
काठमांडू के बसन्तपुर की एलिशा महर्जन कुछ महीने पहले तक भी सोचती थीं कि ‘चाहे वोट डालूँ या न डालूँ, क्या फर्क पड़ता है?’ लेकिन पिछले भदौ में हुए ‘जेन जी आंदोलन’ के बाद इस १९ वर्षीय किशोरी की सोच बदल गई। गुरुवार को वह अपने मोहल्ले के मतदान केंद्र पहुंची और पहली बार मतदान किया। उन्होंने कहा, “जेन जी आंदोलन के कारण प्रेरित होकर मैंने सोचा कि हमें भी वोट डालना चाहिए इसलिए मैंने मतदान किया।” पिछले भदौ में नवयुवाओं ने देश में भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ राजधानी में प्रदर्शन किया था। कम से कम ७७ लोगों की मौत के बाद गठित अंतरिम सरकार ने प्रतिनिधि सभा भंग कर आम चुनाव की घोषणा की थी। उस चुनाव में अपनी राय व्यक्त करने के बाद महर्जन ने कहा, “पहली बार मतदान करते हुए मैं उम्मीद करती हूँ कि हमारे जीवन में कुछ अच्छे बदलाव आएंगे। देश का भी विकास होगा इसलिए मैंने वोट डाला है।”
राष्ट्रीय जनगणना दिखाती है कि नेपाल की कुल जनसंख्या का लगभग ४६ प्रतिशत युवा हैं। पिछली जनगणना के अनुसार कुल आबादी का लगभग १९.७ प्रतिशत १५ से २४ वर्ष आयु वर्ग में हैं। इस चुनाव में लगभग १ करोड़ ९० लाख मतदताओं में से करीब १० लाख पहली बार वोट डालने वाले थे। राजधानी काठमांडू के बसन्तपुर क्षेत्र में पहली बार मतदान करने वालों में १९ साल के छात्र सृजल श्रेष्ठ भी थे। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार और देश विकास के लिए मतदान करने आए हैं, “मेरे अपने उम्र के दोस्तों की जान गई। अच्छे लोगों को राजनीति में लाना और काम करना चाहिए। भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है। इसे कम करना चाहिए और नेपाल का विकास होना चाहिए इसलिए मैं वोट डालने आया हूँ।”
ज्ञानेश्वर के मतदान केंद्र में मताधिकार का प्रयोग करने के बाद १९ वर्षीय सर्वश्री गर्तौला ने बताया कि पहली बार मतदान करते समय वे ‘डरी हुई’ थीं लेकिन अच्छे से वोट डाला। उन्होंने कहा, “इस बार हमारे जैसे युवाओं को जरूर मतदान करना चाहिए था। हमने अपना कर्तव्य पूरा किया है। जनता की समस्याओं का समाधान हो, यही आशा है। अवसर देश में हों और रोजगार के मौके यहीं मिलें।”
निर्वाचन आयोग ने बताया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने वालों में से फागुन २० गते तक १८ वर्ष पुरे करने वाले प्रतिनिधि सभा के चुनाव में मतदान करने के पात्र हैं। सुनसान सड़कें, मतदाताओं की लाईन, सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी, विभिन्न संकेत चिन्हों और कर्मचारियों को पार कर वोट देने की प्रक्रिया कई युवा मतदाताओं के लिए एक जिज्ञासा का विषय रही। चितवन के २३ वर्ष के रोनिश कर्माचार्य ने कहा, “पहले मैंने केवल देखा था कि मेरे माता-पिता वोट देते हैं। पहली बार खुद जाकर शुरू में थोड़ा कठिनाई हुई थी। क्या करना है पता नहीं था। लेकिन दूसरों को करते देख कर सहज लगा।”
नुवाकोट क्षेत्र संख्या २ म्यागाङ की पुष्पा रिमाल ने सुबह ही वोट डाला था। उन्होंने पहली बार मतदान करने पर काफी खुशी और गर्व महसूस किया। उन्होंने कहा, “शुरुआत में सोच रही थी कैसे वोट करना होगा। वहां जाकर सब सहज लगा। मैंने खुद को नेपाल की नागरिक महसूस किया और मैं बहुत खुश हूँ।”
प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की नेतृत्व वाली चुनावी सरकार ने पिछले मंसिर माह में जेन जी प्रदर्शनकारियों से समझौता किया था जिसमें जेन जी आंदोलन के दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघन और हिंसा की जांच कर दोषियों को सज़ा देने का वचन दिया गया था।




