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इंधन की कमी के कारण एशियाई देश कोयले पर निर्भर, स्वास्थ्य जोखिम बढ़े


११ चैत, काठमांडू। ईरान में जारी युद्ध ने विश्वव्यापी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। खासकर तेल और गैस की आपूर्ति में व्यवधान के बाद, एशियाई देश मजबूर होकर प्रदूषण का प्रमुख कारण मानी जाने वाली कोयले की ओर लौट रहे हैं।

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, एशियाई क्षेत्र अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित ईंधन पर निर्भर है। इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से आता है, जहां से विश्व के लगभग २० प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की व्यापार होती है।

आम तौर पर तेल और कोयले की तुलना में कम प्रदूषण करने वाला तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति युद्ध के कारण घटने के बाद अब भारत, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस से लेकर वियतनाम तक के देशों ने कोयले के उपयोग को बढ़ा दिया है।

किस देश की स्थिति कैसी है?

गर्मियों के मौसम की शुरुआत के साथ बिजली की उच्च मांग पूरी करने के लिए पड़ोसी देश भारत ने कोयले की खपत तेजी से बढ़ा दी है। वहीं, दक्षिण कोरिया ने कोयले से बिजली उत्पादन की सीमा ही बढ़ा दी है।

इंडोनेशिया ने अपने देश में उत्पादित कोयले को घरेलू खपत के लिए प्राथमिकता दी है, जिससे क्षेत्रीय बाजार में कोयले की आपूर्ति और घटने की संभावना है। ईंधन आपूर्ति अस्थिर होने के बाद वियतनाम ने भी अन्य देशों से कोयला आयात करने की तैयारी शुरू कर दी है।

प्रदूषण और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

ऊर्जा संकट को टालने के लिए कोयले पर निर्भरता बढ़ाना पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को बढ़ाएगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, कोयला जलाने से निकलने वाला धुंआ वायु प्रदूषण और स्मॉग को बढ़ाता है तथा फेफड़े, हृदय रोग, स्ट्रोक और श्वसन से संबंधित दीर्घकालीन स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को बड़ा देता है।

वर्तमान में भारत में करोड़ों लोग अस्वस्थ हवादार वातावरण में सांस लेने को मजबूर हैं, और कोयले के बढ़ते इस्तेमाल से यह स्थिति और गंभीर हो जाएगी।

बिजली महंगी हो रही है, नवीकरणीय ऊर्जा की राह में चुनौतियां

दूसरी ओर, युद्ध के बाद विश्व बाजार में कोयले की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इसने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में बिजली के शुल्क बढ़ाने का दबाव उत्पन्न किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान स्थिति में कोयले का उपयोग अनिवार्य और अस्थायी समाधान है, जबकि दीर्घकालीन समाधान नवीकरणीय ऊर्जा है। लेकिन वर्तमान संकट सौर्य, जल और पवन समेत नवीकरणीय संसाधनों की ओर वैश्विक संक्रमण को कुछ वक्त के लिए पीछे धकेल सकता है।

फिर भी, संकट के बीच कुछ देश जैसे वियतनाम विद्युत वाहन उपयोग बढ़ाकर कोयले पर निर्भरता कम करने के दीर्घकालीन लक्ष्य पर काम कर रहे हैं।

(एजेंसियों के सहयोग से)