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दंगा नियंत्रण के लिए सशस्त्र बल में विशेष गण का गठन, भूमिका अभी भी अस्पष्ट

समाचार सारांश

समीक्षा गरिएको।

  • सशस्त्र पुलिस महानिरीक्षक राजु अर्याल ने दंगा नियंत्रण में सशस्त्र पुलिस परिचालन की भूमिका को स्पष्ट नहीं बताया।
  • सरकार ने दंगा नियंत्रण के लिए कीर्तिपुर स्थित नीलबाराही गण को दंगा नियंत्रण गण बनाने का निर्णय लिया है।
  • गृह मंत्रालय भीड़ और दंगा प्रबंधन में सुरक्षा बल परिचालन नीति, २०८२ लेकर सुरक्षा निकायों के बीच दोहराव हटाने की तैयारी कर रहा है।

१० चैत्र, काठमांडू। सशस्त्र पुलिस अधिनियम २०५८ (घ) के अनुसार दंगा नियंत्रण के लिए सशस्त्र पुलिस की तैनाती की बात कही गई है, लेकिन इस विषय में स्पष्टता न होना चिंता का विषय है। किस स्थिति में दंगा नियंत्रण करना है और सशस्त्र पुलिस को कब तैनात करना है, इसकी स्पष्ट भूमिका निर्धारित नहीं हो पाई है।

मंगलवार को नयाँ बानेश्वर में पशुपतिनाथ बाहिनी मुख्यालय के २२वें स्थापना दिवस समारोह में सशस्त्र पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) राजु अर्याल ने सशस्त्र पुलिस तैनाती की स्पष्ट भूमिका पर सवाल उठाए।

दंगा होने या होने की स्थिति आने पर सशस्त्र पुलिस को तैनात करने की बात कही गई है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल सामान्य स्थिति में रोजाना सशस्त्र पुलिस तैनात हो रही है।

दंगा नियंत्रण के लिए अभी तक स्पष्ट नीति नहीं बनी है, और गृह मंत्रालय के साथ इस संबंध में निर्णय होना बाकी है, उन्होंने बताया।

सशस्त्र पुलिस की तैनाती, उसके आदेश और भूमिका अस्पष्ट होने के कारण नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के बीच दोहराव और भ्रम उत्पन्न होता रहा है।

गुरुवार २३ और २४ भदौ को हुए जन गणराज्य आन्दोलन में दंगा नियंत्रण में पूरे सुरक्षा तंत्र की विफलता सामने आई। निषिद्ध क्षेत्र में घुसकर हिंसा करने पर सुरक्षा बलों द्वारा गोली चलाने से १९ लोगों की जान गई।

दूसरी ओर, १५ चैत्र को तीनकुने में हुए राजावादी आन्दोलन में भी सुरक्षा बलों की भूमिका प्रभावी नहीं हो सकी। इन घटनाओं से पता चलता है कि सुरक्षा संस्थानों के बीच समन्वय न होना दोहराव और दुविधा का कारण बन रहा है।

इन घटनाओं के बाद सशस्त्र प्रहरी बल ने दंगा नियंत्रण के लिए एक विशेष इकाई की आवश्यकता का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को दिया। इसी के अनुसार २ मंसिर की मंत्रिपरिषद बैठक में कीर्तिपुर में स्थित नीलबाराही गण को दंगा नियंत्रण गण बनाने और एसएसपी की पद संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

एसपी के नेतृत्व में यह गण अब एसएसपी के कमांड में आ गया है और इसे दंगा नियंत्रण रेजिमेंट के रूप में स्थापित किया गया है।

इस गण का जल्द औपचारिक उद्घाटन कर ऑपरेशन में लाने की तैयारियां हो रही हैं। हालांकि गण की स्थापना होने के बावजूद इसकी परिचालन प्रक्रिया और भूमिका अस्पष्ट होने के कारण समस्या उत्पन्न हो सकती है, सुरक्षा अधिकारियों ने बताया।

सशस्त्र प्रहरी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “पद तो बन गया है लेकिन ये टीम किस उद्देश्य से, कैसे तैनात होगी, अन्य सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका क्या होगी, किसे क्या अधिकार दिए जाएंगे, ये सब अभी स्पष्ट नहीं है। इससे भविष्य में जन गणराज्य आन्दोलन जैसे हादसे हो सकते हैं।”

