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जीसीसी देशों की सैन्य ताकत कितनी है?

समाचार सारांश

  • इजरायल और अमेरिका द्वारा इरान के खिलाफ शुरू किया गया ‘ऑपरेशन एपिक फ्यू्री’ पश्चिम एशिया में घातक युद्ध को उकसा चुका है।
  • इरान ने खाड़ी सहयोग परिषद के देशों को निशाना बनाते हुए सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन हमले किए हैं।
  • खाड़ी देशों ने अत्याधुनिक हवाई रक्षा प्रणाली का उपयोग करते हुए 90 प्रतिशत से अधिक हमलों को रोकने में सफलता पाई है।

12 चैत्र, काठमाडौं। 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका द्वारा इरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन एपिक फ्यू्री’ ने पश्चिम एशिया को एक घातक युद्ध के संकटे में धकेल दिया है।

इरान ने इसका बदला लेने के लिए ‘हॉरिजॉन्टल एस्केलेशन’ रणनीति अपनाते हुए खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

रियाद से दुबई और दोहा से मस्कट तक के आसमानों में सायरन की तेज़ आवाज़ गूँज रही है। इरान द्वारा भेजे गए सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन गल्फ के तेल स्रोतों, हवाई अड्डों और नागरिक क्षेत्रों को निशाना बना रहे हैं।

तीनों पक्षों के द्विपक्षीय युद्ध के कारण अन्य देश भी युद्ध में बाध्य होकर शामिल हो रहे हैं। संघर्ष के कोई समाप्ति संकेत न होने से जीसीसी के देशों के साथ ही अन्य देशों के भी युद्ध में शामिल होने के संकेत मिल रहे हैं।

 

फिर भी, इस युद्ध में एक अनोखा और महत्वपूर्ण दृश्य देखने को मिल रहा है: जीसीसी देश इस युद्ध में शामिल तो हुए हैं, लेकिन सीधे लड़ाई में भाग नहीं ले रहे हैं। अब तक उनका पूरा फोकस ‘आत्मरक्षा’ पर केन्द्रित है।

हाल की सैन्य सूचनाओं के अनुसार, खाड़ी देशों की एकीकृत हवाई रक्षा प्रणाली ने 90 प्रतिशत से अधिक इंटरसेप्शन दर हासिल की है, जिससे इरान के बड़े पैमाने के हमलों को सीमित नुकसान पर रोका गया है।

युद्ध का संदर्भ और बढ़ता जोखिम

इरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनी और उच्च सैन्य कमांडरों को निशाना बनाकर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद, इरान ने अपने ‘प्रॉक्सी’ और सैन्य बलों का उपयोग करते हुए खाड़ी देशों पर हमला शुरू किया है। इरान ने हजारों मिसाइल और ड्रोन प्रहार कर लिए हैं।

सबसे तीव्र हमला संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हुआ है, लेकिन यूएई की रक्षा प्रणाली ने 94 प्रतिशत ड्रोन और 92 प्रतिशत बैलिस्टिक एवं क्रूज़ मिसाइलों को आकाश में ही नष्ट कर दिया है।

सऊदी अरब के ‘रस तनूरा’ तेल रिफाइनरी केंद्र को निशाना बनाकर भेजे गए मिसाइलों को लगभग सभी इंटरसेप्ट कर लिया गया। अमेरिकी बेस स्थित कतर के अल उदैद एयर बेस पर कुछ हमले हुए हैं लेकिन नुकसान कम है। बहरीन और कुवैत में नागरिक क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, लेकिन ‘लेयर्ड डिफेंस’ के कारण मानवीय क्षति न्यूनतम रही है।

इस संकट के दौरान, जीसीसी के नेतृत्व ने इरानी हमलों की तीव्र निंदा की है और जनवरी 2026 में सम्पन्न ‘गल्फ शिल्ड 2026’ सैन्य अभ्यास ने इस युद्ध में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका साबित की है।

हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि महंगे ‘पैट्रियट’ और ‘थाड’ मिसाइलें तेजी से घट रही हैं। यदि यह युद्ध लंबा खींचा, तो खाड़ी देशों को केवल रक्षा नहीं, बल्कि ‘काउंटर-स्ट्राइक’ करनी पड़ेगी।

