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‘नेतृत्व ने गलती की तो मैं चेतावनी दूंगा’ – बदन भण्डारी

समाचार सारांश में बदन ने कहा कि अब की राजनीति के लिए रणनीतिक सोच के साथ ‘गोल सेटिंग’ आवश्यक है और वे सुशासन में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को चेतावनी दी कि यदि वे गलत रास्ते पर चले तो वे पार्टी के अंदर ही विरोध और संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेंगे। बदन ने बताया कि पुराने दल कमजोर होने के कारण नई शक्तियों का उदय सहज हुआ है, हालांकि उनका राजनीतिक प्रशिक्षण उन्हीं पुराने दलों से प्राप्त हुआ था। 11 चैत्र, काठमांडू। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के बदन भण्डारी काभ्रेपालांचोक क्षेत्र संख्या 2 से नेकपा एमाले के प्रभाव को तोड़ते हुए प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचित हुए हैं। इस क्षेत्र से एमाले नेता गोकुल बास्कोटा 2017 और 2022 में निर्वाचित हुए थे। 21 फागुन के चुनाव में रास्वपा के बदन ने 53,344 मत हासिल कर एमालेलाई तीसरे स्थान पर धकेल दिया। काभ्रे-2 में नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार मधु आचार्य ने 17,868 मत लेकर दूसरा स्थान प्राप्त किया जबकि एमाले के अशोककुमार ब्यांजू श्रेष्ठ ने 13,940 मत पाकर तीसरा स्थान हासिल किया। अपनी जीत को बदन ने सामान्य चुनावी परिणाम नहीं बल्कि जनजीवन आंदोलन द्वारा पुराने राजनीतिक मूल को हिला देने का परिणाम माना है। उन्होंने पुरानी पार्टियों की लोकप्रियता में आई गिरावट और रास्वपा के प्रति जनता के बढ़ते आकर्षण को अपनी जीत का मुख्य आधार बताया।

बदन ने कहा, “पुरानी पार्टियां कमजोर होने के कारण नई शक्तियों का उदय सहज हुआ है, हालांकि मेरा राजनीतिक प्रशिक्षण उन्हीं पुराने दलों से प्राप्त हुआ है।” उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा 2005 में एमाले के छात्र संगठन अनेरास्ववियु से शुरू की। बाद में केपी शर्मा ओली द्वारा संसद् विघटन के बाद उन्होंने पार्टी पुनर्गठन का रास्ता चुना। उस समय संविधान के ‘चीरहरण’ का अनुभव कर वे तत्कालीन नेकपा (एकीकृत समाजवादी) में शामिल हुए, जिसे नेता माधवकुमार नेपाल और झलनाथ खनाल ने एमाले से अलग होकर बनाया था। लेकिन इन पुराने दलों से सुधार की उम्मीद न होने के कारण वे 2023 अप्रैल में रास्वपा में शामिल हुए।

बदन ने पुराने दलों से नए दल में जाने वालों को अवसरवादी कहना अस्वीकार किया। उन्होंने तर्क दिया कि पुराने दलों द्वारा भ्रष्टाचार और गलतियों को छोड़ना तथा नई विकल्प चुनना लोकतंत्र की खूबसूरती है। उन्होंने कहा, “रास्वपा संवैधानिक समाजवाद और सहभागी लोकतंत्र की मूल धारणा पर आधारित पार्टी है।” 2015 के संविधान द्वारा गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का पूरी तरह क्रियान्वयन हो जाने पर ही देश में समाजवाद आएगा, ऐसा उनका विश्वास है। रास्वपा का उदय सुशासन और भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए हुआ है और यह लोककल्याणकारी राज्य व्यवस्था और उदार अर्थव्यवस्था के पक्ष में है।

बदन ने बताया कि चुनाव पहली बार लड़ते वक्त वे रोजाना केवल 3 से 4 घंटे ही सोते थे। उन्होंने बड़े जनसभाओं और भाषणों की बजाय सामाजिक क्षेत्र के 600 से अधिक टोल और घर-घर जाकर जनता से मिलने को सफलता का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि जनता से संवाद करते समय उन्होंने कोई अनावश्यक वादे नहीं किए और जीत के बाद जनमत का निवेश सुशासन व विकास में करेंगे। उन्होंने कहा, “मुझे सड़क और पुल बनाने वाले ठेकेदार के बजाय नीति बनाने वाले विधायक के रूप में समझे।”

बदन ने कहा कि राजनीति अब विजन के साथ ‘गोल सेटिंग’ जरूरी है और उनकी पार्टी सुशासन के लिए किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि संसद में उनकी भूमिका सरकार और जनता के बीच पुल की तरह रहेगी और वे कानूनी अड़चनों को हटाने के लिए आवाज उठाएंगे। निर्वाचित होने के बाद कई नेता विलासिता भरी जिंदगी जीने लगते हैं, जिससे जनता में आशंका पैदा होती है, लेकिन वे हमेशा ‘जमीनी आदमी’ बने रहेंगे और उत्पीड़ित वर्ग के लिए काम करेंगे।

बदन ने कहा, “यह चुनाव नेपाली राजनीति में ईमानदारी के नए युग की शुरुआत करेगा, जिसे मैं टूटने नहीं दूंगा।”