई, विभिन्न मीडिया को इंटरव्यू दिया, मगर सरकारी संस्थानों से कोई खास कवायद नहीं हुई, उनकी शिकायत है। खुद पीड़ित होने के बावजूद जानकी ने कहा कि अभी भी कई नेपाली लड़कियां भारत में बंधक हैं। सरकार को तत्काल उन्हें बचाने और ठगी करने वाली कंपनियों को बंद करने पर ध्यान देना चाहिए। ‘अगर सरकार कुछ नहीं करेगी तो मैं भारत जाऊंगी और वहां के अधिकारियों से मिलूंगी,’ वे दृढ़ता से कहती हैं, ‘मुझे न्याय नहीं चाहिए, लेकिन दूसरों को बचाना है। कोई इस जाल में न फंसे, इसके लिए दबाव बनाना और दूसरों को चेतावनी देना मेरी मकसद से मैं माइतीघर आई हूं।’ जानकी की कहानी सुनते हुए नज़दीक ही पुष्पमाया कार्की की आंखें भी नम हो गई थीं। वे भी अपनी पीड़ा साझा करना चाहती थीं।

उदयपुर की पुष्पमाया कार्की (28 वर्ष) दिन-रात माइतीघर मण्डला की सड़क पर ही हैं। उनके पास कहीं जाने का ठिकाना नहीं है इसलिए दिन-रात धरना देकर माइतीघर में सोने के लिए मजबूर हैं। मलेशिया में मानव तस्करी का शिकार हुई वे नेपाल लौटने के बाद यहां पुलिस और स्थानीय लोगों से भी अतिरिक्त कष्ट झेल रही हैं। कुछ समय पहले नुवाकोट की प्रतिमा तामांग ने ‘मलेशिया में अच्छी नौकरी और वेतन मिलता है’ कहकर उन्हें फंसाया। परिवार से बात करके वे थाईलैंड होते हुए मलेशिया गई थीं। वहां उन्हें नेपाली होटल में नौकरी दी गई लेकिन वेतन नहीं मिला। ग्राहकों के साथ शारीरिक संबंध बनाने को मजबूर किया गया। ‘दो महीने तक काम किया, पैसे नहीं मिले। ग्राहक खुश नहीं होने की वजह से वेतन काटा गया,’ उन्होंने बताया। विभिन्न होटलों में उन्हें बेचा गया। 2025 दिसंबर 2 की रात होटल मालिक और दो ग्राहकों के द्वारा सामूहिक बलात्कार करने की कोशिश का आरोप है। दिन-रात तक दुरुपयोग झेलने के बाद वे अन्य सहयोग से वापस नेपाल आईं।

लेकिन वापस आने के बाद उनके लिए और भी बड़ी परेशानी शुरू हो गई। तारकेश्वर-10 स्थित केटीएम होमस्टे में वे दैनिक 500 रुपये किराया देकर रह रही थीं। कुछ महीनों बाद जबरदस्ती वहां से निकाल दिया गया। पुलिस की मदद से उनका मोबाइल, सोने की चेन, ब्रेसलेट और डिप्रेशन की दवा भी छीन ली गई। ’15 दिन से मैं डिप्रेशन की दवा नहीं खा पाई,’ पुष्पमाया भावुक होकर कहती हैं। ‘सड़क पर चादर बिछाकर सो रही हूं। पानी टंकी के पास भी रहना पड़ता है। मलेशिया में बलात्कार के मामले और मकान मालिक के उत्पीड़न की शिकायत दी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। परिवार से भी कोई मदद नहीं है, इसलिए तब तक माइतीघर नहीं छोड़ूंगी जब तक मुझे न्याय नहीं मिलता। चाहे जितना भी दुख हो।’