सऊदी अरब: खाड़ी का सैन्य शक्ति केंद्र

सऊदी अरब पश्चिम एशिया की सैन्य और हवाई रक्षा में अत्यंत प्रभावशाली देश है। ग्लोबल फायरपावर 2026 में यह पश्चिम एशिया में पांचवें और विश्व में 25वें स्थान पर है।

सऊदी अरब ने 2025-26 के लिए लगभग 78 अरब डॉलर का रक्षा बजट निर्धारित किया है, जो इसे दुनिया के शीर्ष सात सैन्य खर्च करने वाले देशों में से एक बनाता है। 2 लाख 30 हजार से अधिक सक्रिय सैनिकों के साथ, यह देश अपनी सारी ताकत हवाई रक्षा में लगा रहा है।

सऊदी वायुसेना के पास 917 विमान हैं, जिनमें से 596 हमेशा तैयार रहते हैं। इसकी मुख्य शक्ति 283 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं, जिनमें 84 एफ-15 एसए ईगल, 68 एफ-15 एसआर और 72 यूरोफाइटर टाइफून शामिल हैं।

सऊदी ने अपने एफ-15 विमानों को ‘हार्पुन ब्लॉक 2’ एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम से लैस किया है, जिसका सफल परीक्षण 2025 के अंत में हुआ था।

सऊदी की सबसे मजबूत विशेषता उसकी हवाई रक्षा प्रणाली है, जिसमें ‘थाड’ (टर्मिनल हाई अल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) बैटरी और ‘पैट्रियट पैक-3 एमएसई’ का शक्तिशाली संयोजन शामिल है। जनवरी 2026 में अमेरिका ने 9 अरब डॉलर के बराबर 730 पैक-3 एमएसई मिसाइलों की बिक्री की अनुमति दी थी।

यह प्रणाली वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर इरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर रही है। छोटे ड्रोन के लिए सऊदी रूसी ‘पैंटसिर-एस1’ जैसे प्वाइंट डिफेंस सिस्टम भी इस्तेमाल कर रहा है।

सऊदी के पास 1085 टैंक हैं, जिनमें अधिकांश अमेरिकी ‘एम1ए2 अब्राम्स’ हैं। 22,370 सशस्त्र वाहन और अत्याधुनिक तोपखाने ने सऊदी सेना को ज़मीनी स्तर पर भी मजबूत किया है। ‘विजन 2030’ के तहत सऊदी अरेबियन मिलिट्री इंडस्ट्रीज के माध्यम से 50 प्रतिशत हथियार स्वदेशी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

यूएई: उच्च तकनीक और ‘राफाल-पैट्रियट’

यूएई की सैन्य रणनीति संख्या से अधिक गुणवत्ता पर आधारित है। 2026 के रक्षा बजट में लगभग 27 अरब डॉलर के खर्च के साथ, यूएई ने अपनी सैन्य सामग्री अमेरिका, फ्रांस और दक्षिण कोरिया से विविधीकृत की है।

यूएई वायुसेना के पास ‘एफ-16 ई/एफ ब्लॉक 60’ जैसे बेहतरीन विमान हैं। हाल ही में फ्रांस से खरीदे गए 80 ‘राफाल एफ4’ विमानों ने यूएई की मारक क्षमता को ऊँचाई दी है। युद्ध में यूएई की इंटरसेप्शन दर सबसे अधिक चर्चा में रही है।

यूएई दक्षिण कोरियाई ‘च्युंगुंग-2’ मध्यम दूरी की प्रणाली और अमेरिकी ‘थाड’ का मिश्रण इस्तेमाल कर रहा है, जो दुबई और अबू धाबी के हवाई अड्डों तक इरानी मिसाइलों को नहीं पहुंचने देता। जेबेल अली बंदरगाह को मामूली क्षति हुई, पर ‘लेयर्ड डिफेंस’ पूरी तरह सफल रहा।

मार्च 2026 में अमेरिका ने यूएई को अतिरिक्त 5.6 अरब डॉलर के पैट्रियट मिसाइल और ‘सीएच-47 एफ चिनूक’ हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने की अनुमति दी। यूएई की स्थानीय कंपनी ‘एज ग्रुप’ द्वारा निर्मित अत्याधुनिक ड्रोन सीमा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कतर: त्रि-आयामी हवाई शक्ति

