
१२ चैत्र, काठमांडू। तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने गौरीबहादुर कार्की नेतृत्व वाली जांच आयोग द्वारा अपने खिलाफ की गई कारवाई सिफारिशों को निराधार बताया है। गुरुवार को एमाले मुख्यालय च्यासल में आयोजित कार्यक्रम में ओली ने कहा कि उन पर लगाए गए आपराधिक अभियोगों के लिए कोई न्यायिक आधार मौजूद नहीं है।
‘इस समय मुख्य रूप से नेकपा एमाले अध्यक्ष और तत्कालीन प्रधानमंत्री के विरुद्ध आपराधिक संहिता २०७४ की धारा १८१ और १८२ के तहत जांच और मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है,’ ओली ने कहा, ‘धारा १८१ और १८२ के अनुसार घटना स्थल पर व्यक्ति की उपस्थिति आवश्यक है और घटना उसी के माध्यम से सीधे घटनी चाहिए। चाहे वह दुर्भावना हो या लापरवाही, किसी भी स्थिति में उसकी उपस्थिति का प्रमाण जरूरी है।’
उन्होंने बताया कि अगर वह स्थान पर उपस्थित नहीं थे तो लापरवाही से हुई घटना की दलील न्यायिक रूप से आधारहीन होगी। ‘मैं पहले ही कह चुका हूं कि प्रधानमंत्री न तो गोली चलाते हैं और न ही आदेश देते हैं। अब बीच में लोग मारे गए हैं, इसका जिम्मा कौन लेगा?’ ओली ने सवाल उठाया।
इसके अलावा, न्यायाधीश और पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ व्यक्तियों द्वारा दी गई सिफारिशें बेहद निराधार और कानूनी दृष्टि से अनुपयुक्त हैं, ऐसा भी ओली ने कहा।
ओली ने बताया कि एमाले की दसवीं केन्द्रीय समिति ने इस आयोग के पदाधिकारियों पर पहले ही सवाल उठा दिए हैं।
‘पहले ही जिन लोगों ने पक्षपातपूर्ण और हमारे पार्टी के खिलाफ वैमनस्यपूर्ण दृष्टिकोण बनाए हुए थे, जिन्होंने अपने निर्णय पहले ही सुना दिए थे, उन्हें जिम्मेदारी सौंपना गलत था और इसलिए यथार्थ पर आधारित कोई सत्य तथ्य प्रतिवेदन आना संभव नहीं था, ऐसा हमने कहा था,’ ओली ने कहा।





