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नेपाली के अलावा कौन-कौन सी मातृभाषाओं में हो रहे हैं सांसद शपथ ग्रहण?


९ चैत, काठमाडौं। सुनसरी निर्वाचन क्षेत्र नम्बर ४ से निर्वाचित दीपककुमार साह (४९) सांसद पद की शपथ मैथिली भाषा में ले रहे हैं।

साथ ही २१ फागुन के चुनाव से निर्वाचित प्रतिनिधि सभा सदस्यों की पद एवं गोपनीयता की शपथ चैत १२ तारीख को होगी।

मातृभाषा में शपथ लेने के कारण समझाते हुए साह कहते हैं, ‘अपने जड़ों को समेटना जरूरी था। भाषा संरक्षण से संस्कृति भी संरक्षित होती है। सदन में मेरी मातृभाषा का रिकॉर्ड भी बनेगा।’

पढ़ाई के दौरान साह कविता लिखते थे। मैथिली में कविताएं भी लिखने वाले वे बचपन से ही मातृभाषा संरक्षण के पक्षधर रहे हैं।

पुल्चोक इंजीनियरिंग क्याम्पस से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और प्राकृतिक स्रोत विकास में स्नातकोत्तर करने वाले साह बहुलता में विश्वास रखते हैं।

नेपाल के संविधान ने बहुभाषिक, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक विशेषताओं को राज्य की गौरव और पहचान के रूप में अपनाया है। सभी भाषाओं, धर्मों और सांस्कृतिक पहचानों को समाहित करते हुए समावेशी समाज के निर्माण पर जोर दिया है। विविधता को नेपाली समाज की आत्मा और पहचान मानने वाले सांसद साह इसे और मजबूत करने के लिए नीतिगत पहल करेंगे।

साह जैसे और भी सांसद हैं जो मातृभाषा में शपथ ले रहे हैं। बाँके निर्वाचन क्षेत्र नम्बर २ से प्रतिनिधि सभा सदस्य मोहम्मद इश्तियाक राई अवधि भाषा में शपथ लेंगे।

शपथ संबंधी ऐन २०७९ में शपथ की भाषा को लेकर व्यवस्था है, जो सांसदों को मातृभाषा में शपथ लेने की अनुमति देता है।

राई तीसरी बार सांसद बने हैं। पूर्व में भी उन्होंने अवधि भाषा में शपथ ली थी।

‘जहाँ भी सांसद बना, हमेशा अवधि भाषा में ही शपथ ली है। इस बार भी यही भाषा प्रयोग करूँगा।’ उन्होंने कहा।

राई २०६४ में संविधानसभा और २०७४ में प्रतिनिधि सभा सदस्य बने थे। २०७० और २०७९ के चुनावों में वे हार गए थे।

४६ वर्षीय राई पहली बार सांसद बने तो उनकी उम्र केवल २८ वर्ष थी। ३१ वर्ष की आयु में वे श्रम और यातायात मंत्री भी बने थे।

बचपन से भाषा और संस्कृति संरक्षण में सक्रिय राई का मानना है कि उनकी मातृभाषा ही उनकी पहचान है।

‘हमारी बोली-चाल की भाषा के साथ गहरा जुड़ाव होता है। इसे सदन में लाने का यही माध्यम है’, वे कहते हैं। ‘मातृभाषा में शपथ लेने से पहचान मिलती है, मुझे गर्व महसूस होता है और मतदाता भी अपनत्व दिखाते हैं।’

राई के मुताबिक, अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सदन में मातृभाषा के जरिए करना उपयुक्त तरीका है।

शपथ संबंधी ऐन २०७९ के अनुसार, शपथ सरकारी कामकाज की भाषा नेपाली में लेने की व्यवस्था है, लेकिन मातृभाषा में शपथ लेने के वैकल्पिक प्रावधान भी हैं।

राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी की समानुपातिक सांसद खुश्बु ओली संस्कृत भाषा में शपथ लेंगी।

मातृभाषा में शपथ लेने पर उस भाषा में शपथ का अनुवाद कर प्रमाणित कराना और उसे पदाधिकारी के समक्ष शपथ ग्रहण से पहले प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

किसी सार्वजनिक पद पर नियुक्त व्यक्ति को नेपाली भाषा में भी शपथ ली गई आधिकारिक प्रति और मातृभाषा में शपथ की दोनों प्रतियां हस्ताक्षरित कर शपथ ग्रहण करने वाले पदाधिकारी को सौंपनी पड़ती हैं।

संघीय संसद सचिवालय के उपसचिव प्रदीप गुरागाईं के मुताबिक शपथ ग्रहण से पहले सांसदों को अपनी भाषा के बारे में फार्म जमा करना होता है। मातृभाषा में शपथ लेने वाले सांसदों ने ईमेल और भौतिक रूप से गतिविधि की जानकारी दी है।

