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सुदूरपश्चिम में क्षयरोग की समस्या बढ़ती जा रही है, चालू आर्थिक वर्ष में 65 लोगों की मौत


11 चैत्र, सुदूरपश्चिम। जनस्वास्थ्य की प्रमुख समस्याओं में से एक क्षयरोग की समस्या सुदूरपश्चिम प्रदेश में लगातार बढ़ती जा रही है।

क्षयरोग के उपचार के लिए ‘डॉट्स’ कार्यक्रम (चिकित्सक की देखरेख में दवा देने की विधि) प्रभावी साबित हो रहा है, लेकिन समुदाय में अपेक्षित संख्या में रोगी सामने नहीं आ पा रहे हैं, जिससे इस रोग की समस्याएँ बढ़ रही हैं, स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया है। स्वास्थ्य निर्देशनालय दिपायल के क्षय–कुष्ठ निरीक्षक मनोज ओझा ने कहा कि लक्ष्य के अनुसार रोगी खोजने में असमर्थता के कारण रोग की गंभीरता बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, ‘हमारे देश में उपचार पद्धति अच्छी है, लेकिन उपचार के दायरे में न आने वाले व्यक्तियों के कारण रोग से होने वाली मौतों का अनुमान है।’ उन्होंने बताया, ‘प्रदेश भर में 40 प्रतिशत रोगी आज भी उपचार में नहीं आ पा रहे हैं।’

लक्षण दिखने वाले रोगियों का समय रहते स्वास्थ्य संस्था में न आना, सभी जगहों पर पीसीआर (रोग का पता लगाने की जांच) की पहुँच नहीं होना, जांच के काम में क्षेत्रीय स्तर पर कमी होना, और लक्षणों के बावजूद उपचार में देरी जैसे कारणों से रोगियों की संख्या बढ़ रही है, ओझा ने बताया।

जनसंख्या का दबाव, आवागमन, भारत के साथ खुली सीमा, गरीबी और जनचेतना की कमी जैसी चुनौतियाँ क्षयरोग नियंत्रण में बाधाएँ पैदा कर रही हैं, स्वास्थ्यकर्मी बताते हैं।

प्रदेश में दर्ज मरीजों में 65 वर्ष से ऊपर के केवल 26 प्रतिशत रोगी हैं। सबसे ज्यादा मरीज कैलाली जिले में पाए गए हैं, जबकि प्रति लाख जनसंख्या के हिसाब से कंचनपुर में सबसे अधिक रोगी दर्ज हैं।

प्रदेश में वार्षिक क्षयरोगी की संख्या बढ़ रही है। आर्थिक वर्ष २०७७/७८ में 2826, २०७८/७९ में 3424, २०७९/८० में 3214, २०७९/८१ में 3618, जबकि आर्थिक वर्ष ०८१/८२ में 3648 मरीज दर्ज किए गए हैं, स्वास्थ्य निर्देशनालय के आंकड़े दिखाते हैं।

चालू आर्थिक वर्ष के माघ महीने तक प्रदेश में 1840 क्षयरोगी मरीज पाए गए हैं। इनमें कैलाली में 812 और कंचनपुर में 504 मरीज हैं। आर्थिक वर्ष ०८१/८२ के माघ मसांत तक डोटी में 78, अछाम में 83, बैतड़ी में 83, बझाङ में 58, बाजुरा में 81, डडेलधुरा में 72 और दार्चुला में 69 क्षयरोग के मरीज पहुंच चुके हैं।

चालू वर्ष में प्रदेश के कुल मरीजों में 65 लोगों की मृत्यु हुई है, निर्देशनालय ने यह जानकारी दी है। नेपाल में क्षयरोगी में से 75 प्रतिशत से अधिक फेफड़ों के क्षयरोग से पीड़ित होते हैं। इसके अलावा ग्रंथि, गला, पेट, जिगर, गुर्दा और मस्तिष्क में भी क्षयरोग संक्रमण होते हैं।

सरकार क्षयरोग का उपचार निशुल्क कर रही है। सरकारी योजना है कि सन् 2035 तक क्षयरोग को समाप्त कर इससे होने वाली मृत्यु में 95 प्रतिशत की कमी लाई जाए।

लंबे समय तक खांसी आना, बलगम में खून आना, सांस लेने में परेशानी या छाती में भारीपन, अचानक वजन कम होना, अधिक पसीना आना और थकान महसूस होने पर नजदीकी स्वास्थ्य चौकी जाकर स्वास्थ्य परीक्षण करवाने का स्वास्थ्यकर्मियों ने सुझाव दिया है। –रासस