कतर एक छोटा देश है, पर इसकी सैन्य शक्ति अत्यंत आधुनिक है। कतर ने हाल ही में राफाल, यूरोफाइटर टाइफून और एफ-15 जैसे तीन तरह के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान अपनी सूची में शामिल किए हैं।

कतर की हवाई रक्षा ‘पैट्रियट पीएसी-3’ और नॉर्वेली तकनीक पर आधारित ‘नासम्स-3’ मुख्य आधार हैं। मार्च की पहली सप्ताह में कतर ने 63 मिसाइलें और 11 ड्रोन सफलतापूर्वक मार गिराने का दावा किया है।

कतारी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने अपनी सीमा पर अनधिकृत प्रवेश करने वाले दो इरानी ‘सु-24’ जेट भी निगेटिव कर दिए हैं। दोहा में आयोजित ‘डिम्डेक्स 2026’ रक्षा प्रदर्शनी में कतर ने नया ‘स्काई वार्डन’ ड्रोन विरोधी प्रणाली और ‘एक्रॉन’ मिसाइलों का अनावरण किया था।

कुवैत और बहरीन: अमेरिकी रणनीतिक केंद्र

कुवैत ने अपने ‘पैट्रियट’ सिस्टम को 8 अरब डॉलर की निवेश से नए सेंसर के साथ अपग्रेड किया है।

24 मार्च के भीषण हमले में, कुवैत ने 17 मिसाइल और 13 ड्रोन का सामना किया, जिसमें कुवैती सेना तेल रिफाइनरी केंद्रों की रक्षा में सफल रही। कुवैत के पास नए ‘एम1ए2के अब्राम्स’ टैंक हैं, जो जमीन पर सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

बहरीन, जहां अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय है, इरान का पहला लक्षित देश था। हालांकि बजट कम है, लेकिन हाल ही में खरीदे गए ‘पैट्रियट पैक-3 एमएसई’ ने इस बार राजधानी मनामा को भारी विनाश से बचा लिया। बहरीन का हवाई क्षेत्र छोटा है, लेकिन यह रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।

ओमान: संतुलित रक्षा नीति

ओमान ने तटस्थ और संतुलित रक्षा नीति अपनाई है। क्योंकि उसके इरान के साथ अच्छे संबंध हैं, ओमान में सीधे हमले अन्य खाड़ी देशों की तुलना में कम हुए हैं। फिर भी ओमान ने अपने ‘यूरोफाइटर टाइफून’ और ‘एफ-16’ विमानों को उच्च सतर्कता पर रखा है।

होरमूज जलसंधि की सुरक्षा में ओमानी नौसेना की भूमिका निर्णायक है। ओमन इस युद्ध में कूटनीति के द्वार खुले रखते हुए अपनी रक्षा प्रणाली को केवल ‘बैकअप’ के रूप में उपयोग कर रहा है।

एकीकृत रक्षा और भविष्य की दिशा

‘गल्फ शिल्ड 2026’ अभ्यास ने जीसीसी देशों में ‘इंटेलिजेंस शेयरिंग’ का एक प्रमुख लाभ दिखाया है। मिसाइल लॉन्च होते ही छह देशों और अमेरिकी कमांड को एक साथ सूचना मिल जाती है, जिसे ‘गल्फ मिसाइल डिफेंस शिल्ड’ कहा जाता है।

फिर भी, इस युद्ध ने कुछ चुनौतियां सामने लाई हैं। सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक हिस्से में है। एक इरानी ड्रोन कुछ हजार डॉलर का होता है, जबकि उसे मार गिराने वाली एक पैट्रियट मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है। यह आर्थिक असंतुलन खाड़ी देशों के लिए महंगा साबित हो सकता है। साथ ही, निरंतर हमलों से इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या भी घटती जा रही है।

2026 का यह पश्चिम एशियाई युद्ध खाड़ी देशों को तेल समृद्ध राष्ट्र से अत्याधुनिक सैन्य शक्ति में बदल चुका है। उनकी आधुनिक हथियार प्रणाली और रणनीतिक संयम ने मध्यपूर्व के शहरों को तबाही से बचाया है।

हालांकि, यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे और इरान के ‘सैचुरेशन अटैक्स’ बढ़े तो खाड़ी की यह रक्षा ढाल आक्रामक हथियार में बदलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। विश्व अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खाड़ी की सैन्य शक्ति वर्तमान में अंतिम उम्मीद की किरण है। –एजेंसियों के सहयोग से