भीड़ नियंत्रण में नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के बीच समुचित समन्वय नहीं दिखा। २३ भदौ की घटना में पुलिस को गोली चलाने के दौरान सशस्त्र पुलिस का कोई समर्थन नहीं मिला।

पुलिस और सशस्त्र पुलिस दोनों अपनी-अपनी तरीके से फील्ड ऑपरेशन करते हुए बड़े मानवीय नुकसान हुए।

इस दोहराव को समाप्त करने के लिए गृह मंत्रालय हुल और दंगा प्रबंधन में सुरक्षा बलों के परिचालन के लिए नीति २०८२ जारी करने की तैयारी कर रहा है।

सामान्य परिस्थितियों में सशस्त्र पुलिस की तैनाती, उनके कार्य, जिम्मेदारियां और अधिकारों को इस प्रस्तावित नीति में शामिल किया गया है।

सामान्य सुरक्षा परिचालन में नेपाल पुलिस और स्थानीय पुलिस की मुख्य भूमिका रहेगी और जरूरत पड़ने पर ही सशस्त्र पुलिस को तैनात किया जाएगा।

लाठी चार्ज, पानी की बौछार और हवाई फायर जैसे चरणबद्ध बल का प्रयोग कर भीड़ नियंत्रण की रणनीति बनाई गई है।

यदि ये उपाय दंगा नियंत्रण में नकामयाब रहते हैं और कोई बड़ा विनाशकारी घटना होती है तो विशेष परिस्थितियों की घोषणा कर सशस्त्र पुलिस को तैनात किया जाएगा।

ऐसी परिस्थितियों में फील्ड ऑपरेशन का नेतृत्व सशस्त्र पुलिस करेगी और नेपाल पुलिस सशस्त्र पुलिस के कमांड में काम करेगी।

हालांकि, अभी तक यह नीति लागू नहीं हुई। इस संबंध में आईजीपी अर्याल ने भी भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है।

सशस्त्र प्रहरी के पूर्व उपमहानिरीक्षक नारायण बाबु थापा ने भी नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के बीच दोहराव हटाने के लिए भूमिका स्पष्ट होने पर जोर दिया है।

दंगा नियंत्रण के लिए सशस्त्र पुलिस बल पहले ही स्थापित हो चुका है, लेकिन वर्तमान में जिले के सीडीओ सामान्य स्थिति में भी सशस्त्र पुलिस तैनात कर रहे हैं।

जन गणराज्य आन्दोलन के बाद दंगा नियंत्रण के लिए विशेष इकाई की आवश्यकता जताई गई और दंगा नियंत्रण गण बनाने का सुझाव दिया गया, लेकिन परिचालन और क्षेत्राधिकार अस्पष्ट होने के कारण समस्या बनी हुई है।

उपत्यका की सुरक्षा की जिम्मेदारी बानेश्वर से स्थानांतरित की गई

काठमांडू उपत्यका के तीन जिलों में शांति सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, दंगा प्रबंधन, आपदा उद्धार और वीआईपी सुरक्षा के कार्य सशस्त्र पुलिस की पशुपतिनाथ बाहिनी संभालती रही है।

२२ साल पहले स्थापित इस बाहिनी का कार्यालय अब तक सतुङगल में था। परन्तु जन गणराज्य आन्दोलन के बाद कार्यालय को नयाँ बानेश्वर स्थानांतरित किया गया है।

नई बानेश्वर के यातायात विभाग कार्यालय के पीछे यह कार्यालय स्थित है और उपत्यका के कमांड सशस्त्र पुलिस के डीआईजी यहां से संचालित कर रहे हैं।

नयाँ बानेश्वर और माइतीघर इलाके में विभिन्न आन्दोलन, जुलूस और धरना होते रहते हैं, इसलिए बाहिनी को बेहतर समन्वय के लिए नई जगह लाया गया है। यहां महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय और प्रतिष्ठान भी हैं, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से यह स्थान रणनीतिक माना जाता है।