नवनिर्वाचित सांसद उज्ज्वलकुमार झा और मातृकाप्रसाद यादव भी मैथिली में शपथ लेने वाले हैं। ३३ वर्षीय उज्ज्वलकुमार महोत्तरी ३ और ६७ वर्षीय मातृका धनुषा १ से निर्वाचित हुए हैं। इस क्षेत्र के रास्वपा के उम्मीदवारों के नामांकन निरस्तीकरण से जुड़ा विवाद अदालत में विचाराधीन है।

कृपाराम राना राना थारू भाषा में शपथ लेंेंगे। वे समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली अंतर्गत नेकपा एमाले से सांसद हैं।

सांसद गीता चौधरी और प्रमिलाकुमारी गच्छदार थारू भाषा में शपथ लेने के लिए तैयार हैं। गीता रास्वपा और प्रमिला नेपाली कांग्रेस से समानुपातिक सदस्य हैं।

विराजभक्त श्रेष्ठ और कुलभक्त शाक्य नेपाल भाषा में शपथ लेंगे। कुलभक्त एमाले से समानुपातिक सांसद हैं। विराजभक्त रास्वपा के नेता हैं और प्रत्यक्ष चुनाव में काठमाडौं-८ से निर्वाचित हैं। वे विघटित प्रतिनिधि सभा के सदस्य भी रह चुके हैं और उस समय नेपाली में शपथ लेकर सांसद बने थे।

राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी की सांसद खुश्बु ओली संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण करेंगी।

अभी तक ९ भाषाओं में शपथ ग्रहण करने के लिए सांसदों ने नामांकन कराया है। साफ तौर पर २४ सांसदों ने अपने-अपने मातृभाषा में शपथ लेने की इच्छा जताई है।

सांसद दीपक साह के अनुसार मातृभाषा में शपथ सिर्फ भाषा का प्रयोग नहीं है, यह दर्शाता है कि नेपाल बहुभाषी राष्ट्र है, सीमांत समुदाय संसद तक पहुंचे हैं, संघीय व्यवस्था और समावेशी प्रतिनिधित्व संसद में है।

मातृभाषा में शपथ की शुरुआत

मातृभाषा में शपथ पञ्चायत काल में एक भाषा-एक भेष नीति के समय शुरू हुई थी। भाषाई अधिकारकर्मी मल्ल के.सुन्दर के अनुसार २०४२ में राष्ट्रीय पञ्चायत में पद्मरत्न तुलाधर ने मातृभाषा में शपथ ली थी।

गणतंत्र के बाद नेपाली के अलावा मातृभाषा में शपथ लेने वालों की संख्या बढ़ गई। २०६४ के संविधानसभा में २६४ सदस्यों ने अपनी-अपनी मातृभाषा में शपथ ली थी।

सप्तरी-२ से निर्वाचित नेपाल सद्भावना पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष गजेन्द्रनारायण सिंह ने २०४८ में हिन्दी में शपथ ग्रहण की थी।

२०६३ के अस्थायी संसद सदस्य मल्ल के.सुन्दर याद करते हैं कि उस समय वे स्वयं सहित ५८ लोगों ने विभिन्न मातृभाषाओं में शपथ ली थी।

गणतंत्र के बाद नेपाली भाषा के अलावा मातृभाषा में शपथ ग्रहण करने वालों की संख्या और बढ़ी। २०६४ के संविधानसभा में २६४ सदस्यों ने मैथिली, भोजपुरी, मगर, गुरुङ, पश्चिमी थारू, हिन्दी, नेवारी, लिम्बु, तामाङ, राई, पूर्वी थारू, उर्दू, राजवंशी, थकाली, शेर्पा, राना थारू, धिमाल, कुमाल, दार्चुला पश्चिमी, अवधी, माडवारी, जिरेली, चेपांग, बाँतर, माझी, सुनुवार, बराम आदि भाषाओं में शपथ ली।

२०६४ के संविधान सभा चुनाव के बाद उपराष्ट्रपति परमानन्द झा का हिन्दी भाषा में शपथ विवाद अदालत तक गया था।

संसद सचिवालय के आँकड़ों के अनुसार २०७० में ३५, २०७४ में ४६ और २०७९ में २८ सांसद ने नेपाली के अलावा मातृभाषा में शपथ ली।

भाषाई अधिकारकर्मी सुन्दर कहते हैं, ‘नेपाल की भाषा विविधता संसद की संरचना में भी अपनी उपस्थिति दर्शाए, इस संदेश को शपथ ग्रहण देता है।’