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परिचय नै नहुने केन्द्रीय सदस्यलाई नेकपा कैसे करेगी कारवाई?

समाचार सारांश

समीक्षा की गई।

  • नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने निर्वाचन में रास्वपा को मत देने वाले केन्द्रीय सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
  • नेकपा ने २५ समूहों के बीच एकता कर चुनाव में भाग लिया, लेकिन केवल १७ सीटों पर सीमित रह गई।
  • पार्टी आगामी दिनों में समीक्षा बैठक कर संगठन पुनर्गठन की योजना बना रही है।

९ चैत, काठमांडू। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड द्वारा हाल ही में चुनाव परिणाम विषयक दी गई अभिव्यक्ति को पार्टी पंक्ति और राष्ट्रीय राजनीति में गम्भीरता से देखा जा रहा है।

गत शुक्रवार केन्द्रीय मुख्यालय पेरिसडाँडा में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रचण्ड ने घण्टी में मत देने वाले केन्द्रीय सदस्यों को कड़ी कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया था।

जनसंगठन के नेताओं सहित आयोजित उस कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमन्त्री प्रचण्ड ने पार्टी के भावी रोडमैप भी प्रस्तुत किए। परंतु मुख्य ध्यान रास्वपा को वोट देने वाले सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी पर केंद्रित रहा।

‘अब कार्रवाई होगी और इसकी शुरुआत केन्द्रीय सदस्यों से ही होगी। केन्द्रीय सदस्यों के घण्टी की तरफ जाने की सामान्य रिपोर्ट आई है,’ प्रचण्ड ने कहा, ‘सटीक प्रमाण लाएं, कौन- कौन अपने क्षेत्र में नहीं गया? कौन- कौन घण्टी की तरफ गया? ऐसे लोगों पर हम कड़ी कार्रवाई करेंगे।’

२५ समूहों के बीच एकता के बाद चुनाव लड़े नेकपा को मिले नतीजों के प्रकाश में प्रचण्ड की चेतावनी पर नेताओं का ध्यान जाना स्वाभाविक है। ‘जिस उद्देश्य से एकता अभियान चला रहे थे और जिस संख्या में नेता जुड़े थे, नतीजे वैसे नहीं आए,’ एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ‘गंभीर समीक्षा के बिना आगे बढ़ना संभव नहीं। संयोजक की बात को इसी रूप में लेना होगा।’

नेकपा माओवादी केन्द्र, नेकपा एकीकृत समाजवादी सहित दो दर्जन समूहों ने एकता कर पार्टी बनाई है, जिसमें शीर्ष नेताओं की संख्या भी काफी है। पूर्व प्रधानमंत्रियों में तीन (प्रचण्ड, माधव नेपाल, झलनाथ खनाल) शामिल हैं। पूर्व उपप्रधानमंत्री, पूर्व गृह मंत्री और अन्य मंत्री भी बड़ी संख्या में हैं।

इन नेताओं के गठजोड़ पर चुनाव के बाद सरकार बनाने की पहल करने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन रास्वपा अकेले ही लगभग दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गया।

समीक्षा बैठक की तैयारी

२०६३ साल के अंतरिम सरकार में सहभागी होने के बाद हमेशा सत्ता में रहे प्रचण्ड के लिए इस चुनाव के परिणाम में कुछ वर्षों के लिए पुनः सशक्त भूमिका की संभावना कम दिख रही है।

फागुन २१ के चुनाव में नेकपा को सीधे तौर पर ८ और समानुपातिक में ९ सीटें मिलीं, कुल १७ सीटें। अब सरकार बनाने की संभावना तभी बनेगी जब रास्वपा के भीतर संकट आए।

‘पार्टी की अपेक्षित सफलता नहीं मिली, अब समीक्षा कर संगठन पुनर्गठन योजना के साथ आगे बढ़ेंगे,’ नेता डॉ. बेदुराम भुसाल कहते हैं, ‘संभवतः जल्द समीक्षा बैठक होगी।’

हालांकि, किस समिति की बैठक होगी, इस पर नेता स्पष्ट नहीं हैं। ‘कार्य संयोजन समिति या सचिवालय की बैठक हो सकती है,’ भुसाल कहते हैं, लेकिन इन दोनों समितियों के सदस्यों का निर्णय नहीं हो पाया है।

नेकपा में पद निर्धारण केवल प्रचण्ड और माधव नेपाल तक सीमित है। प्रचण्ड संयोजक और माधव नेपाल सहसंयोजक के रूप में पार्टी निर्णयों को प्रभावित करते रहे हैं। फागुन २१ के चुनाव के लिए तो १३८ केन्द्रीय सदस्यों की सूची चुनाव आयोग को दी गई थी, लेकिन वह केवल तकनीकी सूची थी।

