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निर्वाचन में उपयोग न हुए 40 प्रतिशत मतपत्र नष्ट किए जाएंगे

समाचार संक्षेप

  • गत फागुन 21 को प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन में लगभग 40 प्रतिशत मतपत्र उपयोग न होने के कारण नष्ट किए जाने हैं।
  • निर्वाचन आयोग ने मतदाता संख्या से सात प्रतिशत अधिक मतपत्र छापकर चार करोड़ 11 लाख 43 हजार मतपत्र संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में भेजे थे।
  • सरकारी कागजात नष्ट करने के नियम, 2027 के अनुसार उपयोग न हुए मतपत्र नष्ट करने और नीलामी के लिए बेचने का प्रावधान है।

10 चैत, काठमांडू। गत फागुन 21 को सम्पन्न प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन में लगभग 40 प्रतिशत मतपत्र उपयोग न किए जाने के कारण नष्ट किए जाने हैं। प्रतिनिधि सभा निर्वाचन में 59 प्रतिशत मतदान हुआ लेकिन प्रथम निर्वाचित प्रणाली और समानुपातिक प्रणाली के लिए छापे गए मतपत्रों में 40 प्रतिशत मतपत्र अप्रयुक्त पाए गए।

निर्वाचन के लिए कुल 1 करोड़ 89 लाख 3 हजार 669 मतदाता थे, जबकि निर्वाचन आयोग ने दोनों प्रणालियों के लिए मतदाता संख्या से सात प्रतिशत अधिक मतपत्र छापकर जनक शिक्षा सामग्री केंद्र के माध्यम से संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में भेजे थे।

आयोग ने प्रत्यक्ष चुनाव के लिए 2 करोड़ 3 लाख 23 हजार और समानुपातिक चुनाव के लिए 2 करोड़ 8 लाख 43 हजार, कुल मिलाकर 4 करोड़ 11 लाख 43 हजार मतपत्र छापे तथा भेजे थे।

आयोग के अनुसार प्रत्यक्ष (पहले अभ्यर्थी द्वारा जिते जाने वाली) प्रणाली में 1 करोड़ 11 लाख 68 हजार 32 मतदाताओं ने मतदान किया, जिनमें से 1 करोड़ 5 लाख 9 हजार 17 (94.55 प्रतिशत) मत मान्य हुए। समानुपातिक प्रणाली के अन्तर्गत 1 करोड़ 12 लाख 80 हजार 617 मतदान हुए, जिनमें से 1 करोड़ 8 लाख 35 हजार 25 (96.05 प्रतिशत) मत मान्य किए गए।

निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता नारायणप्रसाद भट्टराई ने बताया कि मतदाताओं की संख्या से ज्यादा मतपत्र छापने की प्रक्रिया का पालन करते हुए इस बार भी 4 करोड़ 11 लाख 43 हजार मतपत्र छापे गए हैं और जिन मतपत्रों का उपयोग नहीं हुआ, उन्हें नियम के अनुसार संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में नष्ट किया जाएगा।

मतदाताओं से अधिक मतपत्र छापे जाने पर किसी दुरुपयोग या चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्न उठने के संबंध में प्रवक्ता भट्टराई ने कहा, ‘शंका हो सकती है लेकिन चुनाव की निष्पक्षता पर कोई संदेह नहीं है। हमने राष्ट्रपति के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है और किसी दल या पक्ष से औपचारिक प्रश्न नहीं आया है। इसलिए मतपत्र बर्बाद होने के कारण संदेह करना उचित नहीं है।’

जनक शिक्षा सामग्री केंद्र लिमिटेड के प्रबंध निर्देशक यदुनाथ पौडेल ने बताया कि विद्यालय की पुस्तकें छपाने सहित सामान्य कार्यों के अलावा आयोग के कार्यादेश के मुताबिक प्रतिदिन 13 लाख मतपत्र छपते हैं और इन्हें सुरक्षित तरीके से समय पर निर्वाचन क्षेत्रों में भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि मतपत्र छपाई का काम केंद्र को भी हानि पूर्ति में मदद करता है।

‘सरकारी कागजात नष्ट करने के नियम, 2027 (पहली संशोधन, 2070) के अनुसार नष्ट करने का अर्थ सरकारी कार्यालय के कागजातों को पढ़ने, समझने या उपयोग करने योग्य न रह जाने के लिए रद्द या जलाने का कार्य है।’

उक्त नियम के तहत संबंधित कार्यालय प्रमुख कागजातों की अवधि समाप्ति के बाद ‘नेपाल सरकार को कोई हानि न होने वाले और बचा हुआ कागजात, पूरी तरह उपयोग में आने के बाद किसी भी समय नष्ट करने का आदेश दे सकता है।’ नष्ट किए गए कागजातों को नीलामी के लिए बेचने की भी व्यवस्था है।

कानून के अनुसार तीन महीने बाद पूरी तरह उपयोग में आने वाले कागजात वर्गीकृत किए जाते हैं। नक्शा और डिजाइन से संबंधित तथ्य के अलावा कोई निर्माण योजना, प्रस्ताव, ठेका, पट्टा या अनुदान से जुड़ा कागजात कार्य पूरा होने एवं लेखा परीक्षा के बाद ही नष्ट किया जा सकता है। राष्ट्र के अभिलेखीय दस्तावेज कभी नष्ट नहीं किए जाएंगे।

आयोग ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2079 में हुए प्रतिनिधि सभा और प्रदेश सभा चुनावों के लिए चार-चार करोड़ मतपत्र छापे गए थे, जिनमें से लगभग 62 प्रतिशत मतदान हुआ और शेष मतपत्र अप्रयुक्त थे।