जब वे अपनी शिकायतें सुना रही थीं, तो दूसरे टेंट के अंदर परिवार सो रहे थे। उनके टेंट के पीछे कई झंडे थे जिन पर विभिन्न मांगें की गई थीं। कोई वाहन दुर्घटना में चालक द्वारा इलाज न कराने के विरोध में धरने पर था। कोई सहकारी ठगी के विरोध में था। कोई फरार अभियुक्त जीबी राई की गिरफ्तारी की मांग कर रहा था। कुछ अस्पताल की लापरवाही के खिलाफ छोटे बच्चे के साथ माइतीघर में रात बिता रहे थे। टेंट के अंदर छोटे बच्चे भी थे। इस प्रकार दिन भर ही नहीं बल्कि रातभर भी धरना देकर माइतीघर लंबे समय से अन्याय के शिकार व्यक्तियों के न्याय की मांग करने का केंद्र बना हुआ है। यह साझा मंच बना है जहां सभी अपनी मांगें रख सकते हैं। माइतीघर का यह स्वाभाविक इतिहास ही ऐतिहासिक माना जाता है।

वि.सं. 2023 की बात है, उस समय प्रदर्शन में आई नेपाली फिल्म ‘माइतीघर’ के निर्माण दल का कार्यालय थापाथली इंजीनियरिंग कैंपस के बिल्कुल सामने एक तीन मंजिला इमारत में था। उस इमारत पर फिल्म के नाम का एक साइनबोर्ड लटका हुआ था। फिल्म के काम खत्म होने के बाद यह बोर्ड हटा दिया गया। लेकिन उस वक्त जनसाधारण उस जगह को ‘माइतीघर’ के नाम से जानने लगे थे। यह नाम बाद में स्थायी रूप से स्थापित हो गया। वि.सं. 2058 में काठमाडौं में हुए 11वें सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान शहर को सुंदर बनाने के उद्देश्य से तत्कालीन मेयर केशव स्थापित ने यहां कलात्मक मंडल का निर्माण कराया और इसके बाद इसे ‘माइतीघर मण्डला’ नाम दिया गया। देश के सशस्त्र संघर्ष के समय यहां नागरिक स्तर पर शहीदों कांड की याद में मोमबत्ती जलाने का आयोजन भी हुआ।

यह स्थान नागरिक आंदोलन और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। देश के मुख्य प्रशासनिक केंद्र सिंहदरबार और सर्वोच्च न्यायालय के नजदीक होने के कारण पीड़ितों की शिकायतें सरकार तक पहुंचाने का प्रमुख माध्यम बना। कभी-कभी इस स्वत:स्फूर्त अधिकार पर राज्य ने नियंत्रण लगाने की कोशिश भी की गई। वि.सं. 2075 बैशाख में सरकार ने ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क सफाई के नाम पर माइतीघर में प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। अन्य खुले स्थानों के चयन का प्रस्ताव आया लेकिन इसका व्यापक विरोध हुआ। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को स्वतंत्र प्रदर्शन का स्थान देने का कर्तव्य राज्य का है, इसे डॉ. गोविन्द केसी, डॉ. जीवन क्षेत्री जैसे नागरिक अभियंताओं ने कड़ा विरोध किया। इस प्रकार माइतीघर मण्डला ने सत्ता के अहंकार और आम जनता की पीड़ा दोनों के करीब से देखने का अवसर दिया।

काठमाडौं के खुले मैदान धीरे-धीरे घटते जा रहे हैं, ऐसे में सामाजिक मुद्दों को आवाज़ देने वाला यह ‘पहले से तैयार किया गया’ स्थान बन गया है। आज तक माइतीघर ने अनेक आवाज़ों और हस्तियों को देखा है। शीर्ष नेता पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’, माधवकुमार नेपाल, झलनाथ खनाल समेत कई यहां आए और प्रदर्शन किया। गुठी विधेयक आंदोलन, शिक्षक आंदोलन, मीटर शुल्क पीड़ित आंदोलन, सहकारी ठगी आंदोलन और जेनजी आंदोलन भी यहीं हुए। इस तरह सदन और सरकार जो अनसुनी पीड़ाएं हैं, उन्हें सड़क के माध्यम से पहुंचाने और कमजोरों की गुहार को सत्ता तक ले जाने में माइतीघर मण्डला साक्षी रहा है। आज भी जानकी विष्ट, रमिला कार्की, जमुना खत्री, पुष्पमाया कार्की, कृष्णमाया उप्रेती न्याय की मांग को लेकर दिन-रात जागरूक हैं।