केन्द्रीय सदस्यों की पहचान नहीं

नेकपा निर्माण के दौरान १२५ सदस्यों का सचिवालय प्रस्तावित था तथा शीर्ष नेता शामिल करने वाली कार्य संयोजन समिति बनाने का निर्णय भी लिया गया, लेकिन किन नेता उक्त समितियों में होंगे, यह निर्णय नहीं हुआ।

‘एकता अभियान लम्बा चला और नेताओं की संख्या बढ़ती गई, पर नेताओं की हैसियत और समिति गठन तय न हो सका,’ एक पूर्व अधिकारी बताते हैं, ‘२५ समूहों के नेताओं को संयोजक और सहसंयोजक तक सही पहचान नहीं है।’

पार्टी के कार्यकारी संरचनाओं में शामिल नेताओं का निश्चित चयन न होने के कारण प्रचण्ड ने कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो पार्टी के भीतर आमतौर पर केवल राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में ही ली जाती है। ‘यदि किसी को चुनाव परिचालन की जिम्मेदारी सौंपते हुए किसी अन्य उम्मीदवार को वोट देने का प्रमाण मिला, तो उस व्यक्ति की पार्टी में भूमिका पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। पर यह जांच शुरू नहीं होगी कि घण्टी को किसने वोट दिया।’ एक अन्य नेता कहते हैं।

मुख्य समस्या केन्द्रीय सदस्यों की पहचान का अभाव है। २५०० सदस्यों में से केन्द्रीय सदस्य बनाने का वादा हुआ था, लेकिन नेताओं को पहचान नहीं है। आठ समूहों के बीच एकता के बाद केन्द्रीय सदस्यों ने शपथ भी वर्चुअल माध्यम से ली थी, क्योंकि सभी सदस्यों का पेरिसडाँडा आना संभव नहीं था।

इसलिए कार्रवाई के योग्य नेताओं की तलाश करने की बजाय अपनी संपूर्ण हार का समीक्षा करना जरूरी बताया जा रहा है। ‘मत किसने दिया या नहीं दिया यह नहीं, बल्कि हार क्यों हुई उसका मूलभूत विश्लेषण जरूरी है,’ वे कहते हैं, ‘क्यों जनता के बीच पार्टी की समझ नहीं पहुंच पाई इसकी जांच होनी चाहिए।’

‘पार्टी की हार का कारण नेतृत्व पंक्ति में तलाशना चाहिए’

कुछ नेताओं को साजिश या प्रमाण के आधार पर दंडित करने से पार्टी टूटेगी नहीं, बल्कि हार की जिम्मेदारी नेतृत्व पंक्ति को ही लेनी होगी। ‘प्रचण्ड स्वयं चुनाव के दौरान भ्रमित करने वाली बातें बोले, लोगों को कांग्रेस, एमाले या घण्टी के साथ गठबंधन की संभावना दिखा दी। इससे कार्यकर्ता असमंजस में पड़ गए।’

नेकपा के एक उम्मीदवार नेता ने कहा कि प्रचण्ड की अभिव्यक्तियों ने माहौल बिगाड़ा। ‘बालेन (रास्वपा नेता) से कल भी गठबंधन हो सकता है, इस उम्मीद से कई मतदाता घण्टी को वोट दे बैठे।’

झापा-१ से उम्मीदवार अशेष घिमिरे ने हार के व्यक्तिगत कारण खोजने के बजाय पार्टी स्तर पर ध्यान देने की बात कही। ‘कम्युनिस्ट दशकों से बहुमत में आते रहे, पर भूमिहीन को संपत्ति नहीं मिली। पार्टी अलग है लेकिन नेताओं की भाषा एक जैसी है,’ उन्होंने कहा, ‘हमें अपनी कम्युनिस्ट पार्टी की समीक्षा करनी होगी कि चुनाव हमारे पक्ष में क्यों नहीं हुआ।’

उनके अनुसार इस चुनाव में मार्क्सवादी हार गया और उत्तरआधुनिक विचारधारा ने बाज़ी मारी। ‘जब कम्युनिस्ट पार्टी वर्ग आधारित सिद्धांतों से अलग हुई, तब उत्तरआधुनिकवाद का हमले शुरू हुए। इससे संगठन और सामूहिक शक्ति कमजोर हुई, तथा चुनावी परिणाम पर व्यक्तिगत नायकवाद का प्रभाव पड़ा।’ उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के खिलाफ दल बनाकर आई शक्तियों के हमले को बेहतर समझना आवश